(Minghui.org) मेरी आयु 64 वर्ष है और मैं 1996 से फालुन दाफा का अभ्यास कर रही हूँ। मुझे दाफा और मास्टरजी पर अटल विश्वास है। 1999 में जब चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) ने फालुन दाफा का दमन शुरू किया, तब से लेकर आज तक मैं मास्टरजी की करुणामयी सुरक्षा में हर परीक्षा और कठिनाई को पार करती आई हूँ।
हर परिस्थिति में लोगों को बचाना
2014 में मैं कुछ साथी अभ्यासी के साथ एक दर्शनीय पर्वतीय क्षेत्र में सत्य-स्पष्टीकरण वाले बैनर और पोस्टर लगाने गई। उस समय मेरे पैरों में बहुत दर्द था और पहाड़ पर चढ़ते हुए हर कदम कठिन लग रहा था। मैं लगातार फ़ा के अंश दोहराती रही ताकि मेरे सद्विचार दृढ़ बने रहें। मास्टरजी के सहयोग से हम पर्वत की चोटी के नीचे "फालुन दाफा अच्छा है" लिखे बैनर और पोस्टर लगा सके, जो मानो सुनहरी आभा बिखेर रहे थे।
सीसीपी अधिकारियों ने इस घटना की जाँच की और एक वर्ष बाद उन्हें पता चल गया कि मैं इसमें शामिल थी। एक दोपहर, जब मैं अपनी पोती की देखभाल कर रही थी, पुलिस का एक दल मेरे घर में घुस आया। उन्होंने मुझे अवैध रूप से गिरफ्तार किया और घरेलू सुरक्षा विभाग ले गए, जहाँ मुझे लोहे की कुर्सी से हथकड़ी लगाकर बाँध दिया गया। अगले दिन मुझे एक हिरासत केंद्र भेज दिया गया।
हिरासत केंद्र में मैंने कैदियों के आचरण नियम याद करने से इंकार कर दिया। प्रहरी चाहता था कि जब भी मैं कुछ कहूँ तो उकड़ूँ बैठूँ, लेकिन मैंने मना कर दिया क्योंकि मैं कोई अपराधी नहीं थी। परिणामस्वरूप भोजन के समय केवल मुझे बैठकर खाने की अनुमति थी; बाकी सभी को उकड़ूँ बैठकर खाना पड़ता था। क्योंकि मैंने नियम याद नहीं किए थे, इसलिए प्रहरी ने मुझे भोजन खरीदने की अनुमति भी नहीं दी। अन्य कैदी मेरी पोषण की चिंता करते थे, लेकिन मैं केवल इतना कहती, "कोई बात नहीं। अभ्यासी को इसकी आवश्यकता नहीं है।"
मैंने सोचा कि जब मैं यहाँ हूँ, तो क्यों न कुछ सार्थक किया जाए? मैंने उन लोगों को दाफा का सत्य बताना शुरू किया जिनसे मेरा पूर्वनियत संबंध था, क्योंकि सभी लोग मास्टरजी के दूर के संबंधी हैं। मैं प्रतिदिन कम से कम एक व्यक्ति को सीसीपी और उसके संबद्ध संगठनों से त्यागपत्र देने के लिए राजी कर लेती थी। जब तक मुझे रिहा किया गया, तब तक 30 से अधिक लोग मेरे माध्यम से सीसीपी छोड़ चुके थे।
एक बार बैरक की प्रभारी ने सभी से अपना परिचय देने और हिरासत में आने का कारण बताने को कहा। मेरी बारी आई तो मैं खड़ी हुई और कहा,
"मैं फालुन दाफा की अभ्यासी हूँ। मैं घर पर अपनी पोती की देखभाल कर रही थी, तभी घरेलू सुरक्षा पुलिस मुझे पकड़कर ले आई।"
सब लोग हँस पड़े और कुछ ने कहा कि समाज की नैतिकता कितनी गिर गई है कि अब फालुन दाफा के अभ्यासी भी यहाँ लाए जा रहे हैं।
प्रभारी ने कहा, "तुमने अभी तक हिरासत केंद्र के नियम याद नहीं किए हैं। क्या अब करोगी?"
मैंने उत्तर दिया, "नहीं। मैं कोई अपराधी नहीं हूँ। फालुन दाफा सबसे धर्मसम्मत मार्ग है।"
उसे मेरे उत्तर की अपेक्षा नहीं थी। उसने मुझे शौचालय साफ करने का आदेश दिया, लेकिन मैंने उसकी बात पर कोई ध्यान नहीं दिया।
अगली सुबह मेरा नाम पुकारा गया और मुझे अपना सामान बाँधकर घर जाने के लिए कहा गया। बैरक के सभी लोग मेरे लिए बहुत खुश थे। कुछ ने मुझे गले लगाया, कुछ की आँखों में आँसू आ गए। मैंने दोनों हाथ जोड़कर हेशी किया और कहा,
"कृपया याद रखें—'फालुन दाफा अच्छा है, सत्य-करुणा-सहनशीलता अच्छी है।' मैं आशा करती हूँ कि आप सभी भी शीघ्र ही घर लौट सकेंगे।"
मास्टरजी ने मेरी रिहाई की व्यवस्था की
लेकिन मुझे सीधे घर नहीं भेजा गया। पुलिस मुझे एक ब्रेनवॉशिंग केंद्र ले गई।
वहाँ मैंने एक सहायक को दाफा का सत्य बताया और समझाया कि फालुन दाफा एक धर्मसम्मत साधना मार्ग है। मैंने उसे बताया कि सार्वजनिक सुरक्षा मंत्रालय द्वारा प्रकाशित 14 तथाकथित "पंथ संगठनों" की सूची में फालुन दाफा का नाम नहीं है।
मैंने उसे यह भी बताया कि वह इंटरनेट पर गुइझोउ प्रांत की उस चट्टान के बारे में देखे, जिस पर प्राकृतिक रूप से "सीसीपी का विनाश होगा" शब्द उभरे हुए हैं। मैंने कहा कि यह स्वर्ग की चेतावनी है और उसे सीसीपी छोड़ देना चाहिए। वह सहमत हो गई और चाहती थी कि मैं उसके पति और बेटे की भी सीसीपी से सदस्यता समाप्त कराने में सहायता करूँ। मैंने कहा कि इसके लिए उनकी सहमति आवश्यक है और उनसे केवल इतना कहा कि वे मन में याद रखें—
"फालुन दाफा अच्छा है, सत्य-करुणा-सहनशीलता अच्छी है।"
तीसरे दिन मास्टरजी ने मेरे लिए बीमारी-कर्म का एक भ्रम उत्पन्न किया। मेरे पेट में इतनी तेज़ पीड़ा हुई कि मैं बिस्तर पर तड़पने लगी। मेरे हाथ-पाँव बर्फ जैसे ठंडे हो गए और पूरे शरीर में ऐंठन होने लगी। ब्रेनवॉशिंग केंद्र के कर्मचारी घबरा गए। कप्तान ने तुरंत एम्बुलेंस बुलवाई और मुझे अस्पताल ले गया। साथ ही पुलिस को भी सूचना दी गई।
अस्पताल ने बताया कि मुझे गंभीर पित्ताशय की पथरी है, लेकिन बिस्तर खाली न होने के कारण उन्होंने भर्ती करने से मना कर दिया। पुलिस मुझे दूसरे अस्पताल ले गई।
मैंने डॉक्टर से कहा, "1996 में दाफा का अभ्यास शुरू करने के बाद से मैंने कभी कोई दवा नहीं ली है। मुझे कोई बीमारी नहीं है। ये लक्षण केवल इस दमन के कारण उत्पन्न हुए हैं।"
पुलिस चाहती थी कि मैं दवा ले लूँ। मैंने उनसे कहा कि यदि दवा लेने से मेरे साथ कुछ भी होता है, तो वे लिखित रूप में इसकी जिम्मेदारी लें। किसी की भी ऐसा करने की हिम्मत नहीं हुई और उन्होंने मुझे दवा लेने के लिए कहना बंद कर दिया।
इसके बाद उन्होंने मेरी बेटी को बुलाकर मुझे घर ले जाने के लिए कहा।मेरे पति और बेटी अस्पताल पहुँचे। पुलिस ने मेरी बेटी से कहा कि मैं गंभीर रूप से बीमार हूँ, लेकिन दवा और ड्रिप लेने से इंकार कर रही हूँ।
मेरी बेटी ने उत्तर दिया, "मेरी माँ ने साधना शुरू करने के बाद से कभी कोई दवा नहीं ली है। मैं इन्हें घर ले जाऊँगी और समझाऊँगी।"पुलिस ने निगरानी की शर्त पर मुझे घर जाने की अनुमति दे दी। इस प्रकार मैं रिहा हो गई। यह सब मास्टरजी की करुणामयी व्यवस्था के कारण संभव हुआ।
मास्टरजी की सुरक्षा में सुरक्षित
एक बार मैं एक अन्य अभ्यासी के साथ एमएमएस संदेशों के माध्यम से सत्य स्पष्ट करने निकली। मैं गाड़ी चला रही थी और दूसरी अभ्यासी विशेष उपकरण से मल्टीमीडिया मैसेज भेज रही थी। एक बार में लगभग सौ संदेश भेजे जा सकते थे।
हम मुख्य सड़कों और गलियों से गुजर रहे थे। हमें पता नहीं था कि पुलिस हमें देख चुकी है और हमारा पीछा कर रही है। जब मुझे इसका एहसास हुआ, तो मैंने साथी अभ्यासी से कहा कि वह तुरंत उपकरण बंद कर दे और सद्विचार भेजे।
फिर मैं एक ऐसी संकरी गली में मुड़ गई जिसे मैं अच्छी तरह जानती थी। कई बार मोड़ लेने के बाद हम पुलिस की गाड़ी से पीछा छुड़ाने में सफल हो गए। यद्यपि उस समय हमारे मन में भय था, फिर भी मास्टरजी ने हमारी रक्षा की।
दाफा के संदेश वाले नोटों का उपयोग
मास्टरजी ने चीन में अभ्यासी द्वारा सत्य-स्पष्टीकरण संदेश वाले कागज़ी नोटों के उपयोग को स्वीकार किया। मैं ऐसे नोटों से हर प्रकार की खरीदारी करती थी और दुकानदारों से सामान्य नोटों के बदले उनका आदान-प्रदान भी करती थी। अब तक मैं ऐसे दसियों हजार युआन के नोट प्रचलन में ला चुकी हूँ।
इन नोटों पर ऐसे संदेश लिखे होते थे—
"फालुन दाफा अच्छा है, सत्य-करुणा-सहनशीलता अच्छी है।" , "सीसीपी दुष्ट है।" , "चीन, सीसीपी नहीं है।" इन संदेशों के माध्यम से लोगों को सही और गलत का अंतर समझने तथा सीसीपी छोड़ने के लिए प्रेरित किया जाता है।
मैं प्रतिदिन बाहर जाने से पहले मास्टरजी को धूप अर्पित करती हूँ और प्रार्थना करती हूँ कि वे मेरे सद्विचारों को सशक्त करें, जिन स्थानों पर मैं जाऊँ वहाँ के आयामों को शुद्ध करें, पुरानी शक्तियों को जीवों के उद्धार में हस्तक्षेप करने से रोकें तथा मेरे क्षेत्र में किसी भी दुष्ट तत्व के प्रवेश को अवरुद्ध करने के लिए एक सुरक्षा कवच स्थापित करें।
घर से निकलते समय मैं मास्टरजी की यह फ़ा कविता बार-बार दोहराती हूँ—
"एक महान प्रबुद्ध प्राणी कठिनाइयों से नहीं डरता।
उसने वज्र समान दृढ़ इच्छाशक्ति गढ़ ली है।
जीवन और मृत्यु के प्रति आसक्ति से मुक्त होकर,
वह फ़ा-सुधार के मार्ग परआत्मविश्वास और गरिमा के साथ चलता है।
"— "सद्विचार और सद्कर्म", होंग यिन II
निष्कर्ष
मास्टरजी मेरे प्रागैतिहासिक मिशन को पूरा करने की यात्रा में हर समय मेरे साथ रहे हैं। मैंने उनके निर्देशानुसार तीनों कार्य अच्छी तरह करने और यथासंभव अधिक लोगों को बचाने का प्रयास किया है। जहाँ भी गई, जिन लोगों से मेरा पूर्वनियत संबंध था, उनसे मिली और उन्हें सीसीपी तथा उसके संबद्ध संगठनों से त्यागपत्र देने के लिए प्रेरित किया।
मैं अंत तक अपने इस मिशन के प्रति समर्पित रहूँगी, ताकि एक दिन मास्टरजी के साथ अपने वास्तविक घर लौट सकूँ।
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