(Minghui.org) सात वर्ष पहले आधी रात को हमें अपने देवर का फोन आया। उसने बताया कि मेरी सास की हालत बहुत गंभीर है और उन्हें आपातकालीन कक्ष में ले जाया गया है। चार घंटे की यात्रा के बाद जब हम अस्पताल पहुँचे, तो हमने देखा कि पित्ताशय में फोड़ा होने के कारण उन्हें इतना तेज़ दर्द हो रहा था कि वे मुश्किल से बोल पा रही थीं।
डॉक्टरों ने तुरंत सर्जरी कराने की सलाह दी। लेकिन उनकी उम्र 80 वर्ष से अधिक थी और वे बहुत कमजोर थीं। उनके बच्चों को चिंता थी कि शायद वे ऑपरेशन टेबल से जीवित वापस न आ पाएँ। इसलिए उन्होंने फिलहाल रूढ़िवादी उपचार अपनाने और परिस्थिति के अनुसार एक-एक कदम आगे बढ़ने का निर्णय लिया।
इससे पहले के वर्षों में, फालुन गोंग (फालुन दाफा) की साधना करने के बाद मेरे स्वास्थ्य में हुए सुधार को देखकर मेरी सास ने मुझसे मुख्य पुस्तक ज़ुआन फालुन उधार ली थी और उसके कुछ व्याख्यान पढ़े थे। उन्होंने पाँचों व्यायामों को कभी नहीं सीखा था। वे जानती थीं कि दाफा अच्छा है और शुभ वाक्य “फालुन दाफा अच्छा है” और “सत्य-करुणा-सहनशीलता अच्छी है” दोहराती थीं।
मैं उनके बिस्तर के पास गई और धीरे से पूछा, “क्या आप ‘फालुन दाफा अच्छा है, सत्य-करुणा-सहनशीलता अच्छी है’ दोहरा रही हैं?”
उन्होंने कहा, “इतनी गंभीर बीमारी में भी क्या इससे फायदा होगा?”
मैंने उत्तर दिया, “हाँ, जब तक आप सच में विश्वास करती हैं और पूरे मन से इसे दोहराती हैं। इसे अपने पूरे हृदय से दोहराइए। आप इंजेक्शन या दवाइयों से भी जल्दी ठीक हो जाएँगी।”
उन्होंने सहमति जताई। वे दोहराती रहीं और धीरे-धीरे सो गईं।
जब वे जागीं, तो मैंने उनसे कहा, “जब थकान लगे तो सो जाइए और जब जागें तो दोहराइए।” उन्होंने फिर से उन शुभ वाक्यों को दोहराना शुरू कर दिया।
दिन-ब-दिन उनकी सिकुड़ी हुई भौंहें ढीली पड़ने लगीं। जब उनसे पूछा गया कि क्या अब भी दर्द हो रहा है, तो उन्होंने सिर हिलाकर कहा कि नहीं।
लगभग चार-पाँच दिन बाद मैं उनके लिए खाना लेकर अस्पताल गई। वे मुस्कुराईं और बोलीं, “कल रात मैंने एक सपना देखा। एक ताओवादी साधु मेरी सर्जरी करने आया था और एक युवा ताओवादी साधु पास में एक बड़ी ट्रे लेकर खड़ा था। उस साधु ने मेरी आँतें और दूसरे अंग बाहर निकाले, उन्हें ट्रे में अच्छी तरह धोया और फिर वापस मेरे शरीर में रख दिया।” यह सुनकर वहाँ मौजूद सभी लोग हँसने लगे।
मैंने कहा, “यह बहुत अच्छी बात है! क्योंकि आपने पूरे मन से ‘फालुन दाफा अच्छा है’ को अपने हृदय में रखा, इसलिए मास्टरजी ने आपकी देखभाल की! उन्होंने आपका कर्म साफ करने में मदद की है और अब आप ठीक रहेंगी।”
तभी मेरी सास की तीसरी बेटी, जो दूसरे शहर में काम करती थी, कमरे में आई। उसने पूछा कि क्या उसकी माँ ठीक हो गई है। इसके बाद उसने पिछली रात का अपना सपना सुनाया, जो मेरी सास के सपने के बिल्कुल समान था। यह सुनकर सभी बहुत हैरान हुए और मेरी इस बात से सहमत हुए कि मास्टरजी ने मेरी सास के शरीर को शुद्ध कर दिया था।
अगले दिन डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड और फिर सीटी स्कैन कराया, लेकिन अब पित्ताशय दिखाई ही नहीं दे रहा था। इस बीच मेरी सास के पित्ताशय वाले क्षेत्र का दर्द भी पूरी तरह गायब हो गया था। बाद में उन्होंने अस्पताल में कई बार चिकित्सकीय जाँच कराई, लेकिन पित्ताशय का पता नहीं चला। ऐसा लग रहा था जैसे वह गायब हो गया हो।
पिछली वसंत ऋतु में मेरी सास को आँतों में चिपकाव के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया। एक सप्ताह तक इंजेक्शन देने के बाद भी समस्या ठीक नहीं हुई, इसलिए सर्जरी करना आवश्यक हो गया। उनके सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड दोनों किए गए।
जाँच की तस्वीरों को देखने के बाद डॉक्टर ने कहा, “इस बुज़ुर्ग महिला के अंग कुल मिलाकर बहुत अच्छी स्थिति में नहीं हैं, लेकिन उनका पित्ताशय आश्चर्यजनक रूप से बहुत अच्छी स्थिति में है। यह तो बिल्कुल किसी युवा व्यक्ति के पित्ताशय जैसा दिखता है।”
मैंने फिर अपनी सास से कहा, “बस ‘फालुन दाफा अच्छा है, सत्य-करुणा-सहनशीलता अच्छी है’ दोहराती रहिए।” सर्जरी सफलतापूर्वक हुई। इसके बाद उन्हें 14 दिनों तक कुछ भी खाने-पीने की अनुमति नहीं थी और उनके शरीर में जगह-जगह कई ट्यूब लगी हुई थीं। फिर भी उनका मन पूरी तरह स्पष्ट था और वे चुपचाप उन शुभ वाक्यों को दोहराती रहीं।
20 दिनों के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई और वे घर लौट आईं। अस्पताल से निकलने से पहले उनका एक और अल्ट्रासाउंड किया गया, जिसमें पुष्टि हुई कि उनका पित्ताशय एक युवा और स्वस्थ व्यक्ति के पित्ताशय जैसा था।
अस्पताल से छुट्टी मिलने के एक महीने से भी कम समय बाद, मेरी 89 वर्षीय सास बाहर पड़ोसियों के साथ बैठकर बातचीत करने और अपने दम पर बाहर बने शौचालय तक चलकर जाने में सक्षम थीं। रिश्तेदार और मित्र यह देखकर आश्चर्यचकित रह गए और इसे चमत्कार कहने लगे।
अपनी सास और पूरे परिवार की ओर से मैं मास्टरजी के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करना चाहती हूँ! हम मास्टरजी की करुणामय मुक्ति के लिए उनका धन्यवाद करते हैं!
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