(Minghui.org) Minghui.org को हाल ही में पता चला कि हेइलोंगजियांग प्रांत के हार्बिन शहर की 62 वर्षीय निवासी सुश्री लियू फूजिन को 18 जून 2026 को हेइलोंगजियांग प्रांत महिला कारागार भेज दिया गया, जहाँ वे फालुन दाफा में अपनी आस्था के कारण सुनाई गई सात वर्ष की जेल की सज़ा काट रही हैं।

अगस्त 1963 में जन्मी सुश्री लियू को 21 अगस्त 2025 को वुजिया टाउन पुलिस थाने के अधिकारियों ने उनके घर से गिरफ्तार किया। पुलिस ने उनके पास से 16,000 युआन के ऐसे बैंक नोट जब्त किए, जिन पर फालुन दाफा से संबंधित संदेश मुद्रित थे, तथा फालुन दाफा के बारे में संदेश वाले 200 स्वयं-चिपकने वाले स्टिकर भी जब्त किए।

उसी दिन स्थानीय क्षेत्र के 20 से अधिक अन्य फालुन दाफा अभ्यासियों को भी गिरफ्तार किया गया। यह व्यापक गिरफ्तारी अभियान हार्बिन शहर की राजनीतिक एवं विधिक मामलों की समिति के आदेश पर चलाया गया था। यह एक न्यायिक प्रक्रिया से बाहर कार्य करने वाली संस्था है, जिसे फालुन दाफा के उत्पीड़न की निगरानी और संचालन का अधिकार दिया गया है।

सुश्री लियू की सुनवाई 30 मार्च 2026 को दाओली जिला न्यायालय में हुई। मुकदमे के विवरण स्पष्ट नहीं हैं। प्रारंभ में उन्हें तीन वर्ष की सज़ा सुनाई गई थी, लेकिन बाद में अदालत ने उनकी सज़ा बढ़ाकर सात वर्ष कर दी। उन्होंने इस निर्णय के विरुद्ध अपील की, किंतु वह असफल रही। इसके बाद 18 जून 2026 को उन्हें हेइलोंगजियांग प्रांत महिला कारागार भेज दिया गया।

सुश्री लियू के अतिरिक्त, उसी पुलिस अभियान में गिरफ्तार किए गए कम-से-कम दो अन्य अभ्यासियों को भी उनकी आस्था के कारण सज़ा सुनाए जाने की पुष्टि हुई है। इनमें सुश्री झोउ छुआनयिंग को साढ़े सात वर्ष तथा सुश्री झाओ शीहुआ को तीन वर्ष दो महीने की जेल की सज़ा दी गई।

पूर्व में झेला गया उत्पीड़न

फालुन दाफा का अभ्यास शुरू करने से पहले सुश्री लियू अनेक गंभीर बीमारियों से पीड़ित थीं। उन्हें सतही गैस्ट्राइटिस, एट्रोफिक गैस्ट्राइटिस, पित्ताशय की सूजन, यकृत रोग, नेफ्राइटिस तथा स्त्रीरोग संबंधी समस्याएँ थीं। उनके पति को उनकी देखभाल, बच्चे और अपनी वृद्ध माँ की जिम्मेदारी निभाने के साथ-साथ ताज़ा टोफू की दुकान भी चलानी पड़ती थी। सीमित आय के कारण परिवार पर आर्थिक दबाव बहुत अधिक था।

सुश्री लियू ने अप्रैल 1997 में फालुन दाफा का अभ्यास शुरू किया। एक महीने से भी कम समय में उनकी सभी बीमारियाँ ठीक हो गईं। इसके बाद वे अपने पति के साथ टोफू बनाने के काम में हाथ बँटाने लगीं और परिवार की आर्थिक स्थिति भी सुधर गई।

जब जुलाई 1999 में चीनी कम्युनिस्ट शासन ने फालुन दाफा के विरुद्ध राष्ट्रव्यापी उत्पीड़न शुरू किया, तो सुश्री लियू जुलाई 2000 में अपने आस्था की स्वतंत्रता के अधिकार की अपील करने के लिए बीजिंग गईं। उन्हें तियानमेन चौक पर गिरफ्तार कर बीजिंग के चांगपिंग जिले के एक हिरासत1 केंद्र में ले जाया गया।

पुलिस ने उन्हें विद्युत डंडों (इलेक्ट्रिक बैटन) से झटके दिए और कहा कि यदि वे अपना घर का पता बता देंगी तो उन्हें तुरंत रिहा कर दिया जाएगा। पुलिस की बात पर विश्वास करके उन्होंने अपना पता बता दिया। लेकिन छह दिन बाद शुआंगचेंग जिला बीजिंग संपर्क कार्यालय के कर्मचारी उन्हें अपने कार्यालय ले गए, जहाँ उन्हें चार दिन तक रखा गया। इसके बाद उन्हें वापस हार्बिन ले जाकर शिनमिन स्ट्रीट ब्रेनवॉशिंग केंद्र में दस दिनों से अधिक समय तक बंद रखा गया। रिहाई से पहले उनसे 200 युआन भोजन खर्च और 1,000 युआन का जुर्माना भी वसूला गया।

4 फ़रवरी 2002 को जब वे घर पर थीं, तब स्थानीय समुदाय के सचिव चार अन्य लोगों के साथ उनके घर पहुँचे। उन्होंने कहा कि कुछ वरिष्ठ अधिकारी उनसे बात करना चाहते हैं। सुश्री लियू उनके साथ चली गईं, लेकिन उन्हें सीधे एक ब्रेनवॉशिंग केंद्र ले जाया गया।

वहाँ लगभग 20 पुरुष और महिला अभ्यासी बंद थे। सभी को एक ही मल-पात्र (चेंबर पॉट) साझा करने के लिए मजबूर किया गया और उन्हें सामान्य शौचालय का उपयोग करने की अनुमति नहीं थी। किसी के भागने से रोकने के लिए केंद्र का लोहे का मुख्य द्वार हमेशा बंद रखा जाता था।

23 दिनों तक बंद रखने के बाद सुश्री लियू से 500 युआन का जुर्माना लेकर उन्हें रिहा किया गया। इसके बाद भी स्थानीय पुलिस और समुदाय के कर्मचारी नियमित रूप से उनके घर जाकर उन्हें परेशान करते रहे, जिससे वे लगातार भारी मानसिक दबाव में रहीं।