(Minghui.org) एक अधिकारी, जिसने कई दशकों तक चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) की न्याय व्यवस्था—विशेष रूप से कानूनी प्रणाली—में कार्य किया, फालुन गोंग के दमन में शामिल रहा। बाद में आत्मचिंतन करने पर उसे धीरे-धीरे अपने इस कृत्य पर पछावा होने लगा। नीचे वह बताता है कि किस प्रकार वह सहभागिता से सत्य की समझ तक पहुँचा।

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मैंने 30 से अधिक वर्षों तक सीसीपी की न्याय व्यवस्था, विशेषकर कानूनी प्रणाली, में काम किया। शुरू में मुझे अपना काम बहुत पसंद था और मैं अपने पद से संतुष्ट था। उस समय उच्च अधिकारी हमारे काम में बहुत कम हस्तक्षेप करते थे और काम अपेक्षाकृत आसान था।

1999 में जब सीसीपी ने फालुन गोंग का दमन शुरू किया, तो हमारा काम हर साल अधिक कठिन होता गया। दबाव बहुत बढ़ गया और विभिन्न स्तरों के अधिकारी लगातार हमारे काम में हस्तक्षेप करने लगे। परिणामस्वरूप, फालुन गोंग से जुड़े मामलों में वास्तविक कानून का पालन करना लगभग असंभव हो गया।

मैं ऐसे परिवार में पला-बढ़ा जहाँ पारंपरिक मूल्यों को महत्व दिया जाता था। मेरे माता-पिता अक्सर मुझसे कहते थे, "अपनी अंतरात्मा की आवाज़ का अनुसरण करो।" मैं कार्यस्थल पर भी यही करने का प्रयास करता था। लेकिन समय के साथ मेरे सहकर्मियों को मेरा व्यवहार "अजीब" लगने लगा। मेरे वरिष्ठ भी मुझसे असंतुष्ट रहने लगे, और अंततः मुझे अपनी अंतरात्मा के विरुद्ध कार्य करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

उदाहरण के लिए, मैं जानता था कि गिरफ्तार किए गए फालुन गोंग अभ्यासी निर्दोष हैं, फिर भी मुझे उनके मुकदमों में भाग लेना पड़ता था। हर बार मुझे भीतर से बहुत बुरा लगता था। लेकिन सीसीपी की विचारधारा से प्रभावित होने के कारण मैंने इन बातों पर गंभीरता से सोचना बंद कर दिया। धीरे-धीरे मेरी अंतरात्मा कुंठित होती गई और मैं एक अच्छे इंसान होने के मार्ग से दूर होता चला गया। मुझे लगा कि यदि जीवित रहना है और अपने पद पर बने रहना है, तो अंतरात्मा के विरुद्ध काम करना ही पड़ेगा; अन्यथा सहकर्मी और वरिष्ठ मेरा बहिष्कार करेंगे।

एक अभ्यासी ने अनेक बार मुझे फालुन दाफा और उसके उत्पीड़न के बारे में सच्चाई बताई, लेकिन मैंने 2024 तक उस पर विशेष ध्यान नहीं दिया। वर्षों के दौरान मैंने देखा कि मेरे एक-एक करके कई सहकर्मी दुर्भाग्य का सामना कर रहे थे, और मैंने पाया कि वे सभी इस उत्पीड़न में किसी न किसी रूप में शामिल थे। मैंने लगभग एक वर्ष तक इस विषय पर विचार किया और अंततः नौकरी छोड़ने का बहाना बनाकर अपना पूरा करियर समाप्त कर दिया।

नौकरी छोड़ने के बाद मैंने फालुन दाफा के विरुद्ध सीसीपी की उत्पीड़न नीति का स्वयं अध्ययन किया। तब मुझे समझ में आया कि फालुन दाफा के विरुद्ध फैलाई गई पार्टी की प्रचार सामग्री पूरी तरह निराधार थी। वास्तव में, फालुन दाफा तथा उसके सिद्धांत सत्य-करुणा-सहनशीलता चीन की आशा और भविष्य का प्रतिनिधित्व करते हैं।

जब मैं उन अभ्यासियों के साथ किए गए अपने व्यवहार को याद करता हूँ तो मुझे गहरा पछतावा होता है। दूसरों की दृष्टि में भले ही मैंने एक अच्छी नौकरी खो दी हो, लेकिन आज मेरे मन में शांति और संतोष है। सीसीपी की न्याय व्यवस्था में कार्य करते समय मुझे ऐसा अनुभव कभी नहीं हुआ था। भविष्य में मैं फालुन दाफा का समर्थन करूँगा और लोगों को इसके बारे में सच्चाई बताने की पूरी कोशिश करूँगा।

सीसीपी मानवता को नष्ट करती है। जब हम युवा होते हैं, तो हमारे भीतर उत्साह, आशाएँ और सपने होते हैं। लेकिन वर्षों तक मस्तिष्क-धोवन और विचारों पर नियंत्रण के बाद हमारी मानवता की जगह पार्टी संस्कृति ले लेती है। अपने पद पर रहते हुए मैं सीसीपी की रक्षा करने वाला एक उपकरण बन गया था, यहाँ तक कि हमने स्वयं को पार्टी के प्रति समर्पित करने की शपथ भी ली थी।

सीसीपी की व्यवस्था में झूठ बोलना और विवाहेतर संबंध रखना सामान्य बात मानी जाती है। परिवारों में लगातार संघर्ष होते रहते हैं और सीसीपी के अधिकारी प्रायः खराब स्वास्थ्य से भी पीड़ित रहते हैं। मैं आशा करता हूँ कि सीसीपी का पतन शीघ्र हो।

मैं सीसीपी की व्यवस्था छोड़ने के बाद जो समझ पाया, उसे लोगों के साथ साझा करना चाहता था। मेरे अनेक पूर्व सहकर्मियों ने भी सेवानिवृत्ति के बाद फालुन दाफा के उत्पीड़न के बारे में सच्चाई को समझा। मैं आशा करता हूँ कि अधिक से अधिक लोग पार्टी से स्वयं को अलग करें और पारंपरिक संस्कृति को अपनाएँ।

मैं फालुन दाफा के संस्थापक, मास्टरजी, का भी हृदय से धन्यवाद करना चाहता हूँ कि उन्होंने इस अद्भुत साधना पद्धति को संसार के सामने प्रस्तुत किया। अब मैं समझ पाया हूँ कि एक अच्छा इंसान होने का वास्तविक अर्थ क्या है, और इसी समझ ने मुझे फिर से सही मार्ग पर लौटा दिया।