(Minghui.org) चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के पूर्व प्रमुख जियांग ज़ेमिन ने ईर्ष्यावश 20 जुलाई, 1999 को फालुन गोंग का उत्पीड़न शुरू किया। सीसीपी ने फालुन गोंग को बदनाम करने और चीनी जनता को गुमराह करने के लिए अपने सभी मीडिया का इस्तेमाल किया। मेरे पति भी गुमराह हो गए और उन्होंने मुझे फालुन गोंग का अभ्यास करने की अनुमति नहीं दी।

मेरे पति ने मुझे न तो फालुन गोंग की किताबें रखने दीं और न ही अन्य अभ्यासियों से मिलने-जुलने की। जब मैंने उन्हें इस अभ्यास के बारे में बताने की कोशिश की, तो उन्होंने सुनने से इनकार कर दिया। उन्होंने दूसरों के नाम से लिखे गए मेरे प्रोत्साहन पत्रों को पढ़ने से मना कर दिया और जब अन्य अभ्यासियों ने उनके कार्यालय में पर्चे दिए, तो उन्हें भी स्वीकार नहीं किया। अगर हमारे दरवाजे पर सच्चाई बताने वाली कोई सामग्री रखी होती, तो वे उसे फाड़कर कूड़ेदान में फेंक देते। वे उसे पढ़ते भी नहीं थे और न ही मुझे या बच्चों को पढ़ने देते थे। घर में किसी को भी फालुन गोंग का जिक्र करने की इजाजत नहीं थी और इस अभ्यास का नाम सुनते ही वे भड़क उठते थे। वे नास्तिकता में भी बुरी तरह से डूबे हुए थे।

मैं इस पारिवारिक माहौल में कोई खास सफलता हासिल नहीं कर पाई, और मेरी साधना में आई यह बड़ी खामी पुरानी ताकतों के लिए फायदा उठाने और मुझे प्रताड़ित करने का बहाना बन गई।

कुछ साल पहले, मुझे अचानक गंभीर बीमारी के लक्षण दिखाई दिए। मैं अपने शरीर के एक हिस्से को हिला नहीं पा रही थी, इसलिए मेरे परिवार वाले मुझे अस्पताल ले गए, जहाँ उन्हें बताया गया कि मुझे स्ट्रोक हुआ है। कुछ दिन अस्पताल में रहने के बाद मुझे छुट्टी दे दी गई। डॉक्टर ने कहा, “आपकी बाईं बांह काम करना बंद कर चुकी है। अब से आपको चलते समय किसी के सहारे की ज़रूरत होगी। कृपया गिरने से बचें, वरना इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।”

घर लौटने के बाद, मेरे पति ने मुझे देखा और अक्सर व्यंग्यपूर्ण और उपहास भरे ताने मारे। उन्होंने मेरी इस हालत का दोष मेरी साधना पर डाला। उन्होंने गुस्से से कहा, "अब से तुम्हें साधना करने की अनुमति नहीं है।" उन्होंने बिना किसी बहस या तर्क के मेरी एकमात्र अनमोल पुस्तक जुआन फालुन  मुझसे छीन ली। मैं उस पूरी रात सो नहीं पाई और लगातार प्रार्थना करती रही कि वे पुस्तक लौटा दें। अगले दिन मैंने उनसे कहा, "मेरी पुस्तक मुझे लौटा दीजिए। इसके बिना मैं अपनी जान गंवा दूंगी। फ़ा-सुधार प्रक्रिया समाप्त हो रही है। क्या आप इसकी ज़िम्मेदारी उठा पाएंगे?!" मेरा अटूट विश्वास देखकर उन्होंने कहा, "मैं तुम्हारे लिए ले आऊंगा।" उन्होंने पुस्तक मुझे लौटा दी।

इस अनमोल पुस्तक के साथ, मैंने फ़ा का अध्ययन करने, आत्मनिरीक्षण करने, अपने शिनशिंग को सुधारने और अभ्यास करने में आने वाली कठिनाइयों पर काबू पाने में बहुत समय व्यतीत किया। मैं स्वयं खड़ी नहीं हो सकती थी, इसलिए मैंने बिस्तर पर लेटकर अभ्यास किया। एक दिन मुझे अपने शरीर में ऊर्जा का प्रवाह महसूस हुआ और  मास्टरजी के फ़ा ने मुझे ज्ञान प्रदान किया। मेरे मन में एक विचार आया, "मेरी स्थिति का डॉक्टर की कही बात से कोई लेना-देना नहीं है, तो मैं बिस्तर पर कैसे पड़ी रह सकती हूँ?" मैं उठकर बैठ गई और सद्विचार उत्पन्न करके उन सभी बुरी शक्तियों और पदार्थों को दूर करने का प्रयास किया जो मेरी साधना में बाधा डाल रहे थे।

मैं धीरे-धीरे बिस्तर को पकड़े हुए खड़ी हुई। फिर दरवाजे को पकड़कर कदम-दर-कदम लिविंग रूम की ओर बढ़ी। सोफे और कॉफी टेबल के बीच खड़े-खड़े, खुद को संभालने से पहले ही मैं ज़ोर से कॉफी टेबल पर गिर पड़ी। शोर सुनकर मेरे पति दौड़कर लिविंग रूम में आए और मुझसे पूछा, "तुम्हें क्या हुआ?" मैंने जवाब दिया, "कुछ नहीं। मैं बस कुछ व्यायाम कर रही थी।" उन्होंने कहा, "सावधान रहो।" मैंने जवाब दिया, "मुझे पता है। आप अपने कमरे में वापस जा सकते हैं।"

फिर मैंने सोफे का कुशन उठाया, उसे कॉफी टेबल पर रखा और व्यायाम शुरू कर दिया। कुछ देर बाद मैं सोफे पर गिर पडी। मैं तुरंत उठी, ठीक से खडी हुई और व्यायाम जारी रखा। थोड़ी देर बाद मैं फिर से कॉफी टेबल पर गिर पडी, लेकिन इस बार कोई आवाज़ नहीं हुई। मैं इसी तरह गिरती और उठती रही और व्यायाम करती रही। चाहे कितनी भी बार गिरूं, मेरा हौसला नहीं टूटा।

मैं दृढ़ निश्चयी थी और मेरे मन में केवल एक ही विचार था: “मैं खड़े होकर ही ये अभ्यास करना चाहती हूँ, और कोई भी मुझे ऐसा करने से नहीं रोक सकता!” मुझे नहीं पता कि इसमें कितना समय लगा (क्योंकि मैंने अभ्यास का संगीत नहीं चलाया था), लेकिन बार-बार गिरते और उठते हुए, मैंने पहला, तीसरा और चौथा अभ्यास पूरा किया। अगले तीन दिनों तक, मैंने इसी तरह अभ्यास किया, लेकिन मेरा गिरना धीरे-धीरे कम होता गया। पाँचवें दिन तक, मैं बिना गिरे तीनों अभ्यास पूरे करने में सक्षम हो गई। उसके बाद मैं खड़े होकर अभ्यास करने में सक्षम हो गई। साथ ही, मुझे अब दूसरों के सहारे की भी आवश्यकता नहीं रही, क्योंकि मैं स्वयं चलने में सक्षम हो गई थी। मैं जानती थी कि यह मास्टरजी की कृपा का परिणाम था।

मेरे मन में अभी भी कुछ ऐसी धारणाएँ और विचार हैं जिन्हें मुझे अभी समझना बाकी है, इसलिए मैं इस बीमारी के कष्टों से पूरी तरह उबर नहीं पाई हूँ और मेरा शरीर अभी तक पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाया है। हालाँकि, यह एहसास बहुत स्पष्ट है कि मेरा शरीर हर दिन बेहतर हो रहा है। कुछ बदलावों ने तो मेरे पति को भी आश्चर्यचकित कर दिया है।

एक दिन, जब मैं अपने पति की ओर पीठ करके अभ्यास कर रही थी, तब वे सो रहे थे। पहले अभ्यास के दौरान, जब मैंने "देवलोक और पृथ्वी की ओर हाथ उठाना" वाला अभ्यास किया ही था, तभी वे अचानक चिल्लाए, "चीन में दिव्य शक्तियाँ हैं!" मैं तुरंत रुक गई और सोचा कि यही उन्हें सच्चाई बताने का मौका है। मैं मुड़ी और उनसे पूछा, "क्या आप सो नहीं रहे थे? आप क्यों चिल्लाए?" उन्होंने कहा, "मैं सो रहा था, तभी मैंने मुड़कर देखा कि आपकी बाहें बाहर की ओर फैली हुई हैं। मैं बहुत हैरान हुआ क्योंकि मुझे एहसास हुआ कि यह फालुन गोंग के अभ्यास का परिणाम है, इसलिए मैं चिल्लाया। डॉक्टर ने कहा था कि आप अपनी बांह कभी हिला नहीं पाएंगी। अब, आप न केवल इसे हिला सकती हैं, बल्कि इसे फैला भी सकती हैं। हालांकि आप इसे पूरी तरह से सीधा नहीं फैला पा रही थीं, लेकिन आप इसे जितना फैला सकती हैं, वह मेरी कल्पना से परे है।" इतना सुनकर मैंने उन्हें सच्चाई बताने का मौका पा लिया।

मैंने एक घंटे से अधिक समय तक बात की, और वह चुपचाप बैठे मेरी बातें सुनते रहे। हालाँकि माओत्से तुंग के बारे में उनकी राय अभी भी वही थी, लेकिन बाकी बातें उन्होंने स्वीकार कर लीं। इसके बाद उन्होंने मेरे अभ्यास के बारे में व्यंग्य या उपहास करना बंद कर दिया। उन्होंने दाफा की अलौकिक शक्तियों को स्वयं देखा था, और पार्टी द्वारा फालुन गोंग पर अत्याचार शुरू करने के 24 साल बाद उन्हें अंततः सच्चाई समझ में आई। यह घटना 3 अप्रैल, 2023 को घटी। हालाँकि, उनके विचारों में वास्तविक मौलिक परिवर्तन फालुन गोंग की अच्छाई का स्वयं अनुभव करने से आया।

2024 की सर्दियों में एक सुबह, मेरे पति ने कहा कि उनके चेहरे पर एक छाला हो गया है जिसमें बहुत दर्द हो रहा है। उन्हें शक था कि यह दाद हो सकता है और उन्होंने मुझसे पूछा, “क्या आपके पास कोई उपाय है? कृपया मेरी मदद कीजिए।” मैंने जवाब दिया, “हाँ, लेकिन मेरी एक विनती है। आपको मेरी कही हुई बात दोहराना होगा और दोहराते समय आपके मन में कोई संदेह या बेतुके विचार नहीं होने चाहिए।” वे मान गए। मैं उठ बैठी, उनके चेहरे को देखा और मास्टरजी के फ़ा-सुधार के वाक्य पढ़े, और फिर कहा, “फ़ालुन दाफ़ा अच्छा है, सत्य, करुणा और सहनशीलता अच्छी है।”

मैंने अभी ये कहा ही था कि वो चौंककर बोले, “अरे वाह! ये तो चमत्कार है! दर्द चला गया और मैं बेहतर महसूस कर रहा हूँ। ये फालुन दाफा सचमुच महान है!” मैंने जवाब दिया, “आपने फालुन दाफा की अच्छाई का अनुभव कर लिया है। अगर आप अब से ‘फालुन दाफा अच्छा है, सत्य-करुणा-सहनशीलता अच्छी है’ का पाठ पूरी श्रद्धा से करेंगे, तो सब कुछ अच्छा होगा। क्योंकि जब आप इन वाक्यों का पाठ करते हैं, तो आप ब्रह्मांड के सर्वोच्च और महानतम दिव्य सत्ता के संदेश से जुड़ते हैं। उनकी सामर्थ्य सबसे बड़ी है और उनकी शक्तियाँ अनंत हैं। वे उन लोगों की रक्षा करते हैं जो उन पर विश्वास करते हैं।” मेरे पति ने सिर हिलाया।

मेरे पति में तब से बहुत बदलाव आया है। अगर उन्हें पता चलता है कि मैंने अभ्यास नहीं किया है, तो वे कभी-कभी मुझसे पूछते हैं कि क्या मैंने अभ्यास किया है। एक दिन, मैंने मास्टरजी का लेख "सृष्टिकर्ता सभी जीवन को क्यों बचाना चाहता है " सुनाया। इसे सुनने के बाद, उन्होंने कहा, "मास्टरजी बहुत अच्छे हैं! दाफा भी बहुत अच्छा हैं! तुम्हारे जैसे शिष्य ही इसे साबित करते हैं।" इससे मुझे लगा कि वे सचमुच सत्य को समझ गए हैं। तब से, यह "जिद्दी बूढ़ा" भी बचा लिया गया है!

हे मास्टरजी, आपकी दयालु मुक्ति के लिए धन्यवाद!