(Minghui.org) लगभग एक महीने पहले मेरे सहकर्मियों ने बताया कि वेतन बढ़ने वाला है। यह सुनकर मुझे बहुत खुशी हुई। कुछ दिनों बाद मानव संसाधन विभाग की एक सहकर्मी ने बताया कि केवल कुछ ही लोगों का वेतन बढ़ेगा, और मेरे विभाग में केवल एक व्यक्ति—यांग—को वेतन वृद्धि मिलेगी।
यह सुनकर मुझे आश्चर्य हुआ, क्योंकि यांग कोई विशेष काम नहीं करता था। मैंने सोचा, जो व्यक्ति केवल छोटे-मोटे काम और इधर-उधर के कार्य करता है, उसे वेतन वृद्धि क्यों मिलेगी? मेरी सहकर्मी ने बताया कि पर्यवेक्षक ने विशेष रूप से यांग के लिए वेतन वृद्धि की व्यवस्था की थी, क्योंकि वह बहुत मेहनत करता था।
मैंने मन ही मन सोचा, “यह तो बिल्कुल अनुचित है! जो लोग वास्तव में मुख्य काम कर रहे हैं, उन्हें वेतन वृद्धि नहीं मिल रही। हम पूरे वर्ष लगातार काम करते हैं, और इस वर्ष तो काम और भी अधिक है। नेतृत्व ने मेरे बारे में क्यों नहीं सोचा?” यह विचार लंबे समय तक मेरे मन में बना रहा। मैंने यह भी पूछ लिया कि यांग का वेतन कितना बढ़ने वाला है।
फा का अध्ययन करने के बाद मुझे एहसास हुआ कि इस प्रकार का विचार स्वार्थ और व्यक्तिगत लाभ के प्रति आसक्ति से जुड़ा हुआ है। मैंने निश्चय किया कि मुझे इस आसक्ति को छोड़ना होगा।
मुझे लगा कि मैंने व्यक्तिगत लाभ की इच्छा छोड़ दी है। लेकिन फिर मैंने सुना कि सरकारी सेवा के कर्मचारियों का भी वेतन बढ़ने वाला है। यह सुनकर मुझे खुशी हुई और मैंने सोचा कि मेरा नाम भी निश्चित रूप से उनमें होगा।
जब मानव संसाधन विभाग की सहकर्मी ने बताया कि सूची में मेरा नाम दिखाई नहीं दे रहा, तो मेरा मन अशांत हो गया। मैंने सोचा, “यदि मेरा नाम सूची में नहीं हुआ तो कितनी शर्मिंदगी होगी!” मैं चिंतित भी हुआ और क्रोधित भी। मैंने कुछ नहीं कहा, लेकिन मेरा मन पूरी तरह विचलित था।
कुछ देर बाद उसी सहकर्मी ने बताया कि उसने सूची गलत पढ़ ली थी और वास्तव में मेरा नाम उसमें था। यह सुनकर मुझे राहत मिली, लेकिन साथ ही मुझे यह भी समझ में आया कि मेरा मन इस घटना से प्रभावित हो चुका था।
समूह में फा अध्ययन के दौरान मुझे एहसास हुआ कि मेरे भीतर प्रतिष्ठा, व्यक्तिगत लाभ, ईर्ष्या और दूसरों से तुलना करने की आसक्तियाँ मौजूद थीं। मैंने सद्विचार भेजे ताकि स्वयं को दृढ़ कर सकूँ और इन नकारात्मक तत्वों को समाप्त कर सकूँ। मैंने अन्य अभ्यासियों को भी यह घटना बताई और कहा कि आज का समाज लोगों को भ्रमित कर उन्हें पतन की ओर ले जाने वाला जाल है, और मैं इसमें नहीं फँसूँगा।
मुझे लगा कि मैंने इन नकारात्मक तत्वों को छोड़ दिया है। मेरा मन शांत था और मेरे सद्विचार दृढ़ थे। लेकिन तभी अगली परीक्षा आ गई।
कुछ लोग वेतन वृद्धि की श्रेणी से संतुष्ट नहीं थे और उन्होंने वरिष्ठ प्रबंधन से आपत्ति जताई। परिणामस्वरूप वेतन वृद्धि की योजना रोक दी गई। प्रबंधन ने कहा कि इसे एक महीने के लिए टाल दिया जाएगा, लेकिन फिलहाल योजना को स्थगित करना पड़ा।
यह सुनते ही मेरा मन बैठ गया। मैंने सोचा, “हमें वेतन वृद्धि क्यों नहीं देंगे? मैं तो इसका लंबे समय से इंतज़ार कर रहा था।” जब यह नहीं हुआ तो मैं बहुत निराश हो गया। मेरा मन फिर से विचलित हो गया और मुझे लगा कि मेरे साथ अन्याय हुआ है। वेतन वृद्धि बहुत अधिक भी नहीं थी, फिर भी इसे देना इतना कठिन क्यों था?
मैंने फा का अध्ययन किया और अपने विचारों को सुधारा। मुझे समझ में आया कि मैंने अपनी आसक्तियों को पूरी तरह नहीं छोड़ा था और मेरी साधना अभी भी दृढ़ नहीं हुई थी। मैंने स्वयं से कहा, “मैं एक साधक हूँ। ये बुरे तत्व मुझे प्रभावित नहीं कर सकते। मैं इन्हें स्वीकार नहीं करता। समाज के नकारात्मक प्रभाव मुझे विचलित नहीं कर सकते। मैं एक दाफा अभ्यासी हूँ।”
इसके तुरंत बाद एक और परीक्षा आई। एक सहकर्मी मुझसे वेतन वृद्धि के बारे में बात करने लगा। उसने कहा, “वेतन वृद्धि इतनी भी बड़ी नहीं थी, फिर भी क्यों नहीं हुई? तुम इतना काम करते हो और इतना कम वेतन पाते हो। यह सचमुच बहुत अनुचित है।”
इस बार मैंने पूरी शांति से उत्तर दिया, “यदि वेतन वृद्धि मिलती है तो मैं उसे स्वीकार करूँगा, लेकिन यदि नहीं मिलती तो मैं उसकी माँग नहीं करूँगा। मैं अपना काम पूरी निष्ठा से करता रहूँगा और लगातार सीखता, निरीक्षण करता तथा और भी बेहतर कार्य करता रहूँगा।”
यह कहते ही मुझे ऐसा महसूस हुआ मानो मेरा पूरा शरीर अत्यंत हल्का हो गया हो और मेरी चेतना शुद्ध हो गई हो।
करुणापूर्वक मेरी देखभाल करने के लिए धन्यवाद, मास्टरजी!
कॉपीराइट © 1999-2026 Minghui.org. सर्वाधिकार सुरक्षित।