(Minghui.org) मैं 20 वर्षों से अधिक समय से फालुन दाफा का अभ्यास कर रही हूँ। अपनी इस यात्रा के दौरान, साधना के विभिन्न चरणों और स्तरों पर, मैंने स्वयं  मास्टरजी की शिक्षाओं की प्रामाणिकता का अनुभव किया है। मैंने यह महसूस किया है कि दाफा सामान्य से परे है, और मैंने इसके गहन ज्ञान का अनेक स्तरों पर अनुभव किया है, इसके चमत्कारी स्वरूप और अपार शक्ति का साक्षी रही हूँ। यहाँ कुछ उदाहरण दिए गए हैं।

स्वर्ग की सीढ़ी

जब मैंने पहली बार अभ्यास शुरू किया, तो फालुन दाफा के बारे में मेरी समझ सीमित थी, और मैं इसे केवल एक आनंददायक शारीरिक व्यायाम मानती थी। फा की शिक्षाओं का अध्ययन करने से मुझे बाद में समझ आया कि फालुन दाफा बौद्ध साधना का एक उच्च स्तरीय मार्ग है, और जैसे-जैसे मैंने अभ्यास जारी रखा, मेरी समझ गहरी होती गई।

एक रात, मुझे एक बेहद सजीव और गहन सपना आया। मैंने एक सीढ़ी देखी जो अनंत रूप से ऊपर की ओर फैली हुई थी, बादलों तक पहुँच रही थी, आसमान को छू रही थी। डर से मेरे शरीर में सिहरन दौड़ गई: भला कोई इतनी ऊँची सीढ़ी पर कैसे चढ़ सकता है? बाईं ओर सिर घुमाते ही मुझे एक विशाल, गंदा तालाब दिखाई दिया—कीचड़ भरा पानी जिसमें मल-मूत्र तैर रहा था और साँप रेंग रहे थे। अनगिनत लोग उसकी गंदी गहराई में संघर्ष कर रहे थे। “कितना घिनौना,” मैंने सोचा। “मैं वहाँ नीचे नहीं जाना चाहती।” तभी मुझे एहसास हुआ कि मैं पहले से ही सीढ़ी के तीसरे पायदान पर खडी थी।

मुझे यह सचमुच अद्भुत लगता है। मास्टरजी ने कहा था कि “साधना सीढ़ी चढ़ने के समान है।” (“खोया हुआ,” हांग यिन )

पहली नजर में यह मुश्किल लग सकता है, लेकिन जब तक हम लगन से अभ्यास करते रहेंगे, हम खुद को धीरे-धीरे बेहतर होते हुए और बिना एहसास किए ही आगे बढ़ते जाएंगे। आखिरकार, हम अपने लक्ष्य तक पहुंच जाएंगे।

मैंने मास्टरजी से कभी व्यक्तिगत रूप से मुलाकात नहीं की है, लेकिन अपनी साधना के दौरान, मैंने लगातार मास्टरजी के करुणामय आशीर्वाद, संरक्षण और मार्गदर्शन को महसूस किया है।

शरीर शुद्धिकरण

सन् 1999 की शुरुआत में, जब मैंने साधना करना शुरू ही की थी, एक सुबह मैं जल्दी उठी, मुझे चक्कर आ रहे थे, जी मिचला रहा था और तुरंत बाथरूम जाने की ज़रूरत थी। मैं तुरंत शौचालय की ओर भागी, टॉयलेट पर बैठी और मुझे दस्त हो रहे थे, मैंने अपनी गोद में रखे बेसिन में उल्टी कर दी। मैं ठंडे पसीने से भीग गई थी और ऐसा लग रहा था जैसे मैं बेहोश हो जाऊँगी।

एक डॉक्टर होने के नाते, मैं जानती थी कि यह एक आपातकालीन स्थिति है जिसमें तत्काल देखभाल की आवश्यकता है: IV फ्लूइड्स, मतली और दस्त की दवा, इलेक्ट्रोलाइट्स की पूर्ति, इत्यादि। लेकिन क्योंकि मैं फालुन दाफा का अभ्यास करती हूँ, मैं समझ गई कि मास्टरजी मेरे शरीर को शुद्ध कर रहे हैं। इसलिए मैं पूरी तरह शांत रही, जरा भी चिंतित नहीं हुई। उस सुबह 9 बजे तक, मैं बिल्कुल सामान्य महसूस कर रही थी। मैं तरोताजा और सतर्क होकर काम पर गई। उस क्षण, मैंने वास्तव में महसूस किया कि साधना कितनी अद्भुत होती है।

जैसे-जैसे मेरी साधना आगे बढ़ी, पेट दर्द, गुदा विदर और प्रसवोत्तर पीठ दर्द जैसी पुरानी बीमारियाँ धीरे-धीरे दूर हो गईं। अब मैं बिना किसी रोक-टोक के कुछ भी खा सकती थी। फा का अध्ययन करके मैंने सत्य, करुणा और सहनशीलता के आदर्शों का पालन करना शुरू किया। मेरे चरित्र में सुधार हुआ और जीवन के प्रति मेरा दृष्टिकोण बदल गया। मैं मानसिक रूप से स्वस्थ, आशावादी और सकारात्मक बन गई।

सत्ताईस साल बीत गए हैं, और मैं बीमारी से मुक्त हूँ। जो व्यक्ति हमेशा दवाओं पर निर्भर रहता था, उसके लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। मास्टरजी की करुणापूर्ण सुरक्षा और दाफा के मार्गदर्शन के बिना यह बिलकुल असंभव होता।

अदृश्य सत्ताओं के प्रति आसक्ति को दूर करना 

मास्टरजी ने हमें बताया:

“आपके घर का वातावरण भी साफ-सुथरा होना चाहिए। यदि आपका वातावरण साफ-सुथरा नहीं है और आपके जीवन में तरह-तरह की बाधाएं हैं, तो आप साधना कैसे कर सकते हैं?” (छठा व्याख्यान, जुआन फालुन )

मेरे अनुभव में भी यह बात सच साबित हुई है। बचपन में मैं अक्सर खेतों से खरपतवार (घास) निकालती और मवेशियों को चारा खिलाती थी ताकि काम के बदले मुझे मोबदला मिल सकें। एक दिन, मेरा सामना एक ऐसे भयानक सांप से हुआ कि किसी और को उसे मेरे लिए मारना पड़ा। उसके बाद से, मुझे सांपों से डर लगने लगा। सालों बाद भी, अगर मुझे सड़क पर मरा हुआ सांप भी दिख जाए, तो मेरी धड़कन तेज हो जाती है, दिमाग सुन्न हो जाता है और मेरे पैर कांपने लगते हैं। आप कल्पना कर सकते हैं कि मैं कितना डरी हुई थी।

जुआन फालुन के तीसरे व्याख्यान में " आत्मा या पशु का वास " का अध्ययन करते समय मुझे फिर से भय का अनुभव हुआ । उस समय मुझे ठीक से समझ नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है। फिर एक रात मुझे एक बहुत ही सजीव सपना आया: मैं अपने बैठक कक्ष में खडी थी, तभी पाँच साँप, जिनके सिर उठे हुए थे, एक बड़ा साँप बीच में और दो छोटे साँप दोनों ओर, एक कतार में खड़े होकर मेरी ओर रेंगने लगे। उसी क्षण मैंने देखा कि फालुन ने उन्हें तुरंत नष्ट कर दिया।

अगली सुबह जब मैं जागी, तो मुझे समझ आया कि मास्टरजी ने मेरे और मेरे घर के वातावरण से जुड़ी बुरी आत्माओं को दूर करने में मेरी मदद की थी। तब से, मुझे सांपों के बारे में सोचने या फा के उस भाग का अध्ययन करने पर डर नहीं लगता था। मुझे समझ आया कि डर मुझे नहीं था, बल्कि उन जुड़ी हुई शक्तियों को था। जैसे-जैसे मैंने फा का अध्ययन और अभ्यास किया, फा की शक्ति ने नकारात्मक आत्माओं को नष्ट कर दिया और मेरा डर गायब हो गया।

मेरे शरीर का और अधिक शुद्धिकरण

कुछ समय अभ्यास करने के बाद, एक सुबह मैं एकदम शांत मन से जागी और अचानक अपने सिर के ऊपरी हिस्से से एक गर्म ऊर्जा की धारा बहती हुई महसूस की, जो मेरे पूरे शरीर में फैल गई। यह सर्दियों में गर्म पानी से नहाने जैसा था, लेकिन ऊर्जा का यह संचार अत्यंत रहस्यमय और दिव्य अनुभव था, जो मेरे भीतर और बाहर, मेरे अस्तित्व के हर कण में समा गया। मैंने खुद को बेहद शुद्ध महसूस किया, और वह स्मृति आज भी मेरे मन में ताज़ा है।

मास्टर ने यह भी उल्लेख किया:

“बुद्ध संप्रदाय की अन्य साधना पद्धतियों के शिष्यों की तरह, फालुन दाफा के शिष्य भी अन्य लोकों में उच्च कोटि के मास्टरजी द्वारा अनेक बार गौंडिंग (धार्मिक विधि ) का अनुभव करेंगे; परन्तु आपको इसके बारे में बताया नहीं जाएगा। असाधारण क्षमताओं वाले लोग शायद इसे जान सकें और संवेदनशील लोग इसे महसूस कर सकें। सोते समय या किसी भी समय, सिर के ऊपरी भाग से अचानक एक गर्म धारा बहकर पूरे शरीर में प्रवाहित हो सकती है।” (चौथा व्याख्यान, जुआन फालुन )

मास्टरजी की शिक्षाओं का प्रत्येक शब्द सत्य है, और मेरा हृदय मास्टरजी के प्रति असीम कृतज्ञता से भरा हुआ है।

दाफा की शक्ति

2009 में मैं अपने कंप्यूटर पर मास्टर ली होंगज़ी के अभ्यास निर्देश का वीडियो देख रही थी और स्क्रीन के सामने खडी थी, तभी मैंने देखा कि फालुन न केवल स्क्रीन पर था बल्कि मेरे चारों ओर वास्तविक स्थान में भी घूम रहा था।

इससे सुनहरी रोशनी की अनगिनत किरणें निकलीं जो मेरे शरीर में समा गईं। मेरा पूरा शरीर ऊर्जा से भर गया, हर कोशिका उससे स्पंदित हो रही थी। वाह! मेरा पूरा शरीर पारदर्शी सा महसूस हो रहा था, एक अवर्णनीय, अद्भुत और उदात्त अनुभूति जिसे शब्दों में बयान करना असंभव है।

फिर, फालुन विपरीत दिशा में घूमने लगा। एक बार फिर, सुनहरी रोशनी की अनगिनत किरणें मेरे शरीर से होकर गुजरीं। पल भर में, मेरा पूरा शरीर एक बार फिर ऊर्जा से भर गया; हर कोशिका ने इसे महसूस किया। व्हूश! यह आगे-पीछे की प्रक्रिया तब तक बार-बार चलती रही जब तक कि स्क्रीन दूसरे दृश्य पर नहीं बदल गई।

मैं बुरी तरह से हिल गई थी: फालुन इतना शक्तिशाली, विशाल और अत्यंत पवित्र है!

चीनी कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा दो दशकों से अधिक समय तक उत्पीड़न झेलने के बावजूद फालुन दाफा के अभ्यासी साधना क्यों जारी रखे हुए हैं? इसका कारण यह है कि सच्चे अभ्यासियों ने स्वयं देखा है कि फालुन दाफा एक सर्वोच्च बौद्ध साधना, एक महान और सदाचारी शिक्षा और एक असाधारण विज्ञान है। झूठ और दुष्प्रचार केवल उन्हीं लोगों को गुमराह कर सकते हैं जो सत्य से अनभिज्ञ हैं।

सद्विचारों को भेजने की शक्ति

जब सीसीपी द्वारा मुझ पर अत्याचार किया गया और मुझे बंदी बनाया गया, तब मुझे फ़ा तक पहुँच नहीं थी, और मेरे सद्विचार अपर्याप्त थे। फिर भी, मास्टरजी ने मुझ जैसे अयोग्य शिष्य को नहीं छोड़ा और मुझे दाफ़ा की चमत्कारी शक्ति दिखाई।

2003 की शुरुआत में, घर लौटने के बाद, मैंने साथी अभ्यासियों से सद्विचारों को प्रसारित करने के बारे में सीखा। मैं भी सद्विचार प्रसारित करना चाहती थी, लेकिन अत्यधिक भय के कारण, मुझे लगा कि मेरा निजी स्थान बुरी शक्तियों से भरा हुआ है, और मैंने अपने कमरे में ऐसा करने की हिम्मत नहीं की। मैं बाथरूम में गई, दरवाजा बंद किया, अपनी हथेली उठाई, और पल भर में मेरी हथेली से एक जबरदस्त ऊर्जा निकली, जो माप से परे थी, और बहुत दूर तक फैल गई।

“दाफा शिष्यों के सद्विचार शक्तिशाली होते हैं” ( लगन से प्रगति के मूल तत्व II )। यह सचमुच अद्भुत है! मैंने इसका प्रत्यक्ष अनुभव किया है।

अपनी मुश्किल सास के प्रति दयालु होना

2008 में मेरे पति के निधन के दो साल से भी कम समय बाद, मैं अपने ससुर के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए अपने गृहनगर लौटी। मेरी सास ने मुझसे आर्थिक रूप से योगदान देने और अंतिम संस्कार की व्यवस्था करने के लिए अन्य दो भाइयों के परिवारों के साथ काम करने का अनुरोध किया।

फालुन दाफा का अभ्यास करने से मेरे चरित्र में सुधार हुआ था और मैंने दूसरों के दृष्टिकोण से चीजों को समझना सीख लिया था। इसलिए जब मेरी सास ने यह सुझाव दिया, तो मैंने सद्भावनावश बिना किसी संकोच के सहमति दे दी।

हालाँकि, गाँव के वे रिश्तेदार जो अंतिम संस्कार की व्यवस्था में मदद कर रहे थे, उन्हें यह उचित नहीं लगा। उनका कहना था कि मेरे पति और मैंने दोनों छोटे भाइयों का सहारा दिया था, और अब वे आर्थिक रूप से अच्छी स्थिति में हैं।

चूँकि मेरे पति का निधन हो चुका था और अब मुझे अपने दो बच्चों का पालन-पोषण अकेले करना पड़ रहा था, इसलिए वे उसकी इस योजना से सहमत नहीं थे और उन्होंने मुझसे कोई योगदान देने के लिए नहीं कहा।

इसके कुछ ही समय बाद, मेरी सास अचानक मुझ पर चिल्लाते हुए भड़क उठीं, “तुमने मेरे बेटे को मार डाला! तुमने मेरे बेटे को मार डाला!” उनका इशारा इस बात की ओर था कि फालुन दाफा का अभ्यास करने के कारण सीसीपी ने मुझ पर अत्याचार किया था। मैंने देखा कि उनकी लाल आँखें गुस्से से फटी हुई थीं, उनकी दाहिनी एड़ी ज़मीन पर पटक रही थी और उनका दाहिना हाथ ऊपर-नीचे हिल रहा था। देखते ही देखते, आँगन में मौजूद सभी शोक संतप्त लोगों की निगाहें मेरी ओर मुड़ गईं।

जैसे-जैसे घटनाक्रम सामने आया, मैंने शांत भाव से अपना बैग उठाया, उसकी तरफ देखा और कहा, “अगर तुम मुझसे लड़ना चाहती हो, तो लड़ो। मैं पलटवार नहीं करूँगी!” मेरी इस शांत मुद्रा ने उसे चौंका दिया। उसका हाथ, जो हवा में उठा हुआ था, बीच में ही रुक गया और वह मुझे खाली निगाहों से देखती रही। बिना कुछ और कहे, मैं मुडी और अपने जीजा के घर की ओर चल पडी।

आज भी मैं अपने अंदर आए बदलाव को देखकर हैरान रह जाती हूँ। मैं पहले बहिर्मुखी और गुस्सैल स्वभाव की थी, जो छोटी-छोटी बातों पर भड़क उठती थी और छोटी-छोटी गलतियों पर भी मन में बैर रखती थी। फालुन दाफा का अभ्यास करने से मैं एक दयालु और नैतिक रूप से नेक इंसान बन गई हूँ, जो दूसरों के साथ दयालुता से पेश आती है।

दाफा ने ऐसे ही उच्च कोटि के शिष्य तैयार किए हैं, और यही दाफा की चमत्कारी शक्ति है! दयालु और महान मास्टरजी, आपका धन्यवाद! इस घटना ने दाफा के विरुद्ध दुष्ट दल द्वारा फैलाए गए झूठे आरोपों को दूर करने और उस क्षेत्र के लोगों को बचाने के लिए एक ठोस आधार तैयार किया।

मेरी सास ने बार-बार मेरे साथ बुरा बर्ताव किया, फिर भी मैंने सत्य, करुणा और सहनशीलता के सिद्धांतों का पालन करना जारी रखा। हर त्योहार पर मैं उपहार लेकर बच्चों को उनसे मिलने ले जाती थी। जब भी उन्हें मेरी मदद की ज़रूरत होती, मैं तुरंत हाज़िर हो जाती थी। अंततः मेरी सास का व्यवहार मेरे प्रति नरम पड़ गया।

जब मैं हाल ही में उनसे मिलने वापस गई, तो मैं उनके बिस्तर के पास बैठ गई और धीरे से पूछा, "क्या दाफा अच्छा है?" उन्होंने पूरे दिल से ईमानदारी से जवाब दिया, "दाफा अच्छा है!"

मैंने आगे कहा, "तो फिर क्यों न हम मास्टर और दाफा के बारे में आपके सभी अपमानजनक शब्दों और कार्यों को रद्द कर दें?"

उन्होंने दृढ़ता से उत्तर दिया, "हाँ!" अंततः, मेरी सास ने फालुन दाफा को स्वीकार किया और अपने लिए एक उज्ज्वल भविष्य चुना।