(Minghui.org) मैंने 28 वर्षों से फालुन दाफा का अभ्यास किया है और अब मेरी आयु 77 वर्ष है। मास्टरजी ने मेरे लिए कितना कुछ किया और कितना कुछ सहा है, इसका मैं अनुमान भी नहीं लगा सकती। उन्होंने अभ्यासियों को नरक जैसी स्थिति से बाहर निकाला, हमारे स्वास्थ्य को पुनः स्थापित किया, हमें फ़ा की शिक्षा दी और साधना की परीक्षाओं में हमारा मार्गदर्शन किया। इस जीवन में फालुन दाफा की अभ्यासी बनना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्य और आनंद की बात है। मास्टरजी, आप सचमुच महान हैं!
मैं दो अनुभव साझा करना चाहती हूँ, जो बताते हैं कि दाफा के बारे में लोगों को सच्चाई बताने से कितना सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
जब सीसीपी ने फालुन दाफा और अभ्यासियों का उत्पीड़न शुरू किया, तब मास्टरजी ने हमें लोगों को दाफा की सच्चाई बताने के लिए कहा। तब से मैं प्रतिदिन लोगों से बात करती रही हूँ। मास्टरजी की सुरक्षा में मैंने अनेक कठिन परीक्षाओं को पार किया। जब भी मैं अच्छा नहीं कर पाई, मास्टरजी ने बार-बार मेरी सहायता की, जिससे मैं सीखती रही और अपने शिनशिंग में सुधार करती रही।
एक बार जब मैं लोगों को उत्पीड़न की सच्चाई बता रही थी, तब किसी ने मेरी शिकायत अधिकारियों से कर दी और मेरे परिवार से जबरन धन वसूला गया। मेरे पति बहुत डर गए और कई बार उन्होंने मुझ पर शारीरिक हमला भी किया। फिर भी मैं लोगों को सच्चाई बताती रही, क्योंकि मैं जानती थी कि लोग भ्रमित और हस्तक्षेप के प्रभाव में हैं। कोई भी चीज़ मुझे रोक नहीं सकती थी।
एक दिन मैंने एक वृद्ध व्यक्ति से, जिसे पक्षाघात (स्ट्रोक) हुआ था, फालुन दाफा के बारे में बात की। मैंने उनसे कहा कि वे बार-बार दोहराएँ, "फालुन दाफा अच्छा है; सत्य-करुणा-सहनशीलता अच्छी है।" मैंने उन्हें यह भी सुझाव दिया कि वे सीसीपी के जिन संगठनों में शामिल हुए थे, उनसे अपना नाम वापस ले लें। मैंने उन्हें एक ताबीज़ और "स्वर्ग द्वारा प्रदत्त आशीर्वाद" नामक पुस्तिका दी। उन्होंने युवा लीग और यंग पायनियर्स से अपना नाम वापस लेने पर सहमति जताई।
कुछ समय बाद जब मैं उनसे फिर मिली, तो वे बहुत प्रसन्न दिखाई दिए। उन्होंने कहा, "देखिए, अब मुझे छड़ी की आवश्यकता नहीं रही! आपका धन्यवाद।"मैंने उत्तर दिया, "आपको हमारा धन्यवाद नहीं, बल्कि हमारे मास्टरजी का धन्यवाद करना चाहिए। लोगों को आशीर्वाद वही प्रदान करते हैं।"
मैंने उनसे कहा कि सामग्री पढ़ने के बाद उसे दूसरों को भी दे दें, ताकि वे भी लाभान्वित हो सकें। मैंने यह भी बताया कि ऐसा करना एक पुण्य कार्य है और इससे सद्गुण संचित होते हैं।उन्होंने कहा, "मैंने सारी सामग्री बाँट दी। लोग उसे माँग रहे हैं। माँग इतनी अधिक है कि मैं पूरी नहीं कर पा रहा हूँ। कृपया मुझे और दीजिए।"
इसके बाद मैं उन्हें हर सप्ताह 20 प्रतियाँ देने लगी। जब "स्वर्ग, पृथ्वी और सभी जीव" नामक पुस्तिका प्रकाशित हुई, तो लोग उसे पढ़ने के लिए उत्सुक हो गए। उन्होंने बताया कि लोग उसे पाने के लिए आग्रह कर रहे हैं, इसलिए मैं उन्हें उसकी भी 20 प्रतियाँ प्रति सप्ताह देने लगी।
मैंने उनसे कहा, "आपके जन्मजात संस्कार अच्छे हैं। आपको दाफा की पुस्तकें पढ़नी चाहिए।" मैं उन्हें ज़ुआन फालुन की एक प्रति भी दे आई।
बाद में जब मैंने पूछा कि क्या उन्होंने पुस्तक पढ़ ली, तो उन्होंने कहा, "हाँ, मैंने पढ़ी। मेरी पत्नी और मेरी बेटी ने भी इसे पढ़ा। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक जीवन जीने के अद्भुत सिद्धांत सिखाती है, विशेषकर 'सत्य-करुणा-सहनशीलता', जो बिल्कुल सही है। अब हमें समझ में आया कि यही वह फ़ा है जो लोगों का उद्धार करता है। किसी को भी एक धर्मपरायण आस्था का उत्पीड़न नहीं करना चाहिए। आज प्राकृतिक और मानव-निर्मित आपदाएँ लगातार हो रही हैं। लोग प्रतिदिन जाग रहे हैं और स्वर्ग सीसीपी का अंत कर रहा है।"
पिछले महीने मेरी दूसरी बेटी मुझसे मिलने आई। वह बहुत चिंतित थी। उसने बताया कि उसके जुड़वाँ बेटों का विश्वविद्यालय में चयन हो गया है, लेकिन मेरे कारण उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। उसने कहा कि राजनीतिक पृष्ठभूमि की जाँच तीन पीढ़ियों तक की जाती है।
उसने कहा, "आप मेरे बच्चों का भविष्य खतरे में नहीं डाल सकतीं। शायद आपको अभी कुछ समय के लिए अभ्यास छोड़ देना चाहिए।" जब उसने देखा कि मैं तनिक भी विचलित नहीं हुई, तो वह रो पड़ी और और भी अधिक व्याकुल हो गई।
मैं समझ गई कि यह हस्तक्षेप पारिवारिक मोह का उपयोग करके मेरी धर्मपरायण आस्था को डिगाने और मुझे नीचे खींचने का प्रयास कर रहा है। मैंने दृढ़ निश्चय किया कि मैं पुरानी शक्तियों के इस जाल में नहीं फँसूँगी। मैं शांत हुई, सद्विचार भेजे और मास्टरजी से सहायता माँगी।
फिर मैंने उससे कहा, "कृपया मेरी बात पूरी सुनो, तब तुम समझ जाओगी। दाफा अभ्यासियों के अनेक बच्चों को ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है, लेकिन उन्होंने कोई बयान नहीं लिखा। फिर भी उनमें से बहुत-से विश्वविद्यालय में प्रवेश कर गए। ऐसी बातों पर विश्वास मत करो। मैं 28 वर्षों से अभ्यास कर रही हूँ। दाफा ने मुझे स्वस्थ शरीर और अच्छा चरित्र दिया है। तुम यह सब स्वयं देखती हो। मैं कभी तुम्हारे लिए परेशानी नहीं बनती और हमेशा दूसरों का ध्यान रखती हूँ। तुम मेरे माध्यम से देख सकती हो कि फालुन दाफा कितना महान है। कृपया दाफा का अनादर मत करो। हमेशा याद रखना—'फालुन दाफा अच्छा है; सत्य-करुणा-सहनशीलता अच्छी है।' मास्टरजी हमारी देखभाल कर रहे हैं। सीसीपी जो कहती है, वही अंतिम सत्य नहीं है।"
फिर मैंने उसे मास्टरजी की यह शिक्षा पढ़कर सुनाई:
"जब कोई व्यक्ति जन्म लेता है, तो उसके पूरे जीवन का एक विवरण किसी विशेष आयाम में पहले से ही विद्यमान होता है। दूसरे शब्दों में, वह जीवन में कहाँ होगा और क्या करेगा, यह सब उसमें शामिल होता है। उसके जीवन की व्यवस्था किसने की? स्पष्ट रूप से किसी उच्च स्तर के जीवन ने उसकी व्यवस्था की है। उदाहरण के लिए, हमारे सामान्य मानव समाज में, जन्म के बाद व्यक्ति एक निश्चित परिवार, एक निश्चित विद्यालय और बड़ा होने पर एक निश्चित कार्यस्थल से जुड़ता है। समाज में उसके विभिन्न संपर्क उसके कार्य के माध्यम से बनते हैं। अर्थात पूरे समाज की व्यवस्था इसी प्रकार की गई है।"— (व्याख्यान सात, ज़ुआन फालुन )
मैंने उसे समझाया कि प्रत्येक व्यक्ति का जीवन पहले से व्यवस्थित होता है। हर किसी का अपना भाग्य होता है और उसे कोई दूसरा निर्धारित नहीं कर सकता। मेरे लिए फालुन दाफा का अभ्यास करना वास्तव में सबसे बड़ा सौभाग्य है।
इसके बाद हमारा मतभेद समाप्त हो गया और मेरी बेटी शांत हो गई। वह बहुत गुस्से और चिंता में आई थी, लेकिन लौटते समय उसका मन काफी हल्का था। बाद में परिणाम यह हुआ कि मेरे दोनों नातों का पुलिस अकादमी में चयन हो गया और वे शीघ्र ही अपनी पढ़ाई शुरू करने वाले हैं।
जैसे-जैसे फ़ा-सुधार अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है, मुझे अपनी साधना-यात्रा के अंतिम भाग पर भी अच्छी तरह चलना है और मास्टरजी के साथ अपने वास्तविक घर लौटना है।
यह मेरी व्यक्तिगत समझ है। यदि इसमें कोई बात फ़ा के अनुरूप न हो, तो कृपया करुणापूर्वक मुझे इंगित करें।
कॉपीराइट © 1999-2026 Minghui.org. सर्वाधिकार सुरक्षित।