(Minghui.org) मैंने 2013 में फालुन दाफा का अभ्यास शुरू किया। अपनी सीमित शिक्षा के कारण, मैंने पहले कभी कुछ नहीं लिखा और मैं खुद को मास्टर ली की करुणामयी मुक्ति के योग्य नहीं समझती थी। लेकिन आज, मैंने आखिरकार कलम उठाने और अपने कुछ अनुभवों को लिखने का साहस जुटाया है, ताकि मैं अपने करुणामयी मास्टरजी को बता सकूं और मास्टरजी के साथ साझा कर सकूं।

अभ्यास शुरू करने के बाद पुनर्जन्म

फालुन दाफा का अभ्यास शुरू करने से पहले मेरा जीवन कठिनाइयों से भरा था। मैं गठिया, आंत्रशोथ, पित्ताशयशोथ और हृदयशोथ जैसी कई बीमारियों से पीड़ित थी। इन बीमारियों के कारण मुझे लगातार कष्ट सहना पड़ता था। इसके अलावा, मेरे परिवार में भी कई कलह थे। मैं व्यक्तिगत लाभ और अहंकार से अपने आसक्ति को त्यागने में असमर्थ थी, और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) की संस्कृति से मैं बहुत प्रभावित थी।

मैं अपने पति से हर समय झगड़ती रहती थी। छोटी-छोटी बातों पर हमारी अनबन हो जाती थी और वह अक्सर मुझे पीटता था। मैं हर मुमकिन मदद के लिए गुहार लगाती थी, पर कोई फायदा नहीं होता था। मुझे लगता था जैसे मेरी जिंदगी खत्म होने वाली है। मैं शारीरिक और भावनात्मक रूप से पूरी तरह थक चुकी थी और अब और बर्दाश्त नहीं कर सकती थी। लेकिन जब मैं अपने दो छोटे बच्चों को देखती, तो मुझे बहुत दुख होता था। मैं मर नहीं सकती थी, क्योंकि वे बिना माँ के रह जाते। अपने दर्द के बावजूद, मैंने अपने बच्चों की खातिर यह सब सहा।

जब मैं पूरी तरह निराश महसूस कर रही थी, तभी मेरी ननिहाल की भाभी मेरे लिए ज़ुआन फालुन की अनमोल पुस्तक लेकर आईं। उन्होंने कहा, “बहन, तुम्हारी इस स्थिति में मास्टर ली होंगज़ी के सिवा कोई तुम्हारी मदद नहीं कर सकता। केवल मास्टर ली ही तुम्हें इस मुश्किल से बाहर निकाल सकते हैं।” वे मेरे लिए मास्टरजी के लेख और व्याख्यान भी लेकर आईं और मुझे अभ्यास सिखाए। तभी से मैंने फालुन दाफा का अभ्यास शुरू कर दिया।

जब मैं दूसरी बार ज़ुआन फालुन पढ़ रही थी, तभी मास्टरजी ने मेरे शरीर को शुद्ध किया। मुझे फालुन (नियमों का चक्र) घूमता हुआ महसूस हुआ और मेरे शरीर का दर्द धीरे-धीरे गायब हो गया। मैं अधिक ऊर्जावान हो गई, मेरा रंग निखर गया और मैंने अपने पति से झगड़ा करना बंद कर दिया। मैंने दूसरों के प्रति सहनशील होना सीखा और बहुत शांत हो गई, मानो मैं एक अलग ही इंसान बन गई हूँ।

मास्टरजी ने मुझे नया जीवन दिया और मेरे परिवार को बचाया। तब से, जब भी मुझे समय मिलता, मैं उत्सुकतापूर्वक फा का अध्ययन करती थी। चाहे मैं कितना भी समय अध्ययन करती, मैं दोनों पैर मोड़कर (द्वि-पद्मासन) बैठती और मास्टरजी और फा के प्रति सम्मान दिखाने के लिए पुस्तक को अपनी छाती के सामने रखती थी। मैं प्रतिदिन अभ्यास करती थी, एक भी अभ्यास नहीं छोड़ती थी। दूसरे अभ्यास के दौरान, एक बार मास्टरजी की कविता मेरे मन में आई और मुझे अविश्वसनीय रूप से शक्ति का अनुभव हुआ।

हजारों प्रकार की कठिनाइयों का पूर्ण अनुभव करने के बाद,

दो पैर हजार शैतानो को रौंदते हैं;

हथेली सीधी करो, आकाश और पृथ्वी कांप उठेंगे 

आकाश में एक विशाल बुद्ध प्रतिमा खड़ी है।

(“महान प्रबुद्ध,”हांग यिन )

2015 में, मैंने फालुन दाफा के उत्पीड़न के लिए सीसीपी के पूर्व प्रमुख जियांग ज़ेमिन के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज कराई। मैंने सोचा कि दाफा से लाभ उठाते हुए चुपचाप बैठे रहना और दाफा अभ्यासियों के उत्पीड़न को देखना मेरे लिए उचित नहीं था। लेकिन मेरे परिवार ने मेरी प्रतिबद्धता को नहीं समझा, हालांकि उन्होंने देखा कि दाफा ने मेरे जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव लाया है। मेरे पति भयभीत हो गए और उन्होंने मेरी साधना में बाधा डालना शुरू कर दिया।

2015 में मेरे बेटे के जन्मदिन पर, मेरे पति घबराए हुए घर लौटे, मानो आसमान गिरने वाला हो। वे बेहद डरे हुए थे और उन्हें बहुत पसीना आ रहा था। उन्होंने मुझे बताया कि पुलिस मुझे ढूंढ रही है और मुझसे आग्रह किया कि मैं अपनी दाफा की किताबें तुरंत छिपा दूं। मैं दृढ़ रही, उत्पीड़न के पीछे के बुरे तत्वों को नष्ट करने के लिए सद्विचार भेजे और शांत भाव से कहा, “जियांग पर मुकदमा करना गलत नहीं है। उस शैतान ने दिव्यता के मार्ग पर चल रहे कई दाफा अभ्यासियों को मार डाला है। उसके झूठ ने कई लोगों को जहर दिया है। उसके अपराध जघन्य हैं। क्या हमें उस पर मुकदमा नहीं करना चाहिए?”

उन्होंने कुछ नहीं कहा, बस झुंझलाहट में आह भरी और चले गए। उसके बाद से हमारे परिवार को लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन साधना के प्रति मेरा समर्पण कभी नहीं डिगा। मैं सद्विचार फैलाती रही और लोगों को दाफा के बारे में सही बातें बताती रही। सबसे कठिन दिनों में भी, मास्टरजी का फ़ा अक्सर मेरे मन में कौंधता था, जिससे मुझे स्पष्टता और आत्मविश्वास मिलता था।

एक नेत्रहीन बुजुर्ग महिला अभ्यास शुरू करती है

पिछले साल मुझे एक घरेलू सेवा एजेंसी के माध्यम से नैनी की नौकरी मिली। मेरी जिम्मेदारियों में परिवार के बच्चों की देखभाल करना और उन्हें घर और स्कूल के बीच लाना-ले जाना शामिल है। उनके दो 17 वर्षीय बेटे हाई स्कूल में पढ़ते हैं और एक 14 वर्षीय बेटी है। उन्हें स्कूल लाने-ले जाने के अलावा, मुझे एक नेत्रहीन बुजुर्ग महिला की भी देखभाल करनी पड़ती है। वह बारी-बारी से अपने बेटे और बेटी के घर रहती हैं। उनके तीन बच्चे उनके पोते, पोती हैं। मेरी जिम्मेदारियों में उनके लिए खाना बनाना और उनके घरों की सफाई करना भी शामिल है।

चूंकि बुजुर्ग महिला दोनों घरों में रहती है, इसलिए मुझे दोनों घरों के बीच आना-जाना पड़ता है और दोनों की सफाई करनी पड़ती है, जो काफी थका देने वाला काम है। बुजुर्ग महिला कभी-कभी बहुत कठोर हो जाती है और बेहद भौतिकवादी है। मुझे पानी, बिजली और टॉयलेट पेपर के इस्तेमाल में बहुत सावधानी बरतनी पड़ती है। हम दोनों के अपने-अपने कमरे हैं, लेकिन ऊर्जा बचाने के लिए मैं रात में शायद ही कभी लाइट जलाती हूँ।

मैं आध्यात्मिक शिक्षा के लिए ई-पुस्तकें पढ़ती हूँ। तीनों बच्चे अपने फोन के आदी हो चुके हैं क्योंकि उनके माता-पिता शहर से बाहर काम करते हैं और कोई उन्हें अनुशासन नहीं सिखाता। जब चीजें उनकी इच्छानुसार नहीं होतीं, तो वे अक्सर नखरे दिखाते हैं और बदतमीजी करते हैं। मैं फिलहाल उनकी आठवीं दाई हूँ। पिछली दाईयाँ स्थिति को संभाल नहीं पाईं और नौकरी छोड़ दी। हालाँकि, मैं आध्यात्मिक अभ्यासी हूँ और मैं अपने हर काम में सत्य, करुणा और सहनशीलता के सिद्धांतों का पालन करती हूँ।

चूंकि मैं यहां हूं, इसलिए इस परिवार के साथ मेरा एक पूर्वनिर्धारित संबंध अवश्य है। वे चाहे कुछ भी कहें, मैं क्रोधित नहीं होतीं। बल्कि कुछ भी होने पर मैं पहले आत्मनिरीक्षण करतीं हूं। देवतागण हर गलत चीज को सुधार सकता है। मुझे विश्वास है कि मैं इस वातावरण को बदल सकतीं हूं।

एक बार मैंने खाने के लिए कुछ छोटी तोरी तली। खाना शायद थोड़ा कच्चा रह गया था, और उस महिला का पोता नाराज़ हो गया। उसने अपनी चॉपस्टिक मेज पर पटक दी और चिल्लाया, “यह बहुत कच्चा है! मैं इसे नहीं खा सकता! खाना बाहर से मंगवाओ!”

वह भाग गया, और मैं भी जल्दी से उसके पीछे गई, “अगर तुम्हें पसंद नहीं आया तो मैं तुम्हें 20 युआन दे दूंगी। तुम जो चाहो ले सकते हो। तुम बड़े हो रहे हो! खाना मत छोड़ो। अगली बार मैं इसे थोड़ा नरम बनाऊंगी, ठीक है?”

लड़के ने जवाब दिया, "तो मुझे 50 युआन दे दो।" बाद में बूढ़ी औरत को इसके बारे में पता चला, और उसने मुझे पैसे लौटा दिए।

महिला की बेटी ने अपनी माँ से कहा, “माँ, यह आया हमारे साथ काफी समय से है। वह ईमानदार, मेहनती है, घर को एकदम साफ रखती है और आपकी बहुत अच्छी देखभाल करती है। अगर आप उसे जाने देंगी, तो हमें दोबारा ऐसी अच्छी आया नहीं मिल पाएगी।”

पोते ने बीच में ही कहा, "जी दादी। मुझे लगता है कि यह आया बहुत अच्छी है!"

वह महिला ईसाई हैं। बच्चों को लाने-ले जाने के अलावा, मैं उन्हें सैर पर भी ले जाती हूँ। रविवार को हम चर्च जाते हैं, और रास्ते में मैं उन्हें हांग यिन की कविताएँ सुनाती हूँ और साधना की कहानियाँ साझा करती हूँ। जब भी समय मिलता है, मैं उन्हें जुआन फालुन भी पढ़कर सुनाती हूँ और ऐसे अंश ढूंढने की कोशिश करती हूँ जिनसे वे जुड़ाव महसूस कर सकें। हालाँकि वे 30 वर्षों से ईसाई हैं, लेकिन उनकी सोच और स्वभाव अधिकांश आम लोगों जैसा ही है।

कभी-कभी अगर मैं कुछ ऐसा कह देती जो उसे पसंद नहीं आता, तो वह नाराज़ हो जाती थी, लेकिन मैंने कभी उससे बहस नहीं की। उस महिला को हृदय रोग था और अक्सर कब्ज़ की समस्या रहती थी, इसलिए वह बहुत सारी दवाइयाँ लेती थी। क्योंकि वह अंधी थी, इसलिए कभी-कभी बाथरूम में गंदगी कर देती थी। लेकिन मैं चुपचाप बिना कुछ कहे उसकी सफाई कर देती थी, क्योंकि मुझे डर था कि उसे शर्मिंदगी महसूस होगी। समय के साथ, उसका मुझ पर भरोसा बढ़ गया है और वह मेरे खाने की तारीफ भी करती है।

कई महीने बीत चुके हैं, और मैंने अपने प्रयासों में कोई कमी नहीं आने दी है। मैंने उसे चीनी पारंपरिक संस्कृति की कहानियाँ सुनाईं और अच्छे इंसान होने के सिद्धांतों के बारे में समझाया। मैंने उससे कहा कि जब तक वह एक अच्छी इंसान बनी रहेगी, उसका जीवन सुगम रहेगा। वह सहमत हो गई।

ध्यान करते समय, मैंने एक विशाल इमारत देखी जिसकी नींव बहुत गहरी थी। मुझे अहसास हुआ कि मास्टरजी मुझे ज्ञान प्रदान कर रहे हैं। दृष्टिहीन होने के बावजूद, इस स्त्री में जन्मजात बहुत अच्छे गुण थे और वह इस संसार में फ़ा (ज्ञान) प्राप्त करने के लिए आई थी। शायद उसका समय आ गया था।

मैंने कई दिनों तक सद्विचार भेजे ताकि दूसरी दुनिया में मौजूद वे सभी बुरी शक्तियां दूर हो जाएं जो उसे दाफा प्राप्त करने में बाधा डाल रही थीं। मेरा आत्मविश्वास काफी बढ़ गया। जब वह अच्छे मूड में थी, तो मैंने उससे कहा, “बहन, आपकी उम्र 60 साल से अधिक है। आइए और मेरे साथ दाफा सीखिए! जब तक आप इसे सीखती रहेंगी, मास्टरजी आपका ख्याल रखेंगे।”

उसने प्रसन्नतापूर्वक उत्तर दिया, “ठीक है! आपसे मुझे पता चला कि दाफा अच्छा है। मास्टरजी लोगों को अच्छा बनना सिखाते हैं, और यह गलत नहीं हो सकता। मैं सीखूंगी।”

इसलिए मैंने उसे व्यायाम की गतिक्रिया धीरे-धीरे सिखाईं, क्योंकि वह देख नहीं सकती थी। कभी-कभी जब मैं उसकी गतिक्रियायो को ठीक करती थी तो वह अधीर हो जाती थी और शिकायत करती थी, जिससे मेरे धैर्य की परीक्षा होती थी, लेकिन मैं शांत रही और धैर्यपूर्वक उसे बार-बार सिखाती रही।

वह बहुत लगनशील थी और उसने जल्दी ही पाँचों अभ्यास सीख लिए। 20 दिनों से अधिक अभ्यास करने के बाद, उसने दवाइयाँ लेना बंद कर दिया। उसके स्वास्थ्य में काफी सुधार हुआ और वह पहले से कहीं अधिक आत्मविश्वास से भर गई, वह दिन में दो बार - सुबह और शाम - अभ्यास करती थी। जब भी मुझे समय मिलता, मैं उसे फा पढ़कर सुनाती या उसे मास्टरजी के प्रवचन सुनने देती।

एक बार उसने मास्टरजी से ज़ोर से कहा, “मास्टरजी! मुझे दिखाई नहीं दे रहा। कृपया मुझे यह एहसास दिलाइए कि आप मेरे ठीक बगल में हैं।” बोलते ही उसने अपने हाथ फैला दिए, और मास्टरजी ने उसकी हथेलियों में फालुन को घुमाना शुरू कर दिया। उसने इसे महसूस किया और इतनी भावुक हो गई कि उसकी आँखों से आँसू बहने लगे। वह खुशी से चिल्लाई, “मास्टरजी मेरी देखभाल कर रहे हैं! मास्टरजी मेरे ठीक बगल में हैं!” मेरी आँखों में भी आँसू भर आए।

फालुन दाफा का अभ्यास शुरू करने के दो महीने बाद, वह एक घंटे तक बैठकर ध्यान कर सकती थी और एक ही सत्र में पांचों अभ्यास पूरे कर लेती थी। उसने दवाइयाँ लेना पूरी तरह बंद कर दिया और उसकी बीमारी गायब हो गई। उसी समय, मास्टरजी ने उसके शरीर का शुद्धिकरण भी किया। हालाँकि इसमें थोड़ा दर्द हुआ, लेकिन वह जानती थी कि वह कर्मों का नाश कर रही है। तब से वह हमेशा मुस्कुराती रहती है।

जब मैं रात में उन्हें फालुन दाफा पढ़कर सुनाती हूँ, तो वे बिजली की खपत की शिकायत नहीं करतीं। उनका शिनशिंग (आध्यात्मिक व्यवहार) भी प्रतिदिन सुधरता है। उन्होंने गर्व से कहा, “आखिरकार मैंने फालुन दाफा को समझ लिया!” महिला के बेटे और बेटी बहुत संतुष्ट थे, और उनके बच्चे आज्ञाकारी बन गए। दाफा ने ही उनमें बदलाव लाया। मुझे विश्वास है कि चमत्कार होते रहेंगे। मेरा अगला कदम इस परिवार को दाफा के बारे में सच्चाई बताना और उन्हें सीसीपी और उससे संबद्ध संगठनों से अलग होने में मदद करना है।

मुझे पता है कि मैंने पर्याप्त प्रयास नहीं किए हैं। भविष्य में, मैं स्वयं को निखारने और तीनों कार्यों को अच्छे से करने के लिए और अधिक मेहनत करूँगी  ताकि मास्टरजी कम चिंतित हों। मैं मास्टरजी को निराश नहीं करूँगी और उनके साथ अपने वास्तविक घर लौटूँगी।