(Minghui.org) जब से मैंने फालुन दाफा का अभ्यास शुरू किया है, तब से मुझे अक्सर लगता है कि मैं बहुत सौभाग्यशाली हूँ। जीवन के सबसे कठिन दौर में मुझे दाफा प्राप्त हुआ। तभी से मेरा जीवन आशा से भर गया है और मानो धूप की तरह उज्ज्वल हो उठा है।
फालुन दाफा का अभ्यास करने से पहले
फालुन दाफा का अभ्यास शुरू करने से पहले मेरा स्वभाव बहुत क्रोधी था। मैं अक्सर अपने परिवार के लोगों को डाँटती-फटकारती, बिना सोचे-समझे बोलती और अपने छोटे भाई-बहनों के साथ रूखा व्यवहार करती थी। कभी-कभी जब मुझे बहुत गुस्सा आता, तो मैं उन पर चिल्लाती, यहाँ तक कि उन्हें मार भी देती थी। मैंने कभी यह नहीं सोचा कि मेरे व्यवहार का दूसरे लोगों पर क्या प्रभाव पड़ता होगा।
जून 2023 में मुझे मस्तिष्क में ट्यूमर होने का पता चला। मेरी स्थिति गंभीर थी और मुझे खोपड़ी का बड़ा ऑपरेशन (क्रैनियोटॉमी) करवाना पड़ा। सर्जरी के बाद डॉक्टरों ने मेरी स्थिति पर कड़ी निगरानी रखी और मुझे भारी मात्रा में दवाइयाँ दीं। एक डॉक्टर ने कहा कि मुझे अपने भोजन पर नियंत्रण रखना होगा, मोबाइल फोन का उपयोग नहीं करना है, पढ़ना नहीं है, कोई भारी सामान नहीं उठाना है और जितना संभव हो उतना बिस्तर पर आराम करना है। मैं मानो पूरी तरह असहाय और किसी काम की नहीं रह गई थी। मेरा जीवन एकदम नीचे गिर गया था और मुझे लगता था कि अब जीने का कोई अर्थ नहीं रह गया है।
जीवन का अर्थ: साधना करना और स्वयं को ऊँचा उठाना
अगस्त 2023 में मेरी छोटी बहन, जो फालुन दाफा की एक अभ्यासी है, ने मुझे ज़ुआन फालुन की एक प्रति दी। मुझे हमेशा से पढ़ने का बहुत शौक था, लेकिन बीमारी के कारण डॉक्टर ने मुझे पढ़ने से मना कर दिया था, इसलिए मैं कोई पुस्तक या अखबार पढ़ने का साहस नहीं करती थी। फिर भी यह पुस्तक मुझे बार-बार अपनी ओर आकर्षित करती रही। मैं इसे हाथ से रख नहीं पाती थी और हमेशा जानना चाहती थी कि इसमें क्या लिखा है। अंततः मैंने इसे खोलकर पढ़ना शुरू किया।
ज़ुआन फालुन की शिक्षाएँ मेरे हृदय को गहराई से स्पर्श कर गईं। इसलिए मैंने अपनी बीमारी की परवाह किए बिना पढ़ना जारी रखा और इस प्रकार मेरी साधना यात्रा आरंभ हुई। जब मैंने पहली बार व्याख्यान चार, व्याख्यान छह, तथा वाणी की साधना (व्याख्यान आठ), ऊर्जा क्षेत्र (व्याख्यान तीन) और स्वच्छ एवं निर्मल मन (व्याख्यान नौ) से संबंधित शिक्षाएँ पढ़ीं, तो मुझे अपनी अनेक कमियाँ स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगीं।
तभी मुझे समझ आया कि जीवन का वास्तविक अर्थ निरंतर स्वयं को बदलना और सुधारना है, और इस संसार में आने का उद्देश्य साधना करना है। पहले मैं अपनी हर समस्या और गलती के लिए दूसरों या बाहरी परिस्थितियों को दोष देती थी। मैंने कभी यह नहीं सोचा कि कहीं गलती मेरी भी हो सकती है। अब मुझे एहसास हुआ कि वास्तव में अधिकांश दुःखों और संघर्षों का मूल कारण मेरे अपने भीतर ही था।
साधना शुरू करने के बाद मैंने अपने स्वभाव और विचारों का गंभीरता से आत्म-परीक्षण करना शुरू किया। मैंने दाफा की शिक्षाओं का पालन करते हुए हर कार्य में दूसरों का ध्यान रखने वाला एक अच्छा व्यक्ति बनने का प्रयास किया। मैंने अपना आपा खोना और हर समय दूसरों की शिकायत करना छोड़ दिया। मैंने यह अपेक्षा भी छोड़ दी कि दूसरे मेरी देखभाल करें या मेरा ध्यान रखें। दाफा की आवश्यकताओं के अनुसार स्वयं को बदलने और अपने चरित्र को निरंतर ऊँचा उठाने के लिए मैं पूरी लगन से प्रयास करने लगी।
मेरे परिवार के लोगों ने भी कहा कि मैं पहले जैसी नहीं रही—मैं पूरी तरह बदल गई हूँ। अब हमारे परिवार का वातावरण भी सौहार्दपूर्ण और शांतिपूर्ण हो गया है।
मंगोलिया में एक नए फालुन दाफा अभ्यासी उल्ज़िख़ुताग के पास ज़ुआन फालुन की एक प्रति है (Minghui.org)
हृदय विदारक परीक्षा
2024 की शरद ऋतु में मुझे अपने जीवन का सबसे बड़ा आघात सहना पड़ा—मेरे प्रिय पुत्र की एक दुर्घटना में अचानक मृत्यु हो गई। उस क्षण मुझे ऐसा लगा मानो आसमान ही टूटकर मेरे ऊपर गिर पड़ा हो। इस दुर्घटना में मेरी बहू और मेरे पुत्र का एक मित्र भी शामिल थे। मेरा दुःख शब्दों से परे था। एक नई अभ्यासी होने के कारण मेरे लिए भावनात्मक लगाव को हल्के में लेना आसान नहीं था। फिर भी, उस कठिन समय में भी मेरे मन में दाफा की शिक्षाएँ ही थीं।
मास्टरजी ने कहा है:
“चालक वास्तव में बहुत तेज़ गाड़ी चला रहा था, लेकिन वह जानबूझकर किसी को टक्कर कैसे मार सकता था?”(व्याख्यान चार, ज़ुआन फालुन)
मैंने अपनी बहू या अपने पुत्र के उस मित्र पर, जो इस दुर्घटना में शामिल थे, क्रोध नहीं निकाला और न ही आवेश में आकर उन्हें दोषी ठहराया। मैं किसी को जेल नहीं भेजना चाहती थी और न ही अपने मन में घृणा या वैर रखना चाहती थी, क्योंकि उन्होंने जानबूझकर मेरे पुत्र की जान नहीं ली थी। मैंने अपने हृदय से उन्हें क्षमा करने का निर्णय लिया। मास्टरजी और दाफा से मिली अपार शक्ति के कारण मैं इतने असहनीय दुःख के बीच भी शांत, विवेकपूर्ण और संयमित रह सकी।
यदि मैंने फालुन दाफा का अभ्यास न किया होता, तो शायद मैं इतना बड़ा आघात सहन नहीं कर पाती। संभव है कि क्रोध और प्रतिशोध की भावना में मैं ऐसे कार्य कर बैठती जिनसे दूसरों को हानि पहुँचती। लेकिन एक दाफा अभ्यासी के रूप में मैं अपने दैनिक जीवन में मास्टरजी की शिक्षाओं का पालन करने का प्रयास करती हूँ और हर परीक्षा एवं कठिनाई के समय स्वयं से सत्य, करुणा और सहनशीलता के सिद्धांतों का पालन करने की अपेक्षा रखती हूँ। यद्यपि कभी-कभी मैं इसमें पूरी तरह सफल नहीं हो पाती, फिर भी मैंने अपने भीतर झाँकना, दूसरों की गलतियों को क्षमा करना, सहिष्णु बनना और अपनी कमियाँ पहचानते ही उन्हें तुरंत सुधारना सीख लिया है।
साधना शुरू करने के बाद से मैंने दवाइयाँ लेना बंद कर दिया है। डॉक्टरों द्वारा बताई गई सभी सावधानियाँ और प्रतिबंध अब बहुत पीछे छूट चुके हैं। मैं अब नियमित जाँच के लिए भी नहीं जाती, क्योंकि मेरा स्वास्थ्य बहुत अच्छा है और मेरी मानसिक अवस्था भी अत्यंत सकारात्मक और संतुलित है।
मेरे जीवन के सबसे पीड़ादायक समय में दाफा ने ही मुझे सद्विचार प्रदान किए और मेरे हृदय में करुणा बनाए रखी। मास्टरजी के सुदृढ़ीकरण के कारण ही मैं अपने जीवन के उन सबसे अंधकारमय दिनों से बाहर निकल सकी। यह सब दाफा और मास्टरजी की कृपा से ही संभव हुआ।
मैं मास्टरजी के करुणामय उद्धार के प्रति अपनी कृतज्ञता शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकती। मैं केवल इतना ही कर सकती हूँ कि पूरी लगन से साधना करूँ और मास्टरजी के उद्धार के योग्य बनने का प्रयास करूँ।
धन्यवाद, मास्टरजी!
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