(Minghui.org) सु की उम्र 40 वर्ष के आसपास है। उनके पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द हुआ जिससे वे चीखने लगे। उन्होंने आराम करने के लिए कुछ दिनों की छुट्टी ली, लेकिन दर्द और बढ़ गया। उन्हें 20 दिनों तक गंभीर दस्त रहे। वे कमजोर और दुबले-पतले हो गए थे और बूढ़े आदमी की तरह चलने लगे थे। उन्हें पेशाब करने में दिक्कत हो रही थी और उन्हें अस्पताल जाकर कैथेटर लगवाना पड़ा।

जब मैं उनसे मिलने गया, तो वे बिस्तर पर लेटे हुए मास्टरजी के प्रवचनों की रिकॉर्डिंग सुन रहे थे । मैंने उन्हें याद दिलाया कि फा को सुनने के अलावा उन्हें अपने अंतर्मन में  भी झाँकने की ज़रूरत है। “आप तीनों काम अच्छे से कर रहे हैं, इसलिए शायद आपको कोई बड़ी समस्या न हो, लेकिन हो सकता है कि कुछ छोटी-मोटी समस्याएं हों जिन्हें आपने नज़रअंदाज़ कर दिया हो।”

दो दिन बाद कैथेटर निकाल दिया गया। फिर भी वह पेशाब नहीं कर पा रहे थे, इसलिए डॉक्टर ने दोबारा कैथेटर लगाया। डॉक्टर ने उन्हें बताया कि यह आखिरी बार होगा। अगर उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ, तो उन्हें किसी बड़े अस्पताल में जाकर प्रोस्टेट की सर्जरी करवानी पड़ेगी।

घर लौटने के बाद, सु ने आत्मनिरीक्षण किया और महसूस किया कि वह हमेशा एक नायक के रूप में पहचाना जाना चाहते थे। जब पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया, तो वह दृढ़ धार्मिक विचारों से भरा हुआ प्रतीत हुये और थाने तक पूरे रास्ते "फालुन दाफा अच्छा है" चिल्लाते रहे । वह खुद को आम लोगों के बीच एक नायक समझते थे ।

जैसे ही उन्होंने कैथेटर देखा, उन्हें अपने पेट के निचले हिस्से में एक ऐसा सुखद अहसास हुआ जो उन्होंने पहले कभी अनुभव नहीं किया था। दो दिन बाद, वे अस्पताल गए और कैथेटर निकलवाया, जिसके बाद वे सामान्य रूप से पेशाब करने में सक्षम हो गए। उन्होंने कहा, "यह तो चमत्कार है!" धीरे-धीरे उनका स्वास्थ्य और शक्ति वापस आ गई।

ली की कहानी

पिछले साल गर्मियों में, 60 वर्षीय ली को सीने में जकड़न और सांस लेने में तकलीफ महसूस हुई। दो हफ्तों तक उन्हें ठीक से नींद नहीं आई। उनके परिवार ने उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया। उनके सीने में एक बड़ा ट्यूमर पाया गया और उन्हें फेफड़ों के कैंसर के अंतिम चरण का पता चला। उन्होंने कीमोथेरेपी कराने से इनकार कर दिया और ट्यूमर से तरल पदार्थ निकालने के बाद घर चले गये। उन्होंने लगन से साधना करना शुरू किया और जल्दी ही फिर से स्वस्थ हो गये।

साल के अंत तक, लक्षण फिर से उभर आए और परिवार उन्हें दोबारा अस्पताल ले गया। डॉक्टर ने बताया कि उन्हें जिस प्रकार का फेफड़ों का कैंसर था, वह दुर्लभ था और कोई कारगर दवा उपलब्ध नहीं थी। घर लौटने के बाद,अभ्यासी उनके प्रति चिंतित हुए और उन्होंने धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन किया और उनके लिए सद्विचार भेजे।

अगले दिन मैं उनसे मिलने गया। उस रात मुझे एक भयानक सपना आया। मैंने देखा कि वह कभी इतिहास की एक महत्वपूर्ण हस्ती थी और उन्होंने उस जन्म में बहुत कर्म संचित किए थे। परिणामस्वरूप, पुरानी शक्तियाँ उनकी जान लेने की कोशिश कर रही थीं। वातावरण भयावह था और जब मैं जागा तो मैं डर गया था। मैंने तुरंत उनके लिए सद्विचार भेजे और धीरे-धीरे शांत हो गया। अपनी दिव्य दृष्टि से मैंने देखा कि एक आदमी चिमटे से चूल्हे से एक धधकती हुई कोयले की डंडी उठा रहा था और उसे ली के फेफड़ों में डालने का इरादा रखता था।

मैंने उससे कहा, “पिछले छह महीनों से हम ली की कमियों को समझने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सफल नहीं हो पाए। उसने हमें बताया कि वह कई सालों से लापरवाही कर रहे है और अपना समय मोबाइल फोन पर बर्बाद कर रहे है पिछले छह महीनों में उसने फ़ा का लगन से अध्ययन किया, लेकिन लोगों को बचाने के लिए सच्चाई को स्पष्ट नहीं किया । मैं आज रात उसके घर जाकर उसे याद दिलाऊंगा कि ठीक होने के बाद उसे और अधिक लोगों को बचाने और अपने नुकसान की भरपाई करने के लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए।” वह आदमी रुका, कुछ कदम पीछे हटा, चिमटा नीचे रखा और चला गया।

मैं उस रात ली के घर गया। वह इतने कमजोर थे कि खडे भी नहीं हो पा रहे थे उन्होंने मुझे बताया कि कुछ दिन पहले वह बेहोश हो गये थे और लगभग मर ही गये थे उन्होंने मास्टरजी से मदद की गुहार लगाई। मैंने उन्हें  अपनी देखी हुई बातें बताईं और कहा, “अभ्यासी होने के नाते, लोगों को बचाना हमारा दायित्व है। तुमने वर्षों तक लापरवाही बरती है, और बहुत से ऐसे लोग जिन्हें बचाया जाना चाहिए था, वे नहीं बच पाए। यह ईश्वर की दृष्टि में एक गंभीर मुद्दा है।” मैंने उन्हें  मास्टरजी से यह प्रतिज्ञा करने का सुझाव दिया कि ठीक होने के बाद वह लोगों को उत्पीड़न के बारे में सच्चाई बतायेगे, और उन्होंने ऐसा करने का वादा किया। इसके बाद उनका स्वास्थ्य तेजी से सुधर गया।