(Minghui.org) मेरे पिता एक शिक्षक थे, और सांस्कृतिक क्रांति के दौरान उनकी सार्वजनिक रूप से निंदा की गई थी। मेरी माँ तनाव के कारण चल बसीं, और अपने पीछे मेरी दो बहनों तथा मुझे छोड़ गईं। हमारे परिवार को ग्रामीण क्षेत्र में भेज दिया गया। हमने मानो नरक जैसी परिस्थितियाँ झेलीं, और मुझे प्राथमिक विद्यालय की दूसरी कक्षा में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी। मेरे पिता ने पुनर्विवाह किया, और मेरी सौतेली माँ अपने पाँच बच्चों को हमारे परिवार में लेकर आईं। बाद में उन्होंने मेरे छोटे भाई को जन्म दिया। इस प्रकार, मेरे कुल आठ भाई-बहन हैं।
मेरे पति का ईमानदार और सरल किसान परिवार था। उन्होंने अपने जीवन में सबसे बड़ा अधिकारी केवल गाँव के चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) सचिव को ही देखा था।
मेरे फालुन दाफा का अभ्यास शुरू करने के एक वर्ष बाद ही दमन शुरू हो गया। टेलीविज़न पर दाफा को बदनाम करने और उसके विरुद्ध झूठे प्रचार फैलाने वाले कार्यक्रम प्रसारित किए जाने लगे। मैं सरकार के सामने अपनी बात रखने और स्थिति समझाने के लिए बीजिंग गई। जब मैं घर लौटी, तो मेरी बड़ी बहन और गुस्सैल स्वभाव वाली छोटी बहन मेरी ओर दौड़कर आईं। मेरी बड़ी बहन ने अपनी चप्पल से मुझे मारते हुए चिल्लाकर कहा, “तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई बीजिंग जाने की।"
मेरी छोटी बहन ने बिना एक शब्द कहे एक स्टूल उठाया और मेरे काँच के शोकेस पर दे मारा। बाद में मुझे दाफा के बारे में जानकारी देने वाले पर्चे बाँटने के कारण गिरफ्तार कर लिया गया। जब पुलिस मुझे घर से घसीटकर बाहर ले जा रही थी, तो मैंने अपने पैर को सिलाई मशीन के लोहे के पाये में फँसा लिया। इस दौरान मेरे पैर के पीछे की त्वचा तक फट गई, फिर भी मेरे पति, जो पहले सैनिक रह चुके थे, बिस्तर के किनारे बैठे रहे और न तो हिले, न ही एक शब्द बोले।
मैं जानती थी कि दाफा अच्छा है, लेकिन वे यह नहीं जानते थे। वे वास्तव में सीसीपी से बहुत भयभीत थे!
पुलिस ने मुझसे पूछा कि क्या मैं आगे भी अभ्यास जारी रखूँगी। उन्होंने कहा कि यदि मैंने “हाँ” कहा, तो मुझे जेल की सज़ा दी जाएगी। क्योंकि मैंने अपने विश्वास को त्यागने से इनकार कर दिया, मुझे आठ वर्ष के कारावास की सज़ा सुनाई गई और मेरे परिवार से मिलने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया।
मेरी हिरासत के दौरान मेरे पाँच रिश्तेदार—मेरे माता-पिता, मेरे ससुर, मेरी बुआ और मेरे चाचा—दुनिया से चले गए। फिर भी मुझे उनसे अंतिम बार मिलने या उन्हें अंतिम विदाई देने की अनुमति नहीं दी गई।
मेरी रिहाई के बाद, मेरे सौतेले भाई ने मुझसे पूछा कि क्या मैं किसी इमारत से कूदकर आत्महत्या करने की योजना बना रही हूँ। मैंने उसे समझाया कि दाफा की शिक्षाएँ हत्या को सख्ती से निषिद्ध करती हैं। मैंने कहा कि मास्टर ली ने हमें बताया है कि “आत्महत्या करना एक पाप है।” इसलिए फालुन गोंग के अभ्यासी कभी अपना जीवन स्वयं समाप्त नहीं करते। यह सुनकर उसने कहा, “अब मुझे तसल्ली हो गई।” तब उसे आखिरकार समझ में आया कि सीसीपी दाफा की प्रतिष्ठा को बदनाम करने के लिए झूठा प्रचार कर रही थी।
सन् 2015 में, मैंने लगभग 2 लाख अन्य फालुन दाफा अभ्यासियों के साथ मिलकर उस समय के सीसीपी नेता जियांग ज़ेमिन के विरुद्ध मुकदमा दायर किया, जिसने दमन अभियान की शुरुआत की थी। मेरे चाचा और मैंने यह मुकदमा एक साथ दायर किया।
सन् 2017 में, मैं एक बार फिर वादी बनी। यह कैसे हुआ?
मुकदमा जीतना
मेरी सौतेली बहन ने मेरे बेटे का परिचय एक युवती से कराया था। हमने सगाई के लिए दी जाने वाली राशि (वधू-उपहार) दे दी थी, विवाह की तिथि तय हो चुकी थी, और विवाह समारोह के लिए रेस्तराँ तथा संचालक (एमसी) का भुगतान भी कर दिया गया था। लेकिन अचानक उस युवती ने अपना मन बदल लिया और मेरे बेटे से विवाह करने से इंकार कर दिया।
इन सब मामलों में मेरी सौतेली बहन ने दोनों पक्षों के बीच लगातार बातचीत और समन्वय किया। यद्यपि मेरे पति और मेरे लिए पैसे बचाना आसान नहीं था, फिर भी हमने उसकी टेलीफोन पर हुए 400 युआन के खर्च की भरपाई कर दी। हम जानते थे कि हमें किसी और को नुकसान नहीं उठाने देना चाहिए।
लेकिन अप्रत्याशित रूप से, उस युवती ने केवल इसलिए सगाई की राशि लौटाने से इंकार कर दिया क्योंकि हम फालुन दाफा का अभ्यास करते थे। यहाँ तक कि उसने घमंड से कहा, “तुम्हारा परिवार फालुन दाफा का अभ्यास करता है। जाओ, मुकदमा कर दो—तुम निश्चित रूप से हार जाओगे!”
चूँकि इस मामले में फालुन दाफा के विरुद्ध हो रहे दमन का तत्व शामिल था, इसलिए यह केवल एक व्यक्तिगत विवाद नहीं रह गया था। जैसा कि मास्टरजी ने कहा: ... “मानव इतिहास का अस्तित्व इस उद्देश्य से नहीं है कि [लोग] मनुष्य बने रहना ही अपना अंतिम लक्ष्य समझें, और न ही मानव इतिहास दुष्ट तत्वों के लिए ऐसा खेल का मैदान है, जहाँ वे अपनी दुष्टता का प्रदर्शन करें।” ("2005 के यूरोपीय अनुभव साझाकरण सम्मेलन," मेहनती प्रगति की अनिवार्यता III)
अभ्यासी अच्छे इंसान बनने का प्रयास करते हैं, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि अच्छे लोगों को तंग किया जाए या उनके साथ अन्याय किया जाए। इसलिए मैंने उस युवती के विरुद्ध मुकदमा दायर करने के बारे में सोचना शुरू किया। मुझे कानून की कोई जानकारी नहीं थी। मैं सोचती थी, क्या मैं वास्तव में उसके खिलाफ मुकदमा कर सकती हूँ? एक दिन जब मैं मास्टरजी को अगरबत्ती अर्पित कर रही थी, तो होंग यिन II की कविता “एक विचार में” की यह पंक्ति मेरे मन में उभरी: “जब मैं देवलोक को सुधारता हूँ, पृथ्वी को सुधारता हूँ, और सभी जीवों को सुधारता हूँ।”
तब मुझे एहसास हुआ कि यह मामला देवलोकिय सिद्धांतों के अनुसार स्वीकार्य नहीं था। मैं पहले कभी अदालत नहीं गई थी, फिर भी मैंने वधू-उपहार (सगाई की राशि) वापस पाने के लिए मुकदमा दायर कर दिया। पहली सुनवाई में हम हार गए। तब मैंने उच्च अदालत में अपील की। इस बार अदालत हमारे घर से बहुत दूर थी, और उस युवती के पास मुकदमे में सहायता करने वाला व्यक्ति भी था। मैं क्या करती? मैंने बस आगे बढ़ते रहने का निश्चय किया।
मेरे भतीजे के पास एक कार थी। उसने मुझे अदालत ले जाने और वापस लाने की पेशकश की। वहाँ मुझे एक निष्पक्ष और न्यायप्रिय न्यायाधीश मिले, जिन्होंने मेरे पक्ष में निर्णय दिया। उन्होंने कहा:
“यदि यह विवाह-धोखाधड़ी है, तो यह विवाह-धोखाधड़ी ही है। इसका किसी व्यक्ति की आस्था से कोई संबंध नहीं है।”
अभ्यासियों का उत्पीड़न करने वालों को बेनकाब करना
पिछले वर्ष स्थानीय पुलिस ने गाँव तथा जमीनी स्तर के पार्टी अधिकारियों के साथ मिलकर फालुन दाफा अभ्यासियों को परेशान किया। वे अभ्यासियों की तस्वीरें लेते थे और उन पर यह लिखित बयान देने का दबाव डालते थे कि वे फालुन दाफा का अभ्यास नहीं करेंगे। मार्च के अंत में, गाँव का पार्टी सचिव एक पुलिस अधिकारी को लेकर मेरे घर आया। जब वे मुझे घर पर नहीं मिले, तो कई दिनों तक बाहर प्रतीक्षा करते रहे।
सितंबर में, मेरे एक बुज़ुर्ग रिश्तेदार का निधन हो गया। अंतिम संस्कार में मेरे सभी मित्र और रिश्तेदार शामिल हुए। वहाँ गाँव के पार्टी सचिव ने मेरी बहन को ढूँढ लिया और पूछा, “तुम्हारी बहन यहाँ क्यों नहीं आई?” मेरी बहन ने उत्तर दिया, “यदि मेरी बहन फालुन दाफा का अभ्यास छोड़ना चाहती, तो क्या वह आठ साल जेल में बिताती? उसे ढूँढना बंद कर दीजिए; वह अभ्यास छोड़ने का कोई बयान नहीं लिखेगी। यहाँ तक कि हम भी उसे ऐसा करने की अनुमति नहीं देंगे।” उस समय उसके पति भी उसके पास खड़े थे। उन्होंने नाराज़ होकर कहा, “तुम लोग भी कमाल करते हो! हम तुम्हें परेशान नहीं करते, फिर भी तुम लगातार लोगों को तंग करने में लगे रहते हो।”
मेरे जीजा पहले गाँव के पार्टी सचिव रह चुके थे, इसलिए वे सीसीपी के झूठे प्रचार से प्रभावित हो गए थे और फालुन दाफा के बारे में उनकी धारणा अच्छी नहीं थी। लेकिन जब उन्होंने वर्षों तक घटनाओं को अपनी आँखों से देखा, तो उनका दृष्टिकोण बदल गया।
जब गाँव के पार्टी सचिव ने देखा कि मेरा परिवार फालुन दाफा के पक्ष में बोल रहा है, तो उसने मेरे जीजा से पूछा, “क्या आप पार्टी के सदस्य हैं?” मेरे जीजा ने पलटकर पूछा, “तो उससे क्या फर्क पड़ता है? क्या आप कभी हांगकांग गए हैं? वहाँ हर जगह दाफा अभ्यासी हैं।” उनका आशय यह था कि चीन के बाहर भी दुनिया के अनेक देशों और क्षेत्रों में लोग फालुन दाफा का अभ्यास करते हैं। क्या सीसीपी उन सभी को अभ्यास करने से रोक सकती है?
फिर उन्होंने उस अधिकारी की ओर देखकर कहा, “क्या तुम्हें पता है कि मेरी बहन कितनी अच्छी इंसान है? यदि वह कोई सामान खरीदे और दुकानदार गलती से उसे ज़्यादा पैसे लौटा दे, तो वह दूर तक यात्रा करके भी वह पैसा वापस कर देगी। क्या तुम ऐसा करोगे?”
मेरे चाचा की पत्नी, जो वहीं खड़ी थीं, उन्होंने भी कहा, “मेरी बहन इतनी अच्छी इंसान है, फिर भी तुम लोगों ने इतने वर्षों तक उसका उत्पीड़न किया। अब भी तुम उसे परेशान कर रहे हो और लोगों को ‘फालुन दाफा अच्छा है’ कहने से रोकते हो!”
इसके बाद वहाँ मौजूद लोगों ने गाँव के पार्टी सचिव की आलोचना करनी शुरू कर दी। उसके पास कोई जवाब नहीं था, इसलिए उसने सफाई देते हुए कहा, “मुझे ऊपर से आदेश मिले हैं।” उसका मतलब था कि वह स्वयं भी सीसीपी के दबाव और आदेशों के अधीन था। जब मेरे भाई ने गाँव के पार्टी सचिव और गाँव के प्रधान को देखा, तो वह गुस्से में चिल्लाया, “तुम लोग अब भी मेरी बहन को क्यों परेशान कर रहे हो?” इस बार उन्होंने न तो कोई जवाब दिया और न ही कोई कार्रवाई करने की कोशिश की। वे चुप रहे।
हर व्यक्ति के हृदय में न्याय-अन्याय को परखने का एक तराज़ू होता है; लोगों के हृदय ही वास्तविक न्यायालय हैं। इन सभी वर्षों में, लोगों ने अभ्यासियों के शब्दों और कर्मों की तुलना सीसीपी के शब्दों और कर्मों से की है। कौन सद्विचारी है और कौन दुष्ट; कौन दयालु है और कौन क्रूर—लोग यह बात बहुत पहले ही समझ चुके हैं।
मेरे परिवार के अनेक सदस्यों ने सीसीपी से अपना संबंध तोड़ लिया है और दाफा की मुख्य पुस्तक ज़ुआन फालुन पढ़ी है। उनमें से कुछ गंभीर बीमारियों से स्वस्थ हो गए। कुछ ऐसे लोग, जिन्हें डॉक्टरों ने केवल दो महीने जीवित रहने की बात कही थी, एक वर्ष से भी अधिक समय तक जीवित रहे। मेरा एक रिश्तेदार भविष्यवाणियों और भाग्य बताने वाली विधाओं का अध्ययन करता था। ज़ुआन फालुन पढ़ने के बाद उसने उन अन्य अभ्यासों से संबंधित अपनी सारी सामग्री जला दी।
मेरी वह बहन, जिसने दाफा के लिए अपील करने हेतु मेरे बीजिंग जाने पर मुझे चप्पल से मारा था, अब स्वयं अभ्यास करने लगी है।
मैं जानती हूँ कि फालुन दाफा महान है! मेरा परिवार भी यह जानता है।
(Minghui.org पर 2026 विश्व फालुन दाफा दिवस के उपलक्ष्य में प्रकाशित चयनित अनुभव-साझा लेख से).
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