(Minghui.org)16 जुलाई, 2026 को अमेरिका के सहायक विदेश मंत्री राइली बार्न्स ने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) द्वारा फालुन गोंग के विरुद्ध जारी दमन की निंदा की। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि अमेरिकी सरकार उन चीनी अधिकारियों को जवाबदेह ठहराने के लिए सभी उपयुक्त उपायों का उपयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो इस दमन में शामिल हैं।
अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री राइली एम. बार्न्स
लोकतंत्र, मानवाधिकार और श्रम मामलों के लिए अमेरिका के सहायक विदेश मंत्री तथा अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता के लिए राजदूत राइली एम. बार्न्स ने वॉशिंगटन में आयोजित इंटरनेशनल रिलिजियस फ़्रीडम (IRF) सचिवालय के पीस बिल्डर्स फ़ोरम को संबोधित करते हुए कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता अमेरिका के स्थापना-काल से जुड़े मूल्यों में से एक है और उसकी विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण आधार भी है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो विश्वभर में धार्मिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देने और उसकी रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं तथा इसे अंतरराष्ट्रीय शांति, सुरक्षा और अमेरिका के राष्ट्रीय हितों की रक्षा का एक महत्वपूर्ण स्तंभ मानते हैं।
सीसीपी आस्था समूहों को निशाना बनाती है
चीन में मानवाधिकारों की स्थिति पर बोलते हुए बार्न्स ने कहा, “बीजिंग धार्मिक स्वतंत्रता की अनदेखी करता है और अधिकांश धार्मिक एवं आध्यात्मिक समूहों के प्रति शत्रुतापूर्ण नीतियाँ अपनाता है, जिनमें मुख्य रूप से मुस्लिम उइगर, तिब्बती बौद्ध, प्रोटेस्टेंट, कैथोलिक और फालुन गोंग अभ्यासी शामिल हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “प्रोटेस्टेंट ईसाई गृह-चर्चों के विरुद्ध सीसीपी का लगातार बढ़ता दमन धार्मिक स्वतंत्रता के लिए गंभीर खतरा है। पूरे चीन में पादरियों और चर्च नेताओं के चर्चों पर छापे मारे गए हैं तथा केवल अपनी आस्था का पालन करने के कारण उन्हें हिरासत में लेकर लंबी जेल की सज़ाएँ सुनाई गई हैं। ये छापे अलग-अलग घटनाएँ नहीं हैं, बल्कि ईसाई चर्चों, उनके नेताओं और अनुयायियों को चुप कराने और दबाने के लिए सीसीपी के सुनियोजित अभियान का हिस्सा हैं।”
उन्होंने बताया कि अमेरिका ने चीन द्वारा पंजीकरण-रहित ईसाई समूहों के साथ किए जा रहे व्यवहार पर सर्वोच्च स्तर पर चिंता व्यक्त की है। अक्टूबर 2025 में विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सीसीपी से आग्रह किया था कि वह “हिरासत में लिए गए चर्च नेताओं को तुरंत रिहा करे और गृह-चर्चों के सदस्यों सहित सभी धार्मिक आस्था रखने वाले लोगों को प्रतिशोध के भय के बिना धार्मिक गतिविधियाँ करने की अनुमति दे।”
फालुन गोंग पर हमलों को गंभीरता से लिया जाता है
सीसीपी द्वारा फालुन गोंग के दमन की शुरुआत (20 जुलाई, 1999) की वर्षगाँठ से पहले, अमेरिकी विदेश विभाग के इस वरिष्ठ अधिकारी ने एक बार फिर सार्वजनिक रूप से इस दमन की निंदा की और स्पष्ट रूप से कहा कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।
बार्न्स ने कहा, “20 जुलाई, फालुन गोंग को समाप्त करने के लिए सीसीपी द्वारा चलाए गए क्रूर अभियान की 27वीं वर्षगाँठ है। अमेरिकी सरकार फालुन गोंग जैसे धार्मिक समूहों के सदस्यों पर होने वाले हमलों को गंभीरता से लेती है और दमनकारी कृत्यों में शामिल चीनी अधिकारियों को जवाबदेह ठहराने के लिए सभी उपयुक्त साधनों का उपयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है।”
उत्पीड़न करने वालों पर प्रतिबंध और अंतरराष्ट्रीय दमन से निपटने के नए उपाय
बार्न्स ने धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अमेरिकी सरकार द्वारा हाल ही में अपनाए गए कई नए उपायों की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दिसंबर 2025 में विदेश मंत्री रुबियो द्वारा घोषित नई वीज़ा प्रतिबंध नीति केवल उन सरकारी अधिकारियों पर ही लागू नहीं होती जो धार्मिक स्वतंत्रता का गंभीर उल्लंघन करते हैं, बल्कि उन सभी व्यक्तियों—और उनके निकटतम परिवार के सदस्यों—पर भी लागू होती है, जो धार्मिक उत्पीड़न को अधिकृत करते हैं, उसमें भाग लेते हैं, उसका समर्थन करते हैं या उसे अंजाम देते हैं। ऐसे लोग अमेरिका में प्रवेश की पात्रता खो सकते हैं।
इसके अतिरिक्त, अमेरिकी सरकार विदेशों में स्थित अपने दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों, उच्च-स्तरीय राजनयिक संपर्कों तथा राष्ट्रपति के सार्वजनिक वक्तव्यों सहित विभिन्न माध्यमों से विवेक के बंदियों (Prisoners of Conscience) की स्वतंत्रता के लिए प्रयास जारी रखे हुए है। साथ ही, वह सीमापार दमन का भी सक्रिय रूप से मुकाबला कर रही है।
बार्न्स ने कहा, “सीमापार दमन अमेरिका के भीतर लोगों और संगठनों के विरुद्ध भी किया जाता है। हम उन लोगों को जवाबदेह ठहराने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं, जो हमारी संप्रभुता का उल्लंघन करते हैं और अमेरिकी भूमि पर अमेरिकियों को निशाना बनाते हैं।”
अपने भाषण के अंत में बार्न्स ने अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता के समर्थकों, गैर-सरकारी संगठनों, धार्मिक समूहों और विभिन्न सरकारों से सहयोग बढ़ाने का आवाहन किया। उन्होंने उनसे आग्रह किया कि वे धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघनों के प्रमाण अमेरिकी सरकार को उपलब्ध कराते रहें, नई वीज़ा प्रतिबंध नीति के क्रियान्वयन में सहयोग दें, धार्मिक उत्पीड़न में गंभीर रूप से शामिल लोगों को जवाबदेह ठहराने में सहायता करें तथा विवेक के बंदियों की रिहाई और विश्वभर में धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए मिलकर कार्य करें।
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