(Minghui.org) संपादकीय टिप्पणी: जियांग्शी प्रांत स्थित नानचांग जेल पुरुष फालुन गोंग (फालुन दाफा) अभ्यासीयों को बंदी बनाकर रखने वाली प्रमुख जेलों में से एक है। Minghui.org की रिपोर्टों के अनुसार, वहाँ सैकड़ों अभ्यासीयों को बेरहमी से पीटा गया, बिजली के डंडों (इलेक्ट्रिक बैटन) से झटके दिए गए, कठोर श्रम करने के लिए मजबूर किया गया, नींद से वंचित रखा गया तथा विभिन्न प्रकार की शारीरिक और मानसिक यातनाएँ दी गईं।
जेल हिरासत के दौरान जिन अभ्यासीयों की मृत्यु हुई, उनमें श्री लान हू, श्री यांग पिंगशेंग, श्री लुओ लाइयांग, श्री लियू लेइमा और श्री झोउ चूमिंग शामिल हैं।
नीचे एक ऐसे अभ्यासी का व्यक्तिगत अनुभव प्रस्तुत है, जिसने महामारी के दौरान पाँच वर्ष की सज़ा काटते हुए इस जेल में समय बिताया। उनकी पहचान सुरक्षित रखने के लिए उनका नाम प्रकाशित नहीं किया गया है।
जनवरी 2021 में, कोविड-19 महामारी के दौरान, मुझे नानचांग जेल भेजा गया। सबसे पहले मुझे प्रवेश इकाई में रखा गया, जहाँ मेरा ब्रेनवॉशिंग किया गया।
लगभग एक महीने तक मुझे राजनीतिक शिक्षा लेने, जेल के नियम कंठस्थ करने, सैन्य शैली में मार्च करने तथा फालुन गोंग की बदनामी करने वाले वीडियो देखने के लिए मजबूर किया गया। इसके बाद मुझे जेल के टीम-1 में स्थानांतरित कर दिया गया।
टीम-1 में फालुन गोंग अभ्यासीयों पर यातना
टीम-1 में एक वस्त्र निर्माण कारखाना था। उसी समय मेरे साथ बंद अन्य अभ्यासीयों में श्री पान शुइचाई, श्री लियू चिउशेंग और श्री यांग दायुन शामिल थे।
एक युवा कप्तान वांग श्यांग, जो पुलिस अकादमी से स्नातक था, फालुन गोंग अभ्यासीयों के उत्पीड़न का प्रभारी था। उसने मुझे किसी से भी बात करने से मना कर दिया और मेरी चौबीसों घंटे निगरानी तथा यातना देने के लिए आठ कैदियों को नियुक्त कर दिया।
वांग स्वयं भी मुझे अक्सर प्रताड़ित करता था। एक रात उसने मेरे हाथ पीछे बाँध दिए और मुझे उसके सामने घुटनों के बल बैठने के लिए मजबूर किया। इसके बाद उसने मेरे चेहरे पर थप्पड़ मारे और अपनी उँगलियों से मेरी बाँहों और जाँघों को इतनी ज़ोर से नोचा कि गहरे नीले निशान पड़ गए। उन निशानों को ठीक होने में दो महीने लग गए।
जब मैंने कहा कि शारीरिक हमला करना अवैध है, तो उसने उत्तर दिया, "यह अवैध नहीं है। यह केवल नियमों के विरुद्ध है।"
वह श्री यांग को भी अक्सर दीवार की ओर मुँह करके कई दिनों तक खड़ा रहने के लिए मजबूर करता था, जिससे उनके पैरों में गंभीर सूजन आ जाती थी।
जेल का प्रशिक्षक छुई जुन फालुन गोंग के प्रति गहरी घृणा रखता था और अभ्यासीयों को अत्यंत क्रूरता से प्रताड़ित करता था।
कार्यशाला में मेरे पहले ही दिन उसने मुझे एक अँधेरे कमरे में बुलाया, घुटनों के बल बैठाया और बेरहमी से पीटा। जब मार खाते-खाते मैं गिर जाता, तो वह फिर से मुझे घुटनों के बल बैठने के लिए मजबूर करता।
मैंने उससे पूछा, "मैं अभी-अभी यहाँ आया हूँ। मैं आपको जानता भी नहीं हूँ। फिर आप मुझे क्यों पीट रहे हैं?"
उसने उत्तर दिया, "सिर्फ इसलिए कि तुम फालुन गोंग का अभ्यास करते हो।"
जब मैं सिलाई मशीन पर कपड़े सिल रहा होता, तो वह अचानक मुझे बुलाकर एक पैर पर एक घंटे तक बैठने (स्क्वाट करने) के लिए मजबूर करता, बिना पैर बदले।
हर रात, जब बाकी सभी कैदी सो जाते, तो वह मुझे फालुन गोंग की बदनामी करने वाले वीडियो दिखाता और उनका प्रत्येक शब्द याद करने के लिए बाध्य करता। यदि मैं उन्हें दोहरा नहीं पाता, तो मेरे साथ दुर्व्यवहार किया जाता।
एकांत कारावास
टीम लीडर लियू जियानशिन अत्यंत कठोर था। एक बार दोपहर के भोजन के बाद मैं लगभग एक मिनट तक मास्क पहनना भूल गया। इस छोटी-सी बात के लिए उसने मुझे अतिरिक्त दो महीने तक ब्रेनवॉशिंग कक्षा में भेज दिया।
इस तथाकथित "अध्ययन कक्षा" में कैदियों से दिन भर काम कराया जाता था और रात में दीवार की ओर मुँह करके खड़ा रहने के लिए मजबूर किया जाता था। उन्हें जेल के नियम बार-बार लिखने पड़ते थे तथा उनकी 24 घंटे निगरानी की जाती थी।
सन् 2022 में लियू को शिनजियांग और तिब्बत भेजा गया, जहाँ उसने उइगरों और तिब्बती लामाओं पर इस्तेमाल की जाने वाली यातना विधियाँ सीखीं। 2023 में लौटने के बाद उसने वही तरीके हमारे ऊपर लागू किए। इन यातनाओं के कारण श्री पान शुइचाई अत्यंत दुर्बल हो गए और उन्हें लंबे समय तक जेल अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा।
जेल अधिकारियों द्वारा उत्पीड़न
कप्तान लेई ज़िछ्यांग भी फालुन गोंग अभ्यासीयों के साथ अक्सर दुर्व्यवहार करता था। एक बार कार्यशाला के शौचालय में बिना "पास" के जाने पर मुझे दो महीने के लिए ब्रेनवॉशिंग कक्षा में भेज दिया गया। बाद में निर्धारित कार्य-कोटा पूरा न करने के कारण भी मुझे दो महीने तक वहीं रखा गया।
उप-कप्तान ली श्याओलियांग को फालुन गोंग अभ्यासीयों के साथ दुर्व्यवहार करने की क्षमता के कारण प्रशिक्षक पद पर पदोन्नत किया गया। वह अक्सर मुझसे और श्री यांग से हमारे विश्वास का त्याग करने वाले बयान लिखवाने की कोशिश करता था। वह भारी पुस्तकों से मेरे सिर पर प्रहार करता, मुझे छोटे स्टूल पर लंबे समय तक बैठने और एक पैर पर बैठने के लिए मजबूर करता। एक रात उसने मुझसे एक पैर पर बैठाकर तथाकथित "रूपांतरण रिपोर्ट" लिखवाई।
परिवार से मिलने के अधिकार से वंचित
वित्त विभाग के उप-कप्तान हू च्यांग ने कई वर्षों तक मुझे अपने परिवार से संपर्क करने से रोक दिया। मुझे न तो फ़ोन करने दिया गया और न ही पत्र लिखने की अनुमति दी गई। मेरा परिवार मेरी स्थिति से पूरी तरह अनजान था।
मेरे बड़े भाई ने मुझे हर जगह खोजा। जब वह जेल में मुझसे मिलने आए, तो उन्हें भी मिलने नहीं दिया गया। इस सदमे से वे गंभीर रूप से बीमार पड़ गए और अस्पताल में भर्ती हुए। वहीं उन्हें कोविड-19 हो गया और उनका निधन हो गया। मुझे इस पूरी घटना की जानकारी जेल से रिहा होने के बाद ही मिली।
चिकित्सकीय उपचार से वंचित
काम का लक्ष्य पूरा करने की जल्दी में सिलाई मशीन चलाते समय सुई मेरी तर्जनी में गहराई तक घुस गई और उसका एक टुकड़ा अंदर ही टूटकर रह गया। खून लगातार बहता रहा। मैंने एक प्रशिक्षक को इसकी सूचना दी और चिकित्सा कक्ष ले जाकर सुई निकालने का अनुरोध किया।
उसने मेरी बात अनसुनी कर दी और उल्टा मुझ पर "स्वयं को चोट पहुँचाने" का आरोप लगा दिया। मेरे पास कोई विकल्प नहीं था। मैंने कागज़ के टिशू से घाव बाँधा और फिर से काम करने लगा। कई दिनों बाद वह टूटी हुई सुई अपने आप बाहर निकल आई।
काली मिर्च स्प्रे और अत्यधिक कठोर श्रम
उप-कप्तान श्ये श्याओहुआ अक्सर मुझे एक पैर पर बैठने के लिए मजबूर करता था। वह भारी पुस्तकों से मेरे सिर पर भी प्रहार करता और तथाकथित "रूपांतरण रिपोर्ट" लिखवाता था। एक अन्य उप-कप्तान चिउ निंग, जिसने प्रांतीय मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई करने के बावजूद जेल प्रहरी बनना चुना, फालुन गोंग के उत्पीड़न में अत्यंत सक्रिय था।
वह मुझे धमकाता और रिपोर्ट लिखने के लिए मजबूर करता था। एक बार उसने मुझे एक कमरे में बुलाकर पीटा और मेरे चेहरे पर पेपर स्प्रे छिड़क दिया।
टीम-1 में कार्यभार अत्यंत भारी था। वहाँ कराया जाने वाला श्रम मुझे पहले युझांग जेल में झेली गई यातनाओं से भी अधिक कठोर लगा। अंततः पाँच वर्ष की सज़ा पूरी करने के बाद मुझे रिहा कर दिया गया। घर लौटने पर मुझे पता चला कि महामारी के दौरान मेरे परिवार के कई बुज़ुर्ग सदस्यों का निधन हो चुका था। मेरे नियोक्ता ने मुझे नौकरी से निकाल दिया तथा मेरी सामाजिक सुरक्षा और चिकित्सा बीमा भी निलंबित कर दिया।
आज मेरी आयु 60 वर्ष है। मुझे कहीं रोजगार नहीं मिल रहा है। इसके बावजूद पुलिस और स्थानीय पड़ोस समिति आज भी मुझे लगातार परेशान करती है और मेरी दैनिक गतिविधियों पर निगरानी रखती है।
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