(Minghui.org) मैं ग्रामीण क्षेत्र से हूँ। मेरा अतीत बहुत दुखद रहा है और मैं उसके बारे में बात करना पसंद नहीं करती। कम उम्र में मेरा विवाह हुआ, लेकिन वैवाहिक जीवन अत्यंत कष्टदायक था। कई कारणों से मेरा जीवन अंधकार और पतन की ओर बढ़ता गया। अंततः मैंने अपने पति की हत्या कर दी, जिसके कारण मुझे दोषी ठहराया गया और कारावास की सज़ा मिली। लेकिन वही भयानक अनुभव अंततः मेरे लिए एक आशीर्वाद बन गया।

मेरे माता-पिता का देहांत हो चुका था, और जेल में बिताए उन लंबे वर्षों के दौरान मैं अपने छोटे बच्चे का पालन-पोषण नहीं कर सकी। मेरे कारण मेरे परिवार को भी बहुत कष्ट सहना पड़ा। मेरा शरीर कमजोर और बीमार हो गया था। अपनी स्वतंत्रता खो देना, अपने प्रियजनों की याद में तड़पना और निराशा में जीना मेरे लिए अत्यंत पीड़ादायक था। मैं केवल अपने आँसू पीकर असहनीय वेदना में जीवन बिताती रही। मैं अक्सर सोचती,

“जीने का क्या अर्थ है? मेरा जीवन इतना कठिन और दुखद क्यों है?”

सौभाग्य से मेरा फालुन दाफा से एक पूर्वनियत संबंध (भाग्य का संबंध) था। जेल में मेरी मुलाकात कई ऐसे अभ्यासियों से हुई जिन्हें अवैध रूप से बंदी बनाकर रखा गया था। उनकी दयालुता, ईमानदारी, सत्यनिष्ठा, करुणा और दूसरों की सहायता करने की भावना सहित अनेक श्रेष्ठ गुणों ने मेरे टूटे हुए हृदय को गहराई से स्पर्श किया।

उनमें से एक अभ्यासी, जो पहले एक पुलिस अधिकारी रह चुकी थीं, ने मुझ पर विशेष प्रभाव डाला। उन्होंने मुझे फालुन दाफा के बारे में और अधिक बताने के लिए स्वेच्छा से अपनी रिहाई एक दिन के लिए टाल दी। जेल से रिहा होने से एक रात पहले उन्होंने मुझे दाफा के पाँचों अभ्यास सिखाए।

जब मैंने अभ्यासियों से पूछा, “आप सब इतने अच्छे और इतने दयालु क्यों हैं?”

तो उन्होंने उत्तर दिया, “क्योंकि हमारे पास हमारे मास्टरजी हैं।”

मैंने मन ही मन सोचा, “क्या लोगों को सत्य-करुणा-सहनशीलता का अभ्यास करना सिखाना गलत है? यदि मुझे पहले ही कोई ऐसा गुरु मिला होता, जिसने मुझे ये सिद्धांत सिखाए होते, तो मैं इतनी मूर्खता न करती कि किसी की जान ले लेती और अपने लिए इतना भारी कर्म उत्पन्न कर लेती।”

यह विचार मन में आने के बाद, जब मैं अपने मुकदमे के निर्णय की प्रतीक्षा कर रही थी, तब मैंने एक सपना देखा। सपने में मुझे बताया गया कि अब मेरे भाग्य का निर्णय स्थानीय न्यायिक अधिकारियों द्वारा नहीं किया जाएगा।

कुछ ही समय बाद मुझे पता चला कि मुझे मृत्युदंड देने के बजाय बीस से अधिक वर्षों के कारावास की सज़ा सुनाई जाएगी।

समय के साथ अभ्यासियों के शब्दों और आचरण ने धीरे-धीरे मेरे कठोर हृदय को बदल दिया। फा के सिद्धांतों ने मेरे भीतर आशा का संचार किया। फालुन दाफा ने मेरी अंतरात्मा को जागृत किया, मुझे अनेक सार्वभौमिक सिद्धांतों की समझ दी और जीवन तथा संसार के प्रति मेरा दृष्टिकोण पूरी तरह बदल दिया। दाफा ने मुझे नया जीवन दिया, मेरे शरीर और मन—दोनों को लाभ पहुँचाया और मुझे प्रकाश के मार्ग पर चलने की दिशा दिखाई।

अब वह लंबी अंधेरी रात समाप्त हो चुकी है। मैं जेल से रिहा हो चुकी हूँ और अपनी स्वतंत्रता वापस पा चुकी हूँ। मेरी मुलाकात और भी अनेक अभ्यासियों से हुई है, और मैं स्वयं को अत्यंत सौभाग्यशाली मानती हूँ।

कृतज्ञता और श्रद्धा से भरे हृदय के साथ मैं पूरी दुनिया से कहना चाहती हूँ: “फालुन दाफा अच्छा है, और सत्य-करुणा-सहनशीलता अच्छी है।”

मेरा विश्वास है कि जो भी दाफा की मुख्य पुस्तक ज़ुआन फालुन पढ़ेगा, वह समझ जाएगा कि मैं जो कह रही हूँ वह सत्य है। मेरी हार्दिक आशा है कि आपको भी मेरी तरह यह सौभाग्य प्राप्त हो और आप भी फालुन दाफा का अभ्यास करें।