(Minghui.org) मैं जिस छोटे से आँगन वाले मकान में रहती  हूँ, वहाँ कई परिवार रहते हैं। मैं अपने कुछ पड़ोसियों के अनुभव साझा करना चाहती  हूँ, जिन्होंने फालुन दाफा के बारे में सच्चाई जानने के बाद सकारात्मक परिवर्तन का अनुभव किया।

एक आध्यात्मिक प्रवृत्ति वाली युवती

सन् 2022 में एक दिन मुझे बाहर से बातचीत की आवाज़ सुनाई दी। मैं आँगन में गई तो देखा कि मकान-मालिक मेंग नाम की एक युवती को कमरा किराए पर दिखा रहा था। मैंने मुस्कुराकर उसका अभिवादन किया और उसने भी बड़ी आत्मीयता से उत्तर दिया। उस समय उसे कमरा कुछ पसंद नहीं आया और वह थोड़ी देर बाद चली गई। लेकिन अगले ही दिन वह वापस आई और बोली कि वह यही कमरा किराए पर लेना चाहती है।

जब मेंग अपना सामान लेकर आई, तो उसका सामान दरवाज़े पर ढेर लगा हुआ था। उसे अकेले सब कुछ अंदर ले जाने में कठिनाई हो रही थी, इसलिए मैंने उसकी मदद की। वह बहुत आभारी हुई। समय के साथ हमारी अच्छी मित्रता हो गई।

कुछ समय बाद मेंग ने मुझसे कहा, “असल में, आपकी मुस्कान ही वह कारण थी जिसकी वजह से मैंने यह कमरा किराए पर लिया। मैंने इससे बेहतर कई जगहें देखी थीं, लेकिन आपकी मुस्कान मेरे मन से निकल ही नहीं रही थी। आखिरकार मैंने यहीं रहने का फैसला किया।”

मैंने मुस्कुराकर उत्तर दिया, “लगता है, हमारी मुलाकात नियति में लिखी थी!” मेंग ने कहा, “जब मैंने आपको पहली बार देखा था, तो मुझे लगा कि आपके शरीर से प्रकाश निकल रहा है। क्या आप किसी धर्म में विश्वास करते हैं?”

मैंने कहा, “मैं फालुन दाफा का अभ्यास करती हूँ। यह उच्च स्तर का बुद्ध फ़ा है, जो लोगों को सत्य, करुणा और सहनशीलता के सिद्धांतों का पालन करना सिखाता है।” वह आश्चर्य से बोली, “मेरे गाँव में भी बहुत से लोग फालुन दाफा का अभ्यास करते थे, लेकिन उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था।”

इसके बाद मैंने उसे विस्तार से बताया कि फालुन दाफा क्या है, चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) अभ्यासियों का दमन क्यों करती है, तियानमेन आत्मदाह की घटना का वास्तविक सच क्या है, फालुन दाफा पूरी दुनिया में कैसे फैल चुका है, और लोगों के लिए सीसीपी तथा उसके संबद्ध संगठनों से अलग होना क्यों महत्वपूर्ण है।

जब उसकी सभी गलतफहमियाँ दूर हो गईं, तो उसने कम्युनिस्ट यूथ लीग और यंग पायनियर्स—दोनों से अपना संबंध समाप्त कर दिया। मैंने उसे यह भी बताया कि श्रद्धापूर्वक यह वाक्य दोहराना कितना लाभदायक है—“फालुन दाफा अच्छा है, सत्य-करुणा-सहनशीलता अच्छी है।”

एक दिन वह मेरे कमरे में आई। जैसे ही उसने मेरे दो-मंज़िला बिस्तर (बंक बेड) को देखा, वह आश्चर्यचकित होकर बोली, “मैंने यहाँ आने से पहले ही ध्यान में आपका यही बिस्तर देखा था। नीचे वाले बिस्तर पर सफेद वस्त्र पहने एक महिला ध्यान कर रही थी। तो वह आप ही थीं!”

दाफा पर विश्वास

मेंग काम से लौटने के बाद अक्सर मेरे कमरे में बैठकर बातें किया करती थी। वह कहती, “आपके कमरे में बहुत शांत वातावरण है। आपके पास बैठते ही मेरी सारी चिंताएँ गायब हो जाती हैं। मुझे ऐसा सुकून और स्थिरता महसूस होती है, जैसा पहले कभी नहीं हुआ। मुझे विशेष रूप से आपको ज़ुआन फालुन पढ़ते हुए सुनना बहुत अच्छा लगता है।”

एक दिन उसने बताया कि उसके मन में बार-बार नकारात्मक विचार आते हैं, जिससे उसके काम पर भी असर पड़ता है। मैंने सुझाव दिया कि जब भी ऐसे विचार आएँ, वह श्रद्धापूर्वक यह वाक्य दोहराए—“फालुन दाफा अच्छा है, सत्य-करुणा-सहनशीलता अच्छी है।”

उसने ऐसा किया और बाद में बताया कि उसे लगा मानो एक शांतिपूर्ण ऊर्जा ने उसे घेर लिया हो और वे नकारात्मक विचार अपने-आप समाप्त हो गए। यह सुनकर मुझे बहुत खुशी हुई। एक दिन मेंग ने बताया कि वह बौद्ध साधना करती रही है और उसे कुछ अलौकिक क्षमताओं का अनुभव होता है, जिनकी सहायता से वह अपने अतीत और भविष्य की कुछ झलकियाँ देख सकती है। वह एक कठिन परिस्थिति से गुजर रही थी और चाहती थी कि मैं उसकी सहायता करूँ।

उसने बताया कि एक भविष्यवक्ता ने उससे कहा था कि उसके दो विवाह होंगे। पहला विवाह दक्षिण के एक व्यक्ति से होगा, जो उसे बहुत कष्ट देगा और अंततः उसे छोड़ना पड़ेगा। दूसरा विवाह उत्तर के एक व्यक्ति से होगा, जिसके साथ उसे सुख मिलेगा। उसने ध्यान में इन दोनों विवाहों की झलक भी देखी थी।

बाद में, जब वह शंघाई में काम कर रही थी, उसकी मुलाकात दक्षिण के एक युवक से हुई। भविष्यवाणी याद आने के कारण वह उसके पास जाने से डरती थी, लेकिन उससे अलग भी नहीं हो पा रही थी। वह बहुत उलझन में थी।

उसने मुझसे पूछा, “मुझे क्या करना चाहिए?”

मैंने उसे दाफा के सत्य-करुणा-सहनशीलता के सिद्धांतों की याद दिलाई और कहा कि वह केवल एक अच्छा इंसान बनने पर ध्यान दे। मैंने यह भी सुझाव दिया कि वह ज़ुआन फालुन पढ़े। संभव है कि उसे अपने सभी प्रश्नों के उत्तर उसमें मिल जाएँ।

वह पुस्तक को दोनों हाथों से अपने सीने से लगाकर खुशी-खुशी चली गई। लगभग छह महीने बाद वह शंघाई से वापस लौटी और मुस्कुराते हुए मेरे पास आई। उसने कहा, “मैंने आपकी सलाह मानी और सत्य-करुणा-सहनशीलता के अनुसार अच्छा इंसान बनने का प्रयास किया। हाल ही में मेरा अपने प्रेमी से शांतिपूर्वक अलगाव हो गया। सब कुछ सौहार्दपूर्ण ढंग से समाप्त हुआ।”

मेरे बुज़ुर्ग पड़ोसी ने सीसीपी छोड़ दी

मेरे पड़ोस में बाहर से आए एक बुज़ुर्ग व्यक्ति रहते थे। वे ईमानदार और दयालु थे। पचास वर्ष की आयु में उनकी पत्नी का निधन हो गया था और वे अपने बेटे के साथ रहते थे।

आँगन में हमारी अक्सर मुलाकात होती थी। अवसर मिलने पर मैं उनसे दाफा के बारे में बातें करती और वे हमेशा ध्यान से सुनते। बाद में उन्होंने भी सीसीपी से अपना संबंध समाप्त कर दिया। मैंने उन्हें फालुन दाफा का एक कैलेंडर दिया, जिसे उन्होंने अपने बैठक-कक्ष की मेज़ पर सबसे प्रमुख स्थान पर रखा।

बाद में मैंने उन्हें मास्टरजी के फ़ा-प्रवचनों की ऑडियो रिकॉर्डिंग सुनाई। उन्हें अभ्यासियों के चमत्कारिक अनुभव भी बहुत पसंद आते थे। एक दिन उन्होंने मुझसे फालुन दाफा का एक लॉकेट माँगा और उसे बहुत सावधानी से अपनी जेब में रख लिया।

दाफा का संदेश फैलाना

हमारे आँगन में लगभग साठ वर्ष की आयु का एक दंपति भी रहता था। पत्नी का नाम यू और पति का नाम बिंग था। दोनों बहुत भले लोग थे और एक संपत्ति प्रबंधन कंपनी में चौकीदार के रूप में काम करते थे। मैंने उन्हें दाफा के बारे में बताया और दोनों ने सीसीपी के यंग पायनियर्स संगठन से अपना संबंध समाप्त करने पर सहमति व्यक्त की।

यू ने केवल प्राथमिक विद्यालय तक शिक्षा प्राप्त की थी। उसे दाफा अभ्यासियों के चमत्कारिक अनुभव सुनना बहुत पसंद था। वह दाफा की पुस्तिकाएँ भी पढ़ती थी और जिन चीनी अक्षरों को नहीं समझ पाती, उनके बारे में मुझसे पूछती थी। एक पुस्तिका पढ़ लेने के बाद वह उसे किसी और को पढ़ने के लिए दे देती थी।

वह कहती, “इन पुस्तिकाओं में लोगों को अच्छा इंसान बनने की प्रेरणा दी गई है। मैंने इनसे सही आचरण के सिद्धांत सीखे हैं। मैं चाहती हूँ कि दूसरे लोग भी इन्हें पढ़ें, ताकि वे भी जान सकें कि फालुन दाफा कितना अद्भुत है।” मैंने उससे कहा कि दाफा की सामग्री दूसरों तक पहुँचाना वास्तव में लोगों के लिए एक आशीर्वाद है।

एक बार वह पढ़ी हुई पुस्तिका अपने कार्यस्थल पर ले गई और खिड़की की चौखट पर रख दी। थोड़ी ही देर में किसी ने उसे उठा लिया। वह रोज़ बस से काम पर जाती थी और रास्ते में एक पार्क पड़ता था। एक दिन उसने बस की बजाय पैदल जाना चुना। पार्क में एक बेंच पर उसने अपने बैग से "गोल्डन सीड" नामक पुस्तिका निकाली और वहाँ रख दी। थोड़ी देर बाद उसने पीछे मुड़कर देखा तो एक व्यक्ति उसी बेंच पर बैठकर उसे पढ़ रहा था। यह बताते समय उसके चेहरे पर प्रसन्नता साफ झलक रही थी।

मास्टरजी के फ़ा-प्रवचन सुनने के बाद यू ने सत्य, करुणा और सहनशीलता के अनुसार अच्छा इंसान बनना सीखा। जब भी वह अभ्यासियों के अनुभव पढ़ती, तो अक्सर कहती, “दाफा के अभ्यासी वास्तव में अद्भुत हैं!”

उसने यह भी सीख लिया कि संघर्ष की स्थिति में दूसरों से झगड़ा नहीं करना चाहिए। एक दिन उसने मुझसे कहा, “आज मेरे साथ काम करने वाली महिला बार-बार मुझे ताने मार रही थी, लेकिन मुझे बिल्कुल भी क्रोध नहीं आया। पहले मैं तुरंत जवाब दे देती थी। अब मैं जानती हूँ कि मुझे सहनशीलता रखनी चाहिए और उसके स्तर तक नहीं गिरना चाहिए।”

पहले यू अक्सर शिकायत करती थी कि उसका बेटा और बहू उसका ध्यान नहीं रखते। बाद में उसने सोचा कि शायद पिछले किसी जन्म में उसने उनके साथ अन्याय किया हो और अब उसका कोई ऋण चुकाना बाकी हो। इसलिए उसने निर्णय लिया कि वह परिस्थितियाँ कैसी भी हों, सभी के साथ अच्छा व्यवहार करेगी।

यू के इन सद्कर्मों का उसे अच्छा फल मिला। उसकी कंपनी ने न केवल उसका वेतन बढ़ाया, बल्कि उसे और उसके पति को रहने के लिए एक फ्लैट भी उपलब्ध करा दिया। अब उन्हें किराया नहीं देना पड़ता। इस छोटे से आँगन में रहने वाले अनेक लोगों ने यह समझने के बाद कि “फालुन दाफा अच्छा है”, अपने जीवन में अनेक प्रकार के शुभ अनुभव और आशीर्वाद प्राप्त किए।