(Minghui.org) (भाग 1 से आगे)
सात वर्षों तक खोज के बाद सच्चा मार्ग मिला
पिछले 30 वर्षों से फालुन दाफा का अभ्यास कर रहीं फू युएलान पहले बौद्ध धर्म का पालन करती थीं। साधना शुरू करने से पहले उन्होंने सात वर्षों तक आध्यात्मिक मुक्ति का मार्ग खोजा। इस दौरान वे कई देशों की यात्रा करती रहीं और सच्चे धर्म की तलाश में अनेक मठों में गईं। एक समय तो उन्होंने भिक्षुणी बनने पर भी विचार किया। लेकिन इतने प्रयासों के बाद भी उनके मन के अनगिनत प्रश्नों का उत्तर नहीं मिला—जब तक कि उन्होंने ज़ुआन फालुन नहीं पढ़ी।
उन्होंने कहा, “उस समय मुझे इस पुस्तक में अपने अनेक प्रश्नों के उत्तर मिले और मैंने मन लगाकर दाफा का अभ्यास करने का निर्णय लिया। मास्टरजी ने सिखाया कि सामान्य समाज में रहते हुए भी दाफा की साधना की जा सकती है और साधना की पूरी प्रक्रिया आसक्तियों को छोड़ने की प्रक्रिया है। मास्टरजी ने विभिन्न प्रकार की आसक्तियों को बहुत विस्तार से समझाया। इसी से मुझे समझ आया कि साधना कैसे करनी है।”
युएलान ने बताया कि साधना शुरू करने के तीन महीने बाद मास्टरजी सिंगापुर में व्याख्यान देने आए। वे अन्य अभ्यासियों के साथ एक होटल में मास्टरजी का व्याख्यान सुनने गईं।
उन्होंने स्मरण करते हुए कहा, “मास्टरजी अत्यंत करुणामय मुस्कान के साथ उपस्थित थे।” उन्होंने देखा कि मास्टरजी के शरीर से तेजस्वी प्रकाश निकल रहा था, जो दूर तक फैलकर पीछे की पूरी दीवार को प्रकाशित कर रहा था। फिर वह प्रकाश सात रंगों के इंद्रधनुष में बदल गया। उन्होंने कहा कि वह दृश्य अत्यंत सुंदर था।
जब मास्टरजी अभ्यासियों की पुस्तकों पर हस्ताक्षर कर रहे थे, तब युएलान ने अपने पास खड़े एक अभ्यासी से धीरे से कहा, “मास्टरजी कोई साधारण व्यक्ति नहीं हैं। मास्टरजी एक बोधिसत्त्व हैं।” ऐसा लगा मानो मास्टरजी ने उनकी बात सुन ली हो। उन्होंने मुस्कुराते हुए करुणापूर्वक उनकी ओर देखा।
युएलान ने कहा, “मैं अपने साथ लाई हुई ‘ज़ुआन फालुन’ पर मास्टरजी के हस्ताक्षर करवाने गई। उन्होंने मुस्कुराकर पुस्तक में लिखा—‘फा प्राप्त करो।’”
उन्होंने आगे कहा, “मुझे दाफा का अभ्यास करते हुए 30 वर्ष हो चुके हैं। मास्टरजी और दाफा के प्रति मेरी आस्था कभी डगमगाई नहीं। चाहे मास्टरजी के विरुद्ध कितने भी झूठे आरोप या बदनाम करने वाले प्रचार किए गए हों, मैंने उन पर कभी विश्वास नहीं किया।”
दाफा की शक्ति का अनुभव और मास्टरजी की कृपा के प्रति कृतज्ञता
चेन झोउचेन और उनकी पत्नी झांग लिफांग पिछले 31 वर्षों से साधना कर रहे हैं। साधना शुरू करने के बाद उन्होंने दाफा की असाधारण शक्ति का अनुभव किया। 20 वर्ष पुरानी धूम्रपान की लत छूट गई और काम से जुड़ी शारीरिक समस्याएँ भी ठीक हो गईं। शरीर और मन में आए इन परिवर्तनों ने उन्हें दाफा की अनमोलता का अनुभव कराया।
श्री चेन ने बताया कि बीस वर्ष की आयु में नौकरी शुरू करने के साथ ही उन्हें धूम्रपान की लत लग गई थी। उन्हें पता था कि धूम्रपान और शराब स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। उन्होंने इन्हें छोड़ने के अनेक प्रयास किए, लेकिन सफल नहीं हुए। बाद में जब उन्होंने ज़ुआन फालुन में धूम्रपान और शराब छोड़ने संबंधी शिक्षाएँ पढ़ीं, तो उन्होंने दृढ़ निश्चय किया और अंततः सफल हो गए।
उन्होंने कहा,
“मैंने उसी दिन निश्चय किया कि अब धूम्रपान छोड़ दूँगा और आश्चर्यजनक रूप से ऐसा हो भी गया। बाद में जब सहकर्मी मुझे सिगरेट देते थे, तो उसकी गंध भी मुझे अप्रिय लगती थी। सामान्य लोग जब धूम्रपान छोड़ने का प्रयास करते हैं तो उन्हें बहुत कठिनाई होती है और वे बेचैन रहते हैं। मेरे परिवार के लोग भी हैरान थे कि मैं दोबारा इसकी ओर नहीं लौटा। यह वास्तव में अद्भुत था।”
श्री चेन एक तकनीकी कंपनी के गोदाम में काम करते थे। एक बार वे हाथ से चलने वाली पैलेट ट्रॉली से सामान ट्रक में चढ़ा रहे थे। तभी ट्रक अचानक आगे बढ़ गया और ऊँचाई तक रखा भारी सामान नीचे गिर पड़ा।
उन्होंने कहा, “सामान बहुत भारी था और मेरे पैरों के ठीक सामने गिरा, लेकिन मुझे एक खरोंच तक नहीं आई। यह सौभाग्य था कि मास्टरजी ने मेरी रक्षा की। यदि वह सामान मुझ पर गिर जाता, तो परिणाम गंभीर हो सकते थे।”
उनकी पत्नी श्रीमती लिफांग हेयरड्रेसर हैं। काम शुरू करने के कुछ ही समय बाद उन्हें पेशे से जुड़ी बीमारी हो गई। उनकी दाहिनी कलाई में बार-बार गैंग्लियन सिस्ट बन जाती थी, जिसके कारण हर छह महीने में सुई द्वारा उसका उपचार कराना पड़ता था। अनियमित भोजन के कारण उन्हें अक्सर पेट दर्द भी रहता था।
मई 1995 में वे अपने पति के साथ एक मित्र के घर फालुन गोंग के अभ्यास सीखने गईं। दूसरे अभ्यास के दौरान उन्होंने मन को शांत करने पर ध्यान केंद्रित किया। इसके बाद उनकी कलाई की गाँठ और पेट की तकलीफ़ बिना किसी दवा के पूरी तरह समाप्त हो गई।
साधना शुरू करने से पहले उन्हें बार-बार सर्दी-जुकाम हो जाता था और उनका शरीर बहुत कमजोर था। उनका वजन 40 किलोग्राम से भी कम था। साधना शुरू करने के बाद उनका स्वास्थ्य सुधर गया और उनका वजन बढ़कर 45 किलोग्राम से अधिक हो गया।
जुलाई 1996 में पहली बार मास्टरजी को देखने का अनुभव याद करते हुए श्री चेन ने कहा, “मैंने देखा कि मास्टरजी बहुत लंबे थे और उनके शरीर से सुनहरी आभा निकल रही थी। उनकी मुस्कान बुद्ध जैसी करुणामयी थी, जिसने मुझे गहराई से स्पर्श किया। उनके उपदेश अत्यंत गहन थे। वहाँ इतनी बड़ी संख्या में लोग आए थे कि पूरा सभागार भर गया था।”
22 अगस्त 1998 को सिंगापुर फा सम्मेलन में मास्टरजी ने एक और व्याख्यान दिया। समूह-चित्र के लिए अभ्यासी मंच पर गए और उस अवसर पर मास्टरजी ने श्री चेन से हाथ मिलाया।
उन्होंने स्मरण करते हुए कहा, “मास्टरजी ने करुणा से कहा, ‘पुस्तक अधिक पढ़ो।’ उनके ये शब्द मेरे हृदय में गहराई से अंकित हो गए। उस समय मैं पुस्तक पढ़ने की अपेक्षा अभ्यास करने पर अधिक ध्यान देता था, और मास्टरजी यह जानते थे।”
दाफा से प्राप्त आशीर्वाद
81 वर्षीय सू मिंगहुआ ने कहा कि फालुन दाफा के अभ्यास के कारण आज भी उनका स्वास्थ्य अच्छा है और उनमें भरपूर ऊर्जा है। उन्होंने आधी सदी से अधिक समय तक काम किया और लगभग एक वर्ष पहले सेवानिवृत्त हुईं।
उन्होंने बताया कि मार्च 1995 में उन्होंने और उनके चार भाई-बहनों ने एक साथ दाफा का अभ्यास शुरू किया। उस समय पाँचों भाई-बहनों का साथ में फालुन गोंग का अभ्यास करना लोगों के बीच चर्चा का विषय था।
उन्होंने कहा कि पहले उन्हें जीवन निरर्थक और दुखों से भरा लगता था। एक समय ऐसा भी आया जब उन्हें लगा कि अब वे आगे नहीं जी सकतीं। लेकिन साधना शुरू करने के बाद अचानक उन्हें जीवन का उद्देश्य समझ में आ गया। वर्षों से चली आ रही अनिद्रा और त्वचा की बीमारी पूरी तरह समाप्त हो गई। आज भी वे तेज़ कदमों से चलती हैं, स्वस्थ हैं और ऊर्जा से भरपूर रहती हैं।
उन्होंने कहा,
“साधना शुरू करने के तुरंत बाद मुझे ‘ज़ुआन फालुन’ प्राप्त हुई। मास्टरजी जो कुछ भी कहते हैं, वह सत्य है। ऐसा लगता है कि इस पुस्तक को कभी पूरी तरह पढ़ा ही नहीं जा सकता। हर बार पढ़ने पर अर्थ की नई-नई परतें खुलती हैं, जो मुझे गहराई से स्पर्श करती हैं और कभी-कभी मेरी आँखों में आँसू भी आ जाते हैं।”
उनके भाई सू मिंगफू ने सिंगापुर फालुन दाफा एसोसिएशन के उद्घाटन समारोह में मास्टरजी से मुलाकात की थी।
उन्होंने कहा,
“उस समय मैंने साधना शुरू ही की थी और मेरी समझ अभी गहरी नहीं थी। जब मैंने मास्टरजी से हाथ मिलाया तो मुझे अत्यंत प्रसन्नता हुई। उनके हाथ बहुत दृढ़ और सशक्त थे—ऐसा अनुभव मुझे पहले कभी नहीं हुआ था। मास्टरजी अत्यंत दयालु और करुणामय थे। उनमें किसी प्रकार का अहंकार नहीं था। वे बहुत सरल और सहज थे।”
अधिक से अधिक लोगों को फालुन दाफा से परिचित कराने के लिए सिंगापुर के अभ्यासियों ने अपने घरों में निःशुल्क अभ्यास सिखाना शुरू किया। श्रीमती सू ने भी अपने घर पर दो बार ऐसे निःशुल्क प्रशिक्षण आयोजित किए।
1997 में सिंगापुर फालुन दाफा एसोसिएशन की स्थापना के बाद से अभ्यासी लगातार सामुदायिक केंद्रों में निःशुल्क अभ्यास कक्षाएँ आयोजित कर रहे हैं। प्रत्येक बार दर्जनों लोग इनमें भाग लेते हैं। इसके अतिरिक्त, सिंगापुर फालुन दाफा एसोसिएशन कई वर्षों से निःशुल्क नौ-दिवसीय व्याख्यान श्रृंखला भी आयोजित कर रहा है, जिसमें भाग लेने के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता।
20 दिसंबर, 1998 को सिंगापुर के आंग मो किओ क्षेत्र में "फालुन गोंग मुक्त कक्षाएं" लिखा एक बैनर लटका दिया गया था (Minghui.org)
अनुभवी अभ्यासी 28 दिसंबर, 2019 से 5 जनवरी, 2020 तक नौ दिवसीय कक्षा में शुरुआती लोगों को पढ़ाते हैं (Minghui.org)
फा प्राप्त करने के कुछ ही समय बाद श्रीमती सू और अन्य अभ्यासियों ने हौगांग पार्क में सामूहिक अभ्यास स्थल की स्थापना की, जो सिंगापुर का पहला फालुन दाफा अभ्यास स्थल बना।
उन्होंने कहा, “हमने ‘फालुन गोंग निःशुल्क कक्षा’ का एक बैनर लगाया और सप्ताह के सातों दिन सामूहिक अभ्यास करते थे। हमारे साथ फालुन गोंग के अभ्यास सीखने के लिए बहुत से लोग आने लगे।”
श्रीमती सू ने उस क्षण को भी याद किया जब वे मास्टरजी को सिंगापुर से विदा करने गई थीं। उन्होंने कहा कि जब मास्टरजी प्रस्थान द्वार की ओर बढ़े और मुड़कर सभी को हाथ हिलाकर विदा कहा, तो वह दृश्य उनके हृदय में सदा के लिए अंकित हो गया।
उन्होंने कहा कि मास्टरजी की करुणा और कृपा आज भी उनके हृदय में उसी प्रकार विद्यमान है, जैसे धरती का मौन भाव से पोषण करने वाली कोमल वर्षा।
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