(Minghui.org) मेरा जन्म 1980 के दशक में हुआ था। 1995 में जब मैंने अपनी माँ के साथ फालुन दाफा का अभ्यास शुरू किया, तो मेरी अनेक बीमारियाँ, जिनमें कोलाइटिस, हृदय रोग और गठिया शामिल थे, गायब हो गईं। मैंने दूसरों पर हावी होने की प्रवृत्ति, अहंकार, स्वार्थपूर्ण गणना करने की मानसिकता (मतलबी) और स्वार्थ को छोड़ दिया।। मैं धीरे-धीरे दयालु और सहनशील बन गई तथा अपने आसपास के लोगों और परिस्थितियों के साथ करुणा से व्यवहार करना सीख गई। शारीरिक और आध्यात्मिक दोनों रूपों में मुझे बहुत लाभ हुआ। 

द्वेष छोड़ना और अपने पति के साथ दयालुता से व्यवहार करना

मेरे विवाह के समय मेरे पति का परिवार बहुत गरीब था, जबकि मेरी परिस्थितियाँ उनसे कहीं बेहतर थीं। इसलिए वे मेरे साथ बहुत अच्छा व्यवहार करते थे और मुझे इस बात पर गर्व था। उस समय मैं साधना में परिश्रमी नहीं थी और सामान्य लोगों द्वारा सुखी माने जाने वाले जीवन में डूबी हुई थी। बाद में मुझे अवैध रूप से गिरफ्तार कर एक वर्ष तक हिरासत केंद्र में रखा गया। घर लौटने पर मुझे पता चला कि मेरे पति का एक विवाहित महिला के साथ संबंध था। इससे मेरे मन में उनके प्रति गहरा द्वेष भर गया। 

मैं घृणा से भर गई थी। मैंने कभी अपने पति को उनकी पारिवारिक गरीबी के कारण नीचा नहीं समझा था; इसके विपरीत, मैंने उनसे विवाह किया और हम दोनों ने मिलकर अनेक कठिनाइयों का सामना किया। जब जीवन आखिरकार बेहतर होने लगा, तब उन्होंने मुझे धोखा दिया। इस कारण मेरे मन में उनके प्रति गहरा द्वेष और आक्रोश भर गया। जब वे घर आते, तो मैं उनके साथ ठंडा और उपेक्षापूर्ण व्यवहार करती। मैं यह भूल गई थी कि मैं एक साधक हूँ और मुझे अपने लिए उच्चतर मानक बनाए रखने चाहिए। क्योंकि मैं लगातार उन्हें दूर धकेलती रही, अंततः उन्होंने घर आना ही छोड़ दिया।

लगभग तीन वर्ष बाद मेरे पति ने मुझे फोन करके तलाक की बात की। उन्होंने कहा कि घर मैं रख सकती हूँ क्योंकि वह मेरे कार्यस्थल के निकट था, लेकिन इसके बदले मुझे उन्हें 1,50,000 युआन देने होंगे। वास्तव में, हमारे क्षेत्र में मकानों की कीमतें बहुत कम थीं। यदि घर बेचकर उसका ऋण चुका दिया जाता, तो लगभग 2,00,000 युआन ही बचते, जिसका अर्थ था कि हम दोनों के हिस्से में लगभग 1,00,000 युआन आते। लेकिन वे 1,50,000 युआन चाहते थे। यदि मैं दाफा की अभ्यासी न होती, तो मैं कभी इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करती। आखिरकार, विवाहेतर संबंध उन्होंने बनाए थे। यदि मैं उन पर मुकदमा करती, तो संभव था कि मुझे ऐसा समझौता मिल जाता जिसमें उन्हें कुछ भी न मिलता। इसके अतिरिक्त, उनके पास सैकड़ों हजार युआन मूल्य का एक छोटा कारखाना, दो वाहन और बचत भी थी, जिनमें मेरा कानूनी अधिकार बनता था।

लेकिन मैंने स्वयं को याद दिलाया कि मैं एक साधक हूँ। मास्टरजी हमें सिखाते हैं कि हर व्यक्ति और हर परिस्थिति का सामना सत्यनिष्ठा-करुणा-सहनशीलता के सिद्धांतों के अनुसार करना चाहिए।

यद्यपि उन्होंने मेरे साथ अन्याय किया था, फिर भी मुझे उनसे घृणा नहीं करनी चाहिए थी। इसके बजाय, मुझे उनके प्रति करुणा रखनी थी और उन्हें तलाक न लेने के लिए समझाना था—अपने लिए नहीं, बल्कि उनके लिए। विवाहेतर संबंध में पड़कर उन्होंने अपने लिए बहुत अधिक कर्म उत्पन्न कर लिया था। मुझे चिंता थी कि यदि वे इसी मार्ग पर चलते रहे, तो उनका भविष्य कितना दुखद हो सकता है।

मैं उन्हें यूँ ही नहीं छोड़ सकती थी, इसलिए मैंने उनसे मिलने की व्यवस्था की। जब उन्होंने मेरे चेहरे पर शांत और करुणामय मुस्कान देखी, तो वे आश्चर्यचकित प्रतीत हुए। उन्होंने सिर झुका लिया और चुपचाप मेरी बातें सुनने लगे।

मैंने उनसे दयालुता और सौम्यता से बात की, साथ ही सद्विचार भेजते हुए उन दुष्ट तत्वों और वासना से संबंधित बुरे प्रभावों को समाप्त करने का प्रयास किया जो उन पर नियंत्रण कर रहे थे। सबसे पहले मैंने उनके स्वभाव में मौजूद अच्छाई को स्वीकार किया और मेरे माता-पिता के प्रति उनके अच्छे व्यवहार के लिए उनका धन्यवाद किया। विशेष रूप से, मैंने उस समय उनके प्रयासों के लिए आभार व्यक्त किया जब मैं दमन का सामना कर रही थी—उन्होंने मेरी सहायता के लिए वकील नियुक्त किया, मुझसे मिलने की व्यवस्था की, और हिरासत केंद्र में मेरे लिए हर महीने पैसे जमा कराए।

मैंने उनसे कहा कि मैं उन्हें क्षमा करती हूँ। विवाह स्वर्ग द्वारा निर्धारित संबंध है। विवाहेतर संबंध स्वर्गीय सिद्धांतों के अनुरूप नहीं होते; ऐसे कर्म व्यक्ति के लिए कर्म उत्पन्न करते हैं और गंभीर परिणाम ला सकते हैं। फालुन दाफा एक धर्मसम्मत साधना मार्ग है। यदि वे अपनी गलतियों को सुधारें और सद्भावना का मार्ग चुनें, तो एक दाफा अभ्यासी के परिवार के सदस्य होने के नाते मास्टरजी उनकी रक्षा करेंगे। जब अवसर आएगा, तो वे भी दाफा द्वारा उद्धार प्राप्त कर सकते हैं और उनका भविष्य उज्ज्वल हो सकता है।

मैंने उनसे यह भी कहा कि यदि वे फिर भी तलाक पर अड़े रहते हैं, तो मैं उनकी शर्त स्वीकार करूँगी और घर के बदले उन्हें 1,50,000 युआन दे दूँगी। मैं उनके किसी भी निर्णय का सम्मान करूँगी। लेकिन चाहे कुछ भी हो, उन्हें दाफा के प्रति सकारात्मक विचार बनाए रखने चाहिए, “फालुन दाफा अच्छा है, सत्यनिष्ठा-करुणा-सहनशीलता अच्छी है” को याद रखना चाहिए, और यदि वे कभी किसी खतरे या कठिनाई का सामना करें, तो मास्टरजी से सहायता माँगनी चाहिए।

शायद उन्होंने मेरी सच्चाई और ईमानदारी को महसूस किया। उन्होंने तलाक पर ज़ोर नहीं दिया। उनकी आँखों में आँसू आ गए और वे चुपचाप वहाँ से चले गए। उसके बाद उन्होंने फिर कभी तलाक की बात नहीं की।

मेरा मानना है कि संभवतः कुछ ऐसे कारक थे जो उन्हें घर लौटने से रोक रहे थे। शायद यह मेरी साधना में हस्तक्षेप करने के लिए पुरानी शक्तियों की व्यवस्था का एक रूप था। मुझे विश्वास है कि जैसे-जैसे मैं स्वयं को निरंतर सुधारती रहूँगी, वे अंततः सब कुछ समझ जाएँगे। फा असीम है और लोगों का उद्धार कर सकता है।

व्यक्तिगत लाभ को छोड़ना

मेरा बड़ा भाई पैसों का प्रबंधन अच्छी तरह नहीं कर पाता था। उसने कई बार व्यवसायों में निवेश किया, लेकिन हर बार उसे नुकसान हुआ। उसने रिश्तेदारों और मित्रों से 2 लाख युआन से भी अधिक उधार ले लिया था। अंततः मेरे पिता ने उसके सारे कर्ज़ चुका दिए।

जब भी मैं अपने माता-पिता से मिलने जाती, उनके लिए उपहार लेकर जाती और अक्सर उन्हें जेब खर्च के लिए पैसे भी देती थी। अपने जीवन के अंतिम वर्षों में मेरे पिता ने अपनी बचत मुझे सौंप दी, जो मेरे नाम के एक खाते में रखी हुई थी। उस खाते में 1,50,000 युआन थे, और उनकी इच्छा थी कि मैं उसे विरासत में प्राप्त करूँ।

दो वर्ष पहले मेरे पिता बीमार पड़े और उनका देहांत हो गया। अंतिम संस्कार की सारी व्यवस्था मेरे भाई ने संभाली। पिता के सामाजिक सुरक्षा खाते से मिले पैसे, अंतिम संस्कार संबंधी लाभ और मुआवज़े की राशि सब मेरे भाई के हाथ में चली गई। उसने गाँव के दोनों मकानों का स्वामित्व भी अपने नाम करवा लिया, जबकि पिता ने कहा था कि हम दोनों को एक-एक मकान मिलेगा।

कुछ समय बाद मेरे भाई ने मुझसे वह धन माँगा जो पिता ने मेरे लिए छोड़ा था। यदि मैं फालुन दाफा का अभ्यास न कर ती, तो निश्चित ही मैं उसे वह पैसा नहीं दे ती। लेकिन मैंने स्वयं को याद दिलाया कि मैं एक अभ्यासी हूँ और मास्टरजी हमें दूसरों के बारे में पहले सोचने की शिक्षा देते हैं।

साधना करने के कारण मेरा जीवन बहुत सादा है और मेरे खर्च भी कम हैं। मेरी नौकरी अपेक्षाकृत आसान है और अच्छी आय देती है। मैंने कुछ बचत भी कर रखी है और आरामदायक जीवन जी रही हूँ। दूसरी ओर, मेरे भाई के खर्च बहुत अधिक थे और उसकी बचत बहुत कम थी। मैंने पहले ही मन बना लिया था कि यदि उसे कभी कठिनाई का सामना करना पड़े, तो मैं पिता का छोड़ा हुआ धन उसे दे दूँगी।

जब उसे तत्काल पैसों की आवश्यकता पड़ी, तो जैसे-जैसे सावधि जमा परिपक्व होती गई, मैंने धीरे-धीरे 1,00,000 युआन निकालकर उसे दे दिए। वह बहुत खुश हुआ। शेष 50,000 युआन की जमा अभी परिपक्व नहीं हुई थी, इसलिए मैंने उसे अस्थायी रूप से अपने पास रखा और सोचा कि यदि भविष्य में उसे कोई आपात स्थिति आए, तो वह राशि भी उसे दे दूँगा।

मैंने देखा है कि पारिवारिक संपत्ति के लिए अनेक भाई-बहन कटु संघर्ष करते हैं और कभी-कभी जीवनभर के लिए एक-दूसरे से दूर हो जाते हैं। लेकिन क्योंकि मैं दाफा का अभ्यास करती हूँ, इसलिए मैं यश और व्यक्तिगत लाभ को हल्के में ले सकती हूँ और अपने आसपास के सभी लोगों के साथ दयालुता से व्यवहार कर सकती हूँ।

मेरे भाई ने एक अभ्यासी की विशाल हृदयता को देखा और दाफा की सुंदरता का अनुभव किया। यद्यपि वह स्वयं अभ्यास नहीं करता, फिर भी उसके मन में दाफा के प्रति सकारात्मक विचार हैं। मैंने जो दाफा कैलेंडर उसे दिया था, उसने उसे अपनी दुकान में सबसे प्रमुख स्थान पर लगाया। वह एक दाफा स्मृति-चिह्न भी अपने साथ रखता है।

जब भी कोई फालुन दाफा का उल्लेख करता है, वह उसके बारे में अच्छी बातें कहता है। परिणामस्वरूप उसे आशीर्वाद प्राप्त हुए। उसकी आर्थिक स्थिति धीरे-धीरे सुधरने लगी। उसके बेटे को नौकरी मिल गई और उसके ऊपर का बोझ भी काफी हल्का हो गया। अब वह प्रसन्नचित्त रहता है और अक्सर मुझे फोन करके मेरा हालचाल पूछता है।

अपनी साधना यात्रा पर पीछे मुड़कर देखने पर मुझे एहसास होता है कि यदि दाफा की शिक्षाओं ने मेरा मार्गदर्शन न किया होता, तो संभवतः मैं भी सामान्य लोगों की तरह यश, लाभ और भावनाओं के लिए संघर्ष करती रहती। शायद मेरा जीवन भी किसी दुखद स्थिति में पहुँच जाता।

फालुन दाफा का अभ्यास करने के कारण मेरा जीवन ऊँचा उठा है। मैंने अपनी आसक्तियों को छोड़ा, अपने चरित्र (शिनशिंग) में सुधार किया और स्वयं को दाफा के अनुरूप बनाया। मेरा भविष्य उज्ज्वल है। मैं सचमुच अनुभव करती हूँ कि मैं ब्रह्मांड के सबसे सुखी प्राणियों में से एक हूँ।

अब मैं पहले से अधिक युवा दिखाई देती हूँ। मेरा चेहरा गुलाबी आभा और तेज से भरपूर है। मेरी त्वचा चिकनी है, उस पर झुर्रियाँ नहीं हैं, और मेरे बाल घने तथा स्वस्थ हैं। जब मैं जानकारीपूर्ण सामग्री वितरित करती हूँ, तो कई मंज़िलों की सीढ़ियाँ चढ़ने पर भी मुझे थकान महसूस नहीं होती।

जब मैं लोगों को दमन के बारे में सच्चाई बताती हूँ, तो वे अक्सर टिप्पणी करते हैं कि मैं कितना युवा दिखाई दे ती हूँ। कई लोगों ने मुझसे कहा है कि वे भी फालुन दाफा का अभ्यास करना चाहते हैं।

मास्टरजी की असीम कृपा शब्दों से परे है। उनके करुणामय उद्धार का प्रतिदान करने का एकमात्र तरीका यही है कि मैं परिश्रमपूर्वक साधना करूँ और निरंतर स्वयं को बेहतर बनाती रहूँ। मैं मास्टरजी की सहायता करते हुए और अधिक लोगों को बचाने, अपने मिशन को पूरा करने तथा उनके दयालु उद्धार के योग्य बनने का प्रयास करूँगी।