(Minghui.org) बचपन में मैं अपनी माँ के साथ फा का अध्ययन करता था और अभ्यास करता था, लेकिन मैंने साधना के इस अवसर को संजोकर नहीं रखा और साधना में परिश्रमी भी नहीं था। मेरी समझ केवल इतनी थी कि दाफा के मार्गदर्शक सिद्धांतों का पालन करके एक अच्छा इंसान बनना चाहिए। इसके एक वर्ष बाद दमन शुरू हो गया। फा का अध्ययन करने का वातावरण न रहने के कारण मैंने दाफा की पुस्तकें पढ़ना भी बंद कर दिया।
जब मैं दक्षिणी चीन में कॉलेज गया, तो मुझे कई मानसिक संघर्षों का सामना करना पड़ा। मैं हमेशा दूसरों का ध्यान रखने की कोशिश करता था, लेकिन जिन बातों के लिए मैं जिम्मेदार नहीं था, उनका भी दोष मुझ पर लगाया जाता था। मैं उस नए वातावरण का अभ्यस्त नहीं था। मेरे पूरे शरीर पर दर्दनाक फफोले निकल आए। तभी मुझे दाफा की याद आई। गर्मियों की छुट्टियों के बाद मैं ज़ुआन फालुन पुस्तक अपने साथ वापस ले आया और फिर से फा का अध्ययन तथा अभ्यास करना शुरू कर दिया।
शुरुआत में मुझे अभ्यासों की गतिक्रियाये याद नहीं थीं, इसलिए मुझे अपनी माँ से पूछना पड़ता था। केवल सात दिनों में मेरे सभी फफोले सूखकर ठीक हो गए। रात को सोते समय मुझे सिर से लेकर पैरों तक एक गर्म ऊर्जा-धारा बहती हुई महसूस होती थी। मैं अत्यंत कृतज्ञ था कि मास्टरजी ने इतने वर्षों तक साधना न करने के बावजूद मेरा साथ नहीं छोड़ा और मेरे शरीर को शुद्ध किया। उसी समय मैंने निश्चय किया कि अब मुझे साधना में अवश्य परिश्रमी बनना है।
फालुन दाफा के बारे में लोगों को सच्चाई बताना
मैं अपनी कक्षा की समिति का सदस्य था। कक्षा के अध्यक्ष अतिरिक्त शुल्क एकत्र करना चाहते थे, लेकिन मुझे पता था कि पिछले वर्ष का कुछ धन अभी बचा हुआ था और उसका एक हिस्सा समन्वयक तथा यूथ लीग के निदेशक के लिए उपहार खरीदने में खर्च किया गया था। इसलिए मैंने और अधिक धन एकत्र करने से इंकार कर दिया।
कक्षा के अध्यक्ष ने मेरी शिकायत समन्वयक से कर दी और यह भी कहा कि मैंने सभी विद्यार्थियों से शुल्क न देने के लिए कहा है। इसके बाद समन्वयक ने मुझे मेरे पद से हटा दिया।
मास्टरजी ने कहा है:
"जब इस प्रकार का संघर्ष सामने आए, तो सबसे पहले हमें शांतचित्त रहना चाहिए और दूसरे व्यक्ति की तरह व्यवहार नहीं करना चाहिए। निस्संदेह, हम सौम्यता से स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं, और यदि हम तथ्य स्पष्ट करते हैं तो उसमें कोई समस्या नहीं है। लेकिन हमें उससे अत्यधिक आसक्त नहीं होना चाहिए।"(चौथा व्याख्यान, ज़ुआन फालुन)
जैसे ही मुझे मास्टरजी की यह शिक्षा याद आई, मैंने तुरंत अपनी मानसिकता को समायोजित कर लिया। कुछ सहपाठियों को लगा कि मेरे साथ अन्याय हुआ है, लेकिन मेरा मन विचलित नहीं हुआ। इसके विपरीत, मैं पूरी तरह शांत रहा। मेरे सभी सहपाठी मेरा सम्मान करने लगे।
मेरे पास विद्यालय में दाफा की केवल एक ही पुस्तक थी— ज़ुआन फालुन। मैं मास्टरजी के अन्य व्याख्यान भी पढ़ना चाहता था, और जैसे ही मेरे मन में यह इच्छा उत्पन्न हुई, मास्टरजी ने मेरी सहायता की। एक दिन एक मित्र ने मुझसे पूछा, “क्या तुमने फ़्रीगेट के बारे में सुना है? इसकी मदद से विदेशों की वेबसाइटें देखी जा सकती हैं।” मैंने कहा कि नहीं। उसने मुस्कराकर कहा, “तुम तो बहुत पुराने विचारों वाले हो,” और मुझे वह सॉफ़्टवेयर दे दिया। जब मैंने उसे खोला, तो मैं Minghui.org और NTD TV देख सका। मैंने एक के बाद एक लेख पढ़े और यह जानकर आश्चर्यचकित रह गया कि फालुन दाफा का अभ्यास सौ से अधिक देशों में किया जाता है। मुझे यह देखकर भी बहुत खुशी हुई कि अब मैं मास्टरजी के नवीनतम प्रकाशित लेख भी पढ़ सकता था।
इसके बाद मैंने अपने कमरे के साथियों, सहपाठियों और इंटर्नशिप के सहकर्मियों को फालुन दाफा के बारे में सच्चाई बताना शुरू किया। मास्टरजी ने मेरे लिए लोगों से मिलने की व्यवस्था की। मैं अपने सहपाठियों से दाफा के बारे में बात करना चाहता था, लेकिन भय की आसक्ति के कारण समझ नहीं पा रहा था कि बातचीत कैसे शुरू करूँ।
एक दिन मैं छात्रावास में ऑनलाइन शेन युन देख रहा था। तभी एक सहपाठी कमरे में आई। उसने पूछा, “क्या तुम प्राचीन वेशभूषा वाले नृत्य देख रहे हो?” मैंने कहा कि यह शेन युन है, और फिर उससे पूछा कि क्या उसने कभी फालुन दाफा के बारे में सुना है। उसने कहा कि नहीं। तब मैंने संक्षेप में उसे बताया कि दाफा की साधना क्या है और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) अभ्यासियों का उत्पीड़न क्यों करती है। मैंने उसे यह भी सुझाव दिया कि वह यूथ लीग की सदस्यता छोड़ दे, ताकि सीसीपी के अपराधों की जिम्मेदारी उस पर न आए। उसने तुरंत कहा, “तो फिर मैं अभी इसे छोड़ देती हूँ!” मुझे बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि यह इतना सहज होगा। मुझे लगा कि मास्टरजी मेरा उत्साह बढ़ा रहे हैं।
जब मैंने अपने कमरे की साथी को सच्चाई बताई, तो उसके बाद मैं छात्रावास में निश्चिंत होकर फा का अध्ययन करने, अभ्यास करने और अन्य लोगों को दाफा के बारे में बताने लगा। वे कभी-कभी मुझे तीन कार्य करने की भी याद दिलाते थे। एक बार मैं सोने से पहले सद्विचार भेजना भूल गया। तब मेरी रूममेट ने कहा, “आज तुमने सद्विचार क्यों नहीं भेजे? क्या तुम्हें उन साथी अभ्यासियों की परवाह नहीं है जिनका उत्पीड़न किया जा रहा है?”
स्नातक होने के बाद मैं एक ऐसी कंपनी में इंटर्न के रूप में काम करने लगा, जहाँ रहने और खाने की सुविधा भी दी जाती थी। कंपनी ने प्रशिक्षण के लिए बहुत से नए स्नातकों की भर्ती की थी। मुझे पता चला कि उनमें से एक युवती पार्टी सदस्य थी। मैं उसे सच्चाई बताकर सीसीपी छोड़ने में सहायता करना चाहता था। काम के बाद मैं उसके छात्रावास के कमरे में गया। वह वहाँ अकेली थी। मैंने उसे फालुन दाफा के बारे में सच्चाई बतानी शुरू की, लेकिन वह विशेष रुचि नहीं दिखा रही थी और कोई प्रतिक्रिया भी नहीं दे रही थी।
जब मैं सोच रहा था कि अब क्या करूँ, तभी एक दूसरी इंटर्न कमरे में आ गई और उसने पूछा, “तुम लोग किस बारे में बात कर रहे हो?” मैंने कहा कि मैं फालुन दाफा के बारे में सच्चाई बता रहा हूँ। दूसरी युवती ने पूछा, “क्या सरकार ने इसे प्रतिबंधित नहीं किया है?” तब मैंने उसे विस्तार से समझाना शुरू किया। जैसे-जैसे मैं बोलता गया, वैसे-वैसे और भी इंटर्न कमरे में आते गए और सभी उस छोटे-से बिस्तर के चारों ओर इकट्ठा हो गए।
मैं अभी-अभी फिर से दाफा की साधना में लौटा था और मुझे यह भी एहसास नहीं था कि मुझे पहले सद्विचार भेजने चाहिए। जब मैं बोल रहा था, तो मुझे ठंड लगने लगी और मेरा शरीर काँपने लगा। मैं सहारे के लिए बिस्तर की रेलिंग पकड़कर खड़ा रहा। मास्टरजी की सहायता से मैं अपने इन सहपाठियों को फालुन दाफा के बारे में सच्चाई सफलतापूर्वक बता सका। मैंने उनके मन में दाफा के बारे में जो गलतफहमियाँ थीं, उन्हें दूर किया, यद्यपि उनमें से किसी ने सीसीपी या उससे संबद्ध संगठनों की सदस्यता नहीं छोड़ी।
फा अध्ययन समूह ढूँढ़ना
मैं जानता था कि मुझमें आलस्य की आसक्ति थी और मैं अक्सर साधारण समाज के मनोरंजनों की ओर आकर्षित हो जाता था। इसलिए मैं एक फा अध्ययन समूह ढूँढ़ना चाहता था। लेकिन इतने वर्षों तक साधना न करने के कारण मुझे पता नहीं था कि उसे कहाँ खोजूँ।
मैं एक वृद्ध अभ्यासी से मिलने गया, जिनके साथ मैंने दमन शुरू होने से पहले फा का अध्ययन किया था। उन्होंने मेरा परिचय एक फा अध्ययन समूह से कराया। लेकिन उस समय मेरा शिनशिंग स्तर अभी कम था। मुझे लगा कि वहाँ सभी वृद्ध महिलाएँ थीं, जो धीरे-धीरे पढ़ती थीं और पढ़ते समय कई गलतियाँ करती थीं। मैं ऐसा समूह ढूँढ़ना चाहता था जिसमें कुछ युवा अभ्यासी भी हों, और मास्टरजी ने मेरे लिए इसकी व्यवस्था कर दी।
एक बार मैंने एक वृद्ध अभ्यासी का कंप्यूटर ठीक करने में सहायता की। उन्होंने कहा कि वे पूछेंगी कि क्या मैं एक दूसरे फा अध्ययन समूह में शामिल हो सकता हूँ। मैं उस समूह में शामिल हो गया और वहाँ मेरी उम्र के कई अभ्यासी मिले। धन्यवाद, मास्टरजी।
मुझे यह समझ में आया कि जब हम एक अभ्यासी की अपेक्षाओं के अनुरूप स्वयं को ढालते हैं, तो हमारी इच्छाएँ भी पूरी हो जाती हैं। पिछले वर्ष मैं ऐसे स्थान पर रहने चला गया, जो मेरे फा अध्ययन समूह से अधिक दूर था। मैं सोच रहा था कि क्या मेरे नए घर के पास भी कोई अभ्यासी रहता है। कुछ ही दिनों बाद, जब मैं नीचे गया, तो मेरी मुलाकात एक अभ्यासी से हो गई। मैं बहुत प्रसन्न हुआ और पूछा, “क्या यहाँ और भी अभ्यासी रहते हैं?” उन्होंने बताया कि इसी इमारत में एक और अभ्यासी भी रहता है। मास्टरजी की व्यवस्थाएँ हमेशा सर्वोत्तम होती हैं।
फा अध्ययन के लिए अधिक समय
काम शुरू करने के बाद मेरा कार्यक्रम बहुत व्यस्त हो गया। क्योंकि मैं बिक्री (सेल्स) के क्षेत्र में कार्य करता था, इसलिए ग्राहकों के फ़ोन छूट न जाएँ, इस कारण मैं अपना मोबाइल फ़ोन फा अध्ययन समूह में भी साथ ले जाता था। इस बात को लेकर अन्य अभ्यासियों ने दो बार मुझसे गंभीरता से बात की।
इसके बाद मैंने अपना मोबाइल बाहर अपनी साइकिल की टोकरी में छोड़ना शुरू कर दिया और फा अध्ययन समाप्त होते ही सबसे पहले जाकर उसे देखता था। हर बार मुझे पता चलता कि मेरी कुछ कॉल छूट गई थीं। एक बार तो जब मैं मोबाइल टोकरी में रख ही रहा था, तभी उसकी घंटी बज गई। मैंने ग्राहक के प्रश्नों का उत्तर दिया, लेकिन इस कारण मैं फा अध्ययन के लिए देर से पहुँचा।
मैंने सोचा कि आखिर मैं मोबाइल अपने साथ क्यों ले जाना चाहता हूँ। इसका कारण यह था कि मैं किसी भी ग्राहक का फ़ोन नहीं छोड़ना चाहता था और आय का कोई अवसर खोना नहीं चाहता था। यह वास्तव में एक स्वार्थपूर्ण विचार था। इतना ही नहीं, मैं फा अध्ययन समूह की सुरक्षा के लिए भी जोखिम उत्पन्न कर रहा था। मेरा व्यवहार कितना अनुचित था!
जब मुझे यह बात समझ में आ गई, तो मैंने मोबाइल साथ ले जाना पूरी तरह बंद कर दिया। मैंने सोचा कि यदि एक-दो ग्राहक छूट भी जाएँ, तो कोई बड़ी बात नहीं है। इसके अलावा, मोबाइल साथ रखने से फा अध्ययन के दौरान मन को शांत रखना भी कठिन हो जाता था।
जब मेरी सोच बदली, तो मैंने देखा कि पहले जहाँ एक-दो फ़ोन कॉल छूट जाती थीं, अब कोई भी कॉल नहीं छूटती थी। इतना ही नहीं, काम पर मेरा प्रदर्शन भी बेहतर हो गया। अब मुझे अतिरिक्त समय (ओवरटाइम) काम नहीं करना पड़ता था, जिससे मुझे फा अध्ययन के लिए और अधिक समय मिलने लगा।
धन्यवाद, मास्टरजी। जब तक हमारे सद्विचार दृढ़ हैं, हम सचमुच अच्छे बनने की इच्छा रखते हैं और तीन कार्य अच्छी तरह करते हैं, तब तक हमारी सभी उचित इच्छाएँ पूरी हो जाएँगी।
मुझे आशा है कि मेरा यह अनुभव साझा करना साथी अभ्यासियों को साधना में अधिक दृढ़ और आत्मविश्वासी बनने में सहायता करेगा। यदि मैंने कहीं ऐसी बात कही हो जो फा के अनुरूप न हो, तो कृपया मुझे अवश्य सुधारें।
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