(Minghui.org) चीन एक बेहद बड़ी दुविधा का सामना कर रहा है। सदियों से, चीनी संस्कृति में ईश्वर के साथ गहरा संबंध रहा है, जिसमें पीले सम्राट लाओत्ज़ी और पौराणिक बंदर राजा शामिल हैं। हालांकि, 1949 में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के सत्ता में आने के साथ ही यह परंपरा चकनाचूर हो गई। विहारों (मंदिरों) को ध्वस्त कर दिया गया और कई धार्मिक परंपराओं के भिक्षुओं और भिक्षुणियों को धर्मनिरपेक्ष जीवन में लौटने के लिए मजबूर किया गया।
हाल के वर्षों में, भविष्यवाणियों का प्रचलन तेज़ी से बढ़ा है। भविष्य जानने या शकुनों की व्याख्या करके या अलौकिक शक्तियों का उपयोग करके ज्ञान प्राप्त करने की यह प्रथा प्रचलित है। उच्च अधिकारियों से लेकर आम नागरिकों तक, अधिकाधिक लोग भविष्यवाणियों का सहारा ले रहे हैं। पारंपरिक आध्यात्मिक प्रथाओं के विपरीत, जिनमें दैवीय शिक्षाओं के आधार पर आत्म-सुधार किया जाता है, आजकल कई लोग भविष्यवाणियों के माध्यम से भाग्य प्राप्त करने या अपने भविष्य का पूर्वानुमान लगाने का प्रयास कर रहे हैं। चीन में सुस्त अर्थव्यवस्था और उच्च बेरोजगारी दर का सामना करते हुए, युवा पीढ़ी ऑनलाइन भविष्यवाणियों का भी सहारा ले रही है, ताकि कुछ समझ प्राप्त कर सके या अपनी समस्याओं का त्वरित समाधान ढूंढ सके।
चीनी समाज के लिए इसके क्या निहितार्थ हैं? क्या हम वास्तव में ईश्वर से मार्गदर्शन प्राप्त करने के लिए फास्ट फूड ऑर्डर करने के समान, इस तरह के हताश और लेन-देन संबंधी दृष्टिकोणों पर भरोसा कर सकते हैं?
डिजिटल माध्यम से भविष्यवाणी?
21वीं सेंचुरी बिजनेस हेराल्ड के अनुसार, चीन में एआई-आधारित मनोवैज्ञानिक उपभोक्ता बाजार का अनुमान 2025 में 3.866 बिलियन युआन (या 559.6 मिलियन डॉलर) था। इसी रुझान को देखते हुए, यह आंकड़ा 2028 तक 59.5 बिलियन युआन (या 8.6 बिलियन डॉलर) तक पहुंच सकता है। साइबर ज्योतिष और एआई-आधारित भविष्यवाणियों को मानकीकृत उत्पादों के रूप में पेश किया गया है, जिनमें प्रति उपयोग भुगतान या वार्षिक सदस्यता विकल्प उपलब्ध हैं। कहा जाता है कि भाग्य, दीर्घकालिक संबंधों या नौकरी की तलाश के लिए अलग-अलग एल्गोरिदम का उपयोग किया जाता है।
कई लोग अब भी पारंपरिक तरीकों का पालन करते हैं—लेकिन उनकी सोच वही बनी हुई है। उदाहरण के लिए, बीजिंग के योंगहे मंदिर में 2023 में प्रतिदिन लगभग 60,000 श्रद्धालु आते थे। ऐसी अफवाह है कि इस मंदिर में पूजा करने से नौकरी मिलने में मदद मिलती है। योंगहे मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं में आधे से अधिक मिलेनियल्स (जेन एक्स) और जेन जेड पीढ़ी के हैं। पूरे देश में, मंदिर अर्थव्यवस्था के 2026 तक 100 अरब युआन (या 14 अरब डॉलर) से अधिक होने की उम्मीद है।
लेकिन क्या देवलोक वास्तव में साइबर भविष्यवाणियों के ग्राहकों का पक्ष लेता है या उन लोगों का जो केवल बुद्ध प्रतिमाओं के सामने सिर झुकाते हैं और अगरबत्ती जलाते हैं?
पारंपरिक आस्था
विभिन्न संस्कृतियों में यह मान्यता थी कि मनुष्य मूल रूप से उच्च स्तर से आए हैं, और एक अच्छा व्यक्ति होने से व्यक्ति को अपने दिव्य स्थान पर लौटने में मदद मिलेगी।
बाइबल में शैतान ने तर्क दिया कि अय्यूब परमेश्वर से केवल अपनी अनेक आशीषों के कारण प्रेम करता था। इसलिए परीक्षा के रूप में अय्यूब को अपने सभी पशुधन, सेवकों, बच्चों और यहाँ तक कि अपने स्वास्थ्य से भी वंचित कर दिया गया। परन्तु अपनी तमाम विपत्तियों के बावजूद अय्यूब सदाचारी बना रहा और उसने परमेश्वर के प्रति कोई द्वेष नहीं रखा: “यहोवा ने दिया और यहोवा ने ले लिया; यहोवा का नाम धन्य हो।” इस प्रकार अय्यूब परीक्षा में सफल रहा।
अच्छा इंसान होना बिना शर्त होना चाहिए, और परीक्षाओं और कठिनाइयों के माध्यम से ही हमारा सच्चा चरित्र प्रकट होता है या सुधरता है। और हमारे चुनाव वाकई फर्क डालते हैं, जैसा कि प्राचीन चीन की निम्नलिखित कहानी में दर्शाया गया है।
सोंग राजवंश (960-1279) के एक उच्च अधिकारी किन हुई अपनी क्रूरता के लिए कुख्यात थे और उन्होंने युए फी सहित कई ईमानदार सेनापतियों की हत्या कर दी थी।
एक बार उसने प्रसिद्ध फेंग शुई गुरु लाई बुयी से अपने लिए कब्रिस्तान का स्थान चुनने को कहा, ताकि उसके वंशज समृद्ध हो सकें। लाई के पास उसके आदेश का पालन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।
फिर भी, लाई उस शुभ स्थान के सामने खड़े होकर प्रतिज्ञा की, “यदि यह स्थान समृद्ध न हो तो यह तर्कसंगत नहीं है, लेकिन यदि यह स्थान चिन परिवार के लिए समृद्ध हो जाए, तो फिर देवलोकिय न्याय जैसा कुछ भी नहीं रहेगा।”
किन प्रसन्न हुआ और उसने अपने पैतृक मकबरे को इस स्थान पर स्थानांतरित कर दिया। एक रात, मूसलाधार बारिश और तेज हवाओं ने भूभाग को बदल दिया और उस स्थान को बुरी ऊर्जा का क्षेत्र बना दिया। यु शी मिंग यान (विश्व को ज्ञान देने वाली शिक्षाप्रद कथाएँ) के अनुसार, किन और उसकी पत्नी, अपने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ, अपने पापों के लिए परलोक में कष्ट भोगते रहे।
प्राचीन दृस्ता (दार्शनिक) लाओत्ज़ी ने कहा था, "परमेश्वर किसी के साथ भेदभाव नहीं करता और सदा सद्गुणी लोगों की सहायता करता है।"
एक जड़विहीन वृक्ष
लेकिन सांस्कृतिक क्रांति (1966-1976) और सीसीपी के कई अन्य राजनीतिक अभियानों के दौरान यह पारंपरिक समझ काफी हद तक लुप्त हो गई। 1966 में, महज एक महीने के भीतर, छात्र नेता तान होउलान और उनके साथी रेड गार्ड्स ने 6,000 से अधिक सांस्कृतिक धरोहरों, 2,700 प्राचीन पुस्तकों, सुलेख और चित्रों के 900 रोल और 1,000 पत्थर की शिलाओं को नष्ट कर दिया। इनमें प्रथम श्रेणी के राष्ट्रीय संरक्षण के अंतर्गत 70 से अधिक खजाने और 1,000 दुर्लभ पुस्तकें शामिल थीं। उन्होंने कन्फ्यूशियस मंदिरों को भी ध्वस्त कर दिया और संत की समाधि को अपवित्र कर दिया।
विडंबना यह है कि दशकों बाद, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) ने ऐतिहासिक मंदिरों को व्यावसायिक स्थलों में बदल दिया है। उदाहरण के लिए, शाओलिन मंदिर में प्रतिवर्ष 45 लाख आगंतुक आते हैं और टिकटों की बिक्री से सालाना 30 करोड़ युआन से अधिक की आय होती है। मार्शल आर्ट, स्मृति चिन्ह, लाइव स्ट्रीमिंग और बौद्धिक संपदा सहयोग के साथ, यह उद्यम सालाना एक अरब युआन (या 146 मिलियन डॉलर) से अधिक का राजस्व उत्पन्न करता है। शाओलिन मंदिर के मठाधीश शी योंगशीन राष्ट्रीय जन कांग्रेस (एनपीसी) के प्रतिनिधि भी हैं।
हालांकि, एक मजबूत सांस्कृतिक आधार के बिना, सीसीपी की व्यावसायिक गतिविधियां कभी भी सच्चा आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान नहीं कर सकतीं। फिर भी, आस्था की खोज में आई नई तेजी यह दर्शाती है कि लोग अभी भी सत्य की खोज कर रहे हैं और यह समझने का प्रयास कर रहे हैं कि हम कौन हैं और हमारी उत्पत्ति कहाँ से हुई है।
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