(Minghui.org) 8 जुलाई, 2026 को ब्रिटेन की संसद के पोर्टकुलिस हाउस के विल्सन कक्ष में चीनी शासन और उसके मानवाधिकार उल्लंघनों पर चर्चा के लिए एक संगोष्ठी आयोजित की गई।
संगोष्ठी "चीनी नेतृत्व को समझना" की शुरुआत में ब्रिटेन की कंज़र्वेटिव पार्टी के पूर्व नेता सर इयान डंकन स्मिथ ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) केवल चीन के लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे स्वतंत्र विश्व के लिए भी एक खतरा है।
उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि सीसीपी अंतरराष्ट्रीय संधियों के तहत किए गए अपने वादों का पालन नहीं करती। उदाहरण के रूप में उन्होंने हांगकांग के साथ किए गए उसके व्यवहार का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हाल ही में सीसीपी ने जातीय एकता कानून लागू किया है, जिसका प्रभाव चीन की सीमाओं से बाहर भी पड़ता है और जिसने उसके दमन को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक विस्तारित कर दिया है।
सर इयान ने चेतावनी दी कि पश्चिमी देशों को सीसीपी के मूल्यों और उसके आचरण की अनदेखी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि वे पश्चिमी लोकतांत्रिक मूल्यों से मूलतः भिन्न हैं।
इस संगोष्ठी की अध्यक्षता सर इयान डंकन स्मिथ ने की। मुख्य वक्ताओं में डॉ. डेविड मैटस, जान जेकिलेक और ईथन गुटमैन शामिल थे।
इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें ब्रिटिश संसद के सदस्य, ब्रिटेन के विदेश, राष्ट्रमंडल एवं विकास कार्यालय (FCDO) की चीन टीम के प्रतिनिधि, ह्यूमन टिश्यू अथॉरिटी (HTA), ब्रिटिश मेडिकल एसोसिएशन (BMA), रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट (RUSI), बीबीसी, तथा हांगकांग पार्लियामेंट (HKP), स्टॉप उइगर जेनोसाइड और क्रिश्चियन मेडिकल फेलोशिप जैसे गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

चीन में जबरन अंग कटाई अत्याचारों पर ध्यान आकर्षित करने के लिए 8 जुलाई, 2026 को पोर्टकुलिस हाउस के विल्सन रूम में एक संगोष्ठी आयोजित की गई थी (Minghui.org)
संगोष्ठी की शुरुआत सीसीपी द्वारा नियंत्रित उस व्यवस्था पर चर्चा से हुई, जिसमें विवेक के बंदियों (Prisoners of Conscience) के अंगों को जबरन निकाले जाने के आरोप हैं। वक्ताओं ने ऐसे नए साक्ष्य प्रस्तुत किए, जिनके अनुसार चीन में फालुन दाफा अभ्यासियों, उइगरों तथा अन्य जातीय अल्पसंख्यकों के अंगों की व्यापक और लगातार जबरन निकासी की जा रही है। उन्होंने सीसीपी के नेताओं की सोच और निर्णय लेने के तरीके का भी गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया तथा बताया कि यह पश्चिमी देशों के नेताओं की सोच से मूल रूप से भिन्न है।
सर इयान ने जनता से सीसीपी की वास्तविक प्रकृति को पहचानने और ब्रिटेन से कानूनों को और सुदृढ़ करने का आग्रह किया
सर इयान डंकन स्मिथ, यूके कंजर्वेटिव पार्टी के पूर्व अध्यक्ष: सीसीपी न केवल चीनी लोगों के लिए, बल्कि स्वतंत्र दुनिया के लिए भी खतरा है (Minghui.org)
सर इयान डंकन स्मिथ ने कहा कि पिछले दो दशकों में सीसीपी ने अपने ही नागरिकों, विशेष रूप से विवेक के बंदियों, की बड़े पैमाने पर हत्या करके अंगों के व्यापार का एक विशाल और अत्यंत लाभदायक उद्योग खड़ा किया है।
उन्होंने कहा कि यह अपराध इतना भयावह है कि पश्चिमी समाज अक्सर अनजाने में ही इसके अस्तित्व को स्वीकार करने से बचता है। उनके अनुसार, लोगों के लिए यह विश्वास करना कठिन होता है कि आधुनिक समय में भी इस प्रकार के अमानवीय अपराध हो सकते हैं।
इस संदर्भ में उन्होंने 17 जून 2026 को अमेरिकी सीनेट की विदेश संबंध समिति द्वारा आगे बढ़ाए गए फालुन गोंग और जबरन अंग निकासी के पीड़ितों की सुरक्षा अधिनियम का उल्लेख एक सकारात्मक उदाहरण के रूप में किया।
उन्होंने ब्रिटिश संसद से आग्रह किया कि वह विशेषज्ञों द्वारा प्रस्तुत जाँच संबंधी साक्ष्यों पर गंभीरता से विचार करे और कानून निर्माण, प्रतिबंध (सैंक्शंस) तथा रिपोर्टिंग तंत्र को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाए, ताकि ब्रिटेन किसी भी रूप में इन अपराधों का सहयोगी न बने।
मैटस: कानूनी कमियों को दूर कर व्यापक निवारक उपाय अपनाए जाएँ
डेविड मटास: अंतर-सरकारी बातचीत में मानवाधिकारों के मुद्दों को प्राथमिकता दें (Minghui.org)
2010 में नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किए गए कनाडा के एक प्रमुख मानवाधिकार वकील डेविड माटास ने ब्रिटेन में हाल ही में हुई विधायी प्रगति की पुष्टि की। उन्होंने कहा, "यूनाइटेड किंगडम की संसद ने 2022 में विदेशों में वाणिज्यिक अंग लेनदेन में आपराधिक मिलीभगत प्रदान करने के लिए कानून बनाया है जो नागरिकों और स्थायी निवासियों पर लागू होता है, और 2024 में उन्होंने एक विनियमन लागू किया जिसमें प्रत्यारोपण नर्सों को विदेश में प्रत्यारोपण के उचित संदेह के मामलों की रिपोर्ट करने की आवश्यकता होती है।
माटास ने जोर देकर कहा कि यूके को अंग प्रत्यारोपण के दुरुपयोग को रोकने के लिए अधिक व्यापक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने एक आव्रजन प्रतिबंध और ब्रिटेन आने वाले विदेशियों को प्रवेश से इनकार करने का प्रस्ताव रखा, लेकिन विदेश में अंग प्रत्यारोपण में शामिल रहे हैं। "एक और बीमा है, जो उन लोगों को सार्वजनिक या निजी बीमा से वंचित कर रहे हैं, जो विदेश में प्रत्यारोपण होने पर देखभाल कर रहे हैं, ऐसी स्थिति में जहां अंग प्रत्यारोपण का दुरुपयोग होता है," ... उन्होंने कहा, "उन लोगों की आपूर्ति श्रृंखला को काट दिया जा रहा है जो प्रत्यारोपण अस्पतालों की इमारत की आपूर्ति कर रहे हैं, या प्रत्यारोपण पंखों की आपूर्ति कर रहे हैं, या चीन को प्रत्यारोपण तकनीक प्रदान कर रहे हैं।
माटास ने कहा कि जो बाधाएं लोगों को सक्रिय रूप से समस्या को हल करने से रोकती हैं, उनमें उनका अविश्वास शामिल है कि ये अत्याचार मौजूद हैं, हितों का टकराव और आर्थिक और राजनीतिक रूप से चीन का भू-राजनीतिक वजन।
मातास ने ब्रिटिश सरकार को अमेरिकी फालुन गोंग संरक्षण अधिनियम के समान प्रतिबंधों और देश की रिपोर्टिंग का सुझाव दिया। उन्होंने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री को दो संदेश भेजे थे। एक यह है कि सीसीपी के शासन के तहत चीन ब्रिटेन से बहुत अलग है, और चीन के साथ व्यवहार करते समय पश्चिमी अनुभव का अनुमान लगाना खतरनाक है। दूसरा है "मानवाधिकारों के उल्लंघन के सबूतों को गंभीरता से लेना और उन पर कार्रवाई करना, अंग कटाई के दुरुपयोग के बारे में अंतर-सरकारी चिंताओं के संदर्भ में। उन्होंने कहा कि दुर्व्यवहार कभी-कभी अंतर-सरकारी मंचों में उठाया जाता है, "लेकिन पर्याप्त नहीं, पर्याप्त प्राथमिकता नहीं दी जाती है।
जेकीलेक: जबरन अंग कटाई सीसीपी नेतृत्व के दिमाग में एक खिड़की है
जान जेकीलेक ने कहा कि सीसीपी नेतृत्व की नजर में, उसके अधिकांश नागरिकों को अंग प्रत्यारोपण के लिए संभावित कच्चे माल के रूप में माना जाता है (Minghui.org)
न्यूयॉर्क टाइम्स की बेस्टसेलर पुस्तक ** किल्ड टू आर्डर ** के लेखक जान जेकिलेक ने कहा कि उनकी पुस्तक का लगभग दो-तिहाई भाग इस बात की पड़ताल करता है कि यह कथित भयावह गतिविधि वास्तव में सीसीपी नेतृत्व की सोच और उसकी कार्यप्रणाली को समझने का एक माध्यम है।
उन्होंने कहा, "चीनी नेता अपनी ही आबादी के एक बड़े हिस्से को अंग प्रत्यारोपण के लिए कच्चे संसाधन के रूप में देखते हैं, ताकि वे स्वयं अधिक समय तक जीवित रह सकें और साथ ही भारी आर्थिक लाभ भी कमा सकें।"
उन्होंने आगे कहा कि उनके अनुसार यह कार्य औद्योगिक स्तर पर किया जा रहा है और दावा किया कि चीन में प्रतिवर्ष 60,000 से 90,000 अंग प्रत्यारोपण किए जाते हैं। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि वे सीसीपी के बारे में आदर्शवादी या भ्रमपूर्ण दृष्टिकोण न रखें।
वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए जेकिलेक ने ब्रिटेन के भावी प्रधानमंत्री के लिए कुछ सुझाव भी दिए। उन्होंने कहा कि चीनी अधिकारी अब भी लंदन में एक अत्यंत रणनीतिक स्थान पर विशाल चीनी दूतावास बनाने की योजना पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। उनके अनुसार, इससे चीन को ब्रिटेन तथा फाइव आइज़ (Five Eyes) देशों के डेटा नेटवर्क तक पहुँच बनाने का संभावित अवसर मिल सकता है।
उन्होंने नए प्रधानमंत्री को सलाह दी कि चीनी शासन को एक ऐसे सामान्य शासन के रूप में न देखा जाए, जिसके साथ पारंपरिक तरीके से बातचीत या समझौता किया जा सके।
उन्होंने कहा: "यह ऐसा शासन नहीं है जो 'दोनों पक्षों की जीत' (विन-विन) में विश्वास करता हो। यह ऐसा शासन है जो मूलतः चाहता है कि ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा—जो मेरा मातृदेश है—और अन्य देश उसके अधीनस्थ राज्यों की तरह बन जाएँ।"
ईथन गुटमैन: चिकित्सा समुदाय को चीन पर शैक्षणिक बहिष्कार लागू करना चाहिए
एथन गुटमैन (बाएं) का मानना है कि विवेक के कैदियों को लक्षित करने वाली राज्य-प्रायोजित अंग कटाई अभी भी चीन में बड़े पैमाने पर है (Minghui.org)
विक्टिम्स ऑफ कम्युनिज्म मेमोरियल फ़ाउंडेशन में चीन अध्ययन के वरिष्ठ मानवाधिकार अन्वेषक और शोध फेलो ईथन गुटमैन ने संगोष्ठी में अपनी नई पुस्तक ** द शिनजियांग प्रोसीजर ** प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक ऐसे नवीन साक्ष्य प्रस्तुत करती है, जिनके आधार पर उनका दावा है कि चीन में अंतरात्मा के बंदियों से राज्य-प्रायोजित जबरन अंग निकासी अब भी बिना किसी प्रभावी रोक के जारी है।
गुटमैन ने कहा कि चीन में अंग प्रत्यारोपण से जुड़े मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा समुदाय दो अलग-अलग दृष्टिकोणों में बँटा हुआ है।
उन्होंने कहा: "द ट्रांसप्लांटेशन सोसाइटी अब भी इस विश्वास पर अडिग है कि निरंतर संवाद के माध्यम से चीन को बदला जा सकता है… जबकि दूसरी ओर, इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ हार्ट एंड लंग ट्रांसप्लांटेशन ने चीन पर शैक्षणिक बहिष्कार लागू कर दिया है।"
गुटमैन ने कहा कि जब तक चीन अपनी नीतियों में परिवर्तन नहीं करता, तब तक उसके साथ इस क्षेत्र में कोई सहयोग नहीं होना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि थर्मो फिशर ने कभी बीजिंग को लगभग एक करोड़ (10 मिलियन) डीएनए परीक्षण किट बेची थीं, जिनका उपयोग उइगर समुदाय पर किया गया। उनके अनुसार, पश्चिमी देशों की कुछ व्यावसायिक प्रौद्योगिकी कंपनियाँ अनजाने में ही चीन की कथित जबरन अंग निकासी व्यवस्था में सहयोगी बन गई हैं।
उन्होंने सरकारों से आग्रह किया कि वे ऐसे अपराधों को रोकने के लिए आवश्यक कानून बनाएँ। साथ ही उन्होंने ब्रिटेन से चीनी बाज़ार पर निर्भरता कम करने और ऊर्जा तथा भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच अमेरिका–ब्रिटेन गठबंधन को और मजबूत करने का आह्वान किया।
ह्यूमन टिश्यू अथॉरिटी: चीन से जुड़े मामलों को ब्रिटेन की सर्वोच्च पुलिस एजेंसी को भेजा जाएगा
संगोष्ठी में ह्यूमन टिश्यू अथॉरिटी (HTA) के एक बोर्ड सदस्य तथा किंग्स काउंसल (KC) ने भी संबोधित किया। HTA, ब्रिटेन के स्वास्थ्य एवं सामाजिक देखभाल विभाग के अंतर्गत मानव ऊतकों और अंगों का नियामक निकाय है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि 2024 में लागू किए गए नए नियमों के अनुसार, विदेशों में कराए गए अंग प्रत्यारोपण की अनिवार्य रिपोर्टिंग व्यवस्था आम लोगों की अपेक्षा कहीं अधिक व्यापक है।
उन्होंने बताया कि यदि किसी स्वास्थ्यकर्मी का संपर्क ऐसे ब्रिटिश नागरिक या स्थायी निवासी से होता है, जिसने विदेश में अंग प्रत्यारोपण कराया हो, तो कानूनन उस स्वास्थ्यकर्मी के लिए यह जानकारी HTA को देना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में HTA को हर महीने विदेशों में हुए अंग प्रत्यारोपण से संबंधित कई रिपोर्टें प्राप्त होती हैं।
उन्होंने उपस्थित लोगों को आश्वस्त करते हुए कहा: "यदि इन रिपोर्टों के आधार पर हमें चीन या किसी अन्य देश में जबरन अंग निकासी से जुड़े गंभीर अपराधों का पता चलता है या ऐसा संदेह होता है, तो HTA निष्क्रिय नहीं रहेगा। हम मामले को सीधे ब्रिटेन की सर्वोच्च पुलिस एजेंसी के पास भेजेंगे और तत्काल तथा व्यापक आपराधिक जाँच शुरू करने का अनुरोध करेंगे।"
उइगर प्रतिनिधि: ब्रिटेन सरकार को चीन में जारी नरसंहार को स्वीकार करना चाहिए
वर्ल्ड उइगर कांग्रेस के लंदन कार्यालय की प्रतिनिधि तथा ब्रिटेन में स्टॉप उइगर जेनोसाइड अभियान की प्रमुख रहीमा महमूद ने पीड़ितों के दृष्टिकोण से सीसीपी के व्यवस्थित मानवाधिकार उल्लंघनों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने ब्रिटेन सरकार से दो महत्वपूर्ण कदम उठाने का आग्रह किया।
पहला, उन्होंने कहा कि सरकार को: "चीनी सरकार द्वारा लोगों के विरुद्ध किए जा रहे अपराधों, विशेषकर जबरन अंग निकासी, की गंभीरता को आधिकारिक रूप से स्वीकार करना चाहिए।"
दूसरा, उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे अपराधों को रोकने के लिए प्रभावी उपाय करने चाहिए तथा इन अपराधों के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए जाने चाहिए।
प्रश्नोत्तर सत्र में विस्तृत चर्चा
प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से अपने विचार रखे और कई महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा की।
चर्चा का केंद्र इस बात पर रहा कि ब्रिटेन में विभिन्न राजनीतिक दलों के सहयोग से प्रभावी कानून कैसे बनाए जाएँ, ऐसे व्यक्तियों और संस्थाओं से जुड़ी आपूर्ति श्रृंखलाओं (सप्लाई चेन) को कैसे बाधित किया जाए जिन पर इन अपराधों में संलिप्त होने के आरोप हैं, तथा भविष्य में अधिक सशक्त और प्रभावी प्रतिरोधात्मक उपाय कैसे लागू किए जाएँ।


अभ्यासियों ने फालुन गोंग के चीनी शासन के चल रहे उत्पीड़न को उजागर करने के लिए संसद के बाहर एक कार्यक्रम आयोजित किया (Minghui.org)
संसद भवन के बाहर फालुन दाफा अभ्यासियों ने पोस्टर और बैनर प्रदर्शित कर अधिकारियों तथा आम जनता को फालुन दाफा के उत्पीड़न के बारे में जानकारी दी।
उनकी यह शांतिपूर्ण गतिविधि संसद के भीतर उठी आवाज़ों के अनुरूप थी और इसने सीसीपी द्वारा किए जा रहे मानवाधिकार उल्लंघनों तथा फालुन दाफा के विरुद्ध चीन की सीमाओं से बाहर तक फैले दमन (ट्रांसनेशनल रिप्रेशन) को समाप्त करने की एक सशक्त अपील प्रस्तुत की।
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