(Minghui.org) चीन में फालुन गोंग के विरुद्ध चल रहे दमन का शांतिपूर्ण ढंग से विरोध करते हुए 20 से अधिक वर्ष बीत चुके हैं। इस पूरे समय के दौरान दुनिया भर के फालुन गोंग अभ्यासी अपनी आस्था पर दृढ़ बने रहे हैं। 7 जुलाई 2026 की दोपहर को सिंगापुर के होंग लिम पार्क में अभ्यासी एकत्र हुए और चीन में चल रहे दमन के 27 वर्ष पूरे होने के अवसर पर गतिविधियाँ आयोजित कीं। उन्होंने लोगों से चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) द्वारा जारी दमन, जिसमें विदेशों तक फैलाया जा रहा उसका बढ़ता अंतरराष्ट्रीय दमन भी शामिल है, को समाप्त कराने में सहयोग देने की अपील की। कार्यक्रम के बाद के हिस्से में उन्होंने चीन में दमन के कारण अपनी जान गंवाने वाले साथी अभ्यासियों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की।
दिनभर आयोजित गतिविधियों में फालुन गोंग के अभ्यासों का प्रदर्शन, दमन को उजागर करने वाली कलाकृतियों की प्रदर्शनी, तथा फालुन गोंग के बारे में जानकारी देने वाले प्रदर्शन बोर्ड और बैनर शामिल थे। शाम को अभ्यासियों ने मोमबत्ती जलाकर शांतिपूर्ण श्रद्धांजलि सभा आयोजित की। वहाँ से गुजरने वाले अनेक लोगों ने अभ्यासियों से बातचीत की और चीन में हो रहे अत्याचारों के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त की।

चीनी कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा उत्पीड़न के 27 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में 7 जुलाई, 2026 को हांग लिम पार्क में अभ्यासी गतिविधियाँ आयोजित करते हैं (Minghui.org)





लोग फालुन गोंग और उत्पीड़न के बारे में जानने के लिए रुकते हैं। कई लोगों ने मानवाधिकारों के हनन के लिए सीसीपी की निंदा की (Minghui.org)

चीन में उत्पीड़न के प्रत्यक्ष परिणाम के रूप में मारे गए लोगों को याद करने के लिए 7 जुलाई को हांग लिम पार्क में अभ्यासियों ने मोमबत्ती की रोशनी में जुलूस निकाला (Minghui.org)
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) ने 20 जुलाई 1999 को फालुन गोंग के विरुद्ध देशव्यापी दमन अभियान शुरू किया। चीन में शासन ने पूरे सरकारी तंत्र को संगठित करके फालुन गोंग अभ्यासियों के विरुद्ध व्यवस्थित दमन चलाया। इस दमन के तरीकों में जबरन मस्तिष्क-परिवर्तन (ब्रेनवॉशिंग), निगरानी, उत्पीड़न, अवैध हिरासत, प्रताड़ना तथा जीवित लोगों से जबरन अंग निकालना शामिल हैं। हाल के वर्षों में शासन ने इस दमन को चीन की सीमाओं से बाहर भी विस्तारित कर दिया है और बदनाम करने के लक्षित अभियान, राजनयिक दबाव, हिंसक हमलों, इंटरनेट हमलों, मुकदमेबाज़ी, बम की धमकियों तथा अन्य प्रकार की परेशानियों और हस्तक्षेप के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दमन चला रहा है।
लोगों को पता है कि साम्यवाद खतरनाक है
उस दिन यूनाइटेड किंगडम, स्विट्ज़रलैंड, केन्या, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, ताइवान, भारत, मलेशिया, चीन और अन्य देशों से आए आगंतुकों ने इस कार्यक्रम को देखा। जब उन्हें सीसीपी द्वारा जबरन अंग निकाले जाने की जानकारी मिली, तो वे स्तब्ध रह गए और इस निरंतर जारी दमन की निंदा की। कुछ लोगों ने फालुन गोंग का अभ्यास सीखने में भी रुचि दिखाई।
भारत से आए एक व्यक्ति ने बताया कि उन्होंने अभी-अभी अपने मोबाइल फ़ोन पर फालुन गोंग के बारे में पढ़ा था और तभी पार्क में अभ्यासियों को देखा। उन्हें लगा कि यह एक अद्भुत संयोग है। दक्षिण अफ्रीका से आए दो मित्रों ने कहा कि पार्क का वातावरण बहुत शांतिपूर्ण था। उन्होंने अभ्यासियों को दक्षिण अफ्रीका में सीसीपी द्वारा किए जा रहे विभिन्न बुरे कार्यों के बारे में भी बताया। यूनाइटेड किंगडम के मैनचेस्टर से आए एक व्यक्ति ने कहा कि यह दूसरी बार है जब उन्होंने अभ्यासियों को देखा है, और वे चीन में वास्तव में क्या हो रहा है, इसे और गहराई से समझना चाहते हैं। मलेशिया से आए एक युवा चीनी व्यक्ति ने कहा कि वे फालुन गोंग की मुख्य पुस्तक ज़ुआन फालुन पढ़ना चाहते हैं।
पोलैंड से आईं मार्टिना और उनके दो बेटे अभ्यास प्रदर्शन देखने के लिए रुक गए। अभ्यासियों द्वारा भेंट किए गए छोटे कमल के फूल पाकर वे बहुत प्रसन्न हुए। मार्टिना ने अपने मोबाइल फ़ोन से अभ्यासियों के अभ्यासों का वीडियो बनाया और कहा कि उन्हें सत्य-करुणा-सहनशीलता कला प्रदर्शनी की कलाकृतियाँ बहुत पसंद आईं। उन्होंने अनेक चित्रों के फ़ोटो भी लिए।
"ऑर्गन हार्वेस्टिंग" (जबरन अंग निकाला जाना) शीर्षक वाली एक पेंटिंग ने विशेष रूप से उनका ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने उसके साथ दी गई जानकारी को ध्यान से पढ़ा और यह जानकर स्तब्ध रह गईं कि सीसीपी विवेक के बंदियों से जबरन अंग निकालती है। उन्होंने कहा, "मुझे वास्तव में पता ही नहीं था कि ऐसी घटनाएँ हो रही हैं।" उन्होंने आगे बताया कि चूँकि वे पोलैंड से हैं, इसलिए वे साम्यवादी विचारधारा और उसके खतरों को अच्छी तरह समझती हैं।
यूनाइटेड किंगडम से आए पाँच सदस्यों के एक परिवार ने चाइना ट्रिब्यूनल से संबंधित प्रदर्शनी को ध्यान से पढ़ा। इस प्रदर्शनी में सीसीपी द्वारा जबरन अंग निकाले जाने और मानवता के विरुद्ध अपराधों पर ट्रिब्यूनल की स्वतंत्र जाँच तथा उसके इस निष्कर्ष को प्रस्तुत किया गया था कि सीसीपी ने वास्तव में फालुन गोंग अभ्यासियों और अन्य विवेक के बंदियों से जबरन अंग निकाले हैं और यह कार्य आज भी जारी है। एक अभ्यासी ने जबरन अंग निकाले जाने के बारे में विस्तार से बताया और चाइना ट्रिब्यूनल द्वारा दिए गए निष्पक्ष निर्णय के प्रति अपनी हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त की। उस परिवार ने कहा कि वे इससे बहुत भावुक हो गए हैं और दमन के पीड़ितों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की।
सिंगापुर के अनेक स्थानीय निवासियों ने भी अभ्यासियों से बातचीत की और चीन में हो रहे दमन के बारे में जानकारी ली। उन्होंने न केवल मानवाधिकारों के मुद्दों पर चिंता व्यक्त की, बल्कि फालुन गोंग का अभ्यास करने से मिलने वाले स्वास्थ्य लाभों के बारे में भी पूछा। स्थानीय निवासी कियात ने कहा कि उन्हें पहली बार पता चला है कि फालुन गोंग सिंगापुर में विधिवत पंजीकृत एक संगठन है। एक अभ्यासी ने उन्हें बताया कि सिंगापुर फालुन दाफा एसोसिएशन की स्थापना 30 वर्ष पहले हुई थी और आज फालुन गोंग का अभ्यास दुनिया भर में किया जाता है।
उस अभ्यासी ने अपने साधना अनुभव भी साझा किए और बताया कि अभ्यास शुरू करने के बाद उनका स्वभाव शांत हुआ तथा लोगों के साथ उनके संबंध भी बेहतर हो गए। कियात की रुचि देखकर उन्होंने उन्हें फालुन गोंग के पाँचों अभ्यास सिखाए और निःशुल्क परिचयात्मक कक्षा में नामांकन करने की सलाह दी। उन्होंने यह भी बताया कि वे इन अभ्यासों को ऑनलाइन भी सीख सकते हैं।
चीनी पर्यटक: सीसीपी अच्छे लोगों से डरती है
चीन से आए अनेक लोग भी रुककर अभ्यासियों से बातचीत करने लगे और उनमें से कई ने सीसीपी तथा उसके संगठनों की सदस्यता छोड़ने का निर्णय लिया। कुछ ने कहा कि वे अपने मित्रों को भी सीसीपी से संबंध समाप्त करने के बारे में बताएँगे।
चीन से आए वेन ने बताया कि यह उनका सिंगापुर का पहला दौरा है और पहली बार उन्होंने फालुन गोंग अभ्यासियों को सार्वजनिक स्थान पर गतिविधियाँ आयोजित करते हुए देखा है। उन्होंने कहा कि कई वर्षों से वे सीसीपी के इंटरनेट फ़ायरवॉल को पार करके चीन के बाहर के मीडिया की रिपोर्टें पढ़ते रहे हैं। दो वर्ष पहले उन्होंने ऑनलाइन ज़ुआन फालुन भी पढ़ी थी, लेकिन आज पहली बार उनकी मुलाकात फालुन गोंग अभ्यासियों से हुई।
वे बहुत उत्साहित हुए और अभ्यासियों से लंबे समय तक बातचीत की। उन्होंने यंग पायनियर्स और कम्युनिस्ट यूथ लीग (सीसीपी के दो युवा संगठन) की अपनी सदस्यता त्यागने पर सहमति जताई। उनका कहना था कि चीन की वर्तमान कठिन परिस्थितियों में इससे उन्हें शुभ फल मिलने की आशा है।
जब उनसे फालुन गोंग पर हो रहे दमन के बारे में पूछा गया, तो वेन ने कहा, "यदि आप सच बताने वाली सामग्री बाँटने बाहर निकलते हैं, तो निगरानी कैमरे आपको पकड़ लेते हैं और फिर आपको बुरी तरह प्रताड़ित किया जाता है। वे बिल्कुल भी दया नहीं करते। सत्य-करुणा-सहनशीलता एक बहुत उच्च सिद्धांत है। सत्य-करुणा-सहनशीलता में क्या गलत है? यही तो सबसे बुनियादी सार्वभौमिक मूल्य हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "सीसीपी पूरी तरह से भ्रष्ट हो चुकी है। वह नहीं चाहती कि कोई अच्छा इंसान बने। यदि आप लोगों को आपदाओं से बचाने जाएँ या गरीबों की सहायता करें, तो भी वह ऐसे कार्यों पर रोक लगाती है। 1949 में अपनी स्थापना के बाद से उसने असंख्य लोगों और अनेक अच्छी चीज़ों को नष्ट किया है।"
वेन ने यह भी कहा कि वे लंबे समय से सीसीपी के झूठ को समझ चुके हैं: "मैंने सीसीपी द्वारा फालुन गोंग को बदनाम करने के लिए गढ़ी गई 'तियानमेन आत्मदाह' की कहानी देखी है। मैंने अमेरिका के कुछ स्थानों पर फालुन गोंग की परेड भी देखी हैं, जिनका बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता है, इसलिए सीसीपी उनसे डरती है। इसके अलावा, इतने सारे देशों की सरकारें मानती हैं कि फालुन गोंग लोगों को अच्छा इंसान बनना सिखाता है। यदि फालुन गोंग बुरा होता, तो इतने देश लोगों को इसका अभ्यास करने की अनुमति क्यों देते? केवल सीसीपी ही इसे प्रतिबंधित करती है। क्या यह कहा जा सकता है कि दूसरे देश अच्छे और बुरे में अंतर नहीं कर सकते?"
जब उनसे ज़ुआन फालुन के बारे में उनके विचार पूछे गए, तो वेन ने कहा, "मैं कर्म के सिद्धांत और अपने चरित्र को सुधारने जैसी बातों पर विश्वास करता हूँ, जैसा कि इस पुस्तक में बताया गया है।"
उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अभ्यासियों की ईमानदारी और करुणा स्पष्ट रूप से महसूस हुई।
मोमबत्ती श्रद्धांजलि सभा
संध्या होते ही अभ्यासियों ने उन हजारों अभ्यासियों की स्मृति में मोमबत्ती जलाकर शांतिपूर्ण श्रद्धांजलि सभा आयोजित की, जिन्होंने दमन के प्रत्यक्ष परिणामस्वरूप अपने प्राण गंवाए। 27 वर्षों से लगातार चले आ रहे इस दमन के दौरान, हर वर्ष ऐसी मोमबत्ती श्रद्धांजलि सभाएँ आयोजित की जाती रही हैं, ताकि उन अभ्यासियों को सम्मानपूर्वक याद किया जा सके जिन्होंने असाधारण कठिनाइयों के बावजूद अपनी आस्था और सिद्धांतों पर दृढ़ता बनाए रखी।
टिमटिमाती मोमबत्तियों की रोशनी आशा का प्रतीक बनकर चमक रही थी। अभ्यासियों का विश्वास है कि वह समय निकट है जब अंधकार समाप्त होगा और प्रकाश एक बार फिर संसार में लौटेगा।
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