(Minghui.org) मुझे पेप्टिक अल्सर था, जो अक्सर मुझे परेशान करता था, खासकर जब मैं तनाव में होती थी। मैंने इसका इलाज करवाया, लेकिन यह पूरी तरह ठीक नहीं हुआ। मेरी दाईं आँख में ग्लूकोमा था और चेहरे पर त्वचा के कैंसर के शुरुआती लक्षण भी थे। फालुन दाफा का अभ्यास शुरू करने के बाद इन सभी समस्याओं ने मुझे परेशान करना बंद कर दिया। त्वचा का कैंसर धीरे-धीरे सिकुड़ने लगा। मैं जानती हूँ कि दयालु मास्टरजी ने मेरे शरीर को शुद्ध किया। धन्यवाद, मास्टरजी!

मैंने अभ्यास शुरू किया

मैंने 2015 में फालुन दाफा का अभ्यास शुरू किया, जब मैं 78 वर्ष की हुई। दो अभ्यासी हमारे वरिष्ठ नागरिक क्लब में आए और उन्होंने हमें स्वः -साधना की अद्भुत पद्धति, फालुन दाफा, के बारे में बताया। उन्होंने हमें अभ्यास सिखाए और मुझे तुरंत ऊर्जा का प्रवाह महसूस हुआ। उन्होंने मुझे ईमेल के माध्यम से फालुन दाफा की मुख्य पुस्तक ज़ुआन फालुन का लिंक भेजा। यह पुस्तक गहन होने के साथ-साथ आसानी से समझ में आने वाली लगी और मैंने इसे जल्दी पढ़ लिया। मैं इसकी एक प्रति खरीदना चाहती थी।

पुस्तक पढ़ने और अभ्यास करने के बाद मैंने स्वयं से कहा कि यही मेरा मार्ग है। लेकिन मैं इस बात को लेकर उलझन में थी कि पुस्तक में ऐसी बहुत-सी बातें थीं, जो यहूदी धर्म से मेल नहीं खाती थीं, जिस पर मैं विश्वास करती थी और जिसे मैंने पहले से अपने भीतर आत्मसात कर लिया था। इससे मेरी चेतना में एक प्रकार का विभाजन उत्पन्न हो गया। लेकिन धीरे-धीरे मुझे समझ आया कि फालुन दाफा संसार की सर्वोच्च शिक्षा है और दाफा ने मेरे पूरे अस्तित्व को भर दिया।

मैंने सुना था कि प्रत्येक व्यक्ति का अपना भाग्य होता है, लेकिन मुझे नहीं पता था कि मेरा भाग्य क्या है। फिर एक समय अचानक मुझे समझ आया कि मेरा भाग्य फालुन दाफा का अभ्यास करना है और मैं ब्रह्मांड की सबसे खुशहाल व्यक्ति हूँ, क्योंकि मुझे फ़ा प्राप्त हुआ है।

समूह में फ़ा का अध्ययन

मैं आमने-सामने होने वाले सामूहिक फ़ा अध्ययन में भाग लेने लगी। मैंने स्वयं मास्टरजी के अन्य व्याख्यान भी पढ़ना शुरू कर दिया। हम साथ मिलकर अभ्यास भी करते थे। अभ्यासी मेरे लिए एक कंप्यूटर लाए और उसमें एक प्रोग्राम इंस्टॉल किया। लेकिन मैंने लंबे समय तक विरोध किया और उस प्रोग्राम का उपयोग नहीं करना चाहती थी, क्योंकि मैंने पहले कभी कंप्यूटर इस्तेमाल नहीं किया था और मुझे डर लगता था। इसके अलावा, मुझे अकेले पढ़ने की आदत थी और मैं समझ नहीं पाती थी कि साथ मिलकर पढ़ना बेहतर क्यों है।

लेकिन अभ्यासी धैर्यपूर्वक मुझे इसका कारण समझाते रहे और प्रयास करने के लिए प्रोत्साहित करते रहे। अचानक मुझे एहसास हुआ कि मैं जिद्दी और स्वार्थी थी। इसलिए मैंने सभी के साथ ऑनलाइन फ़ा अध्ययन करना शुरू कर दिया।

मास्टरजी ने कहा है:

“मैं आपको एक सत्य बताऊँगा: एक साधक की संपूर्ण साधना प्रक्रिया निरंतर मानवीय आसक्तियों को त्यागने की प्रक्रिया है।” — व्याख्यान एक, ज़ुआन फालुन 

मेरी पूरी साधना यात्रा के दौरान, मेरे आसपास के अभ्यासी व्यवहारकुशलता, सहनशीलता, करुणा और सहयोग का परिचय देते रहे हैं। हर चीज के लिए धन्यवाद—और कृपया मुझे क्षमा करें।

कर्मजनित बीमारी

मैं स्थानीय अभ्यासी के साथ बाहर जाकर लोगों से चीन में हो रहे दमन के बारे में बात करने लगी। हमने दमन समाप्त करने की माँग वाली याचिका पर हस्ताक्षर एकत्र किए। फिर मैंने यह काम स्वयं करना शुरू कर दिया और तुरंत पुराने बल मेरे लिए बाधाएँ उत्पन्न करने लगे—या शायद मास्टरजी यह देखने के लिए मेरी परीक्षा ले रहे थे कि मैं दृढ़ हूँ या नहीं।

मेरे बाएँ पैर के निचले हिस्से में इतना दर्द होने लगा कि मैं मुश्किल से चल पाती थी या चौथी मंजिल पर स्थित अपने अपार्टमेंट तक सीढ़ियाँ चढ़ पाती थी (इमारत में लिफ्ट नहीं थी)। मेरा बेटा बार-बार मुझसे अस्पताल जाने का आग्रह करता था। उसने कहा कि वहाँ वे तुरंत मेरी बीमारी का पता लगा देंगे। लेकिन मैंने मना कर दिया। मैंने उससे हस्तक्षेप न करने के लिए कहा और कहा कि सब ठीक हो जाएगा। मुझे पूरे हृदय से विश्वास था कि मास्टरजी मेरे साथ हैं और यदि मेरे विचार सद्विचार होंगे, तो मैं इन परीक्षाओं को पार कर सकती हूँ।

उस दौरान मेरी चेतना स्पष्ट नहीं थी। मुझ पर अपना नियंत्रण भी ठीक नहीं था। एक दिन मैंने अपनी चाबियाँ, फोन और बटुआ रखने वाला बैग कूड़ेदान में फेंक दिया। जब मुझे इसका एहसास हुआ, तो मुझे ज़ुआन फालुन के पहले व्याख्यान में मास्टरजी के शब्द याद आने लगे:

“इस ब्रह्मांड में ‘हानि के बिना लाभ नहीं’ का एक सिद्धांत है। लाभ प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को कुछ खोना पड़ता है।”

— व्याख्यान एक, ज़ुआन फालुन 

अचानक मेरी नजर कूड़ेदान के पास पड़ी एक सूखी, लंबी शाखा पर गई। उस शाखा की मदद से मैं अपना सामान निकालने में सफल रही। धन्यवाद, मास्टरजी, मेरी सहायता करने के लिए!

अपने पैर में तेज दर्द होने के बावजूद, मैं लोगों को सच्चाई स्पष्ट करने के लिए बाहर जाती रही। मैं समझती थी कि यह दर्द एक भ्रम था। यह मास्टरजी में मेरे विश्वास और मेरी दृढ़ता तथा अडिग रहने की क्षमता की परीक्षा थी। मैं जानती थी कि मुझे तत्काल मास्टरजी की सहायता करके जीवों को बचाने की आवश्यकता थी और कोई भी चीज मुझे रोक नहीं सकती थी। हर बार घर लौटने पर मैं फिर से चौथी मंजिल तक सीढ़ियाँ चढ़ती थी। यह सिलसिला एक महीने से अधिक समय तक चलता रहा।

मेरी तीव्र इच्छा थी कि दर्द से छुटकारा मिल जाए, लेकिन मैंने उस इच्छा को छोड़ दिया। इसके बजाय, मैंने मास्टरजी और दाफा पर भरोसा किया। तभी दर्द कम होने लगा और अचानक पूरी तरह गायब हो गया। मुझे पता ही नहीं चला कि यह कैसे हुआ। धन्यवाद, दयालु मास्टरजी!

लेकिन अगली परीक्षा पहले से ही मेरा इंतजार कर रही थी। जब मैंने चीनी दूतावास के सामने होने वाली गतिविधियों में भाग लेना और तख्तियाँ पकड़ना शुरू किया, तो कुछ ही मिनटों के बाद मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे मेरे नाखून उखाड़े जा रहे हों। दर्द बहुत तेज था और उसे सहन करना बेहद कठिन था। हर बार जब मैं दूतावास पहुँचती, तो ऐसा होता और घर लौटने तक दर्द बना रहता।

मुझे लगा कि यह चीन के अभ्यासी के साथ एकजुटता के कारण हो रहा था—अर्थात मुझे कम से कम उस दर्द का थोड़ा-सा अनुभव करने की आवश्यकता थी, जिससे वे गुजर रहे थे। और यदि मैं उस दर्द का कुछ हिस्सा अपने ऊपर ले लेती, तो शायद चीन के अभ्यासी के लिए यह थोड़ा आसान हो जाता। लेकिन फिर यही अनुभव तब भी होने लगा, जब मैं सच्चाई स्पष्ट करने के लिए सड़क पर जाती थी और घर लौटने तक बना रहता था।

मैंने स्वयं से कहा: यदि ये पुराने बल हैं, तो मैं उन्हें स्वीकार नहीं करूँगी और अपनी योजनाएँ नहीं बदलूँगी। लेकिन यदि मैं कर्म चुका रही हूँ, तो इसका अर्थ है कि ऐसा होना आवश्यक है और मैं इसे सहन करते हुए सच्चाई स्पष्ट करना जारी रखूँगी। इस बीच, मेरा शरीर शुद्ध होता रहेगा।

मास्टरजी ने कहा है:

“क्योंकि हम आपको सही मार्ग पर ले जा रहे हैं, इसलिए त्रिलोक के भीतर फ़ा की साधना के दौरान आपके शरीर को लगातार शुद्ध किया जाएगा, जब तक कि यह उच्च-ऊर्जा पदार्थ द्वारा पूरी तरह परिवर्तित न हो जाए।” — व्याख्यान दो, ज़ुआन फालुन 

यह सब बहुत लंबे समय तक चलता रहा, लेकिन मैंने सद्विचार बनाए रखे और अचानक मुझे एहसास हुआ कि दर्द गायब हो गया था।

2017 में मैंने न्यूयॉर्क में दाफा सम्मेलन में भाग लिया। घर लौटने के बाद मेरे बाएँ कूल्हे में तेज दर्द होने लगा। यह दर्द छह महीने तक रहा। कभी-कभी मुझे लगता था कि मेरे कूल्हे का जोड़ टूटने वाला है। लेकिन तेज दर्द के बावजूद, मैं सच्चाई स्पष्ट करने के लिए बाहर जाती रही और इस परीक्षा को भी पार करने में सफल रही—मास्टरजी को धन्यवाद।

मास्टरजी ने कहा है:

“इस समय जिस एक महत्वपूर्ण विषय पर ध्यान देने की आवश्यकता है, वह है अधिक से अधिक जीवों को बचाने का प्रश्न। यह वह कार्य है जिसे दाफा शिष्यों को पूर्णता प्राप्त करने की अपनी वर्तमान प्रक्रिया के दौरान पूरा करना है। यह दाफा शिष्यों का मिशन है, एक ऐसा कर्तव्य जिससे बचा नहीं जा सकता, ऐसा कार्य जिसे उन्हें करना ही है और पूरा करना ही है।” — (“2007 के न्यूयॉर्क फ़ा सम्मेलन में फ़ा शिक्षाए,”  कलेक्टेड टीचिंग्स गिवेन अराउंड द वर्ल्ड खंड आठ )

मैंने हमारे वरिष्ठ नागरिक क्लब में चीन में अभ्यासी पर हो रहे दमन के बारे में बात की और लगभग सभी लोगों ने याचिका पर हस्ताक्षर किए। मैंने उस इमारत में रहने वाले सभी निवासियों से भी बात की, जहाँ मैं रहती हूँ, और सभी ने याचिका पर हस्ताक्षर किए।

सच्चाई स्पष्ट करने के लिए बाहर जाने से पहले मैं सद्विचार भेजती हूँ और मास्टरजी से प्रार्थना करती हूँ कि वे ऐसे लोगों को मेरे पास भेजें, जिनका फ़ालुन दाफा के बारे में सुनने के साथ पूर्वनिर्धारित संबंध है। जब मैं वापस लौटती हूँ, तो मास्टरजी को धन्यवाद देती हूँ, क्योंकि वे लोगों को बचा रहे हैं और हम केवल उनकी सहायता कर रहे हैं।

सच्चाई स्पष्ट करते समय मैं देखती हूँ कि कितने अच्छे लोग हैं। वे याचिका पर हस्ताक्षर करते हैं और धन्यवाद कहते हैं। लेकिन बहुत-से लोग विभिन्न कारणों से मना कर देते हैं। उदाहरण के लिए, “मुझे जल्दी है,” “मुझे इसमें रुचि नहीं है,” “मैं हस्ताक्षर नहीं करूँगा, लेकिन उनके लिए प्रार्थना करूँगा।” मैंने सीखा है कि बुरा नहीं मानना चाहिए, भावनाओं से आसक्त नहीं होना चाहिए और लोगों की प्रतिक्रियाओं के आधार पर उनका मूल्यांकन नहीं करना चाहिए—बल्कि बस करुणा के साथ उनके सामने उपस्थित रहना चाहिए। दुर्भाग्य से, मैं हमेशा ऐसा नहीं कर पाती।

जब मैं बाहर जाती हूँ, तो ऐसा मार्ग चुनती हूँ जो बैंकों, रेस्तराँ, बस स्टॉप, दुकानों, कैफ़े, पार्किंग स्थलों आदि के पास से होकर गुजरता है—दूसरे शब्दों में, ऐसे स्थान जहाँ बहुत-से लोग होते हैं। जब कोई व्यक्ति खरीदारी पूरी करके अपना सामान कार में रख रहा होता है, तो मैं उससे बात करती हूँ। या यदि कोई व्यक्ति कार में किसी का इंतजार कर रहा हो, तो उसे जल्दी नहीं होती और वह मेरी बात सुन लेता है। कुछ माता-पिता अपने बच्चों को भी याचिका पर हस्ताक्षर करने की अनुमति देते हैं।

उदाहरण के लिए, एक व्यक्ति लगभग आठ साल के बच्चे के साथ कार में बैठा था। जब मैंने उसे दमन के बारे में बताया, तो पिता ने याचिका पर हस्ताक्षर किए और बच्चा भी हस्ताक्षर करना चाहता था। पिता ने पूछा, “क्या तुम्हें पता है कि यह किस बारे में है?” बच्चे ने कहा कि वह समझता है। तब पिता ने उसे हस्ताक्षर करने की अनुमति दे दी।

कम्युनिज़्म का भूत हमारी दुनिया पर कैसे शासन कर रहा है और कम्युनिज़्म का अंतिम लक्ष्य पुस्तकें पढ़ने के बाद मैं चीन में हो रही घटनाओं के बारे में और भी गहरी समझ के साथ बात कर पाई।

लेकिन कभी-कभी मेरे भीतर अभी भी लोगों से याचिका पर हस्ताक्षर करवाने की तीव्र इच्छा उत्पन्न होती है। उदाहरण के लिए, जब पृष्ठ पर एक या दो खाली पंक्तियाँ बची होती हैं और सड़क पर मेरे आसपास कोई दिखाई नहीं देता, तभी अचानक कोई व्यक्ति मेरी ओर आता है। मैं उससे सच्चाई स्पष्ट करती हूँ और मेरे मन में इच्छा होती है—मैं निश्चित रूप से चाहती हूँ कि वह हस्ताक्षर करे। लेकिन मुझे चिंता रहती है कि वह हस्ताक्षर नहीं करेगा, शायद पर्चा भी नहीं लेगा—और ऐसा ही होता है। मैं स्वयं को शांत करती हूँ और कहती हूँ, “आसक्ति को छोड़ दो। शायद तुम उनसे फिर मिलोगी। तुम्हारे सद्विचार कहाँ हैं?”

अपने अंतर्मन में झाँकना

अपने स्वः -साधना के दौरान मैंने अपनी कई आसक्तियों और भावनाओं को पहचाना है, जिन्हें मैंने अभी तक समाप्त नहीं किया है। कुछ ऐसी आसक्तियाँ, जिन्हें मैं समझती थी कि मैंने समाप्त कर दिया है, फिर से सामने आ गईं। उदाहरण के लिए, आराम की इच्छा, कुछ विशेष खाद्य पदार्थों के प्रति आसक्ति, दिखावा करने की इच्छा, करुणा की कमी और दैनिक गतिविधियों के दौरान उत्पन्न होने वाला भय।

उदाहरण के लिए, मैं एक ऐसी कार के पास गई जिसमें एक महिला और एक युवक बैठे थे। जैसे ही मैंने सच्चाई स्पष्ट करना शुरू किया, महिला कार से बाहर निकली, पर्चा लिया, उसे फाड़ दिया और मुझे वापस दे दिया। इसके जवाब में मैंने उसे एक अन्य पर्चा दिया। उसने उसे भी फाड़ दिया, मुझे वापस किया और कहा कि मैं एक धर्मप्रचारक हूँ।

फिर वह दुकान के अंदर चली गई और युवक कार में ही रहा। कार की खिड़की खुली थी। उसके व्यवहार से मुझे बहुत गुस्सा आया। उस समय मैं अपने गुस्से पर नियंत्रण नहीं रख पाई—गुस्से ने मुझ पर काबू पा लिया। मैंने पहले से फटे हुए पर्चे को और भी छोटे-छोटे टुकड़ों में फाड़ दिया और खुली खिड़की से कार के अंदर फेंक दिया। युवक कार से बाहर कूद पड़ा और उसने सारी चीजें वापस मेरी ओर फेंक दीं।

उस क्षण मेरे लिए सब कुछ स्पष्ट हो गया। मैं क्या कर रही हूँ?! मैं एक दाफा अभ्यासी हूँ! वहाँ बहुत-सी कारें थीं और सभी लोग देख रहे थे। मैंने चुपचाप सारे टुकड़े इकट्ठे किए और वहाँ से चली गई। मेरे हृदय में एक विचार उठा: मैंने दाफा की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाया है!

मैं कुछ देर तक इधर-उधर घूमती रही, लेकिन किसी के पास नहीं गई। मैंने अपने विचारों को व्यवस्थित करने की कोशिश की और केवल इस बारे में सोचती रही कि अब क्या करना चाहिए। ऐसी घटना के बाद मुझे किस तरह व्यवहार करना चाहिए? जब मैं घर लौटी, तो मैं अपने किए हुए काम के बारे में सोचती रही। मुझे समझ आया कि मैंने दाफा की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाया है और मुझे किसी तरह इसे ठीक करना होगा, इस परिस्थिति को सुधारना होगा। मेरे हृदय में कड़वाहट थी। फिर मुझे एहसास हुआ कि मुझे किसी तरह उन लोगों से दोबारा मिलना होगा और उनसे क्षमा माँगनी होगी। लेकिन कैसे? मैंने सहायता के लिए मास्टरजी से प्रार्थना की।

और मास्टरजी ने मेरी सहायता की! अगले दिन जब मैं फिर से सच्चाई स्पष्ट करने के लिए बाहर गई, तो मुझे वही कार दिखाई दी। उसी युवक के साथ दो युवतियाँ और एक छोटा बच्चा भी था। मैं युवक के पास गई और कहा, “नमस्कार, मैं कल अपने व्यवहार के लिए माफी माँगना चाहती हूँ और आपसे बात करना चाहती हूँ।” उनमें से एक ने जवाब दिया, “हम आपसे बात नहीं करना चाहते।” उसी समय उसकी माँ दुकान से बाहर आई और मैंने कहा, “कृपया मुझे क्षमा कर दीजिए। मैं आपसे अनुरोध करती हूँ कि मेरी बात सुन लें। उसके बाद आप तय कर सकती हैं कि मैं जो बताऊँगी, उसका क्या जवाब देना है। कृपया मेरी बात सुन लें।”

जब उसने चीन में हो रही घटनाओं के बारे में सुना, तो उसने कहा कि उसे मुझसे क्षमा माँगनी चाहिए। उसने याचिका पर हस्ताक्षर किए और फिर उसके बेटे तथा दोनों युवतियों ने भी हस्ताक्षर किए। उन्होंने सच्चाई को समझ लिया। इसके बाद उसका बेटा काफी देर तक मेरे साथ चलता रहा और जब मैं लोगों के पास जाती, तो वह उनसे कहता, “याचिका पर हस्ताक्षर करो, यह महत्वपूर्ण है। मैंने पहले ही हस्ताक्षर कर दिया है।”

यह बहुत अद्भुत था कि मैं अपने कार्यों को सुधारने में सफल रही और वह भी इतनी जल्दी। धन्यवाद, मास्टरजी!

सच्चाई स्पष्ट करते समय पिछले वर्षों में मुझे कई अद्भुत अनुभव हुए हैं, लेकिन मैं उन सभी को यहाँ सूचीबद्ध नहीं कर सकती।

अभ्यासी एक एकीकृत शरीर हैं

जब मैं पहली बार अन्य अभ्यासी के साथ राष्ट्रीय सभा में पहुँची, तो मुझे बहुत असहाय महसूस हुआ। मुझे हिब्रू भाषा नहीं आती थी और इतने बड़े समूह में पढ़ना मेरे लिए आसान नहीं था। मैं समझ नहीं पा रही थी कि मैं क्या पढ़ रही हूँ। लेकिन फिर मुझे एहसास हुआ कि सभी लोग मेरी सहायता करने की कोशिश कर रहे थे। मैंने अन्य अभ्यासी की करुणा और ऊर्जा को महसूस किया। एक अभ्यासी ने अभ्यास करते समय मेरी गलतियों की ओर ध्यान दिलाया, जबकि दूसरे ने मुझे कुछ समझाया।

उस समय मेरे लिए पालथी मारकर फर्श पर बैठना कठिन था। लेकिन जब मैं पहली बार सभा में आई, तो अभ्यासी की ऊर्जा की बदौलत मैं पाँचवें अभ्यास के दौरान पूरे एक घंटे तक बैठने में सफल रही।

फिर कुछ समय बाद मैं अर्ध-पद्मासन में पूरे एक घंटे तक बैठने में सक्षम हो गई। जब मैं 2017 में अभ्यासी के एक समूह के साथ न्यूयॉर्क में फ़ा सम्मेलन में गई, तो मेरे साथ कमरा साझा करने वाली एक अभ्यासी ने मुझे एक मिनट तक पूर्ण पद्मासन में बैठने में सहायता की और मैंने अद्भुत खुशी का अनुभव किया। मैं केवल 11 महीने बाद स्वयं पूर्ण पद्मासन में बैठने में सफल हुई। उस समय मेरी आयु 81 वर्ष थी। यह सब केवल फालुन दाफा अभ्यासी की शक्तिशाली ऊर्जा के कारण संभव हुआ।

अंत में, जैसा कि मैंने बताया, 2017 के सम्मेलन में मैंने पहली बार मास्टरजी को देखा, पहली बार एक भव्य परेड में भाग लिया और सभी के साथ अभ्यास किए। मैं इतने दिनों तक अभ्यासी के साथ रही। हम फ़ा के भीतर थे। यह पहली बार था जब मैंने पूरी दुनिया से आए इतने सारे अभ्यासी को एक साथ देखा। वास्तव में अद्भुत!

मैं अपनी साधना में लगन से आगे बढ़ने और जीवों को बचाने में मास्टरजी की सहायता करना जारी रखने के लिए दृढ़ संकल्पित हूँ।

धन्यवाद, महान और दयालु मास्टरजी! धन्यवाद, साथी अभ्यासी!