(Minghui.org) मैं 78 वर्ष का हूँ और मैंने 1998 में फालुन दाफा का अभ्यास शुरू किया। वर्षों से, मैं कई बार खतरे से बचा हूँ। परिस्थिति कितनी भी खतरनाक हो या विपत्ति कितनी भी कठिन हो, मैंने फालुन दाफा का अध्ययन और अभ्यास करना कभी नहीं छोड़ा। मास्टरजी और फालुन दाफा में अटूट विश्वास के साथ, मैं आज तक अपने साधना पथ पर चल पाया हूँ। नीचे कुछ ऐसे पाठ दिए गए हैं जो मैंने सीखे हैं।
मुझे सच्चा मार्ग मिल गया
मुझे कई बीमारियाँ थीं, हड्डियों में उभार और साइटिका की वजह से मेरी पीठ झुकी हुई थी। पेट की समस्याओं के कारण मुझे कई बार अस्पताल में भर्ती होना पड़ा और गुर्दे की पथरी से असहनीय दर्द होता था। मैं अपना दाहिना हाथ भी नहीं उठा पाता था। मेरी पत्नी का 40 वर्ष की आयु में निधन हो गया। मैं शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुका था, यह सोचकर परेशान था कि मेरा यह दुख कब खत्म होगा और मेरा जीवन मुझे कहाँ ले जा रहा है। उन दिनों को याद करना मेरे लिए असहनीय है।
सन् 1998 में मेरे चाचा ने मुझसे कहा, “तुम मेरे साथ फालुन दाफा का अभ्यास क्यों नहीं करते?” मैंने उनका प्रस्ताव ठुकरा दिया और कहा कि मैं केवल सच्चे मार्ग का अनुसरण करना चाहता हूँ। अगले दिन जब उन्होंने मुझे स्तब्ध देखा तो उन्होंने मुझसे फिर पूछा। मैंने तब भी इनकार कर दिया।
तीसरे दिन मेरे चाचा ने भी मुझसे यही बात कही। मैंने जवाब दिया, “मैं किशोरावस्था से ही साधना का सही तरीका खोज रहा हूँ। मुझे नहीं पता कि मुझे कब कोई सच्चा मास्टर मिलेगा जो मेरी इस कड़वाहट को दूर कर सके।” मेरे चाचा ने मुझसे इसे आजमाने के लिए कहा क्योंकि यह साधना बाकी सभी से अलग थी। उनकी दयालुता और आग्रह के कारण, मैं अनिच्छा से ही मान गया।
उन्होंने मुझे अभ्यास सिखाना शुरू किया और मुझे निर्देशों की रिकॉर्डिंग सुनने के लिए कहा। फिर उन्होंने अभ्यास संगीत चलाया। एक गूंजती हुई आवाज़ ने कहा, "पहला अभ्यास, बुद्ध के हज़ार हाथों का फैलाव।" मैंने ज़ोर से खिंचाव किया और महसूस किया कि एक शक्तिशाली बल द्वारा मेरे शरीर के हर एक एक्यूपंक्चर बिंदु और ऊर्जा चैनल खुल गए हैं। मेरा पूरा शरीर शुद्ध हो गया। मैं चकित रह गया और सोचने लगा, "हे भगवान, यही वह सच्चा मार्ग है जिसकी मुझे जीवन भर तलाश थी!" जब मैंने सभी पाँच अभ्यास पूरे कर लिए, तो मुझे पता चल गया कि मुझे मेरे मास्टरजी मिल गये है। मैं दाफा का अभ्यास शुरू करने के लिए बेताब था।
मैंने अपने घर पर फा-अध्ययन समूह शुरू किया और अन्य अभ्यासियों के साथ मिलकर अभ्यास किया। हमने सत्य, करुणा और सहनशीलता के सिद्धांतों का पालन किया और एक-दूसरे के साथ अपने ज्ञान का आदान-प्रदान करके स्वयं को बेहतर बनाया।
मेरी गुर्दे की पथरी दो महीने में मूत्र मार्ग से स्वतः ही निकल गई। मैं अपना हाथ सिर के ऊपर उठाने में भी सक्षम हो गया। मेरी सारी बीमारियाँ दूर हो गईं।
मास्टरजी हर समय मेरे साथ में रहते हैं
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के पूर्व प्रमुख जियांग ज़ेमिन ने 20 जुलाई, 1999 को दाफा अभ्यासियों पर अत्याचार करना शुरू कर दिया। मेरे मन में केवल एक ही विचार था: "अत्याचार चाहे कितना भी कठिन क्यों न हो, मैं अंत तक दृढ़ रहूंगा और साधना करता रहूंगा!" मुझे मास्टरजी और दाफा पर अटूट विश्वास था। दाफा के साथ हो रहे अन्याय को लोगों तक पहुंचाने के लिए, मैंने कस्बों और गांवों में पर्चे बांटने और पोस्टर लगाने शुरू कर दिए।
कुछ दर्जन बिजली के खंभों पर छोटे-छोटे चिपकने वाले पोस्टर लगाते समय, आखिरी मोड़ पर मुझे एक और खंभा दिखाई दिया। मैंने अपनी जेब से पोस्टर निकालने की कोशिश की, लेकिन कई बार कोशिश करने के बाद भी नाकाम रहा। तभी मैंने अपना सिर घुमाया और देखा कि कोई मुझे देख रहा है। बाल-बाल बच गया; अगर मास्टर ने मेरी रक्षा न की होती तो मैं बड़ी मुसीबत में पड़ सकता था।
मैं दाफा के पर्चे बांटने के लिए एक पहाड़ी गांव गया था। जब मैंने एक बड़ा जत्था बांट लिया, तो अचानक मैंने अपने सामने एक कार खड़ी देखी। चार लोग मुझे देख रहे थे। मैंने ऐसे चलना जारी रखा जैसे कुछ हुआ ही न हो। उनके जाने के बाद भी मैंने पर्चे बांटना जारी रखा और आधी रात के बाद घर लौटा।
मैं और मेरा एक साथी प्रचारक पर्चे बाँटने और पोस्टर लगाने के लिए एक दूसरे पहाड़ी गाँव गए थे। जैसे ही हमारा काम खत्म हुआ और हम घर जाने के लिए तैयार हुए, तभी हमारे सामने एक पुलिस की गाड़ी आ गई। फिर वह पीछे हट गई। हम चलते रहे, लेकिन पुलिसवाले फिर से हमारे सामने आ गए और पीछे हट गए। उन्होंने ऐसा चार बार किया। मैंने दूसरे प्रचारक से कहा, "शायद उन्हें पर्चे या पोस्टर मिल गए हों। चलो मोटरसाइकिल से घर चलते हैं।"
मेरे साथी को थोड़ी चिंता थी, इसलिए मैंने कहा, “हम जो कर रहे हैं वह ब्रह्मांड में सबसे सही काम है। मास्टरजी और फा हमारे साथ हैं, इसलिए हमें डरने की कोई ज़रूरत नहीं है। वे शायद सिर्फ़ शक कर रहे हैं। हमें पुरानी शक्तियों के किसी भी प्रभाव को पूरी तरह से नकारना होगा। हमें सही विचार और कर्म करने होंगे!” मास्टरजी की सुरक्षा में हम सुरक्षित घर लौट आए।
मैं कई कार दुर्घटनाओं में सुरक्षित रहा
मैं सीमेंट खरीदने के लिए साइकिल से जा रहा था, तभी पीछे से एक मोटरसाइकिल ने मुझे टक्कर मार दी। साइकिल कई मीटर दूर जा गिरी। 70 वर्ष से अधिक आयु का होने के बावजूद मैं हवा में उछल गया, लेकिन किसी तरह अपने पैरों पर खड़ा हो गया।
मोटरसाइकिल चालक लगभग 20 मीटर और आगे चला गया। युवा चालक मुझे स्तब्ध होकर देखता रहा और उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे। मैंने शांत भाव से उससे कहा, “युवक, मैं दाफा का अभ्यासी हूँ, मैं आपको कोई परेशानी नहीं पहुँचाऊँगा। कृपया याद रखें, 'फालुन दाफा अच्छा है, सत्य, करुणा और सहनशीलता अच्छी है।' अब आप जा सकते हैं।”
एक बार, दाफा सामग्री बांटने के बाद मैं घर लौट रहा था, तभी एक कार ने मुझे टक्कर मार दी और मैं गिर पड़ा। ड्राइवर का चेहरा पीला पड़ गया जब उसने देखा कि उसने एक बूढ़े आदमी को टक्कर मारी है। मैं धीरे से उठा और बोला, “चिंता मत कीजिए, युवती। मैं फालुन दाफा का अभ्यास करता हूँ। मैं आपको कोई परेशानी नहीं दूंगा।”
मैंने उसे बताया कि फालुन दाफा सही मार्ग है और उससे यह विश्वास करने को कहा कि "फालुन दाफा अच्छा है, सत्य, करुणा और सहनशीलता अच्छी है।" मैंने उससे सीसीपी और उसके सहयोगी संगठनों को छोड़ने का भी आग्रह किया, और वह तुरंत सहमत हो गई। फिर मैंने उसे घर ले जाने के लिए फालुन दाफा के कुछ पर्चे दिए।
उसके बाद मेरा हाथ दुखने लगा और लाल हो गया। मुझे लगा कि इससे एक अभ्यासी के रूप में मेरी छवि पर बुरा असर पड़ेगा। इसलिए अगले दिन अपने भतीजे के घर जाने से पहले, मैंने सभी बुरी शक्तियों को दूर करने के लिए सद्विचार भेजे और मास्टरजी से मदद मांगी। सुबह तक मेरा हाथ ठीक हो गया।
मैंने सद्विचारों को भेजने की शक्ति का प्रत्यक्ष अनुभव किया
एक बुजुर्ग अभ्यासी के बच्चे घर से दूर रहते थे, इसलिए उन्हें अपना ख्याल खुद रखना पड़ता था। मुझे उनकी चिंता थी और मैं अक्सर उनसे मिलने जाता था जब वे एक नए घर में रहने लगे, तो मैं उनके घर गया और उन्हें बिस्तर पर कराहते हुए सुना। मेरे दस्तक देने पर उन्होंने दरवाजा नहीं खोला। मैंने पुकारा, "आप दरवाजा क्यों नहीं खोल रहे?" उन्होंने कहा कि अंदर बहुत गंदगी है। मैंने जवाब दिया, "कोई बात नहीं। कृपया दरवाजा खोलिए।"
घर के अंदर बहुत गंदगी फैली हुई थी। बिस्तर से लेकर शौचालय तक हर जगह मल फैला हुआ था। फर्श पर गंदे डायपर बिखरे पड़े थे और पूरे घर से बदबू आ रही थी। मैंने एक-एक करके डायपर उठाकर कूड़ेदान में डाले। घर साफ करने के बाद मैं एक अन्य अभ्यासी के घर गया। मैंने उन्हें सारी स्थिति समझाई और सुझाव दिया कि बुजुर्ग अभ्यासी को बीमारी का कर्म फल भुगतना पड़ रहा है: “वे यहाँ दो हफ्ते पहले ही आए हैं। हमें उनकी मदद करनी चाहिए ताकि वे सद्विचार फैला सकें और अपने साधना क्षेत्र को शुद्ध कर सकें।”
मैं और वह अभ्यासी बुजुर्ग अभ्यासी के घर गए और उनके लिए सद्विचार भेजने लगे। एक घंटे के भीतर ही बुजुर्ग अभ्यासी में नई ऊर्जा आ गई। उनकी बहू को यह चमत्कार जैसा लगा।
एक अन्य अभ्यासी को फालुन दाफा का अभ्यास करने के कारण स्कूल से निकाल दिया गया। वह दिन भर रोती रहती थी और उसकी भूख भी खत्म हो गई थी। उसकी माँ ने उससे बात की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ, इसलिए उसने मुझसे मदद के लिए कहा।
मैंने रास्ते में सद्विचार भेजे। जैसे ही मैं दरवाजे से अंदर दाखिल हुआ, मैंने सोचा, “मैं फ़ा-सुधार काल का दाफ़ा शिष्य हूँ। मैं पुरानी शक्तियों को साथी अभ्यासियों को सताने नहीं दूँगा। सभी बुरी शक्तियाँ धूल में मिल जाएँगी!” सद्विचार भेजने के बाद वह युवा अभ्यासी और भी अधिक सकारात्मक हो गई।
मैं मास्टरजी द्वारा दिए गए तीनों कार्यों को पूरा करने की पूरी कोशिश करूंगा और अपने मिशन को पूरा करने के लिए उनके उपदेशों का लगन से पालन करूंगा।
कॉपीराइट © 1999-2026 Minghui.org. सर्वाधिकार सुरक्षित।