(Minghui.org) प्राचीन काल से लेकर आज तक मानव समाज ने समय-समय पर बाढ़, आग, भूकंप और ज्वालामुखी जैसी प्राकृतिक आपदाओं का सामना किया है।
हमारे पूर्वजों का मानना था कि ऐसी घटनाओं के पीछे कोई कारण होता है। उदाहरण के लिए, समाज के नैतिक पतन को बाइबल में वर्णित महाप्रलय (नूह की कथा) या सदोम और अमोरा के विनाश से जोड़ा जाता है।
मंदिरों का विनाश
फेंग यूसियांग चीन गणराज्य काल के एक सैन्य सरदार (वॉरलॉर्ड) थे और 1928 से 1930 तक चीन के उप-प्रधानमंत्री रहे।
1927 में उन्होंने हेनान प्रांत में बौद्ध धर्म को नष्ट करने का अभियान शुरू किया। इस अभियान के दौरान 400 से अधिक मंदिरों को लूटा गया और जला दिया गया। भिक्षुओं और भिक्षुणियों को जबरन निकाल दिया गया, और चीन में बौद्ध धर्म के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले डाक्सिनगुओ टेम्पल को बाज़ार में बदल दिया गया।
1928 में फेंग के अधीनस्थ शी यूसन ने शाओलिन टेम्पल में आग लगवा दी, जो 40 दिनों से अधिक समय तक जलती रही। अन्य प्रांतों के अधिकारियों ने भी फेंग और शी का अनुसरण किया, जिसके परिणामस्वरूप उत्तरी चीन में बौद्ध धर्म लगभग समाप्त होने की स्थिति में पहुँच गया।
चीनी गृहयुद्ध के दौरान फेंग ने प्रारंभ में चिआंग कई-शेक का समर्थन किया, लेकिन बाद में 1948 में संयुक्त राज्य अमेरिका चले गए। उसी वर्ष काला सागर में एक सोवियत जहाज़ में आग लगने से फेंग और उनकी पुत्री की मृत्यु हो गई।
कुछ लोगों का मानना था कि उनकी हत्या की गई, जबकि अन्य लोगों ने इसे बौद्ध धर्म के विनाश का परिणाम माना। उनका विश्वास था कि मंदिरों को नष्ट करने के आदेश देकर फेंग ने गंभीर कर्म किए थे जिनके परिणामों से बचा नहीं जा सकता था।
आधुनिक समय की त्रासदियाँ
1949 में सत्ता में आने के बाद चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) ने चीन की पारंपरिक संस्कृति और धार्मिक आस्थाओं को व्यवस्थित रूप से नष्ट करने के लिए अनेक अभियान चलाए। इनमें कल्चरल रेवोलुशन से लेकर 1999 से आज तक जारी फालुन गोंग का दमन शामिल है।
हेबेई प्रांत के छिंगलोंग काउंटी के अधिकारी डाँग शौमिन ने फालुन गोंग के दमन में सक्रिय भूमिका निभाई और अनेक अभ्यासियों की गिरफ्तारी में भाग लिया। इसके कारण कई परिवार बिखर गए और अनेक लोगों की नौकरियाँ चली गईं।
जनवरी 2008 में जब डोंग राजमार्ग पर वाहन चला रहे थे, तब उनकी कार लकड़ी से भरे एक ट्रक से टकरा गई। दुर्घटना के बाद उनकी कार में आग लग गई और उनकी घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार उनका शरीर इतनी बुरी तरह जल गया था कि अवशेषों को फावड़े से उठाकर ताबूत में रखना पड़ा।
निष्कर्ष
1992 में सार्वजनिक रूप से परिचित कराए जाने के बाद से फालुन दाफा ने विश्वभर में लगभग 10 करोड़ लोगों के मन और शरीर को लाभ पहुँचाया है। इसके अभ्यासी परिवारों में सौहार्द, कार्यस्थलों पर ईमानदारी और समाज में स्थिरता लाने का प्रयास करते हैं।
इस दृष्टिकोण के अनुसार, आस्था की स्वतंत्रता का दमन और उत्पीड़न को विदेशों तक फैलाना न केवल चीन बल्कि पूरे विश्व के लिए गंभीर परिणाम ला सकता है।
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