(Minghui.org) चीन के चोंगचिंग की 82 वर्षीय महिला को 13 जून, 2026 को फालुन गोंग के बारे में जानकारीपूर्ण सामग्री वितरित करने के कारण गिरफ्तार कर लिया गया।

सुश्री झोउ लियांगरोंग को वर्तमान में बेइबेई पुलिस अस्पताल में रखा गया है। पुलिस का दावा है कि उन्हें हृदय विफलता (हार्ट फेल्योर) है और उपचार की आवश्यकता है। उनके परिवार को उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी गई है।

सुश्री झोउ जियांगबेई युज़ुई ऑर्चर्ड की सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं। उनके दादा एक प्रभावशाली बैंकर थे, जिन्होंने परिवार के लिए पर्याप्त संपत्ति छोड़ी थी। लेकिन जब चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) ने चीन पर सत्ता स्थापित की, तो स्थानीय अधिकारियों ने परिवार की संपत्ति जब्त कर ली और पूरे परिवार को निगरानी में रखा। 1996 में सुश्री झोउ और उनकी सात बहनों में से छह ने फालुन गोंग का अभ्यास शुरू किया। इसके बाद उन्होंने भौतिक लाभ को हल्के में लेना सीख लिया और परिवार की जब्त की गई संपत्ति वापस पाने का प्रयास छोड़ दिया।

20 जुलाई, 1999 को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) ने फालुन गोंग को समाप्त करने के उद्देश्य से देशव्यापी दमन अभियान शुरू किया। अपने विश्वास पर दृढ़ रहने के कारण झोउ बहनें फिर से निशाना बनाई गईं। उनकी एक बहन, सुश्री झोउ लियांगझू, 20 जुलाई, 2000 को अपनी बहन से मिलने जाने के कारण गिरफ्तार कर ली गईं और उन्हें 15 महीने के श्रम शिविर की सज़ा दी गई। 12 दिसंबर, 2002 को हिरासत से रिहा होने पर यातना के कारण उनकी हालत मृत्यु के कगार पर थी। दस महीने बाद, 17 अक्टूबर, 2003 को उनका निधन हो गया।

सुश्री झोउ लियांगरोंग पर हुआ दमन

पहली बार श्रम शिविर भेजा गया

दिसंबर 2000 में फालुन गोंग का अभ्यास करने के अधिकार की अपील करने के कारण सुश्री झोउ को गिरफ्तार कर दो वर्ष के श्रम शिविर की सज़ा दी गई। वहाँ उन्हें अक्सर हथकड़ियाँ लगाकर रखा जाता था और एकांत कारावास में बंद किया जाता था। विरोध स्वरूप उन्होंने कई बार भूख हड़ताल की।

मार्च 2002 में उन्हें चोंगचिंग महिला जबरन श्रम शिविर से सिचुआन प्रांत महिला कारागार स्थानांतरित कर दिया गया, जहाँ उन्हें ब्रेनवॉशिंग कार्यक्रम का सामना करना पड़ा।

दूसरी बार श्रम शिविर भेजा गया

19 मार्च, 2004 को सुश्री झोउ और उनकी छोटी बहन सुश्री झोउ लियांगजुआन को बस में लोगों से फालुन गोंग के बारे में बात करने के कारण गिरफ्तार कर लिया गया। अगले दिन पुलिस ने दोनों बहनों की पिटाई की, जिससे सुश्री झोउ लियांगरोंग को मस्तिष्काघात हो गया।

गंभीर स्थिति के बावजूद पुलिस उन्हें और उनकी बहन को नानआन जिला हिरासत केंद्र ले गई और 2 अप्रैल को दोनों को तीन वर्ष के श्रम शिविर की सज़ा सुना दी। चोंगचिंग  महिला जबरन श्रम शिविर में सज़ा के दौरान परिवार को उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी गई।

घर छोड़ने के लिए मजबूर

जुलाई 2011 की शुरुआत में युझोंग जिला घरेलू सुरक्षा कार्यालय के अधिकारियों का एक समूह उस घर में घुस गया जहाँ सुश्री झोउ अपनी बेटी के साथ रहती थीं। चूँकि वे घर पर नहीं थीं, इसलिए पुलिस ने उनकी बेटी से कहा कि फालुन गोंग संबंधी जानकारी वाले पत्र भेजने के कारण उनका नाम पहले से ही "वांछित" सूची में है। उन्हें न ढूँढ़ पाने पर पुलिस उनकी बेटी को लगातार परेशान करती रही।

29 मार्च, 2012 की शाम पुलिस फिर उनके घर पहुँची, लेकिन उन्हें गिरफ्तार करने का प्रयास फिर विफल रहा। गिरफ्तारी से बचने के लिए सुश्री झोउ को अपना घर छोड़कर अन्य स्थानों पर रहना पड़ा।

ब्रेनवॉशिंग केंद्र भेजा गया

लगातार पुलिस उत्पीड़न के कारण सुश्री झोउ समुदाय कार्यालय गईं ताकि अधिकारियों को फालुन गोंग के बारे में सच्चाई बता सकें। 26 अक्टूबर, 2016 को दूसरी बार वहाँ जाने पर उन्हें गिरफ्तार कर नानशान ब्रेनवॉशिंग केंद्र भेज दिया गया।

उत्पीड़न और घर की तलाशी

23 अगस्त, 2019 को कई पुलिस अधिकारी सुश्री झोउ के घर पहुँचे। नानआन जिला घरेलू सुरक्षा कार्यालय के अधिकारी शू ने उन्हें एक तस्वीर दिखाई और आरोप लगाया कि उन्होंने एक अन्य अभ्यासी सुश्री लियू चांगश्यू के साथ मिलकर फालुन गोंग के पर्चे वितरित किए थे।

पुलिस ने उनके फालुन गोंग की पुस्तकें, फालुन गोंग के संस्थापक का चित्र, व्याख्यानों की ऑडियो टेप तथा जानकारीपूर्ण सामग्री जब्त कर ली।

सुश्री झोउ ने उन्हें फालुन गोंग के बारे में सच्चाई समझाने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने सुनने से इनकार कर दिया।

इसके बाद पुलिस उन्हें दोपहर के समय हुआंगजुएया पुलिस स्टेशन ले गई और फिर नानपिंग पुलिस स्टेशन ले जाकर उनकी उँगलियों के निशान लिए तथा रक्त का नमूना एकत्र किया। उसी दिन दोपहर बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।

घर में नजरबंद किया गया

12 मई, 2020 की दोपहर नानशान पुलिस स्टेशन का एक अधिकारी सुश्री झोउ के घर पहुँचा और उन्हें आदेश दिया कि अगले दिन, जो विश्व फालुन दाफा दिवस था, वे घर से बाहर न निकलें। उन्होंने इस आदेश को मानने से इनकार कर दिया।

अगले दिन शाम लगभग 7 बजे कई पुलिस अधिकारी उनके घर में घुस आए और उन्हें छह महीने के लिए घर में नजरबंद कर दिया। उनकी दैनिक गतिविधियों पर निगरानी रखने के लिए दो पुलिस अधिकारियों को उनके घर के बाहर तैनात कर दिया गया।