(Minghui.org) मैंने 1997 में फालुन दाफा का अभ्यास शुरू किया। मास्टरजी की करुणामयी सुरक्षा और साधना के दौरान निरंतर प्राप्त हुई समझ के कारण, मैंने धीरे-धीरे वास्तव में स्वयं की साधना करना सीखा, एक-एक करके अपनी आसक्तियों को छोड़ना सीखा, और साथ ही मास्टरजी की सहायता करते हुए लोगों को बचाने के दौरान फ़ा की महान शक्ति का अनुभव किया। मैं अपनी साधना-यात्रा की कुछ संक्षिप्त घटनाएँ साझा करना चाहती हूँ, ताकि मास्टरजी के करुणामय उद्धार के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त कर सकूँ।

अविस्मरणीय क्षण

कई वर्ष पहले मैं लोगों को सच्चाई बताने के लिए एक बाज़ार गई थी। लंबे समय तक बात करने के कारण मेरा गला सूख गया था। घर लौटते समय मैंने सड़क किनारे एक वृद्ध व्यक्ति को आराम करते हुए देखा। अपनी इलेक्ट्रिक साइकिल से गुजरते हुए मैंने उन पर एक नज़र डाली। मैं कुछ क्षण के लिए झिझकी, फिर धीमा हुई और लगभग दस मीटर आगे जाकर रुक गई। मैंने सोचा, शायद यह वही व्यक्ति है जिससे मिलने की व्यवस्था मास्टरजी ने मेरे लिए की है। मैं अपनी साइकिल घुमाकर वापस उनके पास गई।

मैं उनके पास बैठ गई और उनसे फालुन दाफा तथा दमन के बारे में बात की। उन्होंने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से अपना संबंध समाप्त करने पर सहमति व्यक्त की। तभी मैंने देखा कि उनकी आँखें अचानक चमक उठीं। यह दृश्य मुझे भीतर तक छू गया। शायद यह उस जीवन के पुनर्जीवित होने का क्षण था जिसे बचा लिया गया था। उनके पीछे वे असंख्य जीव भी थे जिनका वे प्रतिनिधित्व करते थे, और वे भी साथ ही बच गए।

मैं फिर अपनी साइकिल पर बैठकर आगे बढी और मन ही मन कहा, “मास्टरजी, आज मुझसे लगभग एक बड़ी गलती हो गई थी। एक ही विचार के कारण एक पूर्वनियोजित व्यक्ति दाफा द्वारा बचाए जाने का अवसर खो सकता था।”

वृद्ध व्यक्ति की आँखों में आई वह चमक आज भी मेरी स्मृति में ताज़ा है। मैं सभी जीवों की ओर से मास्टरजी को धन्यवाद देती  हूँ।

कार दुर्घटना में मास्टरजी ने मेरी जान बचाई

2013 में, चीनी नववर्ष की छुट्टियों से एक दिन पहले, मैं अपनी साइकिल से बैनर लगाने गई थी। घर लौटते समय मेरे बैग में एक बैनर अभी भी बचा हुआ था। जब मैं अपनी साइकिल को एक ढलान पर चढ़ाते हुए आगे बढ़ रही थी, तभी पीछे खड़ी एक कार अचानक रिवर्स हुई और मुझे टक्कर मार दी। मैं और मेरी साइकिल दोनों वाहन के नीचे आ गए।

मैंने तुरंत पुकारा, “मास्टरजी, मुझे बचाइए!”

कार उसी क्षण रुक गई। स्थिति अत्यंत खतरनाक थी—कार का पहिया मेरे सिर से केवल कुछ इंच की दूरी पर था। जब मैं कार के नीचे से निकलकर सड़क पर बैठी, तो देखा कि मेरी साइकिल अभी भी वाहन के नीचे फँसी हुई थी और घिसटती जा रही थी। उस दुर्घटना में मास्टरजी ने मेरी जान बचाई।

मुझे अस्पताल ले जाया गया। जाँच में पता चला कि मेरी पहली कमर की हड्डी (लम्बर वर्टिब्रा) में दबाव के कारण फ्रैक्चर था और चौथी कमर की हड्डी में भी फ्रैक्चर था। उस समय मैं यह नहीं समझ पाई कि यह एक झूठा प्रकट रूप था जिसे पूरी तरह नकार देना चाहिए था।

डॉक्टर ने कहा कि मुझे अस्पताल में भर्ती होना पड़ेगा और छह महीने तक बिस्तर पर रहना होगा। लेकिन मैंने न तो एक भी गोली ली और न ही एक दिन के लिए अस्पताल में भर्ती हुई। प्रतिदिन फ़ा सुनने और अभ्यास करने के द्वारा, केवल 73 दिनों बाद मैं पहाड़ पर स्टूल उठाकर ले जाने और फलदार पेड़ों की छँटाई करने में सक्षम हो गई। यह दाफा की चमत्कारिक शक्ति का प्रमाण था।

कार चालक बार-बार कहता रहा कि दुर्घटना की पूरी जिम्मेदारी उसकी है, लेकिन मैंने उससे किसी प्रकार का मुआवज़ा नहीं माँगा। मैंने उसे दाफा के बारे में बताया, और वह समझ गया कि मैं उससे कोई भुगतान इसलिए नहीं चाहती  क्योंकि मैं फालुन दाफा का अभ्यास करती  हूँ।

मैं एक ग्रामीण क्षेत्र में रहती हूँ, जहाँ सर्दियों में गर्मी पाने और खाना पकाने के लिए जलावन की लकड़ियाँ ढोनी पड़ती हैं। दुर्घटना के समय मेरा दूसरा बच्चा अभी किंडरगार्टन में पढ़ता था। शारीरिक पीड़ा के बावजूद मुझे बच्चों की देखभाल करनी पड़ती थी और भोजन भी बनाना पड़ता था।

मेरे पति सुबह बहुत जल्दी काम पर निकल जाते और देर शाम घर लौटते थे। वे घर के कामों में कोई सहायता नहीं करते थे, इसलिए सारा बोझ मुझे अकेले ही उठाना पड़ता था। मेरे मन में शिकायत और नाराज़गी उत्पन्न होने लगी, और मुझे समाज की निष्ठुरता का गहरा अनुभव हुआ। मेरे पति मुझे समझ नहीं पाते थे और अक्सर मुझसे बहस करते थे, विशेषकर दुर्घटना के लिए मुआवज़ा न लेने के विषय में।

मैंने उनसे कहा, “यदि मैं एक साधारण व्यक्ति की तरह व्यवहार करती और पैसे के लिए इस दुर्घटना का लाभ उठाने की सोचती, तो शायद मेरी जान ही न बचती।” लेकिन वे यह समझ ही नहीं पाए कि मैंने मुआवज़े की माँग क्यों नहीं की।

पति के साथ इन मतभेदों के बावजूद जीवन चलता रहा। उस अवधि में शारीरिक दर्द, पारिवारिक तनाव, घर के काम, पहाड़ी क्षेत्र में खेती-बाड़ी का कार्य और बच्चे की देखभाल—इन सबका बोझ मेरे ऊपर था। मैं शारीरिक और मानसिक रूप से अत्यंत थकी हुई और दबावग्रस्त महसूस करती थी।

यह बिल्कुल वैसा ही था जैसा मास्टरजी ने "संकल्प को दृढ़ बनाना" (होंग यिन) में कहा है:

“...विपत्तियाँ प्रचुर मात्रा में एक साथ बरसती हैं,यह देखने के लिए कि क्या तुम उन्हें पार कर सकते हो।...”

सौभाग्य से, मेरे हृदय में फ़ा था। दाफा के सिद्धांतों के मार्गदर्शन और मास्टरजी की करुणामयी रक्षा के कारण मैं उस कठिन समय से निकल पाई। फ़ा ने मुझे शक्ति दी, मेरा मार्गदर्शन किया, और हर कठिनाई में आगे बढ़ने का साहस प्रदान किया।

फ़ा को कंठस्थ करने से मुझे अधिक परिश्रमपूर्वक साधना करने में सहायता मिली

कार दुर्घटना के बाद, जब मैं पारिवारिक संघर्षों से जूझ रही थी, तब मैंने फ़ा को कंठस्थ करना शुरू किया। मैंने जुआन फालुन से शुरुआत की। इस प्रक्रिया में मैंने एक के बाद एक अनेक बाधाओं को पार किया और कई मानवीय आसक्तियों को छोड़ा, जिनका मैं यहाँ विस्तार से वर्णन नहीं करूँगी। मैंने पुस्तक को पहले भाग-दर-भाग, फिर व्याख्यान-दर-व्याख्यान याद किया, यहाँ तक कि मैं प्रत्येक व्याख्यान को धाराप्रवाह सुना सकती थी। बाद में मैंने एसेंशीअल्स फॉर फरदर एडवांसमेंट, होन्ग यिन  तथा अन्य शिक्षाओं को भी कंठस्थ किया।

मैं स्वयं को याद दिलाती थी कि फ़ा को याद करना कोई साधारण कार्य नहीं है; इसका उद्देश्य मेरी साधना का मार्गदर्शन करना था। धीरे-धीरे मैंने फ़ा के सिद्धांतों के आधार पर पारिवारिक संबंधों और संघर्षों को एक सच्चे साधक की दृष्टि से देखना सीखा।

जब भी कोई विवाद उत्पन्न होता, मैं सबसे पहले अपनी गलती स्वीकार करने का प्रयास करती। शांत होने के बाद मैं भीतर झाँककर अपनी कमियों को खोजती। कभी मुझे शिकायत, प्रतिस्पर्धा की भावना या स्वयं को सही साबित करने की इच्छा दिखाई देती। संक्षेप में, जब भी कोई संघर्ष सामने आता, मास्टरजी की शिक्षाएँ तुरंत मेरे मन में उभर आतीं। मैंने प्रत्येक संघर्ष को अपने चरित्र और साधना स्तर को ऊँचा उठाने का एक मूल्यवान अवसर माना, और धीरे-धीरे वास्तव में स्वयं की साधना करना सीख लिया।

अब परिवार में संघर्ष बहुत कम हो गए हैं। मेरे पति ने भी दाफा की असाधारण शक्ति और सुंदरता को देखकर अभ्यास शुरू कर दिया है। उन्होंने मेरे भीतर आए सकारात्मक परिवर्तनों को प्रत्यक्ष रूप से देखा। मैं मार्ग में निरंतर संरक्षण और मार्गदर्शन के लिए मास्टरजी की आभारी हूँ। मैं अपने पति का भी धन्यवाद करती हूँ, जिन्होंने इस साधना-यात्रा में मेरा समर्थन किया।

गाँव के अधिकारियों ने मुझे एक उत्कृष्ट व्यक्ति कहा

मेरे बगीचे में लगे 20 से अधिक फलदार पेड़ चिंगमिंग फेस्टिवल  के दौरान पास की कब्रों पर आने वाले लोगों द्वारा लगाई गई आग में जल गए। वे पेड़ अपने सर्वोत्तम फल देने वाले वर्षों में थे। जब मैंने उन सेब के पेड़ों को देखा, जिनके तने 3–4 इंच मोटे थे और जो पूरी तरह जल चुके थे, तो मेरा हृदय टूट गया। मैंने उन पेड़ों की देखभाल लगभग अपने बच्चों की तरह की थी; यह बिल्कुल आसान नहीं था।

शांत होकर भीतर देखने पर मुझे समझ आया कि एक साधक के लिए कोई भी घटना संयोगवश नहीं होती। मैंने पाया कि मेरे भीतर बगीचे और व्यक्तिगत लाभ के प्रति आसक्ति थी। मैंने अनुमान लगाया कि मेरा नुकसान 30,000 युआन से अधिक था।

फिर भी मैंने आग लगने की घटना के लिए एक पैसा भी मुआवज़ा नहीं माँगा। गाँव के अधिकारियों ने ग्रामीणों के सामने मुझे अंगूठा दिखाकर सराहा और कहा कि मैं एक उत्कृष्ट व्यक्ति हूँ। पूरे गाँव को पता था कि मैं और मेरे पति फालुन दाफा का अभ्यास करते हैं। हम दाफा से लाभान्वित हुए हैं, और इस प्रकार का आचरण केवल इसलिए कर सके क्योंकि हम दाफा में साधना करते हैं।

वासना की परीक्षा को पार करने के बारे में मेरी समझ

एक साथी अभ्यासी ने मुझसे वासना की परीक्षा को पार करने के बारे में लिखने के लिए कहा। प्रारंभ में मैं इस विषय पर चर्चा नहीं करना चाहती थी, लेकिन सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद मैंने अपनी कुछ व्यक्तिगत समझ साझा करने का निर्णय लिया। मेरी समझ सही है या नहीं, यह केवल मेरा व्यक्तिगत दृष्टिकोण है।

हर साधक को वासना से संबंधित बाधाओं और हस्तक्षेपों का सामना करना पड़ता है, और मैं भी इसका अपवाद नहीं हूँ। फ़ा की दृष्टि से, ऐसा हस्तक्षेप तब होता है जब किसी का आयामी क्षेत्र शुद्ध नहीं होता और वासनापूर्ण दुष्ट तत्वों तथा भ्रष्ट आत्माओं को वहाँ टिके रहने का स्थान मिल जाता है।

मेरी समझ में, केवल प्रत्येक विचार को सही करते हुए, लगातार सद्विचार भेजते हुए, अपने आयामी क्षेत्र को शुद्ध करते हुए तथा नकारात्मक तत्वों को हटाते हुए ही ऐसे हस्तक्षेप कम किए जा सकते हैं। जैसे-जैसे व्यक्ति का आयामी क्षेत्र अधिक शुद्ध होता जाता है, वैसे-वैसे यह हस्तक्षेप स्वाभाविक रूप से कमजोर पड़ता जाता है।

अब वे बुरे तत्व हट चुके हैं और मुझे प्रभावित नहीं कर पाते। मैं स्वयं को याद दिलाती हूँ कि यदि कोई व्यक्ति दिव्य अवस्था की ओर साधना करना चाहता है, फिर भी निम्न स्तर की इच्छाओं को नहीं छोड़ सकता, तो वह आगे कैसे बढ़ सकता है? मेरी समझ में, साधकों को लगातार अपने विचारों और व्यवहार को उच्च मानकों के अनुसार परिष्कृत करना चाहिए।

मास्टरजी देख रहे हैं, देवता देख रहे हैं, और साधना के मार्ग पर व्यक्ति के प्रत्येक विचार और कर्म का महत्व होता है। इसलिए साधकों को स्वयं के प्रति कठोर और अपनी साधना के प्रति गंभीर रहना चाहिए।

निष्कर्ष

मैं अपनी साधना-यात्रा के दौरान मास्टरजी की करुणामयी सुरक्षा और मार्गदर्शन के लिए हृदय से अत्यंत कृतज्ञ हूँ। मास्टरजी की दयालु देखभाल और फ़ा के मार्गदर्शन के बिना मैं आज जहाँ हूँ वहाँ तक नहीं पहुँच पाती।

आगे से मैं मास्टरजी और फ़ा में अपने विश्वास पर दृढ़ रहूँगी, हर परिस्थिति में स्वयं को फ़ा के मानकों के अनुसार परखूँगी, अपनी साधना में और अधिक कठोर एवं परिश्रमी बनूँगी, अपने दायित्व को पूरा करूँगी, तथा साधना-पथ के शेष मार्ग पर धर्मपूर्वक और दृढ़ता से चलूँगी, ताकि मास्टरजी की करुणा और कृपा का ऋण कुछ हद तक चुका सकूँ।

यह मेरी वर्तमान साधना-समझ है। यदि इसमें कोई अनुचित या फ़ा के अनुरूप न होने वाली बात हो, तो कृपया साथी अभ्यासी करुणापूर्वक उसे इंगित करें।