(Minghui.org) 18 जुलाई, 2026 को फ्लोरिडा के डाउनटाउन ऑरलैंडो स्थित विंडहैम गार्डन में फ्लोरिडा फालुन दाफा साधना अनुभव साझा सम्मेलन आयोजित किया गया।

सम्मेलन में 16 अभ्यासियों ने अपने साधना अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि किस प्रकार उन्होंने फ़ा का अध्ययन और फालुन दाफा का लगनपूर्वक अभ्यास करके अपनी मानवीय आसक्तियों को दूर किया तथा अपने चरित्र (शिनशिंग) में सुधार किया।

उन्होंने लोगों को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) द्वारा फालुन गोंग पर किए जा रहे उत्पीड़न के बारे में बताने, एक समग्र इकाई के रूप में मिलकर कार्य करने तथा अपनी कमियों को खोजने के लिए निरंतर अपने अंतर्मन में देखने के अनुभव भी साझा किए।

अनुभव साझा करने के लिए 18 जुलाई, 2026 को फ्लोरिडा के ऑरलैंडो सिटी में विंडहैम गार्डन में अभ्यासी एकत्र हुए। (Minghui.org)

युवा अभ्यासियों ने आराम की आसक्ति को छोड़ने के अपने अनुभव साझा किए

युवा अभ्यासी फैन ने सम्मेलन में अपना अनुभव-पत्र पढ़ा, जिसमें उन्होंने अपनी साधना के तीन प्रमुख पहलुओं—थकान पर विजय पाना, मोबाइल फ़ोन की लत छोड़ना और अपने चरित्र (शिनशिंग) में सुधार करना—के बारे में बताया।

लंबे समय तक उनींदापन उनके लिए सुबह जल्दी उठकर अभ्यास करना कठिन बना देता था, जिससे वे आत्मग्लानि के एक दुष्चक्र में फँस गई थीं। लगातार सद्विचार भेजने और मास्टरजी की शिक्षाओं को याद रखने के माध्यम से उन्होंने धीरे-धीरे अपने सद्विचारों को मजबूत किया और थकान से होने वाले हस्तक्षेप पर विजय प्राप्त की।

बाद में उन्हें एहसास हुआ कि छोटे-छोटे वीडियो देखने और मोबाइल फ़ोन का अत्यधिक उपयोग अनजाने में उनके सद्विचारों को कमजोर कर रहा था और आराम की आसक्ति को बढ़ावा दे रहा था। उन्होंने कहा कि यदि बिना संयम के केवल "सकारात्मक" सामग्री भी देखी जाए, तब भी वह आसक्ति का कारण बन सकती है। इसलिए उन्होंने स्वयं पर नियंत्रण रखना और अपनी मुख्य चेतना को स्पष्ट बनाए रखना शुरू किया।

फैन ने कहा कि साधना में सब कुछ एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। केवल निरंतर फ़ा का अध्ययन, अपनी कमियों को पहचानने और आसक्तियों को दूर करने के माध्यम से ही व्यक्ति आराम की चाह को छोड़ सकता है और साधना के अंतिम मार्ग पर दृढ़ता से आगे बढ़ सकता है।

17 वर्षीय अभ्यासी यू हुआन ने भी लंबे समय से चली आ रही आराम की चाह और कठिनाइयों के भय के बारे में अपने अनुभव साझा किए। यद्यपि वे फ़ा के सिद्धांतों को समझते थे, फिर भी वे अक्सर बहुत ढीले रहते थे, मोबाइल फ़ोन के अत्यधिक उपयोग में लगे रहते थे और चिड़चिड़ेपन तथा कठिनाइयों के भय के कारण चुनौतियों से बचते थे।

एक डरावने सपने ने उन्हें अपनी साधना की स्थिति पर गंभीरता से विचार करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने पाया कि समस्याओं का सामना करते समय वे पीछे हट जाते थे और दबाव आने पर उनसे बचने की कोशिश करते थे। उन्होंने समझा कि यह व्यवहार आराम की आसक्ति, स्वार्थ और दाफा की आवश्यकताओं के प्रति स्वयं को कठोरता से न परखने के कारण उत्पन्न हुआ था।

जब उन्होंने इन प्रश्नों को मन में रखकर फ़ा का अध्ययन किया, तो उन्होंने ज़ुआन फालुन के चौथे व्याख्यान में "कर्म का रूपांतरण" पढ़ा, जिसने उन्हें गहराई से प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि उन्हें यह समझ में आया:

"मुख्य बात यह नहीं है कि मैं फ़ा को कितना समझता हूँ, बल्कि यह है कि क्या मैं वास्तव में अपने चरित्र की तुलना दाफा के मानकों से करता हूँ और स्वयं को बदलता हूँ।"

यू हुआन ने कहा कि भविष्य में चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ आएँ, वे साधना के मार्ग पर दृढ़ता से चलेंगे और एक सच्चे दाफा शिष्य बनेंगे।

चमत्कारों का प्रत्यक्ष अनुभव

पॉलीन ने बताया कि किस प्रकार उन्होंने और उनके पति, जो स्वयं भी अभ्यासी हैं, मास्टरजी और फ़ा में अटूट विश्वास तथा दृढ़ सद्विचारों के माध्यम से अनेक कठिन परीक्षाओं को पार किया।

2002 में उनके पति साइकिल चला रहे थे, तभी एक 18-पहियों वाले बड़े ट्रक ने उनके दाहिने पैर के निचले हिस्से को दो बार कुचल दिया। उनकी साइकिल पूरी तरह टूट गई, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से उनके पैर की कोई हड्डी नहीं टूटी। उन्होंने कोई चिकित्सीय उपचार नहीं कराया। केवल फ़ा का अध्ययन और नियमित अभ्यास करते हुए वे पूरी तरह स्वस्थ हो गए।

पॉलीन ने कहा कि क्योंकि उनके पति ने हर परिस्थिति में स्वयं को एक अभ्यासी माना, इसलिए ऐसा चमत्कार हुआ जो सामान्य लोगों को अविश्वसनीय प्रतीत होता है।

पॉलीन स्वयं भी दो बार गंभीर बीमारी-कर्म (सिकनेस कर्म) की परीक्षाओं से गुज़रीं। एक समय उनके पूरे शरीर में तीव्र दर्द था और चलना भी कठिन हो गया था।

आत्मचिंतन करने पर उन्हें एहसास हुआ कि प्रसिद्धि, लाभ, आराम तथा कार्य में उपलब्धियों के प्रति उनकी आसक्तियाँ ही इस स्थिति का कारण थीं। साथ ही, वे फ़ा का अध्ययन, अभ्यास और अपने चरित्र को सुधारने में भी ढीली पड़ गई थीं।

उन्होंने फ़ा के अनुसार स्वयं को सुधारा और दृढ़ता से फ़ा का अध्ययन तथा अभ्यास जारी रखा।

लगभग 20 दिनों के बाद उनका स्वास्थ्य पूरी तरह सामान्य हो गया। इस अनुभव ने उन्हें यह समझाया कि साधना की परीक्षाएँ बिना कारण नहीं आतीं; वे साधना में आगे बढ़ने के अवसर होती हैं।

उन्होंने कहा कि केवल मास्टरजी और दाफा में दृढ़ विश्वास रखकर, आसक्तियों को छोड़कर और वास्तविक साधना करके ही व्यक्ति अपने सद्विचार बनाए रख सकता है तथा साधना में अच्छा कर सकता है।

पेइची ने बताया कि साधना के माध्यम से उन्होंने किस प्रकार मानवीय धारणाओं को छोड़ा और मास्टरजी तथा दाफा में अपना विश्वास मजबूत किया।

उनकी बाईं हथेली पर एक गाँठ उभर आई थी। उन्होंने इसे सामान्य मानवीय दृष्टिकोण से नहीं देखा, बल्कि यह विचार किया कि एक अभ्यासी के रूप में उन्हें किन क्षेत्रों में स्वयं को सुधारने की आवश्यकता है।

उन्होंने फ़ा का अध्ययन और सद्विचार भेजना बढ़ा दिया तथा मास्टरजी और दाफा में अटूट विश्वास बनाए रखा।

उसी समय, जब शेन यून के प्रचार का महत्वपूर्ण चरण चल रहा था, वे एक अन्य अभ्यासी के साथ घर-घर जाकर कार्यक्रम की प्रचार सामग्री भी वितरित करती रहीं।

कुछ दिनों बाद उन्होंने देखा कि उनकी हथेली की वह गाँठ, जो लगभग एक वर्ष से उन्हें परेशान कर रही थी, धीरे-धीरे छोटी होती गई और अंततः पूरी तरह गायब हो गई।

इस अनुभव ने उन्हें और गहराई से यह समझाया कि जब व्यक्ति मानवीय चिंताओं और आसक्तियों को छोड़कर मास्टरजी की अपेक्षाओं के अनुसार चलता है, तो चमत्कार घटित हो सकते हैं।

इस घटना के माध्यम से उन्होंने महसूस किया कि कठिन परिस्थितियों में अभ्यासियों को फ़ा को अपना मार्गदर्शक बनाना चाहिए, मास्टरजी द्वारा व्यवस्थित मार्ग पर चलना चाहिए और मास्टरजी तथा दाफा पर सच्चा विश्वास रखना चाहिए।