(Minghui.org) मैं 59 वर्षीय महिला दाफा अभ्यासी हूँ और 20 वर्षों से साधना कर रही हूँ। मास्टर ली ने न केवल मुझे अच्छा स्वास्थ्य दिया बल्कि एक सुखी परिवार भी प्रदान किया। मैं सत्य-करुणा-सहनशीलता के सिद्धांतों का पालन करती हूँ और अपने नैतिक मूल्यों को निरंतर ऊँचा उठाती रहती हूँ। अपने बड़े परिवार में, मैं किसी से भी किसी बात पर झगड़ा नहीं करती और दूसरों की मदद करने का भरसक प्रयास करती हूँ। मेरे प्रभाव से, हमारा बड़ा परिवार पहले से कहीं अधिक खुशहाल है।
सहनशीलता से द्वेष दूर हो जाता है
दाफा सीखने से पहले, मेरे ननदोई ने हमसे पैसे उधार लिए थे और उन्हें लौटाने का वादा किया था। कुछ समय बाद, मुझे मक्के के बीज खरीदने थे लेकिन मेरे पास पर्याप्त पैसे नहीं थे, इसलिए मैंने अपने ननदोई को फोन किया। उन्होंने मुझे अपनी पत्नी से पैसे लेने के लिए कहा।
मैं अपनी ननद से मिलने गई थी, जब मैंने उन्हें बताया कि मैं वहाँ क्यों आई हूँ तो वे बहुत नाराज़ हुईं। उन्होंने मुझे कुछ पैसे दिए। मैंने 250 युआन गिने, जो चीनी लोककथाओं में अशुभ संख्या मानी जाती है। मुझे अच्छा नहीं लगा और मैंने उनसे थोड़े और पैसे मांगे। उन्होंने जवाब दिया, "नहीं, एक पैसा भी ज़्यादा नहीं!"
जब मैंने देखा कि वह टस से मस नहीं हो रही है, तो मैंने उसका दिया हुआ सामान लिया और घर चली गई। जब मैंने अपने पति को यह बात बताई, तो वह क्रोधित हो गये और अपने बहन और बहनोई को खूब खरी-खोटी सुनाई।
कुछ दिनों बाद, मेरी ननद ने गाँव में यह अफवाह फैला दी कि उसने मुझे 350 युआन दिए हैं, जो सच नहीं था। इसलिए मैं उससे मिलने गई ताकि मामला सुलझा सकूँ। इससे पहले कि मैं कुछ कह पाती, उसने मुझे डांटना शुरू कर दिया और मुझे मारने की कोशिश की। जब पड़ोसियों ने शोर सुना, तो वे सब इकट्ठा होने लगे। आखिरकार एक रिश्तेदार आया और मुझे घर ले गया। उसके बाद, जितना मैं इस बारे में सोचती गई, उतना ही मुझे गुस्सा आता गया, और मैंने उनसे कोई वास्ता न रखने का फैसला कर लिया।
अगले साल मैंने दाफा सीखा और मुझे बहुत पछतावा हुआ। अगर मैंने यश और धन को सहजता से लिया होता, तो इतना संघर्ष न होता। मेरे सास-ससुर ने इसे सुलझाने की कोशिश की। चीनी नव वर्ष की पूर्व संध्या पर हम सब उनके घर गए। मैंने अपने ननद और ननदोई के आते ही उनका गर्मजोशी से स्वागत किया, लेकिन उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और मुझे अनदेखा कर दिया। मैंने इसे व्यक्तिगत रूप से न लेने की कोशिश की, यह सोचकर कि एक अभ्यासी होने के नाते मुझे सहनशील होना चाहिए। मेरे सास-ससुर ने उनका व्यवहार देखा और उन्हें लगा कि मेरे साथ अन्याय हुआ है।
बाद में मेरे सास-ससुर ने हमारे रिश्तेदारों से कहा, "मेरी बहू को सही तरीके से व्यवहार करना आता है। अगर वह फालुन दाफा में न होती तो ऐसी नहीं होती।"
मेरे ननद के बेटे की शादी के समय, मैंने शादी से लगभग दो सप्ताह पहले उन्हें पैसों का उपहार दिया। उन्होंने उपहार तो स्वीकार कर लिया, लेकिन शादी की सुबह 8 बजे तक हमें आमंत्रित नहीं किया। न तो मेरे पति और न ही मेरा बेटा जाना चाहते थे। मैंने उनसे कहा कि वे छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा न करें और इस मामले को यहीं खत्म कर दें।
मेरे प्रभाव के कारण, मेरी ननद में धीरे-धीरे बदलाव आया और हमारे बीच के मतभेद सुलझ गए।
जब मैं दूसरों को प्राथमिकता देती हूँ, तो मेरे पति में सकारात्मक बदलाव आने लगते हैं
फालुन दाफा का अभ्यास करने के बाद, मैंने दूसरों की ज़रूरतों को प्राथमिकता दी। मैं अपने सास-ससुर का आदर करती थी और अपने पति के प्रति दयालु थी। उनके माता-पिता को पैसे और भोजन देने के अलावा, हम हमेशा उनकी मदद करने की कोशिश करते थे। हालाँकि वे अक्सर मना कर देते थे, फिर भी वे हमारी इस नेक भावना की सराहना करते थे।
मेरे पति बचपन से ही दिव्यांग थे। समय के साथ उनकी हालत बिगड़ती गई, यहाँ तक कि वे पानी की बाल्टी भी नहीं उठा पाते थे। मैंने उनसे कहा कि वे घर पर रहें और चिंता न करें, मैं सब कुछ संभाल लूँगी और कमा लूँगी, और वे घर पर रहकर खाना बना लें। इसलिए मैंने सारा काम किया और कभी शिकायत नहीं की। उन्हें यह सुनकर बहुत अच्छा लगा।
मैंने उनसे कहा, “जब आप घर पर हैं, तो जुआन फालुन क्यों नहीं पढ़ते ? यह आपके लिए अच्छा होगा।” वे मान गए। मास्टरजी ने पढ़ते ही उनके शरीर को सही ढंग से समायोजित कर लिया। फिर उन्होंने स्वयं ही पाँचों अभ्यास सीखे। कुछ ही समय बाद, उन्होंने कहा कि उन्हें बहुत अच्छा लग रहा है।
जब वह एक रिश्तेदार के घर महजोंग खेलकर लौटे, तो उन्होंने शेखी बघारी कि उन्होंने 300 युआन जीते हैं। मैंने कहा, “अब तो तुम अभ्यासी बन गए हो। दूसरों से पैसे कैसे ले सकते हो? वैसे भी, वे सब रिश्तेदार हैं। तुम्हें पैसे लौटा देने चाहिए।” उन्होंने कहा कि कोई भी अपनी जीती हुई रकम वापस नहीं करता।
अगले दिन जब वह जागे तो हिल नहीं पा रहे थे। उन्होंने मदद के लिए मुझे पुकारा। मैंने कहा, “तुम्हें सद्विचार रखने होंगे। यह तुम्हारी परीक्षा है। अगर तुम सोचोगे कि तुम कर सकते हो, तो तुम हिल पाओगे। तुम्हें आत्मनिरीक्षण करना होगा। महजोंग खेलना और जुआ खेलना बुरा है।” उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ, इसलिए उन्होंने मास्टरजी की तस्वीर के सामने यह स्वीकार किया और महजोंग न खेलने का संकल्प लिया।
कुछ दिनों बाद वे चलने-फिरने लगे, लेकिन फिर भी उन्हें ठीक महसूस नहीं हो रहा था। हमारा बेटा उनके साथ अस्पताल गया, जहाँ पता चला कि उनकी कमर की डिस्क में गंभीर हर्निया हो गया है। मेरे बेटे ने मुझसे कहा, “पापा की डिस्क में हर्निया हो गया है। फालुन गोंग का अभ्यास करने के अलावा और कुछ नहीं किया जा सकता।” मेरे पति के कुछ समय तक अभ्यास करने के बाद, चमत्कारिक रूप से हर्निया ठीक हो गया और वे फिर से चलने-फिरने और काम करने में सक्षम हो गए। हमारे पूरे परिवार ने फालुन गोंग के चमत्कार को देखा है!
नवविवाहित जोड़े के लिए एक दाफा पुस्तिका अनमोल है
एक पड़ोसी का बेटा मेरे गृहनगर की एक लड़की से विवाह कर रहा था। उसकी बुआ ने मुझसे अनुरोध किया कि मैं उसके साथ जाकर दुल्हन को नकद उपहार देने में साथ दूँ। बुआ के पास पर्याप्त पैसे नहीं थे, इसलिए उन्होंने मुझसे 2,000 युआन उधार लिए और इसके लिए वे बहुत आभारी थीं।
शादी के बाद मैंने उस लड़की को फालुन दाफा के बारे में सच्चाई बताई। मैंने उसे एक पर्चा दिया और कहा कि पढ़ने के बाद इसे आगे किसी और को दे देना। उसने कहा, “नहीं, मैं ऐसा नहीं करूँगी। यह एक खजाना है। मैं इसे अपने पास ही रखना चाहती हूँ।”
हमारे पड़ोसी का परिवार दाफा के बारे में सच्चाई जानता था। उत्पीड़न की शुरुआत में उन्होंने दाफा की किताबों की रक्षा करने में मेरी मदद भी की। पति ने सपना देखा कि किसी ने उन्हें दो बच्चे दिए। जल्द ही उनकी बहू गर्भवती हो गई और उसने जुड़वां बेटों को जन्म दिया। वे बहुत खुश हुए। जश्न की पार्टी में लड़की की माँ ने मुझसे कहा, “मेरी बेटी भाग्यशाली है कि आप उसके पड़ोसी हैं। क्या आप मुझे एक पेन्डेन्ट दे सकते हैं ?” उसके सभी रिश्तेदार भी पेन्डेन्ट चाहते थे। मैंने इस अवसर का लाभ उठाकर उन्हें दाफा के बारे में और भी बातें बताईं। मुझे उनके लिए बहुत खुशी हुई।
पुलिस अधिकारी: "ये तो वाकई बहुत खूबसूरत हैं!"
दो पुलिस अधिकारी नशे में धुत होकर मुझे परेशान करने के लिए मेरे घर आए। मैंने विनम्रतापूर्वक उन्हें अंदर बुलाया। मैं नहीं चाहती थी कि वे मेरी दाफा की किताबें ले जाएं, इसलिए मैं उन्हें उस जगह से दूर ले गईं जहाँ वे रखी थीं। एक अधिकारी बैठक में बैठ गया और मुझसे सवाल पूछने लगा, जबकि दूसरा शयनकक्ष में चला गया, जहाँ दीवार पर फालुन दाफा की सामग्री से भरे दो थैले टंगे हुए थे।
अधिकारी ने एक थैला उठाया और दूसरे अधिकारी को सौंप दिया, जिससे यह संकेत मिला कि उन्होंने अपना मिशन पूरा कर लिया है। अधिकारी ने थैला खोला और बार-बार कहने लगा, "ये चीज़ें तो सचमुच बहुत सुंदर हैं!" मैं देख सकती थी कि उन्हें थैला पसंद आया और मैंने कहा, "यह सौभाग्य का थैला है। इसे अपने पास ही रख लो। इसे जमा मत कराओ।"
उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या मैं अब भी फालुन दाफा का अभ्यास करती हूँ। मैंने जवाब दिया, “यह मन और शरीर के लिए कितना अच्छा ध्यान है! मैं इसका अभ्यास क्यों न करूँ? आप भी इसे सीख सकते हैं!” उन्होंने पूछा कि क्या मेरे सास-ससुर को मेरे अभ्यास करने पर कोई आपत्ति है। मैंने कहा, “मैं हमेशा एक अच्छा इंसान बनने की कोशिश करती हूँ, इसलिए वे निश्चित रूप से मेरा समर्थन करते हैं।”
फिर मैंने समझाने की कोशिश की कि सीसीपी छोड़ने से शैतान का निशान कैसे मिट जाता है। लेकिन मेरे प्रयासों के बावजूद वे नहीं समझे। एक अधिकारी जाते समय पीछे मुड़ा और मुझसे पूछा, "शैतान के निशान को मिटाने का क्या मतलब है?" मैंने धैर्यपूर्वक उन्हें फिर से समझाया।
जब तक मैं उन्हें दरवाजे तक लेकर आई, तब तक बाहर काफी लोग जमा हो चुके थे। मुझे चिंता थी कि पुलिस को मेरे घर से सामान ले जाते देख उन पर बुरा असर पड़ सकता है, इसलिए मैंने पुलिस वालों से कहा, “क्यों न आप उस थैले में जो कुछ है उसे बाँट दें और सबको पढ़ने दें? याद रखें, 'फालुन दाफा अच्छा है, सत्य, करुणा और सहनशीलता अच्छी है।'” उन्होंने हाथ हिलाकर विदा ली। जो लोग कुछ तमाशा देखने की उम्मीद कर रहे थे, वे निराश हुए।
फिर मैं बेडरूम में जाकर देखने गई कि कहीं कुछ गायब तो नहीं है, और पाया कि दोनों बैग गायब थे। मेरी नज़र में अधिकारी ने उनमें से सिर्फ़ एक ही बैग बाहर निकाला था। मैंने सोचा कि शायद उसने एक बैग अपने लिए छिपा लिया होगा।
साधना शुरू करने के बाद से मैं अधिक आशावान और शांत हो गई हूँ। यह मास्टरजी द्वारा प्रदत्त ज्ञान का परिणाम है। उनकी कृपा से अक्सर बुरी चीजें भी अच्छी चीजों में बदल जाती हैं। धन्यवाद, मास्टरजी!
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