(Minghui.org) ओटावा फालुन दाफा अनुभव-साझाकरण सम्मेलन 6 सितंबर, 2026 को ओटावा विश्वविद्यालय में आयोजित किया गया। कई अभ्यासी ने साझा किया कि वे अपने दैनिक जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना करते समय सत्य-करुणा-सहनशीलता के सिद्धांतों को कैसे लागू करते हैं।
कुछ अभ्यासी ने बताया कि उन्होंने वर्षों से चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के हस्तक्षेप के बावजूद शेन यून के प्रचार में मदद कैसे की और लोगों को फालुन दाफा तथा दमन के बारे में सच्चाई कैसे बताई। अन्य अभ्यासी ने उन संघर्षों और परीक्षाओं के बारे में बताया, जिनका उन्होंने विभिन्न परियोजनाओं, परिवार या कार्यस्थल में सामना किया था।
अपने अंतर्मन में झाँककर देखने और अपनी आसक्तियों को दूर करने के प्रयास से वे कठिनाइयों का सामना करते समय अपने सद्विचार मजबूत करने और अपनी साधना के मार्ग पर अच्छी तरह आगे बढ़ने में सक्षम हुए।
2026 ओटावा फालुन दाफा साधना अनुभव-साझाकरण सम्मेलन 6 सितंबर को ओटावा विश्वविद्यालय में आयोजित किया गया (Minghui.org)
दयालुता और दृढ़ता
सुश्री झोउ ने बताया कि ओटावा के नेशनल आर्ट्स सेंटर (एनएसी) में शेन यून के कार्यक्रमों में सीसीपी का हस्तक्षेप 18 वर्षों से जारी है। इसमें चीनी वाणिज्य दूतावास द्वारा सीसीपी समर्थक पत्रकारों के माध्यम से मीडिया में शेन यून को बदनाम करना, दूतावास द्वारा थिएटर में शिकायत करना और स्वयं या अपने एजेंटों के माध्यम से शेन यून को बदनाम करना, फालुन दाफा और शेन यून को बदनाम करने के लिए खुद को फालुन दाफा का अभ्यासी बताकर राजनेताओं को पत्र भेजना तथा शेन यून की बसों के टायरों को नुकसान पहुँचाना आदि शामिल हैं। अभ्यासी निरंतर सच्चाई बताने और फालुन दाफा तथा साधना के संस्थापक मास्टर ली में अपने विश्वास के माध्यम से इन चुनौतियों पर विजय पाते रहे।
लगभग एक वर्ष से ओटावा में शेन यून को सीसीपी के हस्तक्षेप के कारण एनएसी में लौटने के आवेदन में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। शेन यून की एनएसी में वापसी का समर्थन करने वाले कनाडाई निवासियों के बढ़ते हस्ताक्षरों ने सुश्री झोउ को बहुत प्रोत्साहित किया। इस वर्ष शेन यून को टोरंटो वापस लाने में मदद करते समय उन्होंने टीमवर्क के महत्व को गहराई से समझा और महसूस किया कि इसी तरह का सहयोग शेन यून को एनएसी में भी वापस ला सकता है।
दो फालुन दाफा अभ्यासी ने शेन यून की ओटावा वापसी की वकालत करने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से सच्चाई बताने के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने महसूस किया कि जब तक कोई मास्टरजी और दाफा में विश्वास रखता है तथा सद्विचार बनाए रखता है, तब तक साधना के मार्ग में आने वाली प्रतीत होने वाली कठिन बाधाओं को पार किया जा सकता है और अच्छाई तथा सीसीपी के बीच संघर्ष अंततः तूफान के बाद इंद्रधनुष लेकर आएगा।
सच्चाई बताने में सक्रिय रूप से भाग लेते हुए सुश्री वू को एहसास हुआ कि सद्विचार और सद्कर्म किसी भी हस्तक्षेप को समाप्त कर सकते हैं और लोगों को बचाने में मदद करने का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं। विभिन्न समूहों के लोगों के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने अपने अहंकार और भेदभाव की भावना को त्याग दिया, शेन यून के प्रति अनेक लोगों का समर्थन देखा और महसूस किया कि केवल स्वयं की साधना अच्छी तरह करके ही वह लोगों को बचाने में मास्टरजी की सहायता कर सकती हैं। जब उन्होंने समुदाय में दमन के बारे में सच्चाई बताई, तो उन्होंने सीसीपी के झूठ से भ्रमित लोगों को धैर्यपूर्वक तथ्य समझाए और उनके रवैये में बदलाव आया। साथी अभ्यासी के साथ संघर्ष होने पर भी उन्होंने भीतर झाँककर देखा, अपनी आसक्तियों को छोड़ा और अपने हृदय तथा विचारों को सही किया।
सुश्री वू को यह भी एहसास हुआ कि फा-सुधार के अंतिम चरण में हर क्षण अनमोल है। केवल स्वयं की साधना अच्छी तरह करके, सद्विचार बनाए रखकर और अन्य अभ्यासी के साथ सहयोग करके ही हम अपनी प्रतिज्ञाएँ पूरी कर सकते हैं, मास्टरजी को फा-सुधार में सहायता कर सकते हैं और अधिक जीवों को बचा सकते हैं।
लोगों के साथ बातचीत के दौरान श्री लेई को अभ्यासी की करुणा की शक्ति का एहसास हुआ, जो गलतफहमियों को दूर कर सकती है, विश्वास कायम कर सकती है और सच्चाई बताने का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। उन्होंने लोगों के साथ शांतिपूर्ण और समावेशी तरीके से बातचीत की और धीरे-धीरे अपने आसपास के लोगों को दाफा समझने तथा महत्वपूर्ण अवसरों पर इसका समर्थन करने में मदद की। उदाहरण के लिए, उन्होंने पूर्व मेयर के कार्यालय के निदेशक से करुणा के साथ बातचीत की और दाफा के बारे में उनकी गलतफहमी दूर की। उस निदेशक ने अन्य गतिविधियों में भी अभ्यासी की सक्रिय रूप से मदद की और नगरपालिका सरकार को यह घोषणा करने में सहायता की कि फालुन दाफा एक संरक्षित आस्था है।
शेन यून को ओटावा वापस लाने के अपने प्रयासों में श्री लेई को एहसास हुआ कि यदि प्रत्येक अभ्यासी स्वयं की साधना अच्छी तरह कर सके और मिलकर एक सकारात्मक वातावरण बनाए, तो सफलता स्वाभाविक रूप से मिलेगी। उनका दृढ़ विश्वास है कि सद्भावना, करुणा और सामूहिक सहयोग जीवों को बचाने तथा मास्टरजी को फा-सुधार में सहायता करने की कुंजी हैं।
परियोजना में गिरावट आने पर अपने अंतर्मन में झाँककर देखना
श्री वांग को अपने सोशल मीडिया प्रचार संबंधी प्रोजेक्ट में लंबे समय तक गिरावट का सामना करना पड़ा। प्लेटफॉर्म पर ट्रैफिक प्रतिबंध, ट्रैफिक में भारी गिरावट, टीम के भीतर भ्रम और नकारात्मकता तथा अत्यधिक दबाव ने उन्हें परेशान किया।
साथी अभ्यासी से बातचीत करने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि समस्या की जड़ अपर्याप्त सद्विचार थे। “ट्रैफिक प्रतिबंध” की धारणा से बंधे होने के कारण वह वास्तव में हस्तक्षेप को नकार नहीं पाए थे। श्री वांग ने अपने अंतर्मन में झाँकना शुरू किया, सोचने के पुराने तरीकों को तोड़ा, सक्रिय रूप से नए उपाय खोजे और अच्छे उदाहरण प्रस्तुत करके टीम का नेतृत्व करने का प्रयास किया। कई महीनों के प्रयास के बाद उन्होंने एक-एक करके साथी अभ्यासी का मार्गदर्शन किया, उन्हें भय पर काबू पाने और अपनी मानसिकता बदलने में मदद की। अंततः ट्रैफिक में व्यापक सुधार हुआ और वे अपने अब तक के सर्वोत्तम स्तर तक पहुँच गए।
श्री वांग ने सीखा कि कठिनाइयाँ बाहर से नहीं आतीं; बल्कि यह इस बात की परीक्षा होती है कि क्या अभ्यासी अपनी आसक्तियों को छोड़ सकते हैं और अपने सद्विचार मजबूत कर सकते हैं। जब तक कोई मास्टरजी में दृढ़ विश्वास रखता है, अपने अंतर्मन में झाँकता है और आगे बढ़ने का साहस करता है, तब तक प्रतीत होने वाली दुर्गम कठिनाइयों के बीच भी एक नया मार्ग खोज सकता है और सुरंग के अंत में प्रकाश देख सकता है।
परिवार और दैनिक जीवन में स्वयं की साधना करना
बढ़ती उम्र के बावजूद अनेक अभ्यासी अपने मिशन को पूरा करना और मास्टरजी को जीवों को बचाने में सहायता करना जारी रखते हैं। 90 वर्ष से अधिक उम्र की चित्रकार कैथी ने महसूस किया कि “बुढ़ापा” आवश्यक रूप से शारीरिक गिरावट नहीं है, बल्कि लगातार सीखने और समस्याओं को हल करने के माध्यम से मन की साधना करने का एक चरण है। वह और उनके पति इस बात के लिए आभारी हैं कि वे अभी भी साधना कर सकते हैं। थकान, आसक्तियों और तकनीकी कठिनाइयों का सामना करते समय वह लगातार अपने अंतर्मन में झाँकती रहीं। वह हर सप्ताह चीनी दूतावास के सामने दमन का शांतिपूर्ण विरोध करती हैं और कला जगत तथा समाज के लोगों को सच्चाई बताने और उन्हें बचाने में मदद करने के लिए हर अवसर का उपयोग करती हैं। इस प्रक्रिया में उन्होंने मास्टरजी की करुणामय व्यवस्था को गहराई से महसूस किया।
दैनिक जीवन में अभ्यासी अवसरों को कैसे संजोएँ और अपने परिवार के साथ दयालुता से कैसे व्यवहार करें?
इस दंपति ने युवा और बुज़ुर्ग दोनों लोगों के साथ बातचीत करते हुए स्वयं की साधना करने की अपनी कहानियाँ भी साझा कीं।
श्री ली ने अपने बच्चे का पालन-पोषण करने के अनुभव के बारे में बताया। उन्होंने धीरे-धीरे अहंकार को छोड़ना सीखा और उसकी जगह सम्मान तथा विश्वास को अपनाया—अर्थात् उन्होंने मुख्य भूमि चीन में प्रचलित दबाव और नियंत्रण आधारित पालन-पोषण के तरीके से दूरी बनाई। अपने बच्चे की पढ़ाई और संगीत की कठिन यात्रा के दौरान उन्होंने मास्टरजी की करुणामय व्यवस्थाओं को भी महसूस किया। कार दुर्घटना के बाद उनके बच्चे का तेजी से स्वस्थ होना फालुन दाफा में उनके विश्वास को और मजबूत कर गया।
चीन छोड़ने के बाद श्री ली और उनके बेटे ने शेन यून का प्रचार करते हुए और सीसीपी के अंतरराष्ट्रीय दमन का विरोध करते हुए लगातार अपने हृदय और मन की साधना की। इस प्रक्रिया में उन्होंने देखा कि अधिक से अधिक लोग जागृत हो रहे हैं। इसी दौरान श्री ली ने अपनी आसक्तियों को दूर किया और चिंता को छोड़ दिया। जब वह पीछे मुड़कर देखते हैं कि मास्टरजी हमारी साधना के प्रत्येक चरण की व्यवस्था करते हैं, तो उनका हृदय गहरी कृतज्ञता से भर जाता है।
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