(Minghui.org) चीन के लियाओनिंग प्रांत के डालियान शहर की 66 वर्षीय सुश्री श्यू च्यांग को फालुन गोंग का अभ्यास करने के कारण लंबी जेल की सज़ा काटते समय विभिन्न प्रकार की प्रताड़नाएँ झेलनी पड़ीं। हाल ही में उन्हें यूरेमिया (गुर्दों की गंभीर विफलता के कारण शरीर में विषैले अपशिष्ट पदार्थों का जमा हो जाना) होने का पता चला। गंभीर स्वास्थ्य स्थिति के बावजूद जेल प्रहरी उनसे अब भी बिना वेतन के जबरन श्रम करवा रहे हैं।

सुश्री श्यू को 11 जुलाई 2020 को गिरफ्तार किया गया था और बाद में उन्हें 9 वर्ष 1 माह की सज़ा सुनाई गई। 3 मार्च 2022 को उन्हें लियाओनिंग प्रांत महिला कारागार के बारहवें प्रभाग में भेजा गया।

यह जेल फालुन गोंग अभ्यासियों को उनके विश्वास का त्याग कराने के लिए शारीरिक यातना और ब्रेनवॉशिंग की विभिन्न यातनापूर्ण विधियों के उपयोग के लिए कुख्यात है। बारहवाँ प्रभाग, जिसे जेल के भीतर एक अलग जेल माना जाता है, विशेष रूप से उन अभ्यासियों के लिए निर्धारित है जो अपने विश्वास पर दृढ़ रहते हैं।

जेल में सुश्री श्यू को कैदियों द्वारा पीटा गया और बारहवें प्रभाग के भीतर अलग-अलग टीमों में स्थानांतरित किया जाता रहा। 18 जुलाई 2023 को जब उन्होंने एक अन्य अभ्यासी को अपनी पीड़ा के बारे में बताया, तो एक प्रहरी ने उन्हें एक महीने तक एकांत कारावास में रखा। रिहा होने के लगभग दस दिन बाद, उनके विश्वास की निंदा करने के लिए एक आलोचना सभा आयोजित की गई। एक प्रहरी ने उन्हें अपमानित करने के उद्देश्य से दीवार की ओर मुँह करके खड़ा रहने के लिए मजबूर किया।

पिछले कई वर्षों से जेल अधिकारियों ने कई कैदियों को चौबीसों घंटे उनकी निगरानी करने के लिए नियुक्त किया। जब भी उन्हें परिवार से मिलने या फोन पर बात करने की अनुमति मिलती, उनकी बातचीत पर प्रहरी कड़ी निगरानी रखते। मुलाक़ात के दौरान परिवार अक्सर पूछता कि क्या उन्हें यातनाएँ दी जा रही हैं, लेकिन भय के कारण वे कुछ कहने का साहस नहीं कर पातीं और केवल पीड़ा तथा डर से भरे भावों के माध्यम से अपनी स्थिति व्यक्त करतीं।

प्रहरी गाओ शिनजिंग ने उन्हें चेतावनी दी कि चूँकि वे अब भी अपने विश्वास पर अडिग हैं, इसलिए उन्हें कभी समय से पहले रिहा नहीं किया जाएगा। प्रहरी मेंग झूहान अक्सर उन्हें गालियाँ देता और विश्वास न छोड़ने पर दंडित करता। दोबारा सज़ा मिलने के भय से वे लगातार मानसिक तनाव में रहती थीं।

लगातार हो रहे दमन और मानसिक दबाव के कारण उनका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता गया। एक शारीरिक परीक्षण के दौरान उनमें यूरेमिया का पता चला, लेकिन बारहवें प्रभाग के अधिकारियों ने उन्हें इस रिपोर्ट की जानकारी नहीं दी। उन्होंने उनके परिवार द्वारा चिकित्सा अभिलेखों की बार-बार की गई माँग भी अस्वीकार कर दी।

मार्च 2026 में उन्हें ग्यारहवें प्रभाग (जहाँ वृद्ध और गंभीर रूप से बीमार कैदियों को रखा जाता है) में स्थानांतरित किया गया। वहीं के प्रहरियों ने उन्हें यूरेमिया की दवा दी, तब जाकर उन्हें पहली बार अपनी बीमारी का पता चला।

पिछले कुछ महीनों से सुश्री श्यू अत्यधिक कमजोरी, चक्कर, सुस्ती और गहरी निराशा महसूस कर रही हैं। उनकी स्थिति ऐसी है कि वे किसी भी समय गिर सकती हैं, फिर भी जेल प्रहरी उनसे अब भी गत्ते के डिब्बे मोड़ने का बिना वेतन का जबरन श्रम करवा रहे हैं।

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