(Minghui.org) यह एक ऐसे समर्पित पति की सच्ची कहानी है, जिन्होंने कई वर्षों तक फालुन दाफा और अपनी साधना करने वाली पत्नी का पूरे मन से समर्थन किया।
सत्तर वर्ष की आयु पार कर चुके इस व्यक्ति ने पूरे हृदय से फालुन दाफा का समर्थन किया। वे अक्सर “फालुन दाफा अच्छा है” दोहराते थे और जब भी अवसर मिलता, दाफा के कार्यों में सहयोग करने तथा अभ्यासियों की सहायता करने के लिए सदैव तत्पर रहते थे।
वे स्वयं आगे बढ़कर घर के अधिकतर काम कर लेते थे, ताकि उनकी पत्नी अभ्यास करने और फा का अध्ययन करने पर अधिक समय दे सकें। जब भी कोई अभ्यासी उनके घर आता, वे उसका हार्दिक स्वागत करते और पूरी आत्मीयता से उसकी देखभाल करते।
यह दुर्घटना 25 जनवरी 2026 की शाम को हुई। रात का भोजन करने के बाद वे अपनी पत्नी के साथ गाँव के बाहर सड़क पर टहलने निकले थे। तभी अचानक एक तेज़ रफ्तार इलेक्ट्रिक स्कूटर उनकी ओर आया और उन्हें ज़ोरदार टक्कर मार दी। वे ज़मीन पर गिर पड़े, उनके सिर का पिछला हिस्सा ज़मीन से टकराया और वे तुरंत बेहोश हो गए। उनकी पत्नी उन्हें तुरंत अस्पताल ले गईं, जहाँ वे कोमा में रहे।
पाँच दिन बाद उन्हें चमत्कारिक रूप से होश आ गया। होश में आने के बाद उन्होंने धीरे-धीरे उस अनुभव का वर्णन किया जो उन्होंने बेहोशी की अवस्था में किया था।
उन्होंने कहा, “उस समय मेरी आँखें बंद थीं, फिर भी मैं सब कुछ बहुत स्पष्ट देख पा रहा था। मैंने देखा कि अस्पताल की दीवारों से ही सुंदर फूल निकल रहे हैं—लाल, सफेद, पीले, बैंगनी और अनेक रंगों के। कुछ फूलों में डंठल थे लेकिन पत्तियाँ नहीं थीं। उनकी कलियाँ पारदर्शी और चमकदार थीं तथा हर फूल अपने-अपने अक्ष पर घूम रहा था। वह दृश्य अत्यंत मनोहारी था।
“जो फूल मेरे सबसे निकट था, वह धीरे-धीरे मेरे चेहरे की ओर तैरकर आया और अचानक ‘स्विश’ की ध्वनि के साथ खिल गया। उसी क्षण मैंने देखा कि मास्टरजी (उनका फा शरीर) कमल के फूल पर विराजमान हैं। उनके शरीर से सुनहरी आभा निकल रही थी और वे मुस्कुराते हुए मेरी ओर देख रहे थे। वह नया खिला हुआ फूल भी मास्टरजी के चारों ओर घूमने लगा।
“मास्टरजी ने काषाय वस्त्र पहन रखा था और वे मौन थे। उनका बायाँ हाथ ऊपर उठा हुआ था, हथेली बाहर की ओर थी, जबकि दाहिना हाथ मेरे माथे की ओर संकेत कर रहा था। उनकी हथेली से गर्म सुनहरी रोशनी निकल रही थी, जिसका अनुभव अत्यंत सुखद था। मैंने यह भी देखा कि मास्टरजी की दिव्य नेत्र (तियानमु) के स्थान से लंबी, चपटी सुनहरी किरणें बाहर की ओर फैल रही थीं।”
उन्होंने स्पष्ट रूप से समझ लिया कि मास्टरजी उन्हें बचाने आए थे।
लगभग दस मिनट बाद उन्हें एहसास हुआ कि मास्टरजी अब जाने वाले हैं। उन्होंने देखा कि मास्टरजी धीरे-धीरे कमल के फूल पर खड़े हो गए। उसी क्षण अस्पताल की छत मानो गायब हो गई और ऊपर निर्मल नीला आकाश दिखाई देने लगा। फिर मास्टरजी धीरे-धीरे उसी आकाश में विलीन हो गए। उसी समय वे सभी फूल भी अदृश्य हो गए।
उन्होंने बताया कि उस क्षण उनकी आँखों से आँसू बहने लगे। वे इतने भावुक हो गए कि कुछ भी बोल नहीं सके—मानो वर्षों बाद कोई माँ अपने बिछड़े हुए पुत्र से मिल गई हो। उसी पल उनका तन और मन अत्यंत हल्का हो गया और उनका मस्तिष्क पहले से कहीं अधिक स्पष्ट हो गया।
उन्होंने कहा कि मास्टरजी की करुणा, महानता, गरिमा और दिव्यता का वर्णन शब्दों में करना असंभव है।
वे बार-बार मन ही मन सोचते रहे, “मैंने ऐसा कौन-सा पुण्य किया है कि दाफा प्राप्त करने से पहले ही मुझे मास्टरजी के दर्शन का सौभाग्य मिला? यह कितना अद्भुत सौभाग्य है—कितना महान आशीर्वाद!”
अस्पताल के विभागाध्यक्ष भी इस घटना से आश्चर्यचकित थे। उन्होंने कहा, “आपकी स्थिति में तो किसी भी क्षण मृत्यु हो सकती थी।”
प्रारंभिक जाँच के बाद डॉक्टरों ने खोपड़ी का ऑपरेशन (क्रैनियोटॉमी) करने की योजना बनाई थी। उनका कहना था कि यदि ऑपरेशन सफल भी हो जाए, तो पूरी तरह स्वस्थ होने में कम से कम तीन से छह महीने लगेंगे। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से बाद की जाँचों में कोई गंभीर समस्या नहीं मिली और अब वे पूरी तरह स्वस्थ हो चुके हैं।
अपना अनुभव सुनाते समय उन्होंने बार-बार यह सुनिश्चित किया कि उनकी कृतज्ञता स्पष्ट रूप से व्यक्त हो। उन्होंने एक बार फिर मास्टरजी द्वारा अपना जीवन बचाने के लिए हृदय से धन्यवाद व्यक्त किया।
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