(Minghui.org) चीन के चोंगछिंग की 83 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षिका वांग जिनशिउ को फालुन दाफा में अपने विश्वास के कारण 21 मई 2026 को जेल भेज दिया गया, जहाँ उन्हें डेढ़ वर्ष की सज़ा काटनी है। चीन की कम्युनिस्ट सरकार 1999 से इस आध्यात्मिक साधना पद्धति का दमन कर रही है।
सुश्री वांग की कठिनाइयाँ मई 2024 के अंत में शुरू हुईं, जब पुलिस ने सादे कपड़ों में अधिकारियों को उनके अपार्टमेंट के बाहर तैनात कर उनकी दैनिक गतिविधियों पर निगरानी रखनी शुरू कर दी। सितंबर 2024 में छिंगगांग स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के प्रमुख झांग शूबेई ने उनके विरुद्ध झूठा मामला तैयार करना शुरू किया।
6 नवंबर 2025 को छिंगगांग स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के अधिकारी शी यूयाओ और अन्य पुलिसकर्मी उन्हें उनके घर से गिरफ्तार कर ले गए। पुलिस ने उनके घर की तलाशी ली और पूछताछ के लिए उन्हें पुलिस स्टेशन ले गई। आधी रात के आसपास उन्हें रिहा कर दिया गया।
इसके बाद भी पुलिस उनकी लगातार निगरानी करती रही। उनके अपार्टमेंट के गलियारे में एक निगरानी कैमरा लगा दिया गया और जब भी वे बाहर जातीं, पुलिस उनका पीछा करती।
16 दिसंबर 2025 को जियांगबेई जिला न्यायालय में उनका मुकदमा चला और शीघ्र ही उन्हें डेढ़ वर्ष की जेल की सज़ा सुनाई गई। 20 मई 2026 को पुलिस ने उन्हें फिर से हिरासत में लिया और अगले दिन उन्हें ज़ौमा टाउन स्थित चोंगछिंग महिला जेल भेज दिया गया।
पूर्व में झेला गया दमन
छिंगगांग टाउन प्रायोगिक प्राथमिक विद्यालय की सेवानिवृत्त शिक्षिका सुश्री वांग पिछले 27 वर्षों से फालुन दाफा में अपने विश्वास पर दृढ़ रहने के कारण बार-बार निशाना बनाई जाती रही हैं।
इस नवीनतम कारावास से पहले उन्हें लगभग तीन वर्षों की कुल दो श्रम शिविर सजाएँ और चार वर्ष की एक जेल की सज़ा भुगतनी पड़ी थी।
32 वर्षों तक अध्यापन सेवा देने के बावजूद, अक्टूबर 1999 में उनके विद्यालय ने उनकी पेंशन रोक दी। न्याय की माँग करने के लिए उन्होंने अनेक सरकारी विभागों में बार-बार गुहार लगाई, लेकिन उन्हें कहीं से भी राहत नहीं मिली।
एक वर्ष का पहला श्रम शिविर, जिसे 11 महीने और बढ़ा दिया गया
अक्टूबर 1999 में सुश्री वांग फालुन दाफा का अभ्यास करने के अपने अधिकार की अपील करने के लिए बीजिंग गईं।
उन्हें तियानमेन चौक से गिरफ्तार कर फेंगताई स्टेडियम में हिरासत में रखा गया।
31 अक्टूबर को उन्हें वापस चोंगछिंग लाया गया और स्थानीय हिरासत केंद्र में बंद कर दिया गया, जहाँ प्रहरी ने उन्हें हथकड़ी और बेड़ियाँ पहनाईं।
कुछ ही समय बाद उन्हें एक वर्ष के लिए श्रम शिविर भेजने की सज़ा सुनाई गई। बाद में उनकी यह सज़ा 11 महीने और बढ़ा दी गई।
चोंगछिंग महिला जबरन श्रम शिविर में सज़ा काटते समय सुश्री वांग जिनशिउ को बिना किसी वेतन के लंबे समय तक कठोर श्रम करने के लिए मजबूर किया गया।
उन्हें प्रतिदिन सुबह 6 बजे से रात 11 बजे तक लगातार खड़े रहने या उकड़ूँ बैठने के लिए मजबूर किया जाता था, जिसके कारण उनके हाथ और पैर बुरी तरह सूज जाते थे।
गर्मी के मौसम में पहरेदार उन्हें तेज़ धूप में खड़ा रखते थे, जबकि सर्दियों में उन्हें खुली खिड़कियों के पास ठंड में खड़े रहने के लिए विवश किया जाता था।
पहरेदारों ने कई कैदियों को सुश्री वांग की निगरानी करने और उन्हें प्रताड़ित करने के लिए नियुक्त कर रखा था। वे उन्हें शौचालय जाने तक की अनुमति सीमित कर देते थे और स्नान करने भी नहीं देते थे।
एक बार एक कैदी ने उनके कंधे को ज़ोर से पकड़कर उनकी बाईं पसलियों पर पूरी ताकत से प्रहार किया। असहनीय दर्द के कारण वे तुरंत ज़मीन पर गिर पड़ीं। उनकी आँखों के आगे अँधेरा छा गया, उन्हें साँस लेने में कठिनाई होने लगी और उनके हाथों का रंग भी काला पड़ गया। यह दर्द एक महीने से भी अधिक समय तक बना रहा।
एक अन्य अवसर पर कैदियों ने उन्हें तीसरी मंज़िल से पहली मंज़िल तक सीढ़ियों पर घसीटते हुए नीचे ले गए और फिर वापस ऊपर घसीटकर ले आए।
चूँकि सुश्री वांग अपने विश्वास पर दृढ़ रहीं, इसलिए उनकी सज़ा में 11 महीने की अतिरिक्त वृद्धि कर दी गई। अंततः उन्हें 22 सितंबर 2001 को रिहा किया गया।
घर लौटने पर उन्हें यह जानकर गहरा आघात पहुँचा कि उनकी पेंशन रोक दी गई थी।
उन्होंने पाँच बार अपने पूर्व विद्यालय जाकर प्रधानाचार्य से इस विषय में बात करने का प्रयास किया, लेकिन हर बार प्रधानाचार्य ने उन्हें धमकी दी कि यदि वे फिर आईं, तो पुलिस बुलाकर उन्हें गिरफ्तार करवा देंगे या दोबारा श्रम शिविर भेज देंगे।
पुलिस भी समय-समय पर उन्हें परेशान करती रही। कई बार आधी रात को उनके घर का दरवाज़ा खटखटाकर उन्हें डराया और उत्पीड़ित किया जाता था।
चार वर्ष की जेल की सज़ा
18 जनवरी 2002 को सुश्री वांग जिनशिउ को सड़क पर फल खरीदते समय गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें पुलिस स्टेशन ले जाने के बाद एक पुलिस अधिकारी ने उनके सीने पर ज़ोर से पैर रखकर रौंदा।
इसके बाद उन्हें शौचालय में लगे लोहे के छल्लों से हथकड़ी लगाकर 52 घंटे तक बाँधकर रखा गया। इस दौरान उनके दोनों हाथ पूरी तरह फैलाकर बाँधे गए थे।
हिरासत के दौरान उनका परिवार उन्हें हर जगह खोजता रहा और गिरफ्तारी के तीसरे दिन उनका पता चला। जब परिवार ने उन्हें शौचालय में हथकड़ी से बँधा देखा, तो वे फूट-फूटकर रो पड़े। उन्हें यह भी पता चला कि गिरफ्तारी के बाद से उन्हें न तो भोजन दिया गया था और न ही पानी।
बाद में सुश्री वांग को एक हिरासत केंद्र भेज दिया गया। पुलिस स्टेशन में दी गई यातना के कारण वे कुछ भी खा नहीं पा रही थीं, फिर भी पहरेदारों ने उनके हाथों में हथकड़ियाँ और पैरों में बेड़ियाँ लगाए रखीं।
कुछ ही समय में उनकी हालत इतनी खराब हो गई कि वे न तो खड़ी हो सकती थीं और न ही अपना स्वयं का ध्यान रख सकती थीं।
कुछ महीनों बाद उन्हें मुकदमे के लिए उठाकर अदालत ले जाया गया, जहाँ उन्हें चार वर्ष की जेल की सज़ा सुनाई गई।
उन्हें योंगछुआन श्रम सुधार फार्म (जेल) भेज दिया गया, जहाँ उनका उत्पीड़न लगातार जारी रहा।
नए कैदियों के विभाग में एक वर्ष से अधिक समय बिताने के बाद उन्हें सामान्य विभाग में स्थानांतरित कर दिया गया। वहाँ दिन में उनसे बिना किसी वेतन के जबरन श्रम कराया जाता था और शाम को उन्हें जबरन ब्रेनवॉशिंग (वैचारिक परिवर्तन) सत्रों में भाग लेने के लिए मजबूर किया जाता था।
उनकी निगरानी के लिए नियुक्त कैदी उन्हें स्नान करने, कपड़े धोने, बर्तन साफ़ करने या शौचालय जाने तक की अनुमति नहीं देते थे। उन्हें नींद से भी वंचित रखा जाता था और किसी अन्य व्यक्ति से बात करने की भी मनाही थी।
एक दिन उन्हें अपने भोजन का स्वाद कुछ अजीब लगा। अगले दिन उन्होंने एक कैदी को उनके भोजन में पीसी हुई गोलियाँ मिलाते हुए पकड़ लिया।
उन्होंने इसकी शिकायत ड्यूटी पर मौजूद पहरेदार से की। पहरेदार ने स्वयं कोई जिम्मेदारी लेने के बजाय दोष उस कैदी पर डाल दिया और उनकी निगरानी के लिए किसी दूसरे कैदी को नियुक्त कर दिया।
लगातार उत्पीड़न और निगरानी
जनवरी 2006 में रिहा होने के बाद सुश्री वांग को पता चला कि अधिकारियों ने उनके घर के लैंडलाइन टेलीफोन की निगरानी (टैपिंग) कर रखी थी।
सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी उनके अपार्टमेंट के बाहर लगातार निगरानी करते रहते थे। पुलिस अधिकारी और स्थानीय आवासीय समिति के कर्मचारी भी समय-समय पर उनके घर जाकर उन्हें परेशान करते थे।
जुलाई 2009 में जब पुलिस सुश्री वांग को नहीं ढूँढ सकी, तो उसने स्थानीय फालुन दाफा के दो अन्य अभ्यासियों को गिरफ्तार कर लिया।
अन्य अभ्यासियों को परेशानी से बचाने के लिए सुश्री वांग को अपना घर छोड़कर दूसरे स्थान पर रहने के लिए मजबूर होना पड़ा। लगातार निगरानी के कारण उनका परिवार भी भय और तनाव में जीवन बिताने लगा।
दूसरी बार एक वर्ष के श्रम शिविर की सज़ा
13 जून 2011 को सड़क पर चलते समय सुश्री वांग को फिर गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस ने उनके घर की तलाशी ली और फालुन दाफा की पुस्तकें, पाँच कंप्यूटर, दो प्रिंटर, दो एमपी5 प्लेयर, एक एमपी3 प्लेयर, एक हार्ड ड्राइव, कुछ खाली डिस्क, कॉपी पेपर तथा 6,000 युआन से अधिक नकद राशि जब्त कर ली।
स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण स्थानीय हिरासत केंद्र ने दो बार उन्हें रखने से इनकार कर दिया।
इसके बावजूद पुलिस ने उन्हें रिहा नहीं किया, बल्कि उन्हें छिंगशान अस्पताल में हिरासत में रखा। वहाँ स्थानीय सरकार, पुलिस स्टेशन और आवासीय समिति के अधिकारी बारी-बारी से उनकी निगरानी करते रहे।
17 दिन बाद जब उनका फिर से स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया, तो उनका रक्तचाप अब भी अत्यधिक खतरनाक स्तर पर था। लेकिन डॉक्टर ने अपनी रिपोर्ट में वास्तविक स्तर से कहीं कम रक्तचाप दर्ज कर दिया।
जब पुलिस उन्हें दोबारा हिरासत केंद्र ले गई, तो वहाँ के अधिकारियों ने फिर से उन्हें रखने से इनकार कर दिया। हालांकि, कुछ घंटों बाद पुलिस ने किसी तरह हिरासत केंद्र के कर्मचारियों को राज़ी कर लिया और अंततः उन्हें वहाँ स्वीकार कर लिया।
सात दिन बाद सुश्री वांग जिनशिउ को फिर से एक वर्ष के श्रम शिविर की सज़ा सुना दी गई।लेकिन उनका रक्तचाप अत्यधिक ऊँचा था और हृदय की धड़कन भी अनियमित थी। इस कारण पुलिस ने उनके परिवार से 10,000 युआन वसूलने के बाद उन्हें रिहा कर दिया।
पुलिस ने आदेश दिया कि वे अपनी सज़ा घर पर ही पूरी करें, और उनके परिवार को उनकी ओर से मामले से संबंधित दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया।घर लौटने पर उनकी शारीरिक स्थिति अत्यंत कमजोर थी और वे ठीक से चल भी नहीं पा रही थीं।
बार-बार गिरफ्तारियाँ
2012 की पहली छमाही में सुश्री वांग को घरेलू सुरक्षा विभाग (डोमेस्टिक सिक्योरिटी ऑफिस) ले जाया गया। पुलिस ने उनके घर की भी तलाशी ली।
उन्हें धातु की पूछताछ कुर्सी पर बाँध दिया गया और बेड़ियाँ पहनाई गईं। उन्होंने इस दमन का विरोध किया, जिसके बाद लगभग पाँच घंटे बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।
25 सितंबर 2012 को, अपने भाई से मिलने के दौरान, उन्हें फिर से गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें लूशान गाँव ब्रेनवॉशिंग केंद्र ले जाया गया। अत्यधिक उच्च रक्तचाप और अनियमित हृदयगति के कारण तीन दिन बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।
7 मई 2013 को एक सामुदायिक कर्मचारी की शिकायत के बाद उन्हें फिर गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने उनके कपड़े उतरवाकर उनकी तलाशी ली और लगभग चार घंटे बाद उन्हें छोड़ दिया।
12 मई 2014 को स्थानीय 610 कार्यालय के एजेंटों ने सुश्री वांग को गिरफ्तार करने का प्रयास किया। जब वे उन्हें नहीं ढूँढ पाए, तो उन्होंने उनकी बेटी को ही गिरफ्तार कर लिया और उसे स्थानीय ब्रेनवॉशिंग केंद्र ले गए।
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