(Minghui.org) मैं 60 वर्ष की एक सरकारी कर्मचारी हूँ। मैंने 2010 में फालुन दाफा (जिसे फालुन गोंग भी कहा जाता है) का अभ्यास शुरू किया। अभ्यास शुरू करने के कुछ ही समय बाद मेरी सभी बीमारियाँ समाप्त हो गईं। मुझे सचमुच महसूस हुआ कि मेरा शरीर हल्का हो गया है और रोगों से पूरी तरह मुक्त हो गया है। मैं इस अवसर को, जो हजारों वर्षों में केवल एक बार मिलता है, अत्यंत संजोकर रखती हूँ और स्वयं को संसार की सबसे भाग्यशाली व्यक्ति मानती हूँ।

मैंने अपने रिश्तेदारों, मित्रों, सहपाठियों और सहकर्मियों को दाफा से परिचित कराया। मैंने पुलिस थाने तथा अपने परिचितों को सच्चाई स्पष्ट करने वाले पत्र भी भेजे। साथ ही, अनुभवी अभ्यासियों के साथ मिलकर जानकारीपूर्ण सामग्री वितरित की और लोगों से आमने-सामने मिलकर उनके सामने हो रहे उत्पीड़न की सच्चाई बताई। मास्टरजी की सुरक्षा और करुणा के कारण मैं आज तक सुरक्षित रूप से अपने साधना मार्ग पर आगे बढ़ पाई हूँ।

हर अवसर पर लोगों को सच्चाई बताना

लगभग दस वर्ष पहले मेरी इच्छा थी कि मैं ड्राइविंग सीखूँ, लेकिन मेरे पति और बेटी दोनों इसके पक्ष में नहीं थे, इसलिए मैंने यह विचार छोड़ दिया। फिर दो वर्ष पहले, जब मैं विदेश यात्रा की योजना बना रही थी, तो कई लोगों ने सुझाव दिया कि ड्राइविंग सीख लेना उपयोगी रहेगा। इसलिए मैंने एक ड्राइविंग स्कूल में प्रवेश ले लिया।

ड्राइविंग परीक्षा के पहले भाग (यातायात नियमों की परीक्षा) से एक दिन पहले मेरे भतीजे ने कहा, "मैंने कभी आपकी उम्र के किसी व्यक्ति को ड्राइविंग सीखते नहीं देखा। अच्छा होगा कि मैं आपकी परीक्षा रद्द कर दूँ।" मैंने मुस्कराते हुए मना कर दिया और विश्वास के साथ कहा कि मैं परीक्षा अवश्य पास कर लूँगी।

पहला भाग कंप्यूटर आधारित था, जिसे मैंने आसानी से उत्तीर्ण कर लिया। दूसरा भाग (ऑफ-रोड ड्राइविंग कौशल परीक्षा) और तीसरा भाग (सड़क पर ड्राइविंग परीक्षा) दोनों व्यावहारिक थे। शुरू में मुझे लगा कि शायद नामांकन कराना सही निर्णय नहीं था, क्योंकि ड्राइविंग स्कूल बहुत दूर था। मुझे प्रतिदिन सुबह 6:30 बजे टैक्सी लेकर वहाँ पहुँचना पड़ता था। प्रत्येक प्रशिक्षण चरण 10 दिनों का था और हर दिन केवल तीन से चार बार, लगभग 10-10 मिनट के लिए गाड़ी चलाने का अवसर मिलता था।

मैं कुछ हिचकिचाई, क्योंकि मैंने देखा था कि बीस वर्ष की आयु वाले बहुत-से युवा भी इन परीक्षाओं को पास करने के लिए दो या उससे अधिक बार प्रयास करते हैं। मेरी आयु तब 59 वर्ष थी, इसलिए स्वाभाविक रूप से मुझे लगा कि मेरे लिए यह और भी कठिन होगा।

फिर मैंने सोचा, "मैं एक फालुन दाफा अभ्यासी हूँ। मैं निश्चित रूप से सफल होऊँगी। मुझे यह प्रमाणित करना चाहिए कि अभ्यासी असाधारण होते हैं और वे आधे प्रयास में दोगुना परिणाम प्राप्त कर सकते हैं।"

एक अभ्यासी किसी भी वातावरण में साधना कर सकता है। प्रतिदिन कक्षा में लगभग 10 से 20 लोग आते थे। उनमें अधिकांश युवा थे, जिनसे सामान्य परिस्थितियों में मेरा मिलना संभव नहीं था। यह उनसे परिचित होने और उन्हें बचाने का एक उत्कृष्ट अवसर था। मुझे विश्वास था कि मास्टरजी ने ही इन पूर्वनियत संबंध वाले लोगों से मेरी मुलाकात की व्यवस्था की थी।

संयोग से मेरा एक पड़ोसी उसी ड्राइविंग स्कूल में प्रशिक्षक था। उसके साथ मैं प्रतिदिन स्कूल आने-जाने लगी। उसी के माध्यम से मेरी पहचान ड्राइविंग स्कूल के मालिक और उनकी पत्नी से हुई। मालिक ने मुझे अभ्यास करने के लिए अपने कार्यालय का कंप्यूटर भी उपलब्ध करा दिया, ताकि मैं मॉक टेस्ट कर सकूँ।

मेरा पड़ोसी आश्चर्य से बोला, "मालिक आपके साथ बहुत अच्छा व्यवहार करते हैं। उन्होंने आज तक किसी दूसरे विद्यार्थी को कार्यालय का कंप्यूटर इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी!" मैंने उत्तर दिया, "यह सब आपकी वजह से है। मुझे आपका धन्यवाद करना चाहिए!"

ड्राइविंग स्कूल के मालिक के साथ बाद में काम के दौरान एक गंभीर दुर्घटना हुई। उनकी अकिलीज़ टेंडन (Achilles tendon) और एक धमनी कट गई। प्राथमिक उपचार के रूप में उनके पैर पर अस्थायी टूर्निकेट (रक्तस्राव रोकने के लिए कसकर पट्टी) लगाया गया, और मेरे पड़ोसी ने कई लाल बत्तियाँ पार करते हुए उन्हें आपातकालीन कक्ष तक पहुँचाया। वहाँ उनकी टेंडन और धमनी की सर्जरी की गई, जिसके बाद उन्हें घर पर आराम करके स्वस्थ होना पड़ा।

जब मुझे इस घटना का पता चला, तो मैंने उनसे मिलने और उन्हें उत्पीड़न की सच्चाई बताने का निश्चय किया। मैं उनके लिए फल और प्रोटीन पाउडर लेकर गई, लेकिन उस दिन वे घर पर नहीं थे। उनकी पत्नी थीं, इसलिए मैंने उन्हें बताया कि मैं फालुन दाफा का अभ्यास करती हूँ और यह बुद्ध परंपरा की एक उच्च स्तर की साधना पद्धति है। मैंने उन्हें यह भी बताया कि लाखों अभ्यासियों के व्यक्तिगत अनुभव इस बात के साक्षी हैं कि दाफा ने लोगों के स्वास्थ्य में चमत्कारिक सुधार किया है।

मैंने उनसे यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति सच्चे मन से "फालुन दाफा अच्छा है, सत्य-करुणा-सहनशीलता अच्छी है" का पठन करता है, तो उसे विपत्तियों से सुरक्षा मिल सकती है। उन्होंने मेरी बात स्वीकार की और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) तथा उससे संबद्ध संगठनों की सदस्यता छोड़ने पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने मेरा धन्यवाद किया और कहा कि वे मेरी सारी बातें अपने पति तक भी पहुँचाएँगी।

ड्राइविंग स्कूल में प्रशिक्षण के अगले छह सप्ताह के दौरान मैंने 30 से अधिक लोगों को सच्चाई बताई। इनमें अन्य विद्यार्थी, एक ड्राइविंग प्रशिक्षक और उनकी पत्नी, स्कूल के मालिक की पत्नी तथा उनकी माँ शामिल थे। केवल कार्यालय में काम करने वाले दो कर्मचारियों से बात करने का अवसर मुझे नहीं मिल सका, जिसका मुझे खेद रहा।

दयालुता लोगों को अधिक प्रभावी ढंग से बचाने में सहायक होती है

मैं प्रतिदिन अपना दोपहर का भोजन साथ लेकर जाती थी और अक्सर अन्य विद्यार्थियों के साथ अपना भोजन साझा करती थी। वे कहते थे कि मेरा हृदय बहुत दयालु है और मैं अच्छा भोजन बनाती हूँ। कभी-कभी मैं उन विद्यार्थियों के साथ अपना अभ्यास का समय भी बदल लेती थी। जिन्हें किसी कारणवश जल्दी थी। मैं चाहती थी  कि उनके मन में मेरी अच्छी छवि बने, ताकि बाद में दाफा के बारे में उनसे बात करना सहज हो सके।

विश्राम के समय या ड्राइविंग अभ्यास की प्रतीक्षा करते हुए मैं अन्य विद्यार्थियों से बातचीत का अवसर खोजती और उन्हें सच्चाई बताती। वे सभी मेरी सद्भावना को महसूस करते थे और मेरी बातों को खुले मन से सुनते थे। उनमें से एक मेरा माध्यमिक विद्यालय का सहपाठी निकला। वह भी सरकारी क्षेत्र में कार्यरत था और सीसीपी को पसंद नहीं करता था।

मैंने उससे पारंपरिक संस्कृति, देवता के प्रति श्रद्धा, देवलोक और पृथ्वी की एकता तथा इस सिद्धांत पर चर्चा की कि अच्छे कर्मों का अच्छा फल मिलता है और बुरे कर्मों का बुरा परिणाम। मैंने यह भी समझाया कि नास्तिकता और विकासवाद के सिद्धांत ने मानव समाज को नुकसान पहुँचाया है, जिसके कारण नैतिक पतन हुआ है और संसार में अनेक प्रकार की अव्यवस्था उत्पन्न हुई है।

मैंने उसे बताया कि सीसीपी के शासन में दया, धर्म, शिष्टाचार और विश्वसनीयता जैसे पारंपरिक सद्गुण लगभग समाप्त हो गए हैं। सीसीपी ने न केवल पारंपरिक संस्कृति को नष्ट किया है, बल्कि आस्था रखने वाले लोगों का उत्पीड़न भी किया है और यहाँ तक कि जीवित फालुन गोंग अभ्यासियों के अंगों की जबरन निकासी जैसा अभूतपूर्व अपराध भी किया है। मैंने समझाया कि देवलोक ऐसे अपराधों को सहन नहीं करेगा और अंततः सीसीपी का अंत होगा। वास्तव में, हाल के वर्षों में महामारी जैसी घटनाएँ भी इसी दिशा की चेतावनी के रूप में देखी जा सकती हैं।

मैंने उससे कहा कि देवताओं और बुद्धों ने लोगों को सुरक्षित रहने का एक मार्ग प्रदान किया है—सीसीपी, कम्युनिस्ट यूथ लीग और यंग पायनियर्स की सदस्यता छोड़ देना। ऐसा करने से व्यक्ति आने वाली विपत्तियों से बच सकता है। उसने तुरंत सहमति व्यक्त की और इन सभी संगठनों से अपना संबंध समाप्त करने का निर्णय लिया।

इसके बाद उसने मुझसे अपने एक मित्र से भी बात करने का अनुरोध किया। वह मित्र ड्राइविंग परीक्षा के दूसरे और तीसरे भाग में असफल हो चुका था और हमारे साथ दोबारा प्रशिक्षण ले रहा था। मैंने उसे भी सच्चाई बताई और उसे एक पेन्डेन्ट भेंट किया। उसने भी तीनों संगठनों की सदस्यता छोड़ने पर सहमति व्यक्त की और कुछ ही दिनों बाद दोनों परीक्षाएँ सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर लीं।

ड्राइविंग स्कूल की दुकान कैंटीन मालिक की माता अकेले संभालती थीं। जब भी मैं देखती कि उन पर काम का बहुत बोझ है, तो मैं स्वेच्छा से उनकी सहायता करती—गर्म पानी तैयार करना, नूडल्स बनाना, मेज़ें साफ़ करना और बर्तन धोना।

वे मेरी सहायता से बहुत प्रभावित हुईं और अपनी बहू के सामने मेरी प्रशंसा करने लगीं। मैंने उनसे कहा, "मैं फालुन गोंग की अभ्यासी हूँ। हमारे मास्टरजी हमें सिखाते हैं कि हम जहाँ भी रहें, अच्छे इंसान बनें।" मैं अक्सर उनसे दाफा के बारे में बातचीत करती थी। अंततः उन्होंने भी सीसीपी तथा उससे संबद्ध संगठनों की सदस्यता छोड़ने पर सहमति व्यक्त की।

एक दिन ड्राइविंग अभ्यास की प्रतीक्षा करते समय मेरी मुलाकात लगभग 20 वर्ष के एक युवक से हुई, जो मेरे पास बैठा था। जब मुझे पता चला कि वह पुलिस विभाग में नौकरी पाने के लिए सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहा है, तो मैंने उससे कहा, "युवा मित्र, मैं तुम्हें एक बहुत महत्वपूर्ण बात बताना चाहती हूँ।"

"तुम बुद्धिमान हो, स्वभाव से अच्छे हो और तुम्हारा भविष्य उज्ज्वल है। मुझे विश्वास है कि तुम परीक्षा अवश्य पास करोगे। लेकिन एक बात हमेशा याद रखना—कभी भी 610 कार्यालय या घरेलू सुरक्षा विभाग (डोमेस्टिक सिक्योरिटी डिवीजन) में काम मत करना और फालुन दाफा के उत्पीड़न में किसी भी प्रकार से भाग मत लेना।"

इसके बाद मैंने उसे बताया कि फालुन दाफा पूरी दुनिया में कितनी व्यापक रूप से फैल चुका है और उसने असंख्य लोगों को कितने लाभ पहुँचाए हैं। मैंने उसे सीसीपी द्वारा फालुन गोंग पर किए जा रहे उत्पीड़न, तियानमेन आत्मदाह की मनगढ़ंत घटना, राज्य-प्रायोजित जीवित अंगों की जबरन निकासी तथा इस सिद्धांत के बारे में भी बताया कि अच्छे कर्मों का अच्छा फल मिलता है और बुरे कर्मों का दंड अवश्य मिलता है।

फिर मैंने उसे समझाया कि सीसीपी और उससे संबद्ध संगठनों की सदस्यता कैसे छोड़ी जा सकती है। मैंने उससे यह भी कहा कि यदि वह सच्चे मन से "फालुन दाफा अच्छा है, सत्य-करुणा-सहनशीलता अच्छी है" का पठन करेगा, तो उसे आशीर्वाद प्राप्त होगा। उसने सहर्ष सहमति दी और मुझे उसके लिए बहुत खुशी हुई।

ड्राइविंग स्कूल में प्रत्येक दस दिन पर दूसरे भाग की परीक्षा आयोजित होती थी। परीक्षा से पहले सभी विद्यार्थी बहुत चिंतित रहते थे, क्योंकि असफल होने पर उनका समय और धन दोनों व्यर्थ हो जाते। जब भी मैं उन्हें सच्चाई बताती, तो अंत में उनसे कहती कि वे मन से "फालुन दाफा अच्छा है, सत्य-करुणा-सहनशीलता अच्छी है" का पठन करें। मैं कहती कि इससे उन्हें परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करने में सहायता मिलेगी। उन्होंने मेरी बात स्वीकार की और सभी सफल हुए।

यदि मैं अपने हृदय की साधना करूँ, तो मास्टरजी व्यवस्था कर देंगे

ड्राइविंग स्कूल में रहते हुए मुझे यह समझ में आया कि यदि मैं परीक्षाओं के लिए पंजीकरण थोड़ी देर से करूँ, तो मुझे और अधिक विद्यार्थियों से मिलने तथा उन्हें सच्चाई बताने का अवसर मिलेगा। जैसे ही मेरे मन में यह विचार आया, मास्टरजी ने सब कुछ व्यवस्थित कर दिया।

सन् 2022 में कोविड-19 के प्रकोप के कारण पूरे शहर और आसपास के क्षेत्रों में लॉकडाउन लगा दिया गया। सभी लोगों को एक सप्ताह तक घरों में रहना पड़ा। इससे तीन प्रशिक्षण बैचों के विद्यार्थी प्रभावित हुए। जब लॉकडाउन समाप्त हुआ, तो सभी प्रभावित विद्यार्थी फिर से ड्राइविंग स्कूल लौट आए। इस प्रकार लगभग 30 विद्यार्थी एक साथ उपस्थित थे और मुझे अधिक लोगों से मिलकर उनकी सहायता करने का अवसर मिला।

तीसरे भाग का प्रशिक्षण ड्राइविंग स्कूल के बाहर होता था, इसलिए वहाँ लोगों से बातचीत करने के अवसर कम मिलते थे। कुछ ऐसे विद्यार्थी थे जिनसे मैं अभी तक बात नहीं कर पाई थी। मैंने मन ही मन मास्टरजी से प्रार्थना की कि उनकी व्यवस्था ऐसी हो कि वे पहले मार्ग (रूट 1) पर आएँ। जब मैं तीसरे भाग की परीक्षा के लिए रूट 1 पर पहुँची, तो वास्तव में वे सभी वहीं मिले। उस समय मैंने मन ही मन बार-बार मास्टरजी का धन्यवाद किया।

मैं यह भी बताना चाहती हूँ कि मेरी ड्राइविंग क्षमता केवल सामान्य स्तर की थी और प्रशिक्षण के दौरान मुझसे अक्सर गलतियाँ हो जाती थीं। लेकिन दूसरे और तीसरे भाग की परीक्षा देते समय मैं मन ही मन लगातार "फालुन दाफा अच्छा है, सत्य-करुणा-सहनशीलता अच्छी है" का पठन करती रही और दोनों परीक्षाएँ पहली ही बार में उत्तीर्ण कर लीं।

कोच और ड्राइविंग स्कूल के मालिक दोनों ने आश्चर्य से कहा, "यह सचमुच उल्लेखनीय है कि आपने दोनों परीक्षाएँ पहली ही बार में पास कर लीं!" मेरे परिवार के सदस्य, यहाँ तक कि मेरे भतीजे ने भी माना कि यह वास्तव में आश्चर्यजनक था।

निष्कर्ष

लोगों को सच्चाई बताते हुए मुझे यह अनुभव हुआ है कि हर व्यवस्था मास्टरजी ही करते हैं। जब तक हमारे मन में लोगों को बचाने की सच्ची इच्छा होती है, मास्टरजी हमारी सहायता करते हैं। यदि हम दृढ़ सद्विचार बनाए रखें तथा पूर्वनियत संबंध वाले लोगों के प्रति दयालुता और करुणा से पेश आएँ, तो हम निश्चित रूप से अच्छा कार्य कर सकते हैं।

निस्संदेह, मुझमें अभी भी अनेक कमियाँ हैं। मुझे फा का अध्ययन और अधिक परिश्रम से करना है तथा अपने शिनशिंग (चरित्र एवं नैतिक स्तर) का निरंतर सुधार करना है। मुझे अनुभव होता है कि मास्टरजी हर क्षण मेरी देखभाल कर रहे हैं। मैं अपने शेष साधना-पथ पर दृढ़ता से आगे बढ़ूँगी, अपने भीतर और अधिक करुणा विकसित करूँगी, अपने ऐतिहासिक दायित्व को पूरा करूँगी और अंततः मास्टरजी के साथ अपने वास्तविक घर लौटूँगी।