(Minghui.org) वियतनाम में एक अभ्यासी ने लोगों को फालुन दाफा से परिचित कराने वाली परियोजनाओं और गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लिया। वह अच्छा वक्ता था और उसमें संगठन करने की अच्छी क्षमता थी, इसलिए कई अभ्यासी उसकी प्रशंसा करते थे। वह ऑनलाइन चर्चाएँ भी आयोजित करता था और अभ्यासी को उनमें भाग लेने के लिए आमंत्रित करता था।
हालाँकि, दाफा के प्रति उसका रवैया बदल गया और उसने सार्वजनिक रूप से दाफा की आलोचना तक करनी शुरू कर दी।
मेरे सहित कई अभ्यासी इससे आश्चर्यचकित थे। इस अनुभव से मैंने सीखा कि बाहरी क्षमताएँ और प्रभाव वास्तविक, दृढ़ साधना के समान नहीं होते। अभ्यासी होने के नाते हमें केवल दूसरों का अनुसरण नहीं करना चाहिए और न ही किसी व्यक्ति की क्षमता, वाक्पटुता या उसकी सक्रिय भागीदारी के आधार पर उसका मूल्यांकन करना चाहिए। इसके बजाय, हमें हमेशा दाफा की शिक्षाओं का पालन करना चाहिए।
अपने अंतर्मन में झाँकना
मैं दुखी थी और मेरे मन में बेचैनी थी, लेकिन मुझे यह भी एहसास हुआ कि यह मेरे लिए अपने अंतर्मन में झाँकने का एक अवसर था।
चर्चाएँ हमारी साधना का हिस्सा हैं और अपने अनुभव साझा करने से दूसरों को सहायता मिल सकती है। लेकिन ये फ़ा (शिक्षाएँ) नहीं हैं। यदि कोई अभ्यासी फ़ा के बारे में अपनी समझ का विस्तार से वर्णन करता है, तो कुछ लोग आँख मूँदकर उसका अनुसरण कर सकते हैं और चीजों का मूल्यांकन करने के लिए उसकी समझ का उपयोग कर सकते हैं। यह गलत है।
हमें स्वयं साधना करनी चाहिए और अपने अंतर्मन में झाँकना चाहिए। मास्टरजी ने ज़ुआन फालुन और अपने अन्य व्याख्यानों में फ़ा की व्याख्या की है। जब भी कुछ होता है, तो हमें सबसे पहले फ़ा का पालन करना चाहिए और दृढ़ता से अपनी साधना करनी चाहिए।
साधना में कोई शॉर्टकट नहीं
मास्टरजी ने कहा है कि संघर्षों का सामना करते समय अभ्यासी को अपने अंतर्मन में झाँकना चाहिए और मैंने इस घटना से बहुत कुछ सीखा। मैं इसमें क्यों शामिल हुई और इससे मुझ पर इतना प्रभाव क्यों पड़ा?
कुछ अभ्यासी उन लोगों का अनुसरण करने की प्रवृत्ति रखते हैं, जो वाक्पटु होते हैं या जिनमें संगठन क्षमता अच्छी होती है। वे सोच सकते हैं कि जो लोग अच्छा बोलते हैं, उन्होंने अच्छी साधना की है और उनमें क्षमताएँ हैं, क्योंकि उनका शिनशिंग दूसरों से बेहतर होना चाहिए। वे यह भी मान सकते हैं कि परियोजनाओं में भाग लेने का अर्थ है कि वे अच्छा कर रहे हैं और उनका उत्साह इस बात का प्रमाण है कि वे लगन से साधना कर रहे हैं।
शायद मैं भी अपनी साधना में कोई शॉर्टकट तलाश रही थी। शांति से फ़ा का अध्ययन करने और अपने अंतर्मन में झाँकने के बजाय, मैं ऐसे व्यक्ति की तलाश करती थी जो सक्षम हो और जिसके बारे में मुझे लगता था कि कठिनाइयों का सामना करने पर वह मेरी सहायता कर सकता है। ऐसा करके शायद मैं दाफा की शिक्षाओं से भटक गई थी। मुझे एहसास हुआ कि मुझे शांत होने, फ़ा का अध्ययन करने और स्वयं को सुधारने की आवश्यकता थी।
सामूहिक वातावरण में संघर्ष क्यों उत्पन्न होते हैं, इसे समझना
इस घटना ने मुझे मास्टरजी की उन बातों की याद दिलाई, जो उन्होंने दूसरों के साथ फ़ा का अध्ययन करने और अभ्यास करने के बारे में कही हैं। इसने मुझे यह सोचने पर भी मजबूर किया कि सामूहिक वातावरण में हम दाफा की शिक्षाओं का बेहतर ढंग से पालन और उनके मार्गदर्शन में अच्छी साधना कैसे कर सकते हैं, एक-दूसरे के साथ समन्वय कैसे कर सकते हैं और मिलकर सुधार कैसे कर सकते हैं।
मास्टरजी ने कहा है:
“लगन से साधना करने का अर्थ है कि वह हर क्षण अपने शब्दों और कार्यों पर बारीकी से ध्यान दे सकता है, अपने विचारों पर पूरा ध्यान देता है और स्वयं के प्रति सख्त रह सकता है। आम तौर पर वह अपने आचरण में सख्ती बरतने में सक्षम होता है। यही वह व्यक्ति है जो साधना में लगनशील है।”
“दाफा शिष्यों के सामने आने वाले संघर्ष और तनाव केवल साधना के उद्देश्य से और फ़ा को प्रमाणित करने के उद्देश्य से होते हैं। भले ही मानवीय आसक्तियाँ, दिखावा करने की आसक्ति, व्यक्तिगत आसक्तियाँ और स्वयं को प्रमाणित करने की मानवीय प्रवृत्तियाँ इसमें शामिल हों, [दाफा शिष्यों] को इनके बारे में पता होता है और जब ये खोज ली जाती हैं, तो वे उन्हें ठीक कर लेते हैं। यह साधारण लोगों से बिल्कुल अलग है। इसलिए दाफा शिष्यों के बीच समस्याएँ उत्पन्न होंगी और इसके अलावा, ऐसी चीजें एक अतिरिक्त भूमिका भी निभाती हैं। अर्थात, जब संघर्ष या तनाव सामने आता है, तो इसका प्रभाव अन्य लोगों पर पड़ेगा। जब दूसरे लोग इस पर ध्यान देते हैं, तो संघर्ष या तनाव और बढ़ जाएगा, जिससे इसमें शामिल साधकों को इस पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया जाएगा। यदि कोई साधक इसका सामना करते समय अपने अंतर्मन में झाँक सकता है, तो वह अपनी कमियाँ खोज पाएगा। यदि संघर्ष या तनाव सामने न लाया जाता या उत्पन्न ही न होता, तो आप अपनी आसक्तियों को खोज और पहचान नहीं पाते। जब सब कुछ शांतिपूर्ण और सुचारु हो, तो क्या आप अपनी साधना कर सकते हैं?”
— “अमेरिकी राजधानी में फ़ा सम्मेलन में फ़ा का शिक्षाए,” कलेक्टेड टीचिंग्स गिवेन अराउंड द वर्ल्ड,खंड सात
मुझे यह भी एहसास हुआ है कि यह संभावना कम है कि हमारा वातावरण हमेशा शांतिपूर्ण रहेगा। संघर्ष हमारे लिए सुधार करने के अवसर होते हैं और वे हमारी आसक्तियों तथा मानवीय धारणाओं को उजागर करते हैं। इस प्रक्रिया में हम उन्हें समाप्त कर सकते हैं। हमें यह स्वीकार करना चाहिए कि हमारे भीतर ये आसक्तियाँ हैं, फिर सद्विचार भेजकर उन्हें उजागर करना और समाप्त करना चाहिए।
क्योंकि वियतनाम एक कम्युनिस्ट देश है, इसलिए हमारे यहाँ अन्य देशों की तरह फालुन दाफा एसोसिएशन नहीं हैं। इसका अर्थ है कि हमारे लिए दाफा को अपना मार्गदर्शक बनाकर चलना और भी महत्वपूर्ण है।
ये मेरी साधना के वर्तमान स्तर पर प्राप्त समझ हैं। कृपया दयापूर्वक बताइए कि इनमें शिक्षाओं के अनुरूप न होने वाली कोई बात है या नहीं।
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