(Minghui.org) सिंगापुर फालुन दाफा एसोसिएशन ने 6 से 14 जून, 2026 तक नौ दिवसीय मुफ्त फालुन दाफा कक्षा आयोजित की।

कई प्रतिभागियों ने फालुन दाफा (जिसे फालुन गोंग के नाम से भी जाना जाता है) का अभ्यास किया था जब वे युवा थे, लेकिन 10 से अधिक वर्षों से रुक गए थे। जून कक्षा के दौरान, उन्हें फालुन दाफा के साथ फिर से जुड़ने का अवसर मिला। इनमें से कुछ उपस्थित चीनी लोग थे जो सिंगापुर में रहते थे और काम करते थे, और कुछ स्थानीय सिंगापुरी थे।

प्रतिभागी 6 से 14 जून तक आयोजित नौ दिवसीय कक्षा के दौरान मास्टर ली के व्याख्यान के वीडियो देखते हैं (Minghui.org)

नौ दिवसीय फालुन गोंग व्यायाम कार्यशाला में भाग लेने वाले अभ्यास सीखते हैं (Minghui.org)

सत्य, करुणा और सहनशीलता की ओर आकर्षित

सिंगापुर में रहने वाली विवियन एक कंपनी के लेखा विभाग में कार्य करती हैं। उन्होंने बताया कि लगभग 20 वर्ष पहले उनके बॉस ने उन्हें फालुन दाफा के बारे में बताया था। उसी समय वे दाफा के सत्य, करुणा और सहनशीलता के सिद्धांतों से गहराई से प्रभावित हुईं।

उनका कहना है कि आज के समय में सच्चे और ईमानदार लोग मिलना कठिन है। बहुत-से लोग दोहरा व्यवहार करते हैं और अपने वास्तविक स्वरूप को छिपाकर रखते हैं।

विवियन ने बताया कि दाफा के तीनों सिद्धांतों में से सहनशीलता का पालन करना उनके लिए सबसे कठिन है, क्योंकि कार्यस्थल पर कभी-कभी उन्हें क्रोध आ जाता है। वे फालुन दाफा का अभ्यास करके अपने चरित्र और स्वास्थ्य दोनों में सुधार लाना चाहती हैं।

विवियन ने कहा कि उन्हें मास्टरजी की शिक्षाओं पर विश्वास है, और वे अपने मित्रों को भी फालुन दाफा के बारे में बताने की योजना बना रही हैं।

सिंगापुर में फालुन दाफा देखकर माँ-बेटी हुईं भावुक

हुई अपनी माँ के साथ इस नौ-दिवसीय कक्षा में शामिल हुईं। कई वर्ष पहले जब वे चीन में रहती थीं, तब वे अपनी माँ के साथ दाफा के अभ्यास करती थीं। उस समय अनेक लोग उनके घर आकर अभ्यास करते थे।

लेकिन बाद में, जब सीसीपी द्वारा टेलीविज़न पर फालुन दाफा के विरुद्ध झूठे और बदनाम करने वाले प्रचार प्रसारित किए जाने लगे, तो धीरे-धीरे लोगों ने आना बंद कर दिया।

हुई ने बताया कि हाल ही में जब वे एक पार्क में टहल रही थीं, तब उन्होंने अचानक फालुन दाफा के परिचित अभ्यास-संगीत को सुना। उन्होंने देखा कि कुछ लोग ध्यान कर रहे थे, इसलिए वे भी उनके साथ शामिल हो गईं।

उस परिचित संगीत को सुनकर वे भावुक हो गईं। उन्हें इंटरनेट पर पढ़ी हुई वे खबरें याद आ गईं, जिनमें बताया गया था कि चीन में फालुन दाफा अभ्यासियों का क्रूरतापूर्वक दमन किया जाता है और उन्हें प्रताड़ित किया जाता है।

हुई ने कहा कि जब वे प्राथमिक विद्यालय में पढ़ती थीं, तब उन्हें दृढ़ विश्वास था कि दिव्य शक्तियाँ वास्तव में अस्तित्व रखती हैं। दाफा से पुनः जुड़ने के बाद अब वे अपनी माँ के साथ स्थानीय अभ्यास स्थल पर नियमित रूप से अभ्यास करती हैं।

हुई की माँ ने बताया कि उनके परिवार ने सबसे पहले फालुन दाफा के बारे में तब जाना, जब उनके भाई (हुई के मामा), जो शहर में पढ़ाई कर रहे थे, उन्हें ज़ुआन फालुन की एक प्रति देकर गए।

जैसे-जैसे वे पुस्तक पढ़ती गईं, उसमें रुचि और बढ़ती गई। उन्हें लगा कि फालुन दाफा अत्यंत उत्कृष्ट है, और उन्होंने इसका अभ्यास शुरू कर दिया। बाद में जब चीन के टेलीविज़न चैनलों पर फालुन दाफा के विरुद्ध बदनाम करने वाले कार्यक्रम प्रसारित होने लगे, तो बहुत-से लोगों ने अभ्यास करना छोड़ दिया।

हुई की माँ अन्य अभ्यासियों से मिलने गईं और उनसे पूछा कि वे उनके घर आकर अभ्यास और फ़ा अध्ययन क्यों नहीं कर रहे हैं। कई लोगों ने कहा कि उन्होंने अभ्यास छोड़ दिया है, जबकि कुछ ने यह भी बताया कि भय के कारण उन्होंने ज़ुआन फालुन की अपनी प्रति तक जला दी।

अपने वास्तविक मूल की ओर लौटने की आशा

सुश्री मा भी 20 वर्ष से अधिक समय पहले फालुन दाफा से परिचित हुई थीं, क्योंकि उनके माता-पिता इसका अभ्यास करते थे। लेकिन उस समय वे छोटी थीं, इसलिए उन्होंने स्वयं अभ्यास करने में रुचि नहीं दिखाई।

हाल ही में एक दिन बस में यात्रा करते समय उनकी नज़र सिंगापुर फालुन दाफा एसोसिएशन के एक सूचना-पट्ट पर पड़ी। उसी क्षण उनके मन में फिर से साधना करने की तीव्र इच्छा जागी। बाद में उन्होंने मिंगहुई वेबसाइट पर नौ-दिवसीय कक्षा की जानकारी देखी।

मार्च में व्यस्त होने के कारण वे कक्षा में शामिल नहीं हो सकीं। लेकिन जून में विद्यालय की छुट्टियों के दौरान उन्हें समय मिला और वे अपने बच्चे के साथ इस कक्षा में भाग लेने आईं।

सुश्री मा ने बताया कि कक्षा शुरू होने से ठीक पहले उन्हें अचानक 38 डिग्री सेल्सियस बुखार हो गया था। फिर भी उन्होंने आने का निर्णय लिया।

उन्होंने कहा कि कक्षा में भाग लेने के बाद उन्हें काफी अच्छा महसूस हुआ। उन्हें लगता है कि उनका फालुन दाफा से एक विशेष संबंध है, और वे भविष्य में भी इसका अभ्यास जारी रखना चाहती हैं।

भारत की महिला चीनी भाषा सीखना चाहती हैं

भारत की निक्की ने बताया कि वे हमेशा से चीनी लोगों और चीनी भाषा की ओर आकर्षित रही हैं। हँसते हुए उन्होंने कहा, "शायद पिछले जन्म में मैं चीनी रही हूँ ।" उन्होंने कहा कि इस नौ-दिवसीय कक्षा में भाग लेने का अवसर मिलने के लिए वे बहुत आभारी हैं। उन्होंने उन अनुभवी अभ्यासियों के प्रति भी अपनी कृतज्ञता व्यक्त की, जिन्होंने पूरी कक्षा के दौरान स्वेच्छा से सेवा की।

अन्य प्रतिभागियों की तरह उन्हें भी ऐसा लगा मानो उनका इस कक्षा में आना पूर्वनियोजित था। निक्की ने आशा व्यक्त की कि इस नौ-दिवसीय कक्षा में भाग लेने वाले सभी लोग अपनी-अपनी कठिनाइयों को पार कर सकेंगे, यहाँ आने के अपने उद्देश्य को पूरा करेंगे और आगे भी फालुन दाफा की साधना जारी रखेंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि वे चीनी भाषा सीखना चाहती हैं, ताकि मास्टर ली होंगज़ी के मूल व्याख्यान सीधे चीनी भाषा में सुन सकें और फालुन दाफा की मुख्य पुस्तक ज़ुआन फालुन को उसके मूल चीनी रूप में पढ़ सकें। नौ-दिवसीय फालुन दाफा कक्षा लगातार नौ दिनों तक प्रतिदिन शाम 7:15 बजे से 9:45 बजे तक आयोजित की जाती है। अगला सत्र शनिवार, 5 सितंबर 2026 से रविवार, 13 सितंबर 2026 तक आयोजित होगा। इच्छुक व्यक्ति ईमेल register@falundafa.org.sg पर पंजीकरण कर सकते हैं।