(Minghui.org) अमेरिकी सीनेट की विदेश संबंध समिति ने 17 जून 2026 को एस 4009, फालुन गोंग तथा जबरन अंग-निकासी के पीड़ितों की सुरक्षा अधिनियम (फालुन गोंग एंड विक्टीम्स ऑफ़ फोर्स्ड ऑर्गन हार्वेस्टिंग प्रोटेक्शन एक्ट) को पारित कर आगे की विधायी प्रक्रिया के लिए भेज दिया। इस विधेयक का उद्देश्य चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) द्वारा किए जाने वाले जबरन अंग-तस्करी (फोर्स्ड ऑर्गन हार्वेस्टिंग) के अपराध को रोकना है। अब इस विधेयक पर अमेरिकी सीनेट में मतदान किया जाएगा।
यह अधिनियम अमेरिकी सरकार से यह अपेक्षा करता है कि वह उन विदेशी व्यक्तियों की एक सूची तैयार करे जिन्होंने चीन में जबरन अंग-तस्करी के चलन में जानबूझकर भाग लिया है या उसमें सहायता की है।
इस कानून के अंतर्गत अमेरिकी सरकार को सूचीबद्ध व्यक्तियों पर विभिन्न प्रतिबंध लगाने का अधिकार होगा। इनमें अमेरिकी नागरिकों या संस्थाओं के साथ लेन-देन पर प्रतिबंध, संयुक्त राज्य अमेरिका में रखी गई संपत्तियों को फ्रीज़ करना, तथा अमेरिका में प्रवेश पर रोक शामिल है। ऐसे व्यक्तियों के पास यदि पहले से अमेरिकी वीज़ा हो, तो उसे रद्द किया जा सकता है, और वे अमेरिकी आव्रजन लाभ प्राप्त करने के लिए भी अयोग्य हो जाएँगे।
यह विधेयक मार्च 2026 में अमेरिकी सीनेटर टेड क्रूज़ (रिपब्लिकन, टेक्सास) और जेफ मर्कली (डेमोक्रेट, ओरेगन) द्वारा संयुक्त रूप से प्रस्तुत किया गया था। हाल ही में आदम स्किफ्फ (डेमोक्रेट, कैलिफ़ोर्निया) भी इसके सह-प्रायोजक के रूप में इसमें शामिल हुए।
सीनेटर टॉड यंग (आर-इन)
9 जून 2026 को इंडियाना से रिपब्लिकन सीनेटर टॉड यंग भी फालुन गोंग संरक्षण अधिनियम के सह-प्रायोजक बने।
जुलाई 2025 में जारी एक वीडियो संदेश में सीनेटर यंग ने फालुन गोंग अभ्यासियों के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया था।
उन्होंने कहा: “दशकों से सीसीपी ने भय और दबाव का उपयोग करके चीनी लोगों के अधिकारों का दमन किया है। उसने जातीय और धार्मिक अल्पसंख्यकों तथा आस्था-आधारित समुदायों को निशाना बनाया है, जिनमें फालुन गोंग अभ्यासी भी शामिल हैं। उन्होंने अकल्पनीय अत्याचार सहे हैं, उन्हें हिरासत में रखा गया है, उनकी आवाज़ दबाई गई है और उनकी बुनियादी मानवीय गरिमा छीन ली गई है। यह सब उन दमनकारी कानूनों के नाम पर किया गया है जो आस्था और संस्कृति को उग्रवाद या आतंकवाद के रूप में प्रस्तुत करते हैं।”
उन्होंने आगे कहा: “आइए स्पष्ट रूप से समझें कि सीसीपी सक्रिय रूप से संस्कृति को मिटाने, धर्म को दबाने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को समाप्त करने का प्रयास कर रही है।”
सीनेटर यंग ने अपने संदेश में आगे कहा: “मैं आज आपके साथ एकजुटता के साथ खड़ा हूँ। आपका साहस, आपकी आवाज़ और आपका शांतिपूर्ण विरोध महत्वपूर्ण है। मुझे ये शब्द साझा करने का अवसर देने के लिए आपका धन्यवाद, और सत्य, स्वतंत्रता तथा मानवीय गरिमा के लिए आपके निरंतर प्रयासों के लिए भी धन्यवाद।”
यह वक्तव्य फालुन गोंग अभ्यासियों और अन्य आस्था-समुदायों के मानवाधिकारों के समर्थन तथा चीन में धार्मिक और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर उनकी चिंता को दर्शाता है।
सीनेटर जेफ मर्कली (डी-आर)
समिति में मतदान के बाद सीनेटर जेफ मर्कली ने संवाददाताओं से कहा:
“मुझे आशा है कि हम इस भयावह चलन के बारे में विश्व स्तर पर जागरूकता को वास्तव में बढ़ा सकेंगे। यह वास्तव में पृथ्वी पर होने वाले सबसे भयानक मानवाधिकार उल्लंघनों में से एक है—लोगों की निरंतर आपूर्ति, जिन्हें मूलतः उनके अंगों के लिए मार दिया जाता है।”
मार्च में जब उन्होंने फालुन गोंग संरक्षण अधिनियम प्रस्तुत किया था, तब सीनेटर मर्कले ने एक बयान में लिखा था:
“चीन का दमन और मानवाधिकार उल्लंघनों का अभियान लगातार भयावह परिणाम उत्पन्न कर रहा है, जिनमें चीन भर के संवेदनशील समूहों से जबरन अंग-निकासी की रिपोर्टें भी शामिल हैं। हमें इन अपराधों के पीड़ितों के समर्थन में खड़ा होना चाहिए, और हमारा द्विदलीय प्रयास चीनी सरकार को उसके मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए जवाबदेह ठहराता है।”
15 जून को सीनेटरों ने इस विधेयक में संशोधन कर एक नया अनुभाग जोड़ा, जिसमें चीन की अंग प्रत्यारोपण प्रणाली को लेकर सार्वजनिक और निजी संस्थाओं द्वारा लंबे समय से व्यक्त की जा रही चिंताओं तथा इस विषय पर सीसीपी की लगातार पारदर्शिता की कमी का उल्लेख किया गया।
संशोधनों में अमेरिकी विदेश विभाग की 2023 की अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट का हवाला दिया गया, जिसमें कहा गया था कि धार्मिक समूह—विशेष रूप से फालुन गोंग अभ्यासी और उइगर —जबरन अंग-निकासी के शिकार हो सकते हैं।
रिपोर्ट में न्यूयॉर्क सिटी बार एसोसिएशन द्वारा किए गए एक अध्ययन का भी उल्लेख किया गया, जिसमें यह निष्कर्ष दिया गया था कि:
“इस बात के पर्याप्त प्रमाण मौजूद हैं कि चीन अब भी विवेक के कैदियों से जबरन अंग-निकासी के चलन में संलग्न है।”
यह संशोधन विधेयक के समर्थकों के अनुसार उन चिंताओं को औपचारिक रूप से दर्ज करता है जो वर्षों से मानवाधिकार संगठनों, कानूनी संस्थाओं और धार्मिक स्वतंत्रता के पक्षधर समूहों द्वारा उठाई जाती रही हैं।
यह विधेयक अमेरिकी सरकार को जाँच-पड़ताल करने का निर्देश देता है, जिसमें फालुन गोंग अभ्यासियों जैसे समूहों से संबंधित मामलों की जाँच भी शामिल है। साथ ही, यह सरकार से “अवैध, जबरन, बिना सहमति के, या अपारदर्शी अंग-प्राप्ति और अंग-प्रत्यारोपण प्रथाओं” की सार्वजनिक रूप से निंदा करने की अपेक्षा करता है।
इसके अतिरिक्त, यह कानून अमेरिकी विदेश विभाग को—स्वास्थ्य एवं मानव सेवा सचिव, नेशनल इंस्टीटूट्स ऑफ़ हेल्थ के निदेशक तथा संबंधित खुफिया अधिकारियों के परामर्श से—चीन की अंग-प्रत्यारोपण नीतियों और प्रथाओं पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश देता है।
इस रिपोर्ट में औपचारिक रूप से यह मूल्यांकन किया जाएगा कि क्या चीनी सरकार वर्तमान में या अतीत में व्यवस्थित रूप से जबरन अंग-निकासी के चलन में शामिल रही है। रिपोर्ट में चीन की अंग-प्रत्यारोपण नीतियों का सार भी प्रस्तुत किया जाएगा, जिसमें विशेष रूप से फालुन गोंग अभ्यासियों, अन्य विवेक के कैदियों तथा संबंधित पीड़ित समूहों से जुड़े मामलों पर ध्यान दिया जाएगा।
रिपोर्ट में चीन में प्रतिवर्ष किए जाने वाले अंग-प्रत्यारोपणों की संख्या और स्वैच्छिक अंगदाताओं के आँकड़ों के अतिरिक्त, अंगों के स्रोतों तथा उनकी प्राप्ति की समय-सीमा का भी मूल्यांकन शामिल होगा। इसमें यह भी देखा जाएगा कि आधिकारिक तौर पर बताई गई प्रतीक्षा और उपलब्धता की समय-सारिणियाँ कितनी विश्वसनीय और व्यावहारिक हैं। साथ ही, पिछले दस वर्षों के दौरान चीन में अंग-प्रत्यारोपण अनुसंधान परियोजनाओं के लिए प्रदान की गई अमेरिकी वित्तीय सहायता का विवरण भी शामिल किया जाएगा।
विधेयक के नवीनतम संस्करण के अनुसार, यदि अमेरिकी सरकार यह निष्कर्ष निकालती है कि चीन में वास्तव में जबरन अंग-निकासी की प्रथा हो रही है, तो उसे आगे यह भी आकलन करना होगा कि क्या ऐसी गतिविधियाँ अंतरराष्ट्रीय कानून के अंतर्गत अत्याचार अपराध की श्रेणी में आती हैं।
यह प्रावधान न केवल संभावित मानवाधिकार उल्लंघनों की जाँच और जवाबदेही सुनिश्चित करने का प्रयास करता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार उनकी कानूनी और नैतिक गंभीरता का भी औपचारिक मूल्यांकन करने की व्यवस्था करता है।
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